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4/21/2021

मुगलों के पतन के कारण

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मुगलों के पतन के कारण

mughal samrajya ke patan ke karan;उत्‍कर्ष एवं अपकर्ष प्रकृति का नियम है। जो ऊपर उठाता वह नीचे जरूर आता है मुगल साम्राज्‍य के पतन के संबंध में वी.ए.स्मिथ ने कहा है ‘‘मुगल साम्राज्‍य का पतन सहसा हुआ, जो प्रथम दृष्टि डालने पर आश्‍चर्यजनक प्रतीत होता है। ‘‘भारत में मुगल साम्राज्‍य की स्‍थापना काल से लेकर जहांगीर के काल तक किसी न किसी रूप में अपने चरमोत्‍कर्ष पर बना रहा, परंतु औरंगजेब के शासनकाल से ही इस साम्राज्‍य का पतन प्रारंभ होने लगा। संक्षिप्‍त में मुगल साम्राज्‍य के पतन के प्रमुख कारण इस प्रकार थे--

1. शाहजहां और औरंगजेब की धार्मिक नीतियां 

ये दोनों ही सम्राट धर्म के लिये अन्‍धें तथा कट्टर सुन्‍नी मुसलमान थे। इनके द्वारा हिन्‍दू धर्म, संस्‍कृति, महापुरूषों, देवी-देवताओं, ग्रन्‍थों आदि का अपमान किया गया। हिन्‍दूओं को मुसलमान बनाना, मन्दिर गिराकर मस्जिद निर्माण करना। मुसलमान न बनने पर धर्म गुरूओं की हत्‍याओं ने उस विश्‍वास को समाप्‍त कर दिया जिसकी उत्‍पत्ति अकबर के काल में हिन्‍दूओं में हुई थी और जहांगीर के समय में भी यह विद्यमान थी। इससे उनमें अपने धर्म, संस्‍कृति, देश और जाति की रक्षा के लिये संघर्ष करना आवश्‍यक हो गया। 

2. मुगल सम्राट का व्‍यक्तित्‍व एंव चरित्र 

मुगल साम्राज्‍य के पतन का सबसे प्रमुख कारण मुगल सम्राटों के चरित्र का पतन था। प्रारंभ के कुछ सम्राटों को छोड़कर अधिकांश मुगल शासक विलासप्रिय, इंद्रियलोलुप और निकम्‍मे थे। अतः साम्राज्‍य के संगठन और व्‍यवस्‍था की तरफ ध्‍यान नहीं दे सके। अतः मुगल साम्राज्‍य का पतन हो गया। 

3. औरंगजेब की राजपूत नीति 

अकबर और जहांगीर ने राजपूतों से मित्रता की नीति अपनाई थी, परन्‍तु शाहजहां और औरंगजेब राजपूतों पर विश्‍वास नही करते थे। अतः राज्‍य में राजपूत और हिन्‍दू पदाधिकारी हटाये जाने लगे। उनके राज्‍य हड़पे जाने लगे। उनकी छल से हत्‍यायें की जाने लगी। राजपूत घरानों की स्त्रियों को मुसलमानों की दासियां बनाने और उन्‍हें तथा बच्‍चों को मुसलमान बनाया जाने लगा। अतः शीघ्र ही मुगल साम्राज्‍य में राजपूत मुगलों के पतन के लिये संघर्ष करने लगे। जसबन्‍त सिंह, जयसिंह, शम्‍भाजी के साथ ऐसा ही हुआ था। 

4. मुगल सरदारों का चरित्रहीन होना

जहांगीर के पश्‍चात् शाहजहां सम्राट बना, परन्‍तु बुद्धिमान होते हुये भी उसमें अकबर और जहांगीर की साम्राज्‍य नीति को समझने की प्रतिभा नहीं थी। जिसका परिणाम विपरीत हुआ। शाहजहां के पुत्रों में भी इतनी योग्‍यता नहीं थी और औरंगजेब के पुत्र भी अयोग्‍य थे। जब सम्राट और उत्तराधिकारी अयोग्‍य हुये तो पदाधिकारी भी धर्मान्‍ध, अत्‍याचारी, भ्रष्‍टाचारी, लोभी, विलासी, शराबी, तथा कामूक नियुक्‍त होने लगे। ऐसी स्थिति में साम्राज्‍य कैसे सुरक्षित रहता। उपरोक्‍त कारण मुगल साम्राज्‍य के पतन के प्रमुख कारण थे, परन्‍तु इसके अतिरिक्‍त कुछ अन्‍य कारण भी थे जिनके लिये अन्‍य सम्राट भी उत्तरदायी थे। 

5. उत्तराधिकारी संघर्ष 

मुगल साम्राज्‍य के पतन का एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण कारण उत्तराधिकारी के निश्चित नियम का अभाव था। परिणामस्‍वरूप सम्राट की मृत्‍यु के पश्‍चात् उसके पुत्रों में उत्तराधिकारी के लिए गृहयुद्ध प्रारंभ हो जाता था। जो मुगल साम्राज्‍य के लिए अत्‍याधिक घातक सिद्ध हुआ, क्‍योकि युद्ध में अनेक कुशल राजकुमार एंव सैनिक मार दिए जाते थे। 

