10/27/2020

चार्टिस्ट आंदोलन के कारण, घटनाएं, परिणाम या महत्व

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चार्टिस्ट आंदोलन क्या था? (chartist aandolan kya tha)

chartist aandolan karan, parinaam, mahatva hindi;सन् 1832 के सुधार अधिनियम द्वारा अंग्रेजी समाज के मध्यम वर्ग के लोंगो को तो लगभग सभी सुविधाएं प्रदान की गई, परन्तु इस अधिनियम से मजदूर वर्ग को पर्याप्त लाभ नही मिल पाया। परिवर्तित आर्थिक ढांचे की वजह से उत्पन्न हुआ देश का आर्थिक संकट, राबर्ट ऑवेन द्वारा औद्योगिक समाज मे नया आधार शास्त्र पेश करने की असफलता ने मजदूरों को असहाय छोड़ दिया। मजदूरों को मजबूर होकर अपनी माँगों की राजनीतिक रूप देना पड़ा और 1838 से विक्टोरिया के शासनकाल मे मेलबोर्न मन्त्रिमण्डल के समय आंदोलन छेड़ना पड़ा। 

मजदूर नेता फ्रांसीसी प्लेस विलियम लौबिट, फिअरगस ओ. कोनर, एडवूड आदि ने मजदूर मांगे संसद के समक्ष एक चार्टर के रूप मे प्रस्तुत की इसलिए इस आंदोलन का नाम " चार्टिस्ट आंदोलन " पड़ा तथा चार्टिस्ट के पक्षधर " चार्टिस्ट " कहलाए।

चार्टिस्टों की प्रमुख मांगे 

चार्टिस्ट आंदोलन की प्रमुख 6 मांगे थी। जिन्हें 1838 मे लन्दन मजदूर संघ ने प्रकाशित किया था--

1. संसद का वार्षिक चुनाव।

2. गुप्त मतदान के द्वारा निर्वाचन।

3. वयस्क स्त्री-पुरूषों को मताधिकार।

4. मताधिकार के लिए सम्पत्ति की योग्यता की सम्पत्ति।

5. संसद सदस्यों को भत्ता और वेतन देना।

6. समान चुनाव क्षेत्र बनाना।

चार्टिस्ट आंदोलन के कारण (chartist aandolan ke karan)

चार्टिस्ट आंदोलन श्रमिकों की पुरानी असफलता और निराशा से उत्पन्न एक आंदोलन था जिसे फ्रांस की 1830 की क्रांति ने प्रेरणा दी थी। चार्टिस्ट आंदोलन के कारण इस प्रकार है--

1. 1832 के अधिनियम से निराशा

1832 मे सुधार हुये परन्तु वे पूर्ण रूप से अपर्याप्त थे। इससे श्रमिकों, किसानो और गरीबों को कोई लाभ नही हुआ। अतः उन्होंने आंदोलन आरंभ कर दिया।

2. गरीब कानून 

इंग्लैंड मे बहुत अधिक भिखारी थे तथा इनकी दशा बहुत खराब थी। अतः आर्थिक तंगी मे यह बहुत अपराध करते थे। इनके लिये एलिजाबेथ ने " निर्धन कानून " बनाया। परन्तु यह उनकी भोजन, वस्त्र, आवास और शिक्षा एवं विकास की समस्या को हल करने मे पूर्णरूप से असफल रहा। अतः यह निर्धन चार्टिस्टों के साथ मिलकर आंदोलन करने लगे।

3. अनाज कानून 

आयरलैंड और इंग्लैंड मे अनाज उत्पादन पर जमींदारों का नियंत्रण था। वे सस्ते मजदूर रख कर भारी उत्पादन कर मुनाफा कमाते थे। अनाज उत्पन्न करने वाला किसान भूखा रहता था। अकाल होने पर भी यह जमींदार अनाज की कीमत बढ़ा देते थे। अनाज का भाव गिरे नही इसलिए संसद से ऐसा कानून पारित कराया। उन्होंने कभी किसानो की गरीबी, भुखमरी, बेकारी और कम मजदूरी का ध्यान नही रखा। इनके साथ साथ श्रमिक और मध्यम वर्ग भी इससे परेशान थे अतः उन्होंने चार्टिस्टों का साथ दिया।

4. सामाजिक कारण 

19 वीं शताब्दी की इंग्लैंड की सामाजिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गयी थी। अमीर लोग प्रायः आन्दन और भोगविलास का जीवन व्यतीत कर रहे थे, जबकि श्रमिक वर्ग और सामान्य कृषक वर्ग बड़े संघर्षो मे अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप इंग्लैंड मे समाजवाद का उदय हुआ। समाजवाद के उदय होने के कारण ही वहां विभिन्न प्रकार की बौद्धिक समस्याएं उठ खड़ी हुई। वर्गभेद बढ़ते चले गए। 1945 मे इस प्रकार की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए लिखा था " दोनो वर्गों के दो राष्ट्र है, जिसमे किसी प्रकार का सम्पर्क या सहानुभूति नही है और जो एक दूसरे की आदतों, विचारों और भावनाओं से इतने अनभिज्ञ है, मानो वे विभिन्न क्षेत्रों या विभिन्न देशो के निवासी हो।"

5. आर्थिक कारण

श्रमिक वर्ग पूंजीपति वर्ग से प्रायः असन्तुष्ट था। वर्ग भेद और पूंजी के असमान वितरण ने आर्थिक विषमता उत्पन्न कर दी थी। 1815 के वाटरलू के उपरांत इंग्लैंड की आर्थिक स्थिति बड़ी शोचनीय हो गई थी। इस सबका प्रभाव यह हुआ कि चार्टिस्ट आंदोलन के रूप मे यह असन्तोष बिखर गया। 

