नियोजन का अर्थ एवं परिभाषा

नियोजन का अर्थ (niyojan ka arth)

नियोजन वांछित परिवर्तन लाने का एक तरीका हैं। नियोजन भविष्य मे देखने की विधि अथवा कला है। इसमे भविष्य की आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाया जाता है ताकि लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए किए जाने वाले प्रयासों को उनके अनुरूप ढाला जा सके। 
आज के इस लेख मे हम नियोजन का अर्थ जानने के बाद हम नियोजन की विभिन्न विद्वानों द्धारा दी गई परिभाषा को जानेंगे।
नियोजन का मतलब

नियोजन परिवर्तन का एक ऐसा स्वरूप है जिसमे तार्किक ढंग से लक्ष्य और साधनों के संयोजन से वांछित परिवर्तन लाया जाता हैं। यह एक चेतन प्रयास है, जो समाज की समस्याओं को पहचानकर प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता हैं। इस प्रक्रिया से समस्याओं का हल खोजने के लिए लक्ष्य निर्धारण सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप किया जाता हैं।

नियोजन की परिभाषा (niyojan ki paribhasha)

जाॅन ई इलियट के शब्दों में " नियोजन क्रिया स्तयं मे एक सोद्देश्य क्रिया है। किन्ही पूर्व निश्चित उद्देश्यों के अभाव मे नियोजन की कल्पना करना कठिन है। नियोजन वह साधन है जिसे किसी निश्चित लक्ष्य के संदर्भ मे प्रयोग किया जाता है।
हार्ट के अनुसार " नियोजन कार्यों की श्रृंखला का अग्रिम निर्धारण है जिसके द्वारा निश्चित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।"
गुन्नार मिर्डल के अनुसार " नियोजन किसी देश की सरकार द्वारा किए गए वे जागरूक प्रयास है जिनके द्वारा लोक नीतियों की अधिक तार्किक ढंग से समन्वित किया जाता है ताकि अधिक से अधिक तेजी से विकास के लक्ष्यों को पूरा किया जा सके।
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