10/27/2019

अगस्त काम्टे का जीवन परिचय

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फ्रान्स के प्रतिभाशाली अगस्त काॅम्टे को समाजशास्त्र का पिता कहा जाता हैं। ऑगस्त काॅम्टे के पूर्व अनेक ऐसे विचारक हुए थे जिन्होंने समाज सुधार की योजना का स्वप्नलोक देखा था लेकिन उन्होंने ऐसी योजना बनाई थी जो धरती पर कम और आकाश पर अधिक लागू होती है। काॅम्टे ने समाजशास्त्र  को एक व्यवस्थित विज्ञान के रूप में प्रतिपादित किया हैं।
ऑगस्त काॅम्टे  मानसिक दृष्टि से अत्यन्त ही परिश्रम करते थे। उनकी मृत्यु 5 सितम्बर 1857 को हो गई थी लेकिन उनका मानसिक शरीर और उनके विचार आज भी जीवत है और शदियों तक जीवित रहेगी।

अगस्त काम्टे का जीवन परिचय

काॅम्टे का जन्म 19 जनवरी 1798 ई. मे हुआ था। उनक जन्म मौन्टपीलियर नामक स्थान में पर हुआ था। काॅम्टे के माता-पिता कैथोलिक धर्म के कट्टर समर्थक थे। काॅम्टे बचपन से ही विभिन्न विलक्षणताओं से परिपूर्ण थे। काॅम्टे प्राचीन सत्ता और परम्पराओं के विरोधी थे। काॅम्टे के विचार अपने पिता के विचारों से मेल नही खाते थे। काॅम्टे की गणित मे रूचि थी।  उनका अध्ययन योजना के अनुसार होता था  जैसे कब और कितना और कितने समय तक पढ़ना हैं। उनमे बचपन से ही कुशल नेतृत्व की क्षमता थी। वह विधार्थी जीवन मे मेधावी छात्र हुआ करते थे। 1818 ई. मे सन्त साइमन के सम्पर्क में आये थे जिसका उन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा।
ऑगस्त काॅम्टे जीवन परिचय
लेकिन वह 6  बर्ष तक ही उनके साथ रहे काॅम्टे ने अपने विचारक साइमन पर यह आरोप लगाया की वह ढ़ोगी और पाखण्डी हैं। काॅम्टे का कहना था की वह उनके विचारो का शोषण कर अपने नाम से स्वंय उनका प्रयोग करता था। इस कारण दोनो के सम्बन्ध आपस मे समाप्त हो गए। काॅम्टे का विवाह 1825 मे कोरोलिन मेसिन से हुआ लेकिन दोनो के मध्य गहन मत-भेद होने के कारण 17 बर्ष बाद सन् 1842 मे विवाह-विच्छेद भी हो गया। ऑगस्त काॅम्टे के आर्थिक स्थिति बिल्कुल भी ठीक नही थी उनके पास आजीविका का कोई भी साधन नही था। काॅम्टे के जीवन मे ऐसे भी अनेक दिन आए जब उन्हे भोजन तक नही मिला। वह अपनी परेशानियों के चलते अपना मानसिक सन्तुलन तक खो बैठे थे। जिसके चलते उन्हें एक बार पानी में डूबकर आत्हत्या करने का तक प्रयास किया था। आगे चलकर सन् 1830 मे उनकी पुस्तक 'पाॅजिटिव फिलासफी' का पहला भाग प्रकाशिक हुआ इस पुस्तक मे छः भाग है जिसका अन्तिम भाग 1942 मे प्रकाशिक किया गया था। इस पुस्तक के प्रकाशित होने से उनकी ख्याति चारो ओर फैलने लगी। इस पुस्तक  के कारण उन्हे पालिटेक्निक स्कूल मे विधार्थियों के निरीक्षण का पद प्राप्त हो गया था। इस प्रकार अब उनकी आर्थिक स्थित मे थोड़ा  सुधार आ गया था। काॅम्टे अपनी पुस्तकों की राॅयल्टी नही लिया करते थे उनका मामना था कि लेखन के बदले पैसा लेना उचित नही हैं।

काॅम्टे जितने अच्छे और महान दार्शनिक थे उतने ही वह भावुक भी थें। काॅम्टे  ने जीवन भर संघर्ष किया और आर्थिक कठिनाइयों से हमेशा जूझते रहें। उनके अपने विवाहिक जीवन मे कोई भी सुख नही मिला। वह हमेशा आर्थिक तंगी से भी जूझते रहे वह निन्तर साम्यवाद और परम्परात्मक धर्म का विरोध भी करते रहें। उनका पूरा जीवन दुःखो और यातनाओं से भरा हुआ बिता अन्त मे उन्हे कैंसर ने भी घेर लिया जिसके कारण केवल 59 वर्ष की आयु मे ही 1857 को उनकी मृत्यु हो गई।
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