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2/23/2021

प्रबंधकीय प्रतिवेदन क्या है? परिभाषा, विशेषताएं/सिद्धांत

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प्रबंधकीय प्रतिवेदन क्या है? (prabandhkiya prativedan ka arth)

prabandhkiya prativedan arth paribhasha visheshta;प्रबंध तंत्र को सूचना उपलब्ध करने की प्रक्रिया " प्रबन्धकीय प्रतिवेदन " करना कहलाता है। प्रबन्धकीय प्रतिवेदन वह पद्धति है, जिसके अंतर्गत विशिष्ट उद्देश्य से संकलित समंको को सम्बंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। इन समंकों को इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि सम्बंधित घटना की अनिश्चितता को दूर किया जा सके या कम से कम किया जा सके। इन सूचनाओं को सामान्यतः प्रतिवेदनों (Reports) के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। इस प्रकार प्रतिवेदन की सहायता से न केवल प्राप्तकर्ता की जानकारी को बढ़ावा जाता है बल्कि इससे नीति-निर्धारण, निर्णयन तथा नियंत्रण मे भी सहायता मिलती है। प्रबंध हेतु प्रतिवेदन को प्रबन्धकीय सूचना प्रणाली के नाम से भी जाना जाता है।

प्रबंधकीय प्रतिवेदन की परिभाषा (prabandhkiya prativedan ki paribhasha)

रामनाथ तथा हिंगोरानी के अनुसार," प्रबंध सूचना प्रणाली प्रत्येक प्रबंधक को संपूर्ण समंको तथा केवल उन समंकों को प्रदान करने की संगठित विधि है जिसकी कि उसे अपने निर्णय के लिए आवश्यकता है, जिस समय एवं रूप मे उसे अपने कार्य को समझने एवं सम्पादित करने के लिए आवश्यकता होती है।" 

जेराम कान्टर के अनुसार," प्रबंधकीय सूचना प्रणाली वह प्रणाली है, जिसके द्वारा प्रबंध के कार्यों जैसे-- नियोजन, नियंत्रण, निर्णयन क्रियान्वयन मे सहायता प्रदान की जाती है।

एस. चोपड़ा के अनुसार," प्रबंधकीय सूचना प्रणाली संचार की एक एक प्रक्रिया है जिसमे सूचानाएं एकत्र की जाती है एवं उन्हें रखा जाता है। ये सूचनाएं निर्णयन कार्य जो नियोजन, नियंत्रण एवं क्रियान्वयन से संबंधित होता है, उपयोग मे ली जाती है।" 

आई. सी. डब्ल्यू. ए. के अनुसार," प्रबंध सूचना प्रणाली वह प्रणाली है, जिसमे परिभाषित समंक उन लोगों को सहायता पहुँचाने के लिये, जो साधनों का उपयोग करने के लिए उत्तरदायी है, संकलित परिनिर्मित एवं संप्रेषित किये जाते है।"

सरल शब्दों मे प्रबन्धकीय सूचना प्रणाली से तात्पर्य उस व्यवस्थित दृष्टिकोण से होता है, जिसके द्वारा सही समय पर पर्याप्त मात्रा मे एवं सही सूचना संगठन संरचना मे सही व्यक्ति को प्रदान की जाती है, जिससे वह व्यक्ति, मनुष्य सामग्री, मशीन एवं मुद्रा के आन्तरिक संबंधों को अनुकूलतम करते हुए संगठन के उद्देश्यों को प्रभावपूर्ण ढंग से प्राप्त करने के लिए निर्णय ले सकें।

प्रबंध सूचना प्रणाली या प्रबन्धकीय प्रतिवेदन की विशेषताएं अथवा सिद्धांत 

किसी भी सूचना प्रणाली का एक निश्चित प्रारूप निश्चित करना एक अत्यंत जटिल काम है, क्योंकि प्रत्येक व्यवसाय की अपनी प्रकृति होती है, अलग-अलग कार्य-शैली होती है। ऐसी स्थिति मे कोई एक सूचना प्रणाली सभी व्यवसायों के लिए उपयुक्त हो, एक कठिन कार्य है। फिर भी कुछ सामान्य गुण या विशेषताएं एक अच्छी सूचना प्रणाली मे होनी चाहिए। अतः एक अच्छी सूचना प्रणाली मे निम्न विशेषताओं का समावेश होना जरूरी है--

1. सरलता 

यथासंभव यह प्रयास होना चाहिए कि सूचना प्रणाली सरल व बोधगम्य हो। इसके लिये इसके प्रस्तुतीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि इसे आसानी से समझा जा सके। इसके अलावा सूचना प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिससे इसका अर्थ लगाने मे कोई भ्रम न उत्पन्न हो जाये।

2. संक्षिप्तता 

सूचना प्रणाली मे सरलता के साथ-साथ संक्षिप्तता का गुण भी जरूरी होता है। लेकिन संक्षिप्तता का अर्थ यह कभी नही होना चाहिए की महत्वपूर्ण बातें ही छोड़ दि जाये, बल्कि सूचना प्रणाली ऐसी होनी चाहिए कि कम बातों मे अधिक बातों का समावेश हो जाये। ऐसी सूचना से प्रबंधकों को समय व श्रम की बचत होती है और वे शीघ्र निर्णय लेने मे अपने को सक्षम पाते है। इसके लिये ग्राफ, चार्ट, तालिका व चित्रों का भी प्रयोग किया जा सकता है। 

