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2/19/2021

सीमान्त लागत के लाभ/गुण, सीमाएं/दोष

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सीमान्त लागत विधि की उपयोगिता (गुण) अथवा लाभ 

simant lagat ke gun;सीमांत लागत निर्धारण विधि व्यावसायिक प्रंबध के क्षेत्र मे एक महत्वपूर्ण एवं उपयोगी तकनीक है। सीमांत लागत विधि के मुख्य लाभ इस प्रकार है--

1. उत्पादन लागत सुविधा

नई वस्तुओं का उत्पादन करना लाभप्रद रहेगा या नही, सीमान्त लागत विधि से इस बात की जानकारी प्राप्त हो जाती है।

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2. लाभ की सीमा का ज्ञान 

ब्रिक्री पर किस सीमा तक लाभ प्राप्त हो सकता है, सीमांत लागत विधि से इस की जानकारी आसानी से प्राप्त हो जाती है।

3. लागत नियंत्रण मे सहायता 

सीमांत लागत पद्धति से लागत नियंत्रण मे पूर्ण सहायता मिलती है।

4. उत्पादन मे कमी-वृद्धि की जानकारी 

व्यवसाय की क्षमतानुसार किस वस्तु का उत्पादन, घटना, बढ़ाना या जोड़ना है, इस बात का ज्ञान हो जाता है।

5. व्ययों की श्रेणी मे परिवर्तन का ज्ञान 

इस पद्धति के द्वारा व्ययों की श्रेणी मे परिवर्तन जाना जा सकता है।

6. लाभ की जानकारी 

व्यवसाय मे प्रत्येक वस्तु से होने वाले लाभ को भली प्रकार जाना जा सकता है।

7. मूल्यों की कमी 

इस पद्धति द्वारा वस्तुओं के मूल्य को किस सीमा तक मन्दीकाल आदि मे कम किया जा सकता है, इस बात का सही ज्ञान हो जाता है।

8. व्यवसाय के विस्तार की सीमा का निर्धारण 

व्यवसाय के विस्तार की अधिकतम सीमा का निर्धारण इस पद्धति द्वारा किया जा सकता है।

9. उत्पादन की लाभदायक किस्म का ज्ञान 

एक उत्पादन विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन करता है। सीमांत लागत तकनीक की सहायता से यह जाना जा सकता है कि किस किस्म का उत्पादन अधिक लाभदायक है। इस तरह की जानकारी से उत्पादन उसी दिशा मे अपने प्रयत्न कर सकता है। अतः विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन मे सर्वोत्तम संयोग का निर्धारण किया जा सकता है।

10. उत्पादन करने से संबंधित निर्णय 

सीमान्त लागत पद्धति द्वारा प्रबंधक इस बात का निर्णय ले सकते है कि किसी विशिष्ट वस्तु का उत्पादन स्वयं के संस्थान मे करना चाहिए या नहीं।

11. उत्पादन की मात्रा मे कमी-वृद्धि का लाभ पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन 

सीमांत लागत की सहायता से उत्पादन की मात्रा मे होने वाली कमी अथवा वृद्धि का लाभ पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस बात का अध्ययन किया जा सकता है।

12. मशीनों एवं संयन्त्रों के उपयोग से संबंधी निर्णय लेने मे सहायक 

विभिन्न उत्पादन प्रक्रियाओं, मशीनों एवं संयन्त्रों मे से किसका प्रयोग करना हितकर होगा यह सीमान्त लागत पद्धति की सहायता से आसानी के साथ ज्ञात किया जा सकता है।

13. समस्याओं के समाधान मे सहायक 

प्रबंधक परम्परागत लागत पत्र की अपेक्षा सीमान्त लागत पत्र को अधिक सरलता से समझ कर समस्या का शीघ्र समाधान करते है।

सीमान्त लागत पद्धति की सीमाएं (दोष) 

simant lagat ke dosh;निश्चित ही सीमान्त लागत पद्धति एक महत्वपूर्ण एवं उपयोगी तकनीक है, लेकिन सीमान्त लागत विधि की कुछ सीमायें भी है। सीमान्त लागत की सीमाएं इस प्रकार है--

