11/30/2019

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधान एवं विशेषताएं

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भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947

माउण्टबेटन योजनानुसार भारत का विभाजन 14-15 अगस्त, 1947 को पाकिस्तान और भारत दो प्रभुसत्ता संपन्न निकायों मे हो गया। 15 अगस्त 1947 तक अधिकांश भारतीय रियासतों के प्रतिनिधि इसमे शामिल हो गए।
इस प्रकार संविधान सभा भारत मे सभी रियासतों एवं प्रांतों की प्रतिनिधि तथा बाहरी शक्ति के आधिपत्य से मुक्त पूर्ण प्रभुत्व संपन्न निकाय बन गई। भारतीय संवैधानिक विकास के क्रम में अनेक विधेयक ब्रिटिश संसद ने पारित किए लेकिन सन् 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ब्रिटिश संसद द्वारा भारत के लिए अंतिम किन्तु सबसे अत्यधिक महत्वपूर्ण अधिनियम था। आज के इस लेख मे हम भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधानों (धाराएं) एवं विशेषताओं के बारें मे जाननें वाले हैं।

एटली द्वारा भारत को स्वतंत्रता प्रदान करने की घोषणा पर अमल करते हुये भारतीय स्वाधीनता अधिनियम 1947 बनाया गया। 4 जुलाई 1947 को संसद मे विधेयक रखा गया एवं 18 जुलाई 1947 को यह विधेयक पारित कर दिया गया।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधान
इस अधिनियम के पारित होने पर नार्मन डी. पामर ने लिखा " ब्रिटिश संसद के इतिहास में शायद ही कोई इतना महत्वपूर्ण विधेयक इतने कम समय व इतने कम वाद-विवाद के बाद पास हुआ होगा। भारत को स्वतंत्रता देने हेतु इस विधेयक का आधार माउंट बेटन तथा इस चली लंबी चर्चाएं थी।


भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधान (धाराएं) एवं विशेषताएं 

1. इस अधिनियम द्वारा भारत दो अधिराज्यों भारत तथा पाकिस्तान मे 15 अगस्त 1947 को विभाजित हो जाएंगा। इन दोनों राज्यों को ब्रिटिश सरकार सत्ता सौंप देगी।
2. नवीन संविधान बनने तक सन् 1945 का अधिनियम प्रभावी रहेगा।
3. जब तक नया संविधान दोनों अधिराज्यों के लिए न बन जाए, तब तक दोनों अधिराज्यों की संविधान सभाओं को अपने-अपने अधिराज्य के लिए कानून बनाने की अज्ञा दे दी गई।
4. ब्रिटिश सरकार का दोनों अधिराज्यों पर 15 अगस्त 1947 के बाद कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। ब्रिटिश क्राउन का भारतीय रियासतों पर से प्रभुत्व समाप्त हो गया।
5. 15 अगस्त सन् 1947 के बाद सभी संधियाँ व समझौते समाप्त माने जायेंगे।

6. भारत तथा पाकिस्तान दोनों को ब्रिटिश राष्ट्रमंडल की सदस्यता अपनी इच्छानुसार रखने अथवा छोड़ने का अधिकार दिया गया।
7. इस अधिनियम से भारत का सम्राट नामक पद हटा दिया गया। इंग्लैंड के सम्राट की अधिराज्यों के कानूनों पर निषेधाधिकार लगाने की शक्ति को समाप्त कर दिया गया।
8. ब्रिटिश सरकार की देशी रियासतों के ऊपर से सर्वोच्चता को हटा दिया गया। इसके साथ ही भारतीय रियासतों को भारत अथवा पाकिस्तान किसी भी राष्ट्र मे सम्मिलित होने का अधिकार दिया गया।
भारतीय स्वाधीनता अधिनियम द्वारा भारत ने 200 वर्ष से चल रहा ब्रिटिश शासन से मुक्ति प्राप्त करी। ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम  1947 को भारत के लिए अब तक पारित सभी विधायकों मे 'महान एवं उत्तम' कहा। 15 अगस्त सन् 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। तो दोस्तों यह थे भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधान। भारतीयस्वतंत्रता अधिनियम 1947 की धाराओंसे सम्बंधित आपका कोई सवाल हैं तो नीचे comment कर जरूर पहुँचे।

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