6/18/2020

समुदाय का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं

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समुदाय का अर्थ (samuday ka arth)

जब किसी समूह के सदस्य एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र से संबंधित हों, एक सामान्य जीवन व्यतीत करते हों और जीवन की किन्हीं एक या दो बातों मे ही नही बल्कि सामान्य जीवन की बहुत कुछ आधारभूत बातों को लेकर सम्बध्द हो तो उस समूह को समुदाय कहा जाता हैं।
दूसरे शब्दों में में, समुदाय का अर्थ, समुदाय वह मानव समूह है जो सामान्य जीवन व्यतीत करने के लिए निश्चित भू-भाग मे सामुदायिक भावना द्वारा संगठित किया गया हैं।
इस लेख मे हम समुदाय किसे कहते है? समुदाय क्या हैं? समुदाय की परिभाषा और समुदाय की विशेषताएं या आवश्यक तत्व जानेंगे।
समुदाय

जब किसी समूह, चाहे छोटा हो या बड़ा, के सदस्य इस प्रकार साथ-साथ रहते हो कि उनका ऐसा रहना किसी विशेष योजना या स्वार्थ को लेकर नही हो बल्कि उनमे सामान्य जीवन की आधारभूत बातें एक हों तो उस समूह को हम समुदाय के नाम से जानते हैं।

समुदाय की परिभाषा (samuday ki paribhasha)

गिन्सबर्ग के अनुसार " समुदाय से एक सामान्य जीवन व्यतीत करने वाले सामाजिक प्राणियों को एक समूह का बोध होता हैं जिसमे सब प्रकार के असीमित विभिन्न एवं जटिल सम्बन्ध होते हैं, जो उस सामान्य जीवन के फलस्वरूप प्राप्त होते हैं या उसका निर्माण करते हैं।"
बोगार्डस के अनुसार " समुदाय एक ऐसा सामाजिक समूह है जो एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र मे निवास करता हैं और जिसमें कुछ मात्र तक "हम" की भावना पाई जाती हैं।
आगबर्न एवं निमकाॅफ के अनुसार " एक सीमित क्षेत्र के अन्दर रहने वाले सामाजिक जीवन के पूर्ण संगठन को समुदाय कहा जा सकता हैं।

समुदाय की विशेषताएं (समुदाय के आवश्यक तत्व) {samuday ki visheshta]

