1/29/2022

राजनीतिक संस्कृति क्या है? परिभाषा, आधार, प्रकार

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प्रश्न; राजनीतिक संस्कृति की परिभाषा दीजिए। यह राजनीतिक व्यवस्था को कैसे प्रभावित करती हैं? 

अथवा" राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा की विवेचना कीजिए एवं राजनीतिक समाजशास्त्र में इसकी उपयोगिता की व्याख्या कीजिए।

अथवा" राजनीतिक संस्कृति से आप क्या समझते हैं? तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन में इस अवधारणा का परीक्षण कीजिए। 

अथवा" राजनीतिक संस्कृति का अर्थ समझाइए। राजनीतिक संस्कृति के लक्षणों तथा आधारों की विवेचना कीजिए। 

अथवा" राजनीतिक संस्कृति को परिभाषित कीजिए। राजनीतिक संस्कृति के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए। 

अथवा" राजनीतिक संस्कृति को परिभाषित करते हुए तुलनात्मक राजनीतिक अध्ययन में इसके महत्व को प्रतिपादित कीजिए। 

अथवा" राजनीतिक संस्कृति क्या है? इस पर एक संक्षिप्त निबंध लिखिये। 

अथवा" राजनीतिक संस्कृति के निर्धारक तत्व बताइए।

अथवा" राजनीतिक संस्कृति से आप क्या समझते हैं? इसकी संक्षिप्त विवेचना कीजिए।

अथवा" राजनीतिक संस्कृति को विस्तार से समझाइए। 

उत्तर-- 

राजनीतिक संस्कृति की धारणा ने राजनीतिक विचार को एक नया रंग-रूप प्रदान किया हैं। संस्कृति में व्यक्ति के व्यवहार के तरीके, उसकी मान्यताओं, विश्वासों, सम्मान, स्वामिभक्ति, घृणा, कर्तव्य, अंतरात्मा, भौतिक उन्नति आदि को सन्निहित किया जाता हैं। ये सभी बातें राजनीतिक क्षेत्र मे भी अपना महत्व रखती हैं और सामाजिक, आर्थिक एवं अन्य क्षेत्रों में भी। जब संस्कृति राजनीतिक प्रसंग में प्रयुक्त होती है तो उसे राजनीतिक संस्कृति की संज्ञा दी जाती हैं। तथापि किसी भी संस्कृति के अस्तित्व का आभास संपूर्ण संस्कृति के सहारे ही किया जा सकता है और किसी एक राजनीतिक व्यवस्था की संस्कृति को तुलनात्मक रूप से समझने के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं की राजनीतिक संस्कृतियों को समझना होता हैं। राजनीति और संस्कृति का संबंध बड़ा गहरा होता हैं क्योंकि सांस्कृतिक व्यवहार में जो स्थायित्व पाया जाता है वह उसके राजनीतिक व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभाव की सम्भावनाओं को बढ़ा देता हैं। सांस्कृतिक व्यवहार के रूपों को वातावरण के अनुसार समूह या समाज के लोग अपनाते हैं। 

राजनीतिक संस्कृति का अर्थ (raajnitik sanskrit kya hai)

राजनीतिक संस्कृति का विचार एक नूतन विचार हैं। 'राजनीतिक संस्कृति' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम ग्रेबियल आमण्ड ने किया। पिछले तीन-चार दशकों से विश्व में राजनीति को समझने के लिए नवीन प्रयास किए जा रहे हैं। परिणामस्वरूप राजनीति विज्ञान में कुछ नवीन मान्यताओं तथा अवधारणाओं का विकास हुआ हैं। राजनीतिक संस्कृति का विचार भी इसी प्रक्रिया का परिणाम हैं। 

