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4/23/2021

पर्यावरण का अर्थ, प्रकृति, कार्यक्षेत्र

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पर्यावरण का अर्थ (paryavaran kise kahte hai)

paryavaran arth prikati paryavaran adhiniyam karya kshera;पर्यावरण दो शब्दों 'परि' एवं आवरण से मिलकर बना है। जिसमे 'परि' शब्द का अर्थ है चारो ओर से' तथा "आवरण' शब्द का अर्थ है 'घेरे या ढके हुए' से होता है। इस प्रकार हमारे चारो और के आवरण को ही पर्यावरण कहा जाता है। चारों ओर के आवरण के भीतर जो कुछ भी सम्मिलित है, पर्यावरण के अंतर्गत ही आता है। जिन विषयों की सहायता से इस 'आवरण' के अध्ययन का प्रयत्न संभव हो सकता है, वे सभी पर्यावरण विज्ञान के अंतर्गत आते है।

पर्यावरण एक व्यापक शब्द है। पर्यावरण का से आशय समूचे भौतिक एवं जैविक विश्व से है जिसमे जीवधारी रहते है, बढ़ते है, पनपते है और अपनी स्वाभाविक प्रकृतियों का विकास करते है। 

पर्यावरण का नाम आते है हमारे मन मे इस भूपटल के बृहद् पक्षों-- जल, मृदा, मरूस्थल, पहाड़, आदि की कल्पना आ जाती है। पर्यावरण के इन प्रकारो की और भी अधिक सटीक अभिव्यक्ति, भौतिक प्रभावों- नमी, ताप,पदार्थों के गठन इत्यादि की विभिन्नताओं तथा जैविक प्रभावो के रूप मे की जा सकती है। मृदा तथा चट्टानों के समान ही दूसरे जीव भी पर्यावरण के ही अंग है। इस प्रकार प्रकृति मे जो कुछ भी हमे परिलक्षित होता है, वायु, जल, मृदा, पादप तथा जीवधारी सभी सम्मिलित रूप से पर्यावरण की रचना करते है।

बड़ी ही दुःख की बात है की आज मनुष्य के प्रभाव से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। प्रदूषण सिर्फ वायु, जल, भूमि आदि को ही प्रभावित नही करता है वरन् जैवमंडल के जीवों पर भी प्रभाव डालता है। पर्यावरण मे बड़ी मात्रा मे मिलने वाले हानिकारक पदार्थ पर्यावरणीय परितंत्र को प्रदूषित कर रहे हैं। इसके कारण पर्यावरण दिनों-दिन जहरीला तथा हानिप्रद होता जा रहा है।

पर्यावरण की बहुआयामी प्रकृति 

वर्तमान समय मे पर्यावरण का अध्ययन विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के सभी विषयों मे किया जाता है। अतः पर्यावरण की प्रकृति बहुआयामी मानी जाती है। शुरू मे पर्यावरण का अध्ययन प्राकृतिक विज्ञान के विषयों तक सीमित था, लेकिन बीसवीं शताब्दी मे मानव-पर्यावरण के बदलते संबंधों के कारण पर्यावरण संबंधी मुद्दों की संख्या मे तेजी से वृद्धि हुई है। इसी कारण वर्तमान मे पर्यावरण के विभिन्न पक्षों का अध्ययन विभिन्न विषयों मे अपने-अपने दृष्टिकोण से किया जाता है। जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, भूगोल, समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, इतिहास, भौतिक विज्ञान, विधि, अर्थशास्त्र तथा अभियान्त्रिकी जैसे विषयों मे भी पर्यावरण के अध्ययन को शामिल किया गया।