1. समुदाय व्यक्तियों का समूह हैं
समुदाय व्यक्तियों का एक समूह हैं। व्यक्तियों के बिना समुदाय का निर्माण नही हो सकता।
2. निश्चित भू-भाग
समुदाय के लिए एक निश्चित भू-भाग या क्षेत्र का होना अति आवश्यक हैं। ज्यादतर समुदाय एक निश्चित स्थान पर ही बसे होते हैं एक निश्चित भू-भाग पर रहने से उनमे एकता व संगठन काफी दृढ होता हैं। आज संचार व यातायात के साधनों के विकास के साथ किसी व्यक्ति का एक निश्चित स्थान से पूर्णतः बंधे रहना संभव नही हैं। सभ्यता व ब्राह्रा निर्भरता के साथ छोटे-छोटे समुदाय बहुत कुछ टूटते जा रहे है और स्थानीयता पर आधारित एकता-सूत्र बहुत कुछ शिथिल हो रहे हैं फिर भी स्थानीयता एक आधारभूत तत्व आज भी हैं। वास्तव मे समुदाय की अवधारणा मे एक निश्चित भू-भाग के संघात से भले ही क्षेत्रीय सीमायें टूट रही हो, छोटे समुदाय बड़े समुदायों मे बदलते जा रहे हो किन्तु यह तो एक प्रकार से क्षेत्रीय विस्तार है न कि स्थानीयता का अभाव।
3. आत्मनिर्भरता
प्राचीन काल मे आत्मनिर्भरता समुदाय का एक एक आवश्यक तत्व माना जाता था। एक समुदाय मे निवास करने वालों की समस्त आवश्यकताएं वही पुरी हो जाती थी, लेकिन आज के इस युग मे ऐसा नही रहा हैं। आज समुदाय पूर्ण रूप से पराश्रति हैं।
4. सामुदायिक भावना
समुदाय मे सामुदायिक भावना पाई जाती हैं। एक भू-भाग से संबंधित होने, बहुत कुछ समान आवश्यकता और अनुभव रखने, एक से तीज त्यौहार, संस्कार व उत्सव मे भाग लेने तथा एक से जीवन मूल्यों से संबद्ध होने की वजह से एक समुदाय के व्यक्तियों मे जो एकता की भावना, अपनेपन की भावना उत्पन्न होती है उसे सामुदायिक भावना कहते हैं। जो इनमे "हम" संबंधों को निश्चित करती हैं। छोटे समुदायों जैसे किसी एक गाव मे लोग एक स्थान पर बसे होते है, एक-दूसरे के सुख-दु:ख मे भाग लेते हैं, बहुत कुछ एक से रीतिरिवाज, संस्कार और त्यौहार आदि से बंधे होते है, बहुत कुछ एक-सा जीवन व्यतीत करते है, इसलिए उनमें सामुदायिक भावना अत्यधिक दृढ़ होती हैं।
5. समान्य जीवन
समुदाय किसी विशेष उद्देश्य या कार्य की पूर्ति का साधन नही होता। इसमे तो सदस्यों का सामान्य जीवन व्यतीत होता है। समुदाय का एकमात्र लक्ष्य सदस्यों की सामान्य आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है। इसी फलस्वरूप हम समुदाय मे रहते हैं, जैसे, राष्ट्र, नगर, गाँव आदि।
6. व्यापक उद्देश्य एवं बहुत कुछ सामान्य जीवन
जीवन के अनेक पक्षों को लेकर समुदाय मे व्यक्ति एक-दूसरे से भागीदारी बनते हैं। एक स्थान पर साथ-साथ रहने से उनका जीवन बहुत एक-सा रहता है। बहुत कुछ समान उद्देश्य एवं समान हितों को लेकर लोग संबद्ध होते हैं। एक से रीति-रिवाज, एक से नियम, उपनियम, एक भाषा तथा एक से उत्सव व संस्कार साधारणतः एक समुदाय मे देखने को मिलते हैं।
7. नियमों की एक सामान्य व्यवस्था
गिन्सबर्ग ने नियमों की सामान्य व्यवस्था को भी समुदाय का एक आवश्यक तत्व माना है। समुदाय मे नियमों की प्रचलित एक समान्य व्यवस्था होती है, जिससे उनके सदस्य प्रभावित व नियन्त्रित होते हैं।
8. विशिष्ट नाम
प्रत्येक समुदाय का अपना एक विशिष्ट नाम होता हैं, जिसके द्वारा उसे पृथक जाना जाता हैं। समुदायों का नाम अधिकतर उनके स्थानीय भू-भाग के नाम पर रखा गया होता हैं।
9. समानताओं का क्षेत्र
प्रत्येक समुदाय मे अनेक प्रकार की समानताएं पाई जाती हैं। ये समानताएं प्रथाओं, रूढ़िवादी विचारों, रीति-रिवाज और उत्सव मनाने के अनोखे ढंगों मे पाई जाती हैं। सब समानताओं मे प्रधान होती हैं, भाषा की समानता। प्रत्येक समुदाय की अलग-अलग भाषा होती हैं।
10. स्थायित्व
समुदाय एक स्थायी संगठन है। एक बार बन जाने के बाद किन्ही असाधारण घटनाओं जैसे--- बाढ़, भूकम्प या तुफान आदि जिससे कि वह पूर्णतः नष्ट न हो जाये, को छोड़कर समुदाय साधारणतः बना रहता हैं।
11. मूर्तता
समुदाय की एक विशेषता इसकी मूर्तता हैं, क्योंकि यह एक जनसमूह की और संकेत करता है जिसके अवलोकन और निरीक्षण किया जा सकता हैं।
इस लेख में हमने समुदाय का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं को जाना। अगर आपके मन मे कोई सवाल या सुझाव हैं तो नीचे comment कर जरूर बताएं।
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