चार्टिस्ट आंदोलन की घटनाएं 

लन्दन मजदूर संघ ने प्रधानमंत्री रसल के काल मे (1832 मे) चार्टिस्ट मांगो को समाचार-पत्र मे दिया। इसके लिये इंग्लैंड मे नैतिक और हिंसक आंदोलन हुए। थामस ऑटबुड ने प्रार्थना पत्र पर 10 लाख हस्ताक्षर करवा कर संसद को सौंपा। परन्तु सरकार ने इन्हें अस्वीकार कर इस पर अनेक आक्षेप लगाये।

चार्टर पर पुनः 30 लाख हस्ताक्षर करवाकर 1842 मे संसद को दिया गया। अब इसके पक्ष मे श्रमिकों ने हड़तालें एवं प्रदर्शन किये सरकार ने भी दमन-चक्र चलाया परन्तु इसका अंत नही हुआ। यूरोप मे 1848 की क्रांति से प्रभावित होकर 1848 मे 50 लाख हस्ताक्षरों के साथ चार्टर पुनः तीसरी बार संसद को दिया गया।

चार्टिस्टों का दमन 

जब एडवर्ड ग्रे प्रधानमंत्री बना तो उसने चार्टिस्टो को बदनाम करके उनके आंदोलन को कुचलने का सफल प्रयास किया। उन्हें बदनाम करने के लिये उसने निम्म अरोप लगायें 1. हस्ताक्षरों को दोहराने। 2. मृत व्यक्तियों के हस्ताक्षर।

3. बाहर गये व्यक्तियों के हस्ताक्षर।

4. 20 हजार हस्ताक्षर जाली होने के आरोप लगाये तथा पुलिस और सैनिक बल से उनका दमन किया।

चार्टिस्ट आंदोलन की असफलता के कारण 

चार्टिस्टों का आंदोलन बुरी तरह असफल रहा। इसकी असफलता के कई कारण थे। चार्टिस्ट आंदोलन के की असफलता के मुख्य कारण इस प्रकार है--

1. चार्टिस्ट नेताओ के बीच मतभेद उत्पन्न होना।

2. सरकार द्वारा दमन और बदनामी।

3. अपेक्षित जनमत का अभाव।

4.  चार्टिस्टो के पास आर्थिक साधन बहुत सीमित होना।

5. चार्टिस्टो के विचार समय से आगे बढ़े गए थे।

6. चार्टिस्टों ने सभी वर्गों के श्रमिकों का प्रतिनिधित्व नही किया।

यूं तो चार्टिस्टों का अंत हो गया और उनके आंदोलन का कोई तात्कालिक परिणाम भी नही हुआ, किन्तु अप्रत्यक्ष रूप से उनके सिद्धांतो ने अवश्य प्रभावित किया। कार्ललायल ने लिखा है कि ," चार्टिस्टों के सिद्धांत मौलिक और व्यापक थे। उनमे ऐसी बाते नही थी, जो कल ही प्रारंभ हुई हो और आज समाप्त हो जाएं।"

चार्टिस्ट आंदोलन के परिणाम या महत्व (chartist aandolan ke parinaam)

तत्कालीन रूप से चार्टिस्ट आंदोलन भले ही असफल रहा परन्तु इसके दूरगामी परिणाम महत्वपूर्ण रहे। यह आंदोलन चार्टिस्ट के पतन के बाद भी अपने प्रभाव और महत्व को स्थापित कर गया। यह इंग्लैंड और यूरोप मे अन्य राजनीतिक और सामाजिक सुधारों की प्रेरणा का आधार बन गया जो कि विभिन्न आंदोलन मे वह प्रगट होने लगा। उनके द्वारा रखी गई माँगो सुधारों के लिए प्रयास अन्य तरीको से होते रहे। 

चार्टिस्ट आंदोलन के निम्न परिणाम हुए--

1. इसका प्रभाव सामन्त वर्ग पर भी पड़ा। अब ये अधिक सुधारों के पक्ष मे हो गए इस प्रकार उनमे उदारता आ गई।

2. इनकी मांगे भविष्य मे लोकप्रिय हो गई और धीरे-धीरे उसकी पूर्ति का प्रयास किया गया। एक के सिवा उनकी पांच मांगे अब तक पूरी हो चुकी थी। संसद के वार्षिक निर्वाचन की जो मांग थी वह पूरी नही हो सकी क्योकि मतदाताओं की संख्या को देखते हुए प्रति वर्ष निर्वाचन करना असंभव था।

3. इंग्लैंड के आधुनिक इतिहास मे श्रमिकों का यह प्रथम संगठित आंदोलन था। उस समय असफल हो जाने पर भी इसने मजदूरों के सहयोग एवं एकता की भावना का सुधार किया। सरकार को श्रमिकों के प्रति सहानुभूति का दृष्टिकोण ग्रहण करना पड़ा तथा उनके लिए सुधारों की व्यवस्था करना पड़ी।

4. राजनीतिक क्षेत्र मे संसद के चुनाव का आंदोलन तीव्र होता गया।

मैरियट के शब्दों मे " यदि चार्टिस्टों की सभी क्रांतिकारी मांगे पूरी हो जाती तो इंग्लैंड मे एक ऐसा गणतंत्र स्थापित हो जाता, जिसके सभी नेता अनुभवहीन होते, इसलिए इंग्लैंड भी फ्रांस की तरह अनेक क्रांतियों का शिकार हो जाता। चार्टिस्टों को सफलता नही मिली, इंग्लैंड का सौभाग्य था।"

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