2/22/2021

रोकड़ बजट क्या है? लाभ, महत्व/कार्य स्वरूप

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रोकड़ बजट क्या है? (rokad budget kya hai)

rokad budget arth paribhasha mahatva karya;रोकड़ बजट रोकड़ संबंधी प्राप्तियों एवं भुगतान को तथा बजट अवधि के प्रत्येक माह के अनुमानित रोकड़ शेष को प्रकट करता है। एक रोकड़ बजट किसी बजट अवधि या अन्य किसी विशेष अवधि के लिए पूर्व अनुमानित नकद प्राप्तियों एवं भुगतान का विस्तृत अनुमान है। 

गूथमैन एवं डूगल के अनुसार," रोक बगट भावि अवधि हेतु रोक का अनुमान है।" 

एस. सी. कुच्छल के अनुसार," रोकड़ बजट किसी अवधि हेतु रोक के आधिक्य एवं कमी के समय एवं मात्रा के निर्धारण के उद्देश्य से रोक के अंतप्रवाह एवं बाहरी प्रवाह के अंकन की तालिका है। यह रोक के आधिक्य तथा कमी से इस समस्या का समाधान करने के लिए समय पर कार्यवाही करने के लिए वित्तीय प्रशासन का ध्यान आकर्षित करता है।" 

रोकड़ बजट के लाभ/महत्व (rokad budget ka mahatva)

रोकड़ बजट के निम्न लाभ है--

1. रोकड़ स्थिति के बारे मे अनुमान प्राप्त हो जाता है।

2. संस्था के पास यदि अधिक रोकड़ रहने का अनुमान लगता है तो उसके विनियोजन की अग्रिम व्यवस्था की जा सकती है।

3. यदि संस्था के पास रोकड़ की कमी होने का अनुमान है तो इस कमी को दूर करने के लिए साधन जुटाने के उपाय किये जा सकते हैं।

4. उधार लेने के लिए रोकड़ बजट एक उत्तम आधार का कार्य करता है।

5. रोकड़ बजट द्वारा प्राप्ति एवं भुगतान मे समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

6. रोकड़ बजट द्वारा तकनीकी दिवालिया की स्थिति से बचा जा सकता है।

7. रोकड़ बजट द्वारा तरल स्थिति को नियंत्रण मे रखा जा सकता है।

8. रोकड़ बजट द्वारा कार्यशील पूंजी, बिक्री, विनियोजन, उधार आदि मे समन्वय स्थापित किया जा सकता है, आदि। 

9. यह अल्पकालीन समय के लिए उपलब्ध अतिरिक्त राशि को विनियोग करने की उपलब्धता को प्रकट करता है।

रोकड़ बजट के कार्य या महत्‍व (rokad budget ke karya)

प्रत्‍येक व्‍यावसायिक संस्‍थाओं में समस्‍त वित्तीय क्रियाओं पर नियंत्रण रखना एक अनिवार्य आवश्‍कयता है। इस नियंत्रण के लिए रोकड़ बजट एक महत्‍वपूर्ण उपकरण है। इसकी सहायता से नगद राशि का वैकल्पिक प्रयोग सम्‍भव है तथा इसके द्वारा नगद कोषों का भी अधिकतम उपयोग किया जा सकता है। संक्षेप में नगद कोषों के कार्य अथवा महत्‍व वितरण निम्‍नानुसार है--

1. नगद कोषों का पूर्वानुमान 

रोकड़ बजट का सबसे महत्‍वपूर्ण कार्य भविष्‍य के लिए रोकड़ की मात्रा का पूर्वानुमान करना है। रोकड़ बजट के द्वारा यह पता लगाया जाता है कि भविष्‍य में कितने नगद कोषों की आवश्‍यकता होगी तथा इनका वितरण अथवा भुगतान सर्वोत्तम विधि से किस प्रकार किया जावेगा।

2. कोषों के उपयोग पर नियंत्रण 

रोकड़ बजट का दूसरा महत्‍वपूर्ण कार्य विभिन्‍न रोकड़ व्‍ययों पर नियंत्रण रखना है। रोकड़ बजट के द्वारा उद्योग विभिन्‍न विभागों द्वारा किये जाने वाले विभिन्‍न व्‍ययों पर नियंत्रण रखा जा सकता है। इस नियंत्रण के द्वारा उपक्रम में उपलब्‍ध वित्तीय साधनों का उपयोग निर्धारित सीमा के अन्‍तर्गत ही सम्‍भव हो सकेगा। 

3. पर्याप्‍त रोकड़ कोषों की उपलब्धि 

हर एक उद्योग की व्‍यवसायिक साख उनके यहां उपलब्‍ध नगद कोषों के शेष पर निर्भर करती है क्‍योकि नगद शेष व्‍यवसाय को तरलता प्रदान करते है। यदि व्‍यवसाय में उचित तरलता है तो ऐसी स्थिति में व्‍यवसाय का संचालन सफलातपूर्वक किया जा सकता है। इसके विपरीत तरलता के अभाव में हानि की सम्‍भावना अधिक होती है। अत: रोकड़ बजट के द्वारा उपक्रम में पर्याप्‍त रोकड़ कोषों की उपलब्धि बनाये रखी जा सकती है। 

4. रोकड़ नियोजन में लाभदायक 

रोकड़ बजट के द्वारा हमें यह ज्ञात होता है कि उपक्रम में कितनी मात्रा में रोकड़ उपलब्‍ध है एंव उसका उपयोग कहां-कहां किया जाना है। इसके साथ ही रोकड़ आधिक्‍य अथवा रोकड़ कमी का ज्ञान भी इसके द्वारा प्राप्‍त होता है। यदि स्थिति विपरीत है तो अतिरिक्‍त साधनों से भी रोकड़ की उपलब्धि करायी जा सकती है।

