समिति किसे कहते है? अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं

समिति का अर्थ (samiti ka arth)

समिति व्यक्तियों के द्वारा अपने समान उद्देश्य की पूर्ति करने के लिए विचारपूर्वक निर्मित एक ऐसा संगठन का नाम है जिसकी सदस्यता ऐच्छाक होती हैं। अतएव समिति आवश्यकताओं की पूर्ति करने का एक महत्वपूर्ण साधन हैं। इसमें व्यक्ति संगठित होकर सामान्य हितों को ध्यान मे रखकर विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति करता हैं। उद्देश्यों की पूर्ति के पश्चात समिति भंग भी हो सकती हैं।
इस लेख मे हम समिति की परिभाषा और विशेषताएं जानेगें।
खासतौर पर विकसित व सभ्य समाजों मे सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक आदि सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ति मे व्यक्तियों के व्यवहारों को नियोजित करने मे समितियाँ अत्यधिक महत्वपूर्ण है। समिति व्यक्ति के सामाजिक जीवन को दिशा प्रदान करती हैं, जिसके आधार पर समाज का विशाल संगठन बनता है। समिति का महत्व न केवल व्यक्ति की दृष्टि से है, अपितु समाज, राष्ट्र, संस्कृति और मानवता की दृष्टि से भी समिति की अनिवार्य आवश्यकता हैं।
समिति

समिति किसे कहते हैं (samiti kise kahte hai)

समिति कुछ आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यक्तियों द्वारा निर्मित की जाती है। इसमें व्यक्ति निश्चित उद्देश्य लेकर सम्मिलित होता हैं। यह व्यक्तियों की आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन हैं। समिति व्यक्तियों का वह समूह है, जो आवश्यकता की पूर्ति के लिए संगठित होती हैं। उदाहरण; छात्र समिति, व्यापारिक समिति, श्रम संघ, दुर्गोत्सव समिति आदि।

समिति की परिभाषा (samiti ki paribhasha)

मैकाइवर और पेज "समिति सामान्य उद्देश्यों के लिये संगठित समूह हैं।"
गिन्सबर्ग के अनुसार "समिति सामाजिक प्राणियों का एक समूह है, जो एक-दूसरे से सम्बंधित है तथा जो एक निश्चित उद्देश्य या उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक संगठन का निर्माण करती है।
बोगार्डस के अनुसार " समिति प्रायः किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए मिलकर कार्य करती है।"
गिलिन एवं गिलिन के अनुसार " एक समिति व्यक्तियों का समूह है जो किसी विशेष हित या हितों की पूर्ति के लिए संगठित होता है तथा कुछ मान्यता प्राप्त अथवा स्वीकृत प्रक्रियाओं एवं व्यवहारों द्वारा कार्य करता हैं।
स्पष्ट हैं कि समिति आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दो या दो से अधिक व्यक्तियों का ऐच्छिक संगठन है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं एवं उद्देश्यों की पूर्ति करता हैं।

समिति की विशेषताएं या लक्षण (samiti ki visheshta)

1. समिति व्यक्तियों का समूह हैं
इसमे दो या दो से अधिक व्यक्ति होते है जिनमें सामाजिक संबंध पाया जाता है। अतः स्पष्ट है कि समिति व्यक्तियों का मात्र एकत्रीकरण नही हैं। समिति चूंकि व्यक्तियों का समूह है इसलिए इसका स्वरूप मूर्त होता हैं।
2. निश्चित उद्देश्य 
समिति का विकास स्वत: नही होता। इसका जन्म व्यक्तियों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए होता हैं। उदाहरण के लिये विधार्थी इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिये कि "लेखन सामग्री" सस्ती और अच्छी मिले, एक समिति का निर्माण कर लेते हैं। इसी प्रकार जितनी भी समितियाँ होती है, उनके पीछे एक निश्चित उद्देश्य होते हैं।
3. समिति सहयोग पर आधारित हैं
वैसे पद प्रतिष्ठा को लेकर समूह मे प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष हो सकता है, किन्तु समिति का बनना एवं बना रहना सदस्यों के सहयोग पर ही निर्भर करता है। प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष कार्य प्रणाली मे सुधार व कतिपय बुराइयों को दूर करने मे सहायक हो सकते हैं, किन्तु लक्ष्यों की प्राप्ति मे समिति के निर्माण व स्थायित्व मे आधारभूत तत्व सहयोग ही हैं।
4. समिति मे संगठन पाया जाता हैं
समिति व्यक्तियों का मात्र समूह ही नही बल्कि एक संगठित समूह हैं। हालांकि किसी न किसी मात्रा मे एक आंतरिक संगठन प्रायः सभी समूहों मे पाया जाता है, किन्तु समिति के बारे मे यह बात विशेषरूप से लागू होती है। प्रत्येक समिति किसी न किसी प्रकार (औपचारिक या अनौपचारिक) से संगठित होती हैं। संगठन से तात्पर्य समूह मे सदस्यों की स्थिति व कार्यों की एक व्यवस्था से है। सदस्यों की स्थिति व कार्यों की पूर्ति निश्चित व्यवस्था हो जाने से समिति को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति मे सहूलियत होती हैं।
5. विचारपूर्वक स्थापना
समिति की स्थापना की जाती है और यह स्थापना सोच-विचार कर विचारपूर्वक की जाती हैं। व्यक्तियों के कुछ उद्देश्य होते हैं, व्यक्ति इन्हें प्राप्त करना चाहते है, तो वह नियमों के द्वारा सोच-विचार कर समिति की स्थापना करता है। इसका स्वत: विकास नही होता हैं।
6. मूर्त संगठन
समिति व्यक्तियों का समूह है जो विभिन्न हितों की पूर्ति के लिए संगठित होता है। अतः समिति एक मूर्त संगठन है जिसमे व्यक्तियों को आमने-सामने की स्थिति मे देखा और स्पर्श किया जा सकता हैं।
7. नियमों पर आधारित
कोई भी समिति अनियमित रूप से अपना कार्य नही कर सकती, क्योंकि जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए समिति का निर्माण होता है उसको तभी प्राप्त किया जा सकता है जब समिति के सदस्य संगठित होकर नियम से कार्य करें।
8. अस्थायी
समिति की प्रकृति अस्थायी होती है। समिति की स्थापना कुछ उद्देश्यों की पूर्ति के लिए की जाती है, और जैसे ही इन उद्देश्यों की प्राप्ति होती है, समिति समाप्त हो जाती हैं
9. समिति साधन है साध्य नही
समिति का निर्माण विभिन्न लक्ष्यों की पूर्ति हेतु होता है, परन्तु समितियों का निर्माण ही हमारा अंतिम उद्देश्य नही होता, वरन्  हम अपने उद्देश्य की पूर्ति अन्य साधनों से भी कर सकते है।
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