जिस प्रकार प्रत्येक देश की अपनी संस्कृति होती हैं, उसी प्रकार प्रत्येक देश की अपनी राजनीतिक संस्कृति भी होती हैं। जिस प्रकार किसी देश की संस्कृति का निर्माण वहाँ के साहित्य, कला-कौशल और परम्पराओं से मिलकर होता हैं उसी प्रकार किसी देश की राजनीतिक संस्कृति का निर्माण उस देश के राजनीतिक चरित्र, आदतों, राजनीतिक सूझबूझ और व्यवहार के राजनीतिक आदर्शों और मूल्यों की मिलीजुली विरासत से होता हैं, जिसे उस देश की राजनीतिक संस्कृति कहते हैं। 

जिस प्रकार किसी देश की सामान्य संस्कृति परिवर्तनशील होती हैं, उसी प्रकार राजनीतिक संस्कृति में भी परिवर्तन होता रहता हैं। किसी भी देश की राजनीतिक संस्कृति स्थिर नही होती। यद्यपि उसके परिवर्तन की गति अत्यधिक तीव्र अथवा मंद हो सकती हैं। फिर भी डाॅ.एस.पी. वर्मा के शब्दों में," किसी देश की राजनीतिक संस्कृति एक प्रकार से उसकी सामान्य संस्कृति के समान होती हैं।" 

आमण्ड का विचार हैं," किसी देश की राजनीतिक संस्कृति उस देश की राजनीतिक संरचना, संस्थाओं, उन संस्थाओं में कार्य करने वाले व्यक्तियों, उनके द्वारा बनाई गई नीतियों तथा लिए गए निर्णयों, इन नीतियों के निर्माण को प्रेरित और प्रभावित करने वाले साधनों और नीतियों को कार्यान्वित करने वाले निकायों के प्रति उस देश में रहने वाले व्यक्तियों का अभिमुखीकरण हैं।" 

राजनीतिक संस्कृति की परिभाषा 

सिडनी के अनुसार," राजनीतिक संस्कृति में आनुभाविक विश्वासों अभिव्यकत्तात्मक प्रतीकों और मूल्यों की वह व्यवस्था निहित हैं जो उस परिस्थिति अथवा दशा को परिभाषित करती हैं। जिसमें राजनीतिक क्रिया संपन्न होती हैं।" 

डाॅ.एस.पी. वर्मा के अनुसार," राजनीतिक संस्कृति में न केवल राजनीति के प्रति दृष्टिकोण, राजनीतिक मूल्य, विचारधाराएं, राष्ट्रीय चरित्र और सांस्कृतिक प्रवृत्ति ही सम्मिलित हैं, वरन् इसमें राजनीति की शैली, पद्धित और रूप भी सम्मिलित हैं।" 

हेन्ज यूला ने लिखा हैं," राजनीतिक संस्कृति उन रूपों की ओर संकेत करती है जिनका पूर्व अनुमान समूहों के राजनीतिक व्यवहार से तथा एक समूह के व्यक्तियों के सामान्य विश्वासों, निर्देशक सिद्धांतों, उद्देश्यों एवं मूल्यों से लगाया जाता हैं, चाहे उस समूह का आकार कुछ भी क्यों न हो।"

राजनीतिक संस्कृति की व्याख्या 

सिडनी बर्बा ने लिखा है कि," राजनीतिक संस्कृति से तात्पर्य उन अनुभवजन्य विश्वासों अभिव्यक्ति के प्रतीकों और मूल्यों की उस व्यवस्था से है जो उस स्थिति को परिभाषित करते हैं जिसमें राजनीतिक कार्य सम्पादित होता है। यह स्थिति राजनीतिक आदर्शों और राजनीतिक व्यवस्था के क्रियाशील सिद्धांतों को अपने में समेटे हुए चलती हैं।" 

लुसियन पाई ने विषय को स्पष्ट करते हुए आगे लिखा है कि कोई भी राजनीतिक संस्कृति दो बातों पर आधारित होती हैं-- 