इसे संक्षिप्त मे निन्म बिन्दुओं द्वारा समझा जा सकता है--

1. पर्यावरण एवं सामाजिक विज्ञान 

भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, लोक प्रशासन आदि सामाजिक विज्ञानों मे पर्यावरण के विभिन्न पक्षों का अध्ययन किया जाता है। जनसंख्या वृद्धि मानव के आर्थिक क्रियाकलाप, अर्थव्यवस्था का स्वरूप, नगरीकरण, औद्योगिकरण, सामाजिक मूल्य, समाज की पर्यावरणीय अभिरूचि, जागरूकता, अंतर्राष्ट्रीय संगठन, समझौते इत्यादि पक्षों का अध्ययन पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इन पक्षों का उभयनिष्ठ अध्ययन सामाजिक विज्ञानों व पर्यावरण अध्ययन मे निकट संबंध दर्शात है। 

2. पर्यावरण एवं भौतिक विज्ञान 

पर्यावरण के भौतिकया अजैविक घटको मे जल, स्थल, मृदा, वायु, ऊर्जा सम्मिलित है। ये भौतिक घटक समस्त जीवों के जीवन का आधार है। जो समूचे जीव-जगत तथा उसके वातावरण को प्रभावित करते है।

3. पर्यावरण एवं जीव विज्ञान 

जीव विज्ञान के अंतर्गत समस्त जीव-जन्तुओं का अध्ययन पर्यावरण के संदर्भ मे किया जाता है। परिस्थितिकी विज्ञान के तहत् जीव-जन्तु तथा उनके आसपास के वातावरण का अध्ययन किया जाता है। अतः हम कह सकते है कि जीव विज्ञान तथा पर्यावरण अध्ययन मे पारस्परिक संबंध है।

4. पर्यावरण एवं प्रबंधन

पर्यावरण प्रबंधन पर्यावरण अध्ययन का महत्वपूर्ण पक्ष है। मनुष्य की तत्कालिक आवश्यकताओं के साथ भावी पीढ़ी की जरूरतों का आकलन करते हुये संसाधनों के दोहन की व्यूह-रचना बनाना, पर्यावरण की गुणवत्ता का पुनर्स्थापन, आर्थिक विकास एवं पारिस्थितिकी संतुलन आदि लक्ष्य दीर्घकालीन योजना व कुशल प्रबंधन से ही आर्जित किये जा सकते है। नीति-निर्माण, क्रियान्वयन, विभिन्न स्तरों पर समन्वय जैसे पक्षों की पर्यावरण संरक्षण मे महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

5. पर्यावरण एवं विधि 

विधि की सहायता से ही पर्यावरण संरक्षण हेतु अधिक कारगर उपाय संभव हो सके है। अतः स्वाभाविक है कि पर्यावरण व विधि विषय का परस्पर घनिष्ठ संबंध है।

पर्यावरण अध्ययन का कार्यक्षेत्र 

पर्यावरण अध्ययन के कार्यक्षेत्र मे आठ तथ्यों के अध्ययन को शामिल किया जाता है--

1. पर्यावरण के प्राकृतिक संसाधन एवं उनसे संबंधित समस्यायें तथा संरक्षण 

वन संसाधन, जल, संसाधन, खनिज संसाधन, खाद्य संसाधन, ऊर्जा संसाधन, एवं भूमि संसाधन। 

2. विश्व के प्रमुख पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना एवं कार्यप्रणाली।

3. विश्व की जैव विविधता एवं इसका संरक्षण।

4. पर्यावरण प्रदूषण कारण, प्रभाव एवं नियंत्रण 

वायु प्रदूषण, तापीय, प्रदूषण।

5. ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन एवं प्राकृतिक आपदा प्रबन्धन।

6. मानव-पर्यावरण संबंध।

7. पर्यावरण संबंधी सामाजिक मुद्दे।

8. पर्यावरण संबंधी कानून एवं नीतियाँ।

भूगोलवेत्ता पर्यावरण के अध्ययन मे निम्न तथ्यों के अध्ययन को शामिल करते है--

(अ) पर्यावरण की मूलभूत संकल्पनाएँ। 

(ब) मावन तथा पर्यावरण संबंध।

(स) पारिस्थितिकी तंत्र।

(द) पर्यावरण अवनयन तथा प्रदूषण।

(ई) पर्यावरण संरक्षण एवं प्रबंधन।

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