3. प्रबन्धोन्मुखी 

प्रबंध सूचना प्रणाली सदैव ही प्रबंधन्मुखी होनी चाहिए अर्थात् प्रबंध सूचना प्रणाली की रचना इस प्रकार करनी चाहिए जिससे संस्था के विभिन्न प्रबंध स्तरों को वांछित सूचना उपलब्ध हो सके। यद्यपि प्रबंध सूचना का निर्माण अधोगामी (top-down) होता है जिसका तात्पर्य यह नही है कि यह प्रणाली केवल उच्च प्रबंध को ही सूचना करती है अथवा इसका निर्माण केवल उच्च प्रबंध के लिए ही किया जाता है। इसका अर्थ केवल इतना ही है कि सर्वप्रथम सूचना प्रणाली की रचना उच्च प्रबंध की आवश्यकताओं को ध्यान मे रखकर की जाती है तथा इसके बाद माध्यम स्तर तथा क्रियात्मक प्रबंध की आवश्यकताओं को ध्यान मे रखा जाता है।

4. एकीकृत 

प्रबंध सूचना प्रणाली एकीकृत होना चाहिए। प्रबंध सूचना प्रणाली अर्थपूर्ण सूचनाएं प्रबंधकों को उपलब्ध करवाती है। इसलिए प्रबंध सूचना प्रणाली का विकास सभी तत्वों को ध्यान मे रखकर किया जाना चाहिए। इस प्रणाली द्वारा स्थापना लागतों, कार्यशक्ति, उत्पादन क्षमता, स्कन्ध स्तरों, ग्राहक सेवा एवं पूंजी आवश्यकताओं मे सन्तुलन स्थापित करना जरूरी होता है।

5. योजनाबद्ध प्रणाली 

प्रबंध सूचना प्रणाली की रचना केवल वर्तमान आवश्यकताओं को ही ध्यान मे रखकर नही करनी चाहिए बल्कि भावी आवश्यकताओं को भी ध्यान मे रखकर करनी चाहिए। इसलिए प्रबंध सूचना प्रणाली योजनाबद्ध होनी चाहिए। प्रबंध सूचना प्रणाली का निर्माण संस्था के भावी उद्देश्यों, आवश्यकताओं तथा विकास को ध्यान मे रखकर करना चाहिए।

6. पूर्णता 

सूचनाओं का संकलन इस प्रकार होना चाहिए जिससे संपूर्ण सूचनाओं का समावेश हो जाये। स्पष्टतः अधी-अधूरी जानकारी के आधार पर निर्णयन का कार्य जटिल हो जाता है। उदाहरण के लिए, यदि वास्तविक लागत का ब्यौरा प्रस्तुत किया जा रहा है तो प्रमापित लागतों का भी वितरण दिया जाना आवश्यक होता है। इसके अभाव मे सही-सही निर्णय लेना एक कठिन काम होगा।

7. मितव्ययिता 

सूचना प्रणाली मे मितव्ययिता के गुण का होना आवश्यक है अर्थात सूचना प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिससे लागत कम से कम हो। इससे प्राप्त होने वाली उपयोगिता की तुलना इसमें लगने वाली लागत से की जानी चाहिए। यथासंभव यह प्रयास किया चाहिए कि प्राप्त उपयोगिता लगने वाली लागत मे कही अधिक हो और यही इसकी सफलता का प्रतीक होगा।

8. उपयोगिता 

संकलित सूचनाएं उपयोगी होनी चाहिए। ऐसी नही होने से अनावश्यक रूप से लागत मे वृद्धि होगी। यदि सूचना का प्रारूप ऐसा हो गया हो जिससे उसकी उपयोगिता की संभावना नही हो तो ऐसी सूचना प्रणाली मे आवश्यक संशोधन कर दिया जाना चाहिए जिससे वह पुनः उपयोगी बन जाये। लेकिन यदि सूचना की उपयोगिता बिल्कुल समाप्त हो जाये तो इसका संकलन अविलम्ब बंद कर देना चाहिए।

9. शीघ्रता 

सूचना प्रणाली ऐसी होनी चाहिए कि इसका संवहन शीघ्र हो सके। समय पर सूचना उपलब्ध नही होने से यह अपने मे महत्वहीन हो जाती है, क्योंकि "का बरखा जब कृषि सुखाने" की तरह यदि संबंधित अधिकारियों के पास विलम्ब से पहुंचती है और तब तक परिस्थितियां बदल गयी हो तो ऐसे प्रतिवेदन की कोई उपयोगिता नही रह जाती है।

10. सामान्य एवं केन्द्रीय समंक आधार 

एक प्रबंधकीय सूचना प्रणाली तभी सफल होती है जब उसमे सूचनाओं एवं समंकों का संग्रहण केन्द्रीय आधार पर किया जाए। केन्द्रीय स्तर से ही सूचनाएं सभी प्रबंध स्तरों को प्रदान की जानी चाहिए। ऐसा होने पर ही सूचनाओं के संग्रहण मे दोहराव नही होगा। सूचनाएं सामान्य हो तथा उनका भण्डारण केन्द्रीय आधार पर हो।

11. लोचदार एवं परिवर्तनशील 

प्रबंध सूचना प्रणाली मे लोचदार तथा परिवर्तनशीलता की विशेषता होनी चाहिए। व्यवसाय को एक परिवर्तनशील वातावरण मे कार्य करना पड़ता है अतः प्रबंधकीय सूचना प्रणाली व्यवसाय की परिवर्तनशील आवश्यकताओं के लिए सूचना प्रदान करने वाली होनी चाहिए। सूचना प्रणाली कदापि कठोर नही होनी चाहिए।

संदर्भ; मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, लेखक श्री डाॅ.  सुभाष गुप्ता, श्री नीलम नाहर

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