1. राजनीतिक व्यवस्था के सामूहिक इतिहास की उपज एवं

2. उन व्यक्तियों के जीवन इतिहासों की उपज है जो कि उस व्यवस्था को जन्म देते हैं। इस प्रकार राजनीतिक संस्कृति की जड़े सार्वजनिक घटनाओं और व्यक्तिगत अनुभवों में समान रूप से निहित होती हैं। राजनीतिक संस्कृति के सिद्धांतों का विकास मुख्यतः इसलिए किया गया है कि उस बढ़ती हुई खाई को पाट सके जिसे व्यवहारवादी दृष्टिकोण ने गहरा बनाया था। राजनीतिक विश्लेषण की यह खाई जिसका एक धरातल व्यक्ति के राजनीतिक व्यवहार की मनोवैज्ञानिक व्याख्या और उसका 'माइक्रो विश्लेषण' था, अपने दूसरे धरातल पर राजनीतिक समाजशास्त्र का 'मोक्रो-विश्लेषण' प्रस्तुत करती हैं। 

इस प्रकार राजनीतिक संस्कृति का प्रयास एक ऐसा प्रयास है जो मनोविज्ञान तथा समाजशास्त्र को सयुक्त करता है और वह भी इस उद्देश्य से कि इस व्यवस्था द्वारा विशाल समाजों के दृष्टिकोणों को हम इस प्रकार नाप सकें कि हमारे राजनीतिक विश्लेषण में आधुनिक मनोविज्ञान का क्रान्तिकारी निष्कर्ष और आधुनिक समाजशास्त्रीय तकनीकों के विकास का पूरा-पूरा लाभ मिल सके। राजनीतिक विज्ञान के विद्वानों में राजनीतिक संस्कृति की यह अवधारणा एक ऐसे प्रयास का शुभारंभ है जो राजनीतिक विचारधारा, वैधता, सम्प्रभुता, राष्ट्रीयता तथा कानून का शासन जैसे परम्परावादी विचारों के अध्ययन को व्यवहारवादी विश्लेषण के अनुरूप बनाता हैं। वास्तव में 'राजनीतिक संस्कृति' एक ऐसी आधुनिक शब्दावली है जो हमारे उस ज्ञान को स्पष्ट एवं व्यवस्थित बनाती है जो लम्बे समय से राजनीतिक विचारधारा, राष्ट्रीय परिवेश, राष्ट्रीय राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक तथा व्यक्ति के मौलिक मूल्यों से संबंधित रहा है। दूसरी ओर राजनीतिक संस्कृति एक अधिक व्यापक अवधारणा है जिसमें नेताओं और नागरिकों का राजनीतिक रूभ्तान या राजनीतिक शैलियाँ ही शामिल नही होती वरन् उनकी क्रियाशीलता पर भी बल दिया जाता है जिसे आधुनिक व्यवहारवादी 'उलट आचरण' कहते हैं। दूसरी ओर, राजनीतिक संस्कृति का विचार राजनीतिक दृष्टि से अधिक राजनीतिक है और इस दृष्टि से उसे जनमत और राष्ट्रीय चरित्र जैसे विचारों की तुलना में अधिक सीमित कहा जा सकता हैं। 

