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2/20/2021

बजटरी नियंत्रण क्या है? परिभाषा, विशेषताएं

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बजट नियंत्रण क्या है? इसे जानने से पहले हमे बजट और नियंत्रण से क्या आशय है? यह जान लेना जरूरी है।

बजट से आशय 

bajatari niyantran arth paribhasha visheshta;बजट प्रबंध का एक उपयोगी यंत्र है जिससे भावी क्रियाओं की योजना बनाई जाती है। उत्पादकगण भविष्य की क्रय, विक्रय, व्यय आदि की योजना बनाकर समस्त क्रिया-कलापो का निर्धारण करते है ताकि वे कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर सके एवं व्यवसाय की अनिश्चितताओं को दूर कर अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सके। बजट व्यवसाय के निर्धारण लक्ष्य प्राप्ति के लिए किये जाने वाले क्रिया-कलापों का पूर्वानुमान है। हम यह भी कह सकते है कि बजट एक तरह के प्रमाप है जिनके द्वारा व्यक्तियों तथा विभागों की वास्तविक सफलताओं को मापा जा सकता है।

प्रो. सैण्डर्स के अनुसार," किसी विशिष्ट भावी अवधि से संबंधित व्यावसायिक क्रियाओं की विस्तृत योजना को बजट कहते है। इसके साथ-साथ लेखाकरण की ऐसी पद्धति अपनाई जाती है, जिससे योजना पर पूर्ण नियंत्रण रह सके।" 

क्लेरेन्स एल. वान सिकिल के अनुसार," बजट एक प्रकार का अनुमान होता है, जो किसी विशिष्ट भावी अवधि के लिए पहले से बनाया जाता है।"

नियंत्रण से आशय 

नियंत्रण प्रबंध का अंतिम कार्य है। नियंत्रण का सही अर्थ है," वश मे रखना। जब हम जैसा चाहे वैसा ही हो, यही नियंत्रण है। नियंत्रण के द्वारा घटनाओं को योजनानुसार बनाए रखा जाता है। कुछ लोग यह भी कहते है कि नियंत्रण मे प्रबंध यह जांच करता है कि वह अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने मे सफल रहा है अथवा नही, उसकी योजनाएं पूर्ण हुई है अथवा नही, उसके निर्देशों का पालन किया गया है या नही। 

बजटरी नियंत्रण क्या है? (bajatari niyantran ka arth)

बजट बनाने से ही सब कुछ नही हो जाता है। बजट बनने के बाद प्रबंध का कार्य प्रारंभ हो जाता है। प्रबंध का यह कार्य है कि वह देखे कि बजट के अनुसार कार्य हो रहा है या नही, व्यावसायिक क्रियाओं मे क्रमबद्धता बनी हुई है, उत्पादन क्रिया मे किसी तरह की शिथिलता तो नही आ रही है। प्रबंधकों को सभी व्यापारिक क्रियाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। बजट नियंत्रण के माध्यम से वास्तविक परिणामों की तुलना पूर्व निर्धारित बजट लक्ष्यों से की जाती है एवं अंतर आने पर उनकी जांच कर कारणों का पता लगाया जाता है तथा फिर उन्हें दूर किया जाता है। बजटरी नियंत्रण मे सर्वप्रथम बजट बनाये जाते है तथा फिर व्यवसायिक प्रगति को बजट के अनुसार नियंत्रण किया जाता है। 

बजट नियंत्रण की परिभाषा (bajatari niyantran ki paribhasha)

एफ. ए. स्काट के अनुसार," बजटरी नियंत्रण से प्रबंध नियंत्रण एवं लेखाकर्म की उस प्रणाली से होता है जिसमे समस्त क्रियाकलापों का पूर्वानुमान लगाया जाता है, यथासंभव पूर्व कर लिया जाता है तथा वास्तविक परिणामों की पूर्वानुमानों तथा नियोजित लक्ष्यों से तुलना की जाती है।" 

जार्ज आर. टैरी के अनुसार," बजट नियंत्रण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा वास्तविक कार्य-कलापों का पता लगाया जाता है, फिर बजट अनुमानों से उसकी तुलना की जाती है जिससे उपलब्धियों को पुष्टि की जा सके या बजट अनुमानों मे समायोजन करके अथवा अंतरों के कारणों का सुधार करके अंतरों को दूर किया जा सके।" 

वाल्टर डब्ल्यू. विग के शब्दों मे," बजटरी नियंत्रण शब्द प्रबंध तथा लेखा नियंत्रण की उस विधि के लिए प्रयोग किया जाता है जिसके द्वारा जहां तक संभव हो सके, सभी क्रियाओं एवं उत्साह की भविष्यवाणी की जाती है और जब वास्तविक परिणाम मालुम होते है तब उनका बजट अनुमान से मिलान किया जाता है।" 

जै. बैटी के अनुसार," बजटरी नियंत्रण एक ऐसी पद्धति है जो बजटों को वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन तथा विक्रय के सभी पहलुओं के नियोजन एवं नियंत्रण के साधन के रूप मे प्रयोग करती है।" 

