har din kuch naya sikhe

हर दिन कुछ नया सीखें।

4/23/2021

पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ, प्रकार, कारण

By:   Last Updated: in: ,

पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ (paryavaran pradushan kya hai)

paryavaran pradushan arth prakar karan;पर्यावरण प्रदूषण दो शब्दों, पर्यावरण और प्रदूषण से मिलकर बना है। जैसा की हम पिछले लेख मे यह जान चुके है की पर्यावरण का तात्पर्य हमारे चारों  ओर आस-पास के वातावरण एवं परिवेश से होता है, जिसमे हम, आप और अन्य जीवधारी रहते है। 

'प्रदूषण' को स्पष्ट करते हुए कोलिन वाकर ने कहा है "प्रकृति के द्वारा प्रदत्त सामान्य वातावरण मे भौतिक, रासायनिक या जैविक कारको के कारण होने वाले परिवर्तन प्रदूषण है।" 

ओडम के अनुसार वातावरण के अथवा जीवमंडल के भौतिक, रासायनिक व जैविक गुणों के ऊपर जो हानिकारक प्रभाव पड़ता है, प्रदूषण कहलाता है। अन्य शब्दों मे हमारे पर्यावरण की प्राकृतिक संरचना एवं संतुलन मे उत्पन्न अवांछनीय परिवर्तन को प्रदूषण कह सकते है। 

प्रदूषण के प्रकार (paryavaran pradushan ke prakar)

पर्यावरण मे मिलने वाले हानिकारक पदार्थ, जो पर्यावरण को प्रदूषित बनाते है प्रदूषक कहलाते है तथा इस समस्या को प्रदूषण कहते है। प्रदूषण के निम्न प्रकार होते है--

1. वायू प्रदूषण 

जीवाश्य ईधन, कोयला, लकड़ी, खनिज तेल, पेट्रोल, कल-कारखानों तथा वाहनों का धुआं वायू प्रदूषण पैदा करते है। इनके कारण वायुमंडल मे जहरीली कार्बन डाईआक्साइड, सल्फर हाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सीसा इत्यादि की मात्रा बढ़ रही है। इससे भूमंडलीय तापमान मे वृद्धि हो रही है। सांस तथा गले की बीमारी, अम्लीय वर्षा, ओजोन परत मे कमी, जीव-जंतुओं की असमय मृत्यु होना वायु प्रदूषण के हानिकारक दुष्परिणाम है।

2. जल प्रदूषण 

कल-कारखानों का कूड़ा-कचरा तथा हानिकारक रसायन नही व जलाशयों मे फेंकने, शहर की गंदगी व सीवर नदियों मे बहाने, रासायनिक खाद तथा कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करने, मृत जीव-जंतुओं व मनुष्यों के शव अथवा उनके अवशेषों को नदियों मे फेंकने आदि कारणों से जल प्रदूषण होता है। प्रदूषित जल मनुष्यों मे पीलिया, पेचिश, टायफाइड, पेट के रोग, त्वचा के रोग पैदा करता है। इसके कारण नदियों व समुद्रों मे जीव-जंतुओं की ऑक्सीजन की कमी होने व जहरीला पानी होने के कारण मृत्यु हो जाती है। 

3. भूमि प्रदूषण 

रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करने शहरी गंदगी तथा कूड़ा-करकट को खुला फेंकने, कल-कारखानों का अपशिष्ट पदार्थ व रसायनों को भूमि पर फेंकने से भूमि प्रदूषण होता है। भूमि प्रदूषण के प्रभाव से मृदा उपजाऊ नही रह जाती है, कृषि का उत्पादन घट जाता है तथा फसल मे खनिज एवं पोषक तत्वों की मात्रा घट जाती है। 

4. रेडियोऐक्टिव प्रदूषण 

रेडियोऐक्टिव पदार्थों के प्रयोग से रेडियोऐक्टिव किरणों का विकिरण होता है। अणु, बम, परमाणु बम इत्यादि के विस्फोट से भी हानिकारक रेडियोऐक्टिव किरणें पैदा होती है जिनके कारण वातावरण प्रदूषित हो जाता है। रेडियोऐक्टिव किरणों के ज्यादा विकिरण से त्वचा रोग, कैंसर, गुणसूत्रों का दुष्प्रभाव, विकलांगता आदि प्रभाव पैदा हो जाते है।

5. ध्वनि प्रदूषण 

वाहनों, मशोनों, जनरेटरों, वाद्ययंत्रों इत्यादि के शोर से ध्वनि प्रदूषण होता है। ध्वनि प्रदूषण से बहरापन, पागलपन, चिड़चिड़ापन इत्यादि लक्षण पैदा हो जाते है। ज्यादा शोर के कारण गर्भ मे बच्चों मे विकलांगता आ जाती है। 

पर्यावरण प्रदूषण के कारण (paryavaran pradushan ke karan)

पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण इस तरह है--

1. जनसंख्या वृद्धि 

जनसंख्या मे वृद्धि पर्यावरण प्रदूषण का एक मुख्य कारण है, क्योंकि इससे प्रदूषक और प्रदूषण दोनो मे वृद्धि होती है। परिणामस्वरूप जहां एक ओर प्राकृतिक स्त्रोतों के त्वरित विदोहन से इनका तेजी से हास होता है, वही दूसरी ओर झील तथा नदियों मे औद्योगिक अपजल, जीवों द्वारा विघटित प्रदूषक तत्व जैसे-- घरों का कचरा एवं कूड़ा-रकट तथा लकड़ी एवं कोयले को ईंधन के रूप मे जलाने से उत्पन्न धुएं से वातावरण मे प्रदूषण फैलता है।

2. स्त्रोतों का अनियंत्रित दोहन 

जनसंख्या वृद्धि के तीव्र दबाव की वजह से स्त्रोतों जैसे-- भूमि, जल, वन, वायू, खनिज आदि का अनियंत्रित एवं विकृत उपयोग किए जाने से भी पर्यावरण प्रदूषण की समस्या भयावह रूप धारण कर रही है।

3. आर्थिक विकास 

जनसंख्या वृद्धि का सामना  करने हेतु अपनाया जाने वाला व्यापक आर्थिक विकास भी पर्यावरण प्रदूषण के लिए काफी हद तक उत्तरदायी है। खाद्यान्न के क्षेत्र मे जनाधिक्य के दबाव से उबरने के लिए कृत्रिम साधन अपनाने पड़ेते है तथा उत्पादन स्तर बढ़ाने हेतु उर्वरकों एवं कीटनाशकों का उपयोग करना पड़ता है जिसमे काफी मात्रा मे प्रदूषण उत्पन्न होकर अनेक प्रकार के संकट पैदा करता है।

4. परिवहन विस्तार 

औद्योगिकरण के कारण जल, थल एवं नभ तीनों ही मार्गों पर परिवहनों की संख्या मे उल्लेखनीय वृद्धि होती है इससे परिवहनों ने धुएं के द्वारा हमारे पर्यावरण को बहुत तेजी से प्रदूषित किया है। प्रदूषण का यह क्रम और भी तेजी से परिवहन साधनों की संख्या के साथ बढ़ रहा है वह यह हमारे पर्यावरण संकट का एक प्रमुख कारण है।

5. आधुनिक तकनीकों का प्रसार 

आधुनिक प्रौद्योगिकी ने अपनी प्रक्रियाओं से अनेक प्रकार की विषाक्त गैसों, धुओं एवं विषाक्त रसायन युक्त अपजलों के माध्यम से जल, थल एवं वायु सभी तत्वों को प्रदूषित कर दिया है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण उत्पन्न हो गया है। 

पर्यावरण प्रदूषण को रोकने हेतु सुझाव अथवा उपाय 

पर्यावरण प्रदूषण रोकने हेतु सुझाव निम्न प्रकार है--

1. प्राकृतिक स्त्रोतों के अनियमित दोहन पर रोक 

भूमि, जल, वन, वायु इत्यादि के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगनी चाहिए ताकि पर्यावरण बच सके।

2. जंगलो की कटाई पर रोक 

सरकार की आय का बहुत बड़ा भाग जंगल है। सरकार वनों को काटने हेतु ठेके देती है। ठेकेदार जंगलों को बेरहमी से काटते है। वनों के कटने से भूमि का क्षरण, अवर्षा की स्थिति उत्पन्न होती है। अतः जंगलों की कटाई पर रोक लगाना चाहिए।

3. उद्योग पर नियंत्रण 

तकनीक विकास के साथ-साथ उद्योगों की भी संख्या मे तीव्र वृद्धि हुई है ये उद्योग उत्पादन पर तो पर्याप्त ध्यान देते है, पर उद्योगों द्वारा फैलाए जाने वाले प्रदूषण की उपेक्षा करते है अतः योजनाओं के माध्यम से प्रदूषण को रोकना चाहिए।

4. जनसंख्या वृद्धि पर रोक 

वातावरण को प्रदूषित करने वाले प्रदूषकों पर तभी नियंत्रण हो सकता है जब सरकार जनसंख्या नीति के माध्यम से जनसंख्या पर रोक लगाए।

5. गंदी बस्तियों पर रोक लगाना चाहिए तथा उचित आवास की व्यवस्था होनी चाहिए।

6. परिवहनों द्वारा फैलाए जाने वाले धुंए से उत्पन्न वायु-प्रदूषण पर रोक लगाना।

7. वृक्षारोपण के लिए लोंगो मे जागरूकता उत्पन्न करना।

8. पर्यावरण प्रदूषण रोकने हेतु कई योजनाएं सरकार द्वारा चलाई जानी चाहिए।

शायद यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

कोई टिप्पणी नहीं:
Write comment

अपने विचार comment कर बताएं हम आपके comment का इंतजार कर रहें हैं।