किसी समाज की राजनीतिक संस्कृति को परिभाषित करने में लोगों के सभी राजनीतिक दृष्टिकोण और भावों का समावेश हो यह आवश्यक नही हैं क्योंकि अनेक दृष्टिकोण और भाव इतने हल्के-फुल्के होते है कि उनके आधारभूत विकास पर कोई प्रभाव नही पड़ता। दूसरी ओर, अनेक गैर-राजनीतिक विश्वास (Non-political Beliefs) इतने महत्वपूर्ण होते है कि उनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती, जैसे मानव-संबधों में आधारभूत विश्वास की भावनाएँ, समय और प्रगति की सम्भावनाओं के प्रति अनुस्थापना अथवा विचार आदि। वास्तव में राजनीतिक संस्कृति मे केवल उन समीक्षात्मक किन्तु व्यापक रूप से प्रचलित विश्वासों और भावों (Shared Beliefs and Sentiments) को ही लिया जाता है जो अनुस्थापना के उन विशिष्ट रूपों (Particular Patterns of Orientation) का निर्माण कर सकें जो राजनीतिक प्रक्रिया को व्यवस्था और स्वरूप प्रदान करते हैं। सारांश में, राजनीतिक संस्कृति राजनीतिक क्षेत्र (Political Sphere) को उसी प्रकार संरचना और अर्थ (Structure and Meaning) प्रदान करती है जिस प्रकार सामान्य साँस्कृतिक, सामाजिक जीवन को संगति और एकीकरण (Coherence and Integration) प्रदान करती है। एक राजनीतिक संस्कृति में गहन भावात्मक विस्तार-क्षेत्र (Deep Emotional Dimensions) सन्निहित होते है जिनमें समाज अथवा समुदाय से एकरूपता और स्वामिभक्ति की भावनाएँ मानव और भौगोलिक मोह की भावनाएँ आदि सम्मिलित होती हैं। भावनाओं, विवेकपूर्ण विचारों और नैतिक मूल्यों को परस्‍पर संबंधित करके राजनीतिक संस्कृति राजनीति की वास्तविकताओं के प्रति लोगों की आशाओं-उपेक्षाओं को रंग प्रदान करती है और लोगों को इस बारे में आदर्शों अथवा विचारों की सहमति उत्पन्न करती है कि उनका सार्वजनिक जीवन कैसा होना चाहिए। वास्तव मे राजनीतिक संस्कृति समकालीन राजनीतिक विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण विकास की द्योतक हैं क्योंकि यह उन प्रयत्नों को प्रस्तुत करती है जिनके द्वारा हम व्यक्तिगत मनोविज्ञान के लाभों को खोए बिना संपूर्ण राजनीतिक व्यवस्था का अध्ययन कर सकते हैं। 

राजनीतिक संस्कृति की अवधारण सामाजिक और आर्थिक तत्वों तथा राजनीतिक कार्यों के बीच की कड़ियों अथवा उन्हें जोड़ने वाले संबंधों की जाँच करने का एक उपयुक्त आधार भी प्रस्तुत करती है। सामाजीकरण की उस प्रक्रिया के माध्यम से जो प्रत्येक पीढ़ी की राजनीतिक संस्कृति को जीवित रखती है और आकार देती है, हम केवल स्पष्ट रूप से राजनीतिक प्रभावों को ही नहीं जान पाते बल्कि राजनीतिक व्यवहार को निर्धारित करने वाले राजनीतिक विकास के क्षेत्रों अथवा तत्वों का अध्ययन भी कर सकते हैं। राजनीतिक संस्कृति के आर्थिक और सामाजिक तत्वों का अध्ययन करके यह भली प्रकार जान सकते है कि आर्थिक विकास और स्थायी राजनीतिक परिवर्तन की सम्भावनाओं के बीच क्या संबंध हैं। राजनीतिक व्यवहार का विश्लेषण करते समय राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा द्वारा हम विवेकपूर्ण अभिरूचि और ध्यानपूर्वक सीखे गए मूल्यों तथा मानव व्यवहार के अविवेकपूर्ण निर्धारित तत्वों के सापेक्षिक महत्व का सन्तुलित चित्र प्रस्तुत कर सकते हैं।

राजनीतिक संस्कृति के आधार 

राजनीतिक संस्कृति के मुख्य आधार निम्न हैं--

1. भौगोलिक स्थिति 

यह देश की संस्कृति का निर्धारण करती हैं। ब्रिटेन की विदेशी आक्रमणों से रक्षा करने और विदेशी जातियों के पदार्पण से ब्रिटेन को बचाने में समुद्र का प्रधान योग रहा है क्योंकि ब्रिटेन चारों ओर से समुद्र द्वारा घिरा हुआ हैं। इसी कारण ब्रिटेन में जातीय संघर्ष की समस्या नहीं पाई जाती। 