5. विस्‍तार कार्यक्रमों की सफलताओं का मापक 

यदि किसी उद्योग में कोई विस्‍तार कार्यक्रम चलाया जा रहा है तो उसकी सफलता अथवा असफलता का मापन रोकड़ बजट के द्वारा किया जा सकता है। रोकड़ बजट मे विस्‍तार कार्यक्रमों के द्वारा प्राप्‍त रोकड़ अन्‍तर प्रवाहों का पूर्वानुमान लगाया जाता है तथा क्रियान्‍वयन के बाद इन पूर्वानुमान की सफलता की जांच की जाती है। 

6. वित्तीय कार्यो का मूल्‍यांकन 

कम्‍पनी में किये गये विभिन्‍न वित्तीय कार्यों का मूल्‍यांकन भी रोकड़ बजट करता है क्‍योकि इसके अन्‍तर्गत सर्वप्रथम रोकड़ पूर्वानुमान लगाया जाता है तथा नगद में  इन पूर्वानुमान से वास्‍तविक परिणमों की तुलना की जाती है तथा यदि कोई अन्‍तर होता है तो उनके कारणों का  पता लगाया जाता है। 

7. लाभांश नीति में सहायक 

रोकड़ बजट लाभांश नीति के निर्धारण में भी सहायक होता है। इसके द्वारा हमें यह ज्ञात हो जाता है कि कितनी मात्रा में अतिरिक्‍त रोकड़ कोष लाभांश वितरण हेतु उपलब्‍ध है एंव रोकड़ बजट बनाते समय भी हम लाभांश हेतु एक निश्चित राशि निर्धारित करते है, जिससे लाभांश वितरण में एकरूपता स्‍थापित होती है।

8. दीर्घकालीन नीति निर्धारण एंव नियंत्रण में सहायक 

रोकड़ बजट के द्वारा हम भविष्‍य में लगने वाली कार्यशील पूंजी, विक्रय प्रबन्‍ध, साख एंव ऋण प्रबन्‍ध, विनियोग प्रबन्‍ध जैसे महत्‍वपूर्ण बिन्‍दूओं का निर्धारण सफलतापूर्वक कर सकते है। किसी भी उद्योग यदि रोकड़ बजट संतुलित एंव वास्‍तविक है तो हम किसी अपनी प्रबन्‍धकीय कार्यक्षमता में वृद्धि कर सकते है एवं इसी के आधार पर भावी कार्यक्रम भी निर्धारित कर सकते है। दूसरी और भविष्‍य को दीर्घकालीन नीतियां निर्धारित होने के पश्‍चात् उनका समयानुसार पर्याप्‍त नियंत्रण भी किया जा सकता है।

रोकड़ बजट के स्वरूप 

रोकड़ बजट के अनेक स्वरूप हो सकते है, लेकिन सामान्यतः निम्म तीन स्वरूप अधिक प्रचलित है--

1. मासिक रोकड़ 

इस बजट मे एक विशेष माह की विभिन्न तिथियों के लिए अनुमानित रोकड़ प्राप्तियों एवं भुगतानों के संबंध मे विवरण दिया जाता है।

2. त्रैमासिक रोकड़ बजट 

इस बजट मे रोकड़ प्राप्तियों एवं भुगतानों के माहवारी पूर्वानुमान प्रस्तुत किये जाते है। रोकड़ प्राप्ति एवं भुगतान का पूर्वानुमान वर्ष के तीन माह के लिए लगाया जाता है और उन्हें महीनानुसार प्रस्तुत किया जाता है।

3. वार्षिक रोकड़ बजट 

यह बजट एक वर्ष के विभिन्न महीनों के लिए किये गये पूर्वानुमानों का सारांश होता है।

रोकड़ बजट तैयार करने की विधि 

रोकड़ बजट निर्माण की सबसे अधिक लोकप्रिय पद्धति प्राप्ति तथा भुगतान पर आधारित है। इस पद्धति के अंतर्गत संपूर्ण रोक बजट को दो भागों मे बांटा जाता है। प्रथम भाग मे बजट अवधि मे रोक प्राप्तियों को दिखाया जाता है तथा दूसरे भाग मे उसी बजट अवधि मे संपूर्ण रोक भुगतानों को प्रदर्शित किया जाता है। इसके दोनों भागों का निम्न है--

(अ) रोक प्राप्ति 

रोकड़ प्राप्ति के निम्न स्त्रोत हो सकते है--

1. नकद विक्रय

2. लेनदारों से वसूली 

3. प्राप्य बिलों से वसूली 

4. अग्रिम और ऋण पर प्राप्त ब्याज 

5. प्राप्त लाभांश

6. पूंजी संपत्तियों के विक्रय पर प्राप्त राशि 

7. अंशों तथा ऋणपत्रों का निर्गमन 

8. अन्य साधन।

(ब) रोकड़ भुगतान 

रोकड़ भुगतान की निम्न मदें हो सकती है--

1. नकद क्रय

2. लेनदारों का भुगतान 

3. देय बिलों का भुगतान 

4. कर्मचारियों को भुगतान 

5. प्रशासन, विक्रय एवं वितरण व्ययों का भुगतान 

6. बैंक ऋण व विशिष्ट दायित्वों का भुगतान 

7. ब्याज व लाभांश का भुगतान 

8. कर दायित्वों का भुगतान 

9. पूंजीगत संपत्तियों का भुगतान।

यह भी पढ़ें; रोकड़ बजट एवं वित्तीय बजट मे अंतर

शायद यह जानकारी आपके लिए काफी उपयोगी सिद्ध होंगी

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