1. सीमान्त लागत विधि सभी व्यवसायों के लिए उपयुक्त नही है। मुख्य रूप से ठेका व्यवसायों मे इस विधि को अपनाना कठिन कार्य है। अगर प्रत्येक वर्ष ठेकिमा से संबंधित चालू कार्य के मूल्यांकन मे स्थिर उपरिव्ययों के अंश को सम्मिलित नही किया जाये तो प्रत्येक वर्ष हानियां हो सकती है, जबकि अन्तिम वर्ष मे सभी ठेके के कार्य पूर्ण हो जाएंगे तो अत्यधिक लाभ होगा।

2. सीमान्त लागत पद्धति के आधार पर मूल्यों का निर्णय करना अनेक बार जटिल होता है, इसका प्रमख कारण यह है, कि यह केवल अंशदान पर आधारित होता है।

3. सीमान्त लागत विधि के आधार पर नये बाजारों की खोज के लिये वस्तुओं की कीमतों को घटाने से कई वस्तुओं की कीमतें स्थायी रूप से घट जाती है।

4. सीमान्त लागत पद्धति के अंतर्गत सामान्य परिस्थितियों मे किसी उत्पाद का विक्रय मूल्य निर्धारित करते समय परिवर्तनशील खर्चों के साथ-साथ स्थिर खर्चों को भी ध्यान मे रखा जाता है। अतः सामान्य परिस्थिति मे सीमान्त लागत पद्धति की उपयोगिता काफी कम हो जाती है।

5. सीमान्त लागत विधि मे कुछ लागतें अंशतः स्थिर एवं अंशतः परिवर्तनशील प्रकृति की होती है। ऐसी लागतों को स्थिर एवं परिवर्तनशील दो भागों मे विभाजित करना केवल मान्यता पर आधारित होता है। यह पूर्णरूपेण सही हो, यह आवश्यक नही है। 

6. सीमान्त लागत पद्धति का क्षेत्र सीमित है, इसका प्रमख कारण यह है, कि सीमान्त लागत विधि सामान्यतः किसी विशिष्ट जाॅब के लिए ही उपयोगी होती है।

7. बजट नियंत्रण एवं प्रमाप लागत लेखांकन जैसी अधिक उत्तम प्रविधियां उपलब्ध न होने से सीमान्त लागत विधि का उपयोग सीमित हो गया है। इन विधियों का लागत नियंत्रण के लिए सीमान्त लागत विधि की अपेक्षा अधिक प्रयोग किया जाता है।

8. सीमान्त लागत विधि मे चालू कार्य एवं निर्मित माल के स्कन्ध मूल्यांकन मे स्थिर लागतों को सम्मिलित न करना असंगत है, क्योंकि वस्तु के निर्माण मे स्थिर व्यय भी किये जाते है, जो लागत का एक भाग है। सीमांत लागत पर स्कन्ध का मूल्यांकन करने से इसका मूल्य कम होगा।

9. सीमान्त लागत पद्धति समय तत्व की पूरी तरह से उपेक्षा करती है। अल्प अवधि मे स्थिर एवं परिवर्तनशील लागतें पृथक-पृथक होती है, लेकिन दीर्घ अवधि मे सभी लागते परिवर्तनशील हो जाती है, क्योंकि अलग-अलग स्तर पर उत्पादन की लागत अलग-अलग होती है।

उपरोक्त विवेचन ऐसा लागत है, कि सीमान्त लागत विधि का प्रयोग नही करना चाहिए, क्योंकि यह महत्वहीन है, लेकिन इस विधि के आधार पर किये जाने वाले निर्णयों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि सीमान्त लागत विधि की सीमायें इसके लाभों की अपेक्षा बहुत ही कम है। इसलिए सीमान्त लागत पद्धति के महत्व को नही भुलाना चाहिए। यही प्रमुख कारण है कि आजकल दिन-प्रतिदिन प्रबन्धकीय निर्णयों मे सीमान्त लागत विधि का प्रयोग बढ़ता ही जा रहा है।

यह भी पढ़ें; अवशोषण लागत लेखांकन और सीमान्त लेखांकन मे अंतर

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