2. ऐतिहासिक परम्परा 

राजनीतिक संस्कृति के तन्तु किसी भी देश की ऐतिहासिक परम्परा में खोजे जा सकते हैं। फ्रांस का इतिहास हिंसा और क्रांति की घटनाओं से भरा हुआ है जबकि ब्रिटेन का इतिहास शांतिपूर्ण परिवर्तन की प्रवृति का द्योतक हैं। फ्रांस के प्रभाव के कारण वियतनाम और अल्जीरिया में खूनी संघर्ष हुए जबकि ब्रिटेन के प्रभाव के कारण भारत में शांति पूर्ण ढंग से सत्ता-हस्तांतरण हुआ और संसदीय संस्थाएँ विकसित हुई। 

3. जन अभिवृत्तियाँ 

राजनैतिक संस्थाओं के प्रति जो जन अभिवृत्तियाँ होती हैं वे भी राजनीतिक संस्कृति की आधार होती हैं। 85 प्रतिशत अमरीकी जनता अपनी राजनैतिक संस्थाओं पर गर्व करती हैं, जबकि पश्चिमी जर्मनी मे यह प्रतिशत केवल 7 हैं। 

4. राजनीतिक सहभाजिता 

नागरिकों में राजनैतिक चेतना होना और देश की राजनीतिक गतिविधियों में उनका भाग लेना तथा अपनी राजनैतिक व्यवस्था के विषय में अधिकाधिक ज्ञान प्राप्त करना राजनीतिक संस्कृति का आधार हैं। 

5. सामाजिक आर्थिक विकास 

यह विकास भी राजनीतिक संस्कृति का निर्धारण करता हैं। देश में शिक्षा का प्रचार-प्रसार, उद्योगीकरण, वैज्ञानिक व तकनीकी विकास आदि तत्व नागरिकों के राजनैतिक विश्वासों और मूल्यों को प्रभावित करते हैं। 

6. राजनैतिक व्यवस्था

राजनैतिक व्यवस्था भी राजनीतिक संस्कृति का निर्धारण करती हैं। लोकतन्त्रीय व्यवस्था में वैयक्तिक स्वतंत्रता पर आधारित सांस्कृतिक मूल्य पनपते हैं जबकि अधिनायकतन्त्रीय व्यवस्था में वैयक्तिक स्वतंत्रता का दमन होने के कारण ऐसे सांस्कृतिक मूल्यनहीं पनप पाते हैं।

राजनीतिक संस्कृति के प्रकार 

आधुनिक राजनीतिक चिंतन के प्रमुख विद्वान आमंड ने राजनीतिक संस्कृति के निम्नलिखित प्रकारों की चर्चा की हैं-- 

1. संकुचित राजनीतिक संस्कृति 

संकुचित राजनीतिक संस्कृति से आशय उस राजनीतिक संस्कृति से है जिसमें कोई व्यक्ति अथवा समूह राजनीतिक तंत्र के विभिन्न अंगों तथा उनके कार्य करने ढंग के संबंध में बिल्कुल जानकारी न रखता हो अथवा उसकी जानकारी साधारण हो। ऐसी राजनीतिक संस्कृति में व्यक्ति केन्द्रीय सरकार की संस्थाओं से अपरिचित होता हैं। उनका उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उसकी जानकारी स्थानीय समूहों की रचना तथा उनकी कार्यविधि तक ही सीमित होती हैं। चूँकि संपूर्ण राजनीतिक तंत्र के संबंध में उसकी जानकारी शून्य होती हैं। अतः उसके संबंध में उसकी कोई भावना अथवा मत नहीं होता। 

यह सीधे-सीधे परंपरागत समाजों में विद्यमान रहती हैं जहाँ बहुत ही कम विशेष ज्ञान होता है और जहाँ अभिनेताओं को राजनीतिक, आर्थिक व धार्मिक भूमिकाओं का एक साथ निर्वाह करना होता हैं। 

डाॅ. श्यामलाल वