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2/22/2021

प्रबंध अंकेक्षण क्या है? परिभाषा, उद्देश्य, महत्व, कार्य, सीमाएं

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प्रबंध अंकेक्षण क्या है? (prabandh ankekshan kise kahte hai)

prabandh ankekshan arth paribhasha udeshaya mahatva karya simaye;प्रबंध अंकेक्षण, अंकेक्षण के क्षेत्र मे एक नवीन विचारधारा है जिसमे अंकेक्षण कला के माध्यम से प्रबंध की कुशलता का मूल्यांकन किया जाता है। प्रबंध अंकेक्षण के माध्यम से प्रबंध के कार्यकलापों का मूल्यांकन किया जाता है। 

प्रबंध अंकेक्षण वर्तमान व्यावसायिक जगत की आवश्यकता है, किन्तु यह परम्परागत अंकेक्षण से अलग तथा एक भिन्न व्यवस्था है। इसका कारण यह है कि परम्परागत अंकेक्षण कंपनी के प्रबंध को यह सलाह देने की स्थिति मे नही होता है कि किस प्रकार कंपनी के लाभ को अधिकतम किया जाये। यह कार्य आज की जटिल अर्थव्यवस्था मे प्रबंध अंकेक्षण द्वारा किया जाता है। वास्तव मे इसका संबंध प्रबंध की कुशलता से होता है। इसीलिए कहा जाता है कि प्रबंध अंकेक्षण आन्तरिक अंकेक्षण का एक विस्तार है। 

प्रबंध अंकेक्षण की परिभाषा (prabandh ankekshan ki paribhasha)

डब्ल्यू. पी. लियोनार्ड के अनुसार," किसी कंपनी, संस्थान या सरकार की शाखा या उसके किसी अंग जैसे संभाग या विभाग की संगठनात्मक संरचना एवं इसकी योजनाओं और उद्देश्यों, इसके परिचालन के साधन, मानवीय व भौतिक सुविधाओं के प्रयोग का एक व्यापक तथा रचनात्मक परीक्षण है।

टी. जी. टोखे के अनुसार," प्रबंध अंकेक्षण प्रबंध प्रक्रिया के सभी पहलुओं का गहन आलोचनात्मक अध्ययन है।" 

लैस्ली आर. हावर्ड के शब्दों मे," प्रबंध अंकेक्षण यह सुनिश्चित करने की संपूर्ण प्रबंध सुदृढ़ है, एक व्यवसाय का ऊपर से नीचे तक किया गया अनुसंधान है ताकि अत्यधिक कुशल व सरलीकृती संगठन का बाहरी जगत से अधिकतम प्रभावशाली संबंध किया जा सके। 

डाॅ. टेलर व पैरी के अनुसार," प्रबंध अंकेक्षण संगठन के सभी स्तरों पर प्रबन्ध की कुशलता के मूल्यांकन की एक पद्धति है तथा प्रमुखतः यह उच्च-स्तरीय कार्यकारी स्तर से नीचे तक स्वतंत्र संस्था के द्वारा की गयी व्यवस्था की जांच है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संस्था मे पूर्णतया सुदृढ़ प्रबंध है तथा कार्यकुशलता के संबंध मे वह अपना प्रतिवेदन दे सके अथवा विपरीत स्थिति मे सिफारिश कर सके जिससे प्रभावशीलता स्थापित की जा सके।" 

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि प्रबंध अंकेक्षण को प्रबंध की सर्वांगीण भूमिका की जांच करनी होती है और यह रिपोर्ट देनी होती है कि पूर्वनिर्धारित लक्ष्य तथा उद्देश्य प्राप्त कर लिये है अथवा नही। यह अंकेक्षण की एक ऐच्छिक व्यवस्था है।

प्रबंध अंकेक्षण के उद्देश्य (prabandh ankekshan ke uddeshya)

प्रबंध अंकेक्षण के उद्देश्य इस प्रकार है--

1. प्रबंध अंकेक्षण के द्वारा अंकेक्षित पहलूओं के दोषों को बतलाना तथा अच्छे परिणामों हेतु सुधारों के संबंध मे सुझाव देना है। 

2. व्यवसाय के संचालन के लिए आवश्यक क्रियाओं के कुशल प्रशासन चलाने की क्षमता उत्पन्न करना।

3. प्रबंध मे कुशलता तथा दक्षता उत्पन्न करना।

4. प्रबंध द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये साधन तथा उपायों के लिए सुझाव देना। 

5. प्रबंध के समस्त स्तरों पर उनके कार्यों तथा दायित्वों के संचालन हेतु सहायता करना।

6. इनपुट तथा आउटपुट के माध्यम से उपलब्धि का मूल्यांकन करना।

7. आंतरिक संगठन के सफल व कुशल संचालन हेतु उत्तम व्यवस्था करना। 

प्रबंध अंकेक्षण का महत्व (prabandh ankekshan ka mahatva)

प्रबंध अंकेक्षण को व्यावसायिक तथा आर्थिक नीतियों के निर्धारण तथा इनके क्रियान्वयन के मूल्यांकन मे अत्यन्त सहायक माना जाता है। किसी व्यवसाय के कुशल संचालन तथा कुप्रबंध से बचाने के लिए प्रबंध अंकेक्षण का एक विशेष महत्व होता है। प्रबंध अंकेक्षण यदि ठीक ढंग से कराया जाये तो यह नियंत्रण का महत्वपूर्ण अंग बन जाता है। 

डाॅ. खण्डेलवाल के शब्दों मे," प्रबन्धकीय अंकेक्षण मे साधनों पर अधिक बल दिया जाता है यद्यपि यह परिणामों का अध्ययन एवं मूल्यांकन करता है। प्रबंध अंकेक्षण के महत्व को हम निम्म प्रकार से समझ सकते है--

1. प्रबंध प्रबंधकों की कार्यक्षमता की समीक्षा करने के लिए सामयिक आधार पर प्रबन्ध अंकेक्षण सम्पादित करा सकता है। इससे प्राप्त परिणामों का उपयोग कर्मचारियों को प्रेरणाएं प्रदान करने मे किया जा सकता है।

2. प्रबंध अंकेक्षण प्रबंध की कार्य-प्रणाली मे निहित अनियमितताओं एवं दोषों को प्रकट करता है तथा प्रबंध की कार्य-कुशलता मे सुधार के उपायों का सुझाव देता है। यह परिणामों पर केन्द्रित होता है और यह नही जांच सकता है कि क्या प्रक्रियाओं का अनुसरण किया गया है अथवा नही।

3. सरकार प्रबंध की कार्यक्षमता का परीक्षण करने के लिए रूग्ण (sick) अर्थात् संकट-ग्रस्त औद्योगिक इकाइयों का प्रंबध अंकेक्षण करने के लिए कह सकती है। ऐसा अंकेक्षण यह ज्ञात करने के लिए किया जाता है कि रूग्णता प्रबंध के कार्यों से उत्पन्न हुई है अथवा उन परिस्थितियों के कारण आयी है, जो प्रबंध के नियंत्रण के बाहर थी। प्रबंध अंकेक्षण के प्रतिवेदन के आधार पर सरकार इन रूग्ण इकाइयों के अधिग्रहण के संबंध मे निर्णय ले सकती है।

यह कहा जा सकता हे प्रबंध अंकेक्षण वह पथ-प्रदर्शक है जो प्रबंध की कार्यक्षमता मे सुधार करने मे सहायता पहुँचाता है।

प्रबंध अंकेक्षण के कार्य (prabandh ankekshan ke karya)

प्रबंध अंकेक्षण के कुछ मुख्य कार्य इस प्रकार है--

1. प्रबंध को गतिशील एवं सुदृढ़ बनाने हेतु सुझाव देना 

प्रबंध अंकेक्षण नीतियों तथा नियोजकों के क्रियान्वयन मे मदद देता है। वह कमजोरियों तथा दोषों को बतलाकर प्रबंध को अधिक गतिशील तथा सुदृढ़ बनाने के लिए परामर्श देता है।

2. निर्णय लेने मे प्रबंध की सहायता 

प्रबंध अंकेक्षण प्रबंध को गलत निर्णय लेने से बचाता है एवं सही निर्णय लेने मे सहायता देता है।

3. सन्देशवाहन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने मे मदद देना 

प्रबंध अंकेक्षण व्यावसायिक संदेशवाहन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने मे प्रबंध की मदद करता है। वह संदेशवाहन प्रणाली के दोषों को भी दूर करता है।

4. कर योजनाओं के निर्माण मे सहायता 

प्रबंध अंकेक्षण कर योजनाओं के निर्माण तथा बजट की नीति के पालन मे तथा विभिन्न बजटों के बनाने मे प्रबंध की मदद करता है।

5. अधिकार तथा दायित्व के हस्तांतरण मे सहायक 

प्रबंध अंकेक्षण उच्च सत्ता को अधिकार तथा दायित्व के विभिन्न प्रबन्धकीय स्तरों पर हस्तांतरण मे सहायक होता है। यह संदेशवाहन प्रक्रिया के दोषों को दूर करने मे भी प्रबंध की सहायता करता है।

प्रबंध अंकेक्षण मे कठिनाइयां/दोष/सीमाएं 

प्रबंध अंकेक्षण के निम्न दोष है--

1. अनावश्यक लागत 

प्रबंध अंकेक्षण करने के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति करनी पड़ती है जिसमे समय, शक्ति और धन अधिक खर्च होता है। इससे लागत अनावश्यक रूप बढ़ जाती है।

2. कानून का प्रभाव 

प्रबंध अंकेक्षण के संबंध मे कोई कानून नही है और किसी कानून के अंतर्गत इसका किया जाना आवश्यक नही है। अतः यह समझा जाता है कि यह पूर्णतः अनावश्यक है।

3. परिवर्तन की समस्या 

प्रबंध अंकेक्षण के अंतर्गत सुधार के लिए सुझाव दिये गये है जिससे विद्यमान परिस्थितियों मे परिवर्तन होता है। पुराने कर्मचारियों की एक विशेष शैली से कार्य करने की आदत पड़ जाती है और वे परिवर्तन को पसंद नही करते। अतः वे प्रबंध अंकेक्षण का विरोध करते है।

4. मूल्यांकन का विरोध 

कोई भी प्रबंधक यह पसंद नही करता कि उसके कार्यों का मूल्यांकन किया जाये। अतः वह स्वयं के मूल्यांकन का विरोध करता है।

5. आवश्यक योग्यता का अभाव 

प्रबंध अंकेक्षण संबंधी कार्य उपक्रम के सभी पहलुओं तक पहुंचता है, अतः इसे करने के लिए आवश्यक योग्यता वाले व्यक्ति का मिलना बहुत कठिन है।

6. वस्तुपरकता का अभाव 

प्रबंध अंकेक्षण के अंतर्गत प्रबंध के गुणात्मक पहलू पर भी मूल्यांकन किया जाता है। इसमे वस्तुपरकता से कार्य किया जाना बहुत कठिन है।

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