ब्राउन एवं हाबर्ड के अनुसार," बजटरी नियंत्रण लागतों के नियंत्रण करने की एक विधि है जिसमे बजटों को तैयार करना, विभागों को संबंधित करना, वास्तविक कार्य निष्पादन की पूर्व निर्धारणों से तुलना करना एवं अधिकतम लाभदायकता प्राप्त करने हेतु परिणामों का कार्य करना शामिल है।" 

श्री आर. आर. गुप्ता के अनुसार," बजटरी नियंत्रण प्रबंध और लेखाविधि की उस विधि को कहते है जिसके द्वारा प्रत्येक उत्पादक कार्य विक्रय तथा उत्पादन की मात्रा एवं उसकी अनुमानित लागत उचित समय पूर्व ही निश्चित की जा सकती है और उत्पादन हो चुकने के बाद वास्तविक कार्यों की तुलना बजटों से की जा सकती है।" 

व्हेल्डन के अनुसार," बजटरी नियंत्रण व्यवसाय के विभिन्न कार्यों का पूर्व नियोजन है, जिससे सम्पूर्ण व्यवसाय नियंत्रित किया जा सके।" 

उपरोक्त विवरण के आधार पर कहा जा सकता है कि बजटरी नियंत्रण वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत प्रबन्धक पहले विभिन्न प्रकार की योजनायें बनाते है, फिर इन योजनाओं पर इस प्रकार नियंत्रण किया जाता है कि प्राप्त परिणाम पूर्व नियोजन के यथासंभव करीब हो।

बजटरी नियंत्रण की विशेषताएं (bajatari niyantran ki visheshta)

बजटरी नियंत्रण की विशेषताएं इस प्रकार है--

1. नियोजन 

बजटरी नियंत्रण की पहली विशेषता है व्यवस्था की नीति के अनुसार समस्त क्रियाओं की योजना बना ली जाये। जिससे कि व्यवसाय के लक्ष्य तक आसानी से पहुंचा जा सके। इसके अंतर्गत पर्याप्त लाभ कमाने की योजना बनाना ताकि विनियोजकों का पर्याप्त लाभांश चुकाया जा सके, पर्याप्त लाभ कमाने के लिए विक्रय योजना तैयार करना, पर्याप्त विक्रय के लिए उत्पादन की योजना बनाना तथा पर्याप्त उत्पादन के लिए विभिन्न लागतों के संबंध मे योजना बनाना है।

2. समन्वय 

व्यवसाय के अंतर्गत कई विभाग होते है जिनकी अलग-अलग क्रियाएं होती है। बजटरी नियंत्रण द्वारा इन सब मे समन्वय स्थापित किया जाता है, ताकि सभी क्रियाओं का सम्पादन कुशलतापूर्वक हो सके तथा व्यवसाय के लक्ष्य तक पहुंचा जा सके। इसके अंतर्गत विक्रय एवं उत्पादन विभाग के समन्वय, उत्पादन तथा प्लाण्ट की क्षमता मे समन्वय, विक्रय, उत्पादन व अनुसंधान क्रियाओं मे समन्वय तथा समस्त क्रियाओं के संबंध मे नकद प्राप्ति एवं भुगतान मे समन्वय।

3. अभिलेखन 

बजट की तीसरी विशेषता है बजट हमेशा लिखित मे होता है। बजट के आंकड़ों का उचित रूप से अभिलेखन किया जाता है। यदि उचित रूप से आंकड़ों का अभिलेखन नही किया जाता है। यदि उचित रूप से आँकड़ों का अभिलेखन नही किया जाता है तो आंकड़ों की तुलनात्मक रूप से जांच नही की जा सकती है।

4. सूचना 

विभिन्न विभागों के सभी दायित्ववान अधिकारियों को बजट के प्रस्ताविक एवं वास्तविक आकड़ों को समय-समय पर पहुंचाया जाता है ताकि वे अपने उत्तरदायित्वों को ठीक प्रकार से समझ भी सकते है एवं अपने कर्मों को उत्तरदायित्वपूर्ण ढंग से निभा सकते है।

5. नियंत्रण 

व्यवसाय का बजट बनाने के बाद उसके क्रियान्वयन के लिए विभिन्न क्रियाओं को अलग-अलग विभागों मे वांटा जाता है, विभागों के उपविभाग भी बनाये जाते है एवं विभिन्न अधिकारियों के मध्य उत्तरदायित्वों का निर्धारण किया जाता है। सभी अधिकारी अपना काम उत्तरदायित्व पूर्ण रूप से समय पर पूर्ण कर सके इसके लिए अनेक नियंत्रण लगाना आवश्यक है।

6. समीक्षा 

एक निश्चित समय के बाद बजटेड आंकड़ें एवं वास्तविक आंकड़ों की तुलनात्मक रूप से समीक्षा की जाती है। बजटेड एवं वास्तविक अंकों के मध्य अंतर अनुकूल या प्रतिकूल हो सकता है। इस प्रकार दोनों ही परिस्थितियों मे अंतर से कारणों का पता लगाया जाना अत्यन्त आवश्यक है। इस प्रकार यदि परिणाम प्रतिकूल है तो अंतर के कारणों को दूर करने का प्रयास किया जाता है। यदि परिणाम अनुकूल है तो उसके प्रोत्साहन के लिए समुचित प्रयास करना चाहिए।

यह भी पढ़ें; बजटरी नियंत्रण के उद्देश्य, लाभ, सीमाएं

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