6. अमीरों की और शहजादों की गुटबन्‍दी 

जहांगीर के समय नूरजहां की गुटबन्‍दी, शाहजहां के समय मुराद और औरंगजेब की दारा के विरूद्ध गुटबन्‍दी ने साम्राज्‍य को अनेक शक्ति गुटों में बांट दिया जिनमें सैनिक, अधिकारी और राजकुमारों ने अपने प्राण गवायें तथा अपार धन व्‍यय हुआ।

7. मुगल सेना का नैतिक पतन 

बाबर के काल में सैनिक तथा सेना का स्‍तर व्‍यापक उन्‍नति पर था, जिससे वे प्रत्‍येक कठिनाइयों का सामना करने में सफल रहे, परंतु भारतीय जलवायु एंव वातावरण ने उन्‍हें विलासी बना दिया, जिससे सैनिको का नैतिक पतन प्रारंभ हो गया। सैनिकों की अकर्मण्‍यता एंव विलासिता मुगल साम्राज्‍य के पतन का प्रमुख कारण बनी। 

8. आर्थिक अंसपन्‍नता 

मुगल साम्राज्‍य के पतन के लिए आर्थिक असंपन्‍नता एक प्रमुख कारण रहा है। अकबर के पश्‍चात् के उ‍त्तराधिकारी के शासनकाल में आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ने लगी। अकबर के उत्तराधिकारी ने ठेकेदारी प्रथा आरंभ की। इस प्रथा के अंतर्गत कृषकों से भारी कर वसूल किया जाता था। जिससे कृषकों की खेती में रूचि घटने लगी साथ ही जनसाधारण की न्‍यूनतम आवश्‍यकताओं को पूरा नहीं किया गया। वाणिज्‍य एंव व्‍यापार के क्षेत्र में भी आवश्‍यकतानुसार उत्‍पादन नहीं हुआ था। जिससे मुगल साम्राज्‍य का पतन सर्वथा निश्चित सा हो गया। 

9. विदेशी आक्रमण 

मुगल साम्राज्‍य की राजनीतिक दुर्बलता से लाभ उठाकर नादिरशाह एंव अहमदशाह अब्‍दाली ने भारत पर अनेक आक्रमणों द्वारा मुगल साम्राज्‍य की शेष बची हुई शक्ति को भी छिन्‍न-भिन्‍न कर दिया। उसने तत्‍कालीन मुगल सम्राट को परास्‍त करके दिल्‍ली में भीषण हत्‍यांए की तथा तख्‍तेताऊस सहित अपार धन भारत से अपने साथ ले गया। अहमदशाह अब्‍दाली ने पंजाब पर अपना आधिपत्‍य कर लिया। इस प्रकार इन आक्रमणों के फलस्‍वरूप मुगल साम्राज्‍य को गहरा आघात लगा। 

10. सतनामी, सिक्‍ख, छत्रसाल और शिवाजी के संघर्ष 

यह सभी अपने धर्म, जाति और देश पर होने वाले अत्‍याचार सहन नहीं कर सके तथा उन्‍होंने इनकी रक्षा के लिये और स्‍वतंत्रता के लिये निरन्‍तर युद्ध करके मुगल साम्राज्‍य को नष्‍ट कर दिया। 

11. यूरोपीय जातियों का आगमन 

भारत में पूर्तगाली, डच, अंग्रेज और फ्रांसीसी आये। इन्‍होंने पहले सम्राटों की अनुमति से व्‍यापार के अधिकार और स्‍थान पाये तथा फिर उनकी कमियों का लाभ उठाकर उनकों पराजित कर मुगलशाही को ही समाप्‍त कर अपना राज्‍य कायम कर लिया। अन्तिम मुगल सम्राट बहादूर शाह था। 

निष्‍कर्ष

इस प्रकार ऊपर दिये गये कारणों के फलस्‍वरूप मुगल साम्राज्‍य का पतन अवश्‍यंभावी हो गया। उसके पतन के लिए आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक, एंव संगठनात्‍मक अभाव प्रमुख रहा। विपिन चंद्र के अनुसार,‘‘ मुगल साम्राज्‍य के पतन की सबसे दुखद बात यह हुई कि उसकी जगह पर एक विदेशी शक्ति आई। जिसने अपने हितो का ख्‍याल करके देश के शताब्दियों पुराने सामाजिक ढांचे को हटाकर उसकी जगह-जगह एक औपनिवेशिक‍ ढांचे को रखा।‘‘ मुगलों की मनसबदारी प्रथा ने सैनिक दृष्टि से मुगलों का हृास कर दिया था और अंत में अंग्रेजों की साम्राज्‍यावादी नीति के कारण जर्जर मुगल साम्राज्‍य के शीघ्र पतन में देर ने लगी।

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