1/06/2022

तुलनात्मक राजनीति की अवधारणा, परिभाषा, प्रकृति

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तुलनात्मक राजनीतिक की अवधारणा 

tulnatmak rajniti ka arth paribhasha prakrit;तुलनात्मक राजनीतिक की नींव अरस्तु ने ही डाल दी थी, किन्तु अनेक शताब्दियों तक वह उपेक्षित पड़ी रही। उसका पुनरूद्धार कहीं अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दियों में जाकर हुआ। 

सिसरो, पोलिबियस, मैकियावली, मान्टेस्क्यू, डी. टाकविले, बेजहाट, सर हेनरी मेन तथा ब्राइस इत्यादि अनेक राजनीतिक दार्शनिकों एवं राजनीतिशास्त्रियों ने अपने अध्ययन में इस पद्धित का प्रयोग किया हैं। तुलनात्मक राजनीति में अध्ययनकर्ता विभिन्न राज्यों, अनेक संगठनों, उनकी नीतियों एवं कार्यकलापों का तुलनात्मक अध्ययन करता हैं तथा इस प्रकार की तुरनाओं के आधार पर राजनीति निष्कर्ष निकालने का प्रयास करता हैं। 

वर्तमान युग विज्ञान का युग हैं। अतः राजनीति विज्ञान का अध्ययन भी वर्तमान में वैज्ञानिक पद्धित द्वारा किया जाने लगा हैं। अतः राजनीति में तुलनात्मक अध्ययन का महत्व बढ़ता जा रहा हैं। आर. सी. मैक्रडीज का कहना हैं," तुलनात्मक राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन अब नाम से ही तुलनात्मक रहा हैं। अब यह केवल विदेशी सरकारों, उनके ढाँचे तथा औपचारिक संगठन का ऐतिहासिक, वर्णानात्मक और वैधानिक ढंग से अध्ययन रहा हैं, जबकि इसे तुलनात्मक राजनीति के सिद्धांतों, ढाँचों और वास्तविक व्यवहार से भी अपना संबंध जोड़ना चाहिए।" 

द्वितीय विश्व युद्ध से पहले तुलनात्मक पद्धित का प्रयोग राजनीतिशास्त्रियों द्वारा अतीत व प्रचलित राजनीतिक व्यवस्थाओं की तुलना करके एक 'आदर्श' अथवा राजनीतिक इतिहास की प्रगतिशील शक्तियों की खोज करने तक ही सीमित रहा था। किन्तु वर्तमान में तुलनात्मक पद्धित किसी राजनीतिक व्यवस्था को किसी अन्य राजनीतिक व्यवस्था से यांत्रिकी तुलना मात्र नहीं मानी जाती हैं। अब इसका प्रयोग सृजनात्मक प्रक्रिया के रूप में इस प्रकार से होता हैं जिससे तुलनाएँ अधिक अर्थपूर्ण बनाई जा सकें। 

जी. केरोबर्ट के शब्दों मे," अब राजनीति का यह तुलनात्मक अध्ययन केवल संरचनात्मक तुलनाओं तक ही सीमित नही रहा हैं, बल्कि इसके अंतर्गत कबीलों, समुदायों, संघो, समूहों और गैर राज्यीय इकाइयों का व्यवहारत्मक अध्ययन भी होने लगा हैं। यही कारण हैं कि आज तुलनात्मक राजनीति को या तो 'सब कुछ या कुछ नहीं, कहा जाने लगा हैं।" 

तुलनात्मक राजनीति की परिभाषा 

एडवर्ड ए. फ्रीमैन के अनुसार," तुलनात्मक राजनीति का अभिप्राय राजनीतिक संस्थाओं एवं सरकारों के विविध प्रकारों का एक तुलनात्मक विवेचन और विश्लेषण हैं। विभिन्न राष्ट्रों में समयान्तर के साथ राजनीतिक संस्थाओं में जो सादृश्य दिखाई देता हैं उसका अध्ययन भी तुलनात्मक राजनीति के अंतर्गत किया जाना चाहिए। विभिन्न राजनीतिक संस्थाओं में जो समान तत्व उपलब्ध होते हैं उनका विषयगत विवेचन भी तुलनात्मक राजनीति की अध्ययन परिधि में आना चाहिए।" 

राय सी. मैक्रीडिस के अनुसार," हैरोडोट्स तथा अरस्तु के समय से ही राजनीतिक मूल्यों, विश्वासों, संस्थाओं, सरकारों और राजनीतिक व्यवस्थाओं में विविधताएँ जीवन्त रही हैं और इन विविधताओं में समान तत्वों की खोज-बीन करने का जो पद्धितीय प्रयास हुआ हैं, उसे तुलनात्मक राजनीतिक विश्लेषण कहा जाना चाहिए।" 

ब्रेवण्टी का मत हैं कि," तुलनात्मक राजनीति सामाजिक व्यवस्था में उन तत्वो की पहचान तथा व्याख्या है जो कार्यों व उनके संस्थागत प्रकाशन को प्रभावित करते हैं।" 

अरेण्ड लिडफार्ड के शब्दों में," तुलनात्मक पद्धित अन्य सभी परिवत्यों को स्थिर रखते हुए दो या अधिक परिवत्यों के बीच सामान्य आनुभविक संबंध स्थापित करने की विधि हैं।" 

लासवैल के अनुसार," तुलनात्मक पद्धित वैज्ञानिक पद्धित की तरह ही सामान्य नियमों की खोज के लक्ष्य की प्राप्ति की विधि हैं।"

तुलनात्मक पद्धित किसी राजनीतिक व्यवस्था, संस्था, प्रक्रिया व राजनीतिक व्यवहार से संबंधित दो या अधिक परिवत्यों में परस्पर आनुभाविक संबंध स्थापित करने की एक ऐसी विधि हैं, जिसमें तुलना से संबंधित अन्य सभी प्रत्ययों को स्थिर रखा जाता है। यथा किसी निर्वाचन क्षेत्र में जाति एवं मतदान व्यवहार का संबंध मालूम करने के लिए अन्य निर्वाचन क्षेत्रों से मतदान व्यवहार की तुलना भी की जाएगी। यहाँ जाति के अतिरिक्त शेष सभी परिवर्त्य स्थिर माने जायेंगे। उदाहरणार्थ, सभी निर्वाचन क्षेत्र ग्रामीण होगें, सभी का शैक्षणिक स्तर समान होगा। इसी प्रकार शिक्षा, धर्म, भाषा आदि परिवर्त्यों का मत-व्यवहार से संबंध स्थापित किया जा सकता हैं और परस्पर अनेक निर्वाचन क्षेत्रों में इन संबंधों की तुलना करके मत-व्यवहार के संबंध में सामान्यीकरणों तक पहुँचा जा सकता हैं।

तुलनात्मक राजनीतिक और तुलनात्मक सरकार

'तुलनात्मक राजनीति' शब्दावली का अच्छा स्पष्टीकरण तब हो सकता हैं जब हम 'तुलनात्मक राजनीति' और 'तुलनात्मक सरकार' शब्दावलियों के बीच के तर्क-सम्मत अंतर को समभ्त लें। प्रायः 'तुलनात्मक राजनीति' (Comparative) Politics) तथा 'तुलनात्मक सरकार' (Comparative Government) शब्दों का प्रयोग परस्पर एक दूसरे के लिए किया जाता हैं जबकि दोनों 'एक' नहीं हैं। 

जी. के. राॅबर्ट्स ने स्पष्ट किया हैं कि 'तुलनात्मक शासन' का प्रयोग राज्यों उनकी संस्थाओं और उनके कार्यों के सम्बद्ध कुछ समूहों (राजनीतिक दल, दबाव समूह आदि) के अध्ययन हेतु उपयुक्त लगता हैं जबकि 'तुलनात्मक राजनीति' शब्दावली एक अधिक व्यापक परिप्रेक्ष्य के लिए हुए हैं जिसमें तुलनात्मक शासन तथा गैर-राज्यीय राजनीति (कबीले, निजी संस्थाएँ आदि) का भी समावेश किया जाता हैं। राबर्ट्स महोदय का आशय यह है कि राजनीति का तुलनात्मक अध्ययन केवल संरचनात्मक तुलनाओं तक ही सीमित नहीं रहा हैं बल्कि इसके अंतर्गत कबीलों, समुदायों, संघो, समूहों जैसी गैर-राज्यीय इकाइयों का व्यवहारत्मक अध्ययन भी होने लगा हैं। जीन ब्लोण्डेल ने राबर्ट्स के मंतव्य से सहमत होते हुए लिखा हैं," तुलनात्मक सरकार समकालीन विश्व मे राष्ट्रीय सरकारों के प्रतिमानों का अध्ययन हैं।" 

उपर्युक्त परिभाषाओं से यह स्पष्ट हैं कि जहाँ तुलनात्मक सरकार के अंतर्गत विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं, उनकी संस्थाओं और कार्यों का तुलनात्मक अध्ययन होता हैं, वहाँ तुलनात्मक राजनीति के अंतर्गत उपरोक्त बातों के साथ ही दूसरे उन सभी विषयों का भी अध्ययन होता हैं, जिन्हें गैर-राज्यीय राजनीति के अध्ययन की संज्ञा दे सकते हैं। 

यद्यपि वर्तमान मे राजनीतिक दलों और दबाव समूहों का अध्ययन भी 'तुलनात्मक सरकारों' में सम्मिलित किया जाने लगा हैं तथापि विशेष बल आज भी शासन-संस्थाओं के तुलनात्मक विश्लेषण पर ही दिया जाता है, अर्थात् तुलनात्मक सरकार या शासन के संपूर्ण राजनीतिक व्यवहार का अध्ययन नही किया जाता। राजनीतिक व्यवहार के अनेक पहलुओं और अनेक गैर-सरकारी संस्थाओं, जिनसे सरकारों का व्यवहार ढलता और बदलता रहता है के अध्ययन को 'तुलनात्मक सरकार' मे शामिल नही किया जाता। इसके विपरीत 'तुलनात्मक राजनीति' अपने अध्ययन में राजनीतिक व्यवहार की सम्पूर्णता को समेटे हुए हैं जिसमें सरकारों तथा शासकीय संस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन स्वतः ही सम्मिलित रहता हैं।

इस प्रकार, तुलनात्मक राजनीति का अर्थ एवं क्षेत्र तुलनात्मक सरकार के अर्थ एवं क्षेत्र से अधिक व्यापक हैं, बावजूद इसके कि तुलनात्मक अन्वेषण या खोज-बीन दोनों ही अध्ययनों का महत्वपूर्ण अंग हैं। तुलनात्मक राजनीतिक के छात्र का कार्य कानून-निर्माण, कानून-प्रयोग और विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं के अंगों से संबंधित निर्णयों, यहाँ तक कि राजनीतिक दलों और दबाव-समूहों जैसे कुछ संविधानेत्तर अभिकरणों के अध्ययन से ही समाप्त नही हो जाता। तुलनात्मक राजनीति के छात्र को इन सबके अध्ययन से भी आगे बढ़ना होता हैं। उसे उन विषयों का भी अध्ययन एक विशिष्ट तरीके से करना होता हैं जो अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और मानवशास्त्र के क्षेत्र में आते हैं।

तुलनात्मक राजनीति की प्रकृति (tulnatmak rajniti ki prakriti) 

तुलनात्मक राजनीतिक की प्रकृति निश्चित रूप से वैज्ञानिक हैं। इसके संबंध में वुड का मत हैं कि," इस क्षेत्र के नामकरण में तुलनात्मक शब्द लाने का एकमात्र कारण यह था कि इस बात पर बल दिया जाये कि क्षेत्र की राजनीति विज्ञान के प्रति जो जिम्मेदारी हैं उसके अनुसार विश्व में विद्यमान राजनीतिक व्यवस्थाओं का राजनीति विज्ञान के सिद्धांत निर्माण और सिद्धांत की सामान्य खोज में तुलना के लिये इकाइयों के तौर पर स्वीकार किये जायें मोटे तौर पर प्रकृति के संबंध में दो दृष्टिकोण पाये जाते हैं।"

प्रायः तुलनात्मक राजनीति के प्रकृति संबंधी विचारों को दो प्रमुख धारणाओं में विभक्त किया जा सकता हैं-- 

1. तुलनात्मक राजनीति लम्बात्मक तुलना हैं 

इस विचारधार के अनुसार तुलनात्मक राजनीति एक ही देश मे स्थित विभिन्न स्तरों पर स्थापित सरकारों व उनको प्रभावित करने वाले राजनीतिक व्यवहारों का तुलनात्मक विश्लेषण और अध्ययन हैं। प्रत्येक राज्य में कई स्तरों पर सरकारें होती हैं। उन्होंने इन सरकारों को दो प्रकार का बताया हैं-- 

(अ) सर्वव्यापक या सार्वजनिक या राष्ट्रीय सरकार। 

(ब) आंशिक, स्थानीय या व्यक्तिगत सरकार। 

इस विचारधारा के अनुसार तुलनात्मक राजनीति का संबंध इस प्रकार की, एक ही देश में स्थित विभिन्न सरकारों- सर्वव्यापक व आंशिक की आपस में तुलना से हैं। यद्यपि एक ही देश मे सर्वव्यापक या राष्ट्रीय सरकार तो एक ही होती हैं परन्तु आंशिक सरकारें अनेकों होती हैं और इसलिए इनसे संबंधित राजनीतिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं की तुलना करके निश्चित निष्कर्ष निकालना संभव हैं। जैसे यदि एकात्म राज्य है तो उसमें एक राष्ट्रीय सरकार और कई स्थानीय सरकारें या निगम होंगे। एक ही राज्य में विभिन्न स्तरों की विविध सरकारों की तुलना करना 'लम्बात्मक तुलना' कहलाता हैं और तुलनात्मक राजनीति इन्हीं की पारस्परिक तुलना करने से सम्बद्ध शास्त्र हैं।

तुलनात्मक राजनीति की उपरोक्त परिभाषा उपयुक्त नहीं हैं। इस परिभाषा का आधार ही तर्क संगत नहीं हैं। क्योंकि राष्ट्रीय सरकार एवं आंशिक सरकारों के बीच दृष्टिकोचर होने वाली समानता सत्य नहीं हैं। इन समानताओं की गहराई में असमानतायें ही अधिक दिखाई देंगी और ऊपर से केवल मात्रा का अंतर दिखाई देगा जो कि वास्तव में एक प्रकार का अंतर भी प्रतीत होगा। 

2. तुलनात्मक राजनीति अम्बरान्तीय तुलना हैं 

इस धारणा के अनुसार यह राष्ट्रीय सरकारों का अम्बरान्तीय तुलनात्मक अध्ययन हैं। आधुनिक राजनीति-शास्त्रियों में से अधिकांशतः इस धारणा से सहमत हैं क्योंकि तुलनात्मक राजनीति के उद्देश्य की पूर्ति इसी प्रकार की तुलना से होती हैं। ऐसी तुलना का महत्व भी रहता हैं। 

तुलनात्मक राजनीति की इस धारणा की दो सम्भावनायें निम्न प्रकार हैं-- 

(अ) एक देश की राष्ट्रीय सरकारों की ऐतिहासिक तुलना 

एक ही देश में विद्यमान राष्ट्रीय सरकारों की ऐतिहासिक तुलना, तुलनात्मक राजनीति में होनी चाहिए। इससे तुलनात्मक राजनीति के विचार का क्षितिज विस्तृत होता हैं। प्रत्येक राज्य की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था की लम्बी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि होती हैं। आज की राजनीतिक संस्थाओं, प्रक्रियाओं और राजनीतिक व्यवहारों का तुलनात्मक विश्लेषण भूतकाल के संदर्भ में ही संभव हैं। एक ही देश में विभिन्न राष्ट्रीय सरकारों का तुलनात्मक अध्ययन आवश्यक भी हैं, क्योंकि इसी से वर्तमान राजनीतिक व्यवहार की प्रकृति को समझा जा सकता हैं। 

इस प्रकार तुलनात्मक राजनीति में इतिहास के संदर्भ में राष्ट्रीय सरकारों की समस्तरीय तुलना की जाती हैं। ऐसी तुलना का अत्यधिक महत्व हैं परन्तु तुलनात्मक राजनीति में यही पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि इससे केवल एक राज्य की राष्ट्रीय सरकारों को विभिन्न कालों में समझने में ही सहायता प्राप्त होती हैं। उस राष्ट्र में भिन्न प्रकार की संस्कृति, सभ्यता व संगठन वाले राज्य की सरकार की प्रकृति व राजनीतिक व्यवहार की गत्यात्मकताओं के स्थान पर केवल संस्थात्मक सतह तक ही संभव होती हैं। 

(ब) समकालीन विश्व में व्याप्त राष्ट्रीय सरकारों की अम्बरान्तीय तुलना 

इसका समर्थन करते हुए जीन ब्लोण्डले ने लिखा हैं," हमारे पास तुलनात्मक सरकारों के अध्ययन का केवल एक ही दृष्टिकोण शेष बचता हैं और वह हैं समकालीन विश्व की राजनीतिक व्यवस्थाओं से सम्बद्ध राष्ट्रीय सरकारों का राष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार अध्ययन करना।" 

इस प्रकार की तुलना से सामान्यीकरण के अतिरिक्त राजनीतिक व्यवहार के संबंध में ऐसे सिद्धांतों का प्रतिपादन भी किया जा सकता हैं, जिनसे प्रत्येक देश की राजनीतिक व्यवस्था को समझा जा सके। इनसे हर विचित्र घटना का स्पष्टीकरण किया जा सकता हैं तथा राजनीतिक संस्थाओं और व्यवस्थाओं की प्रकृति और कार्य विधि को ज्ञात करना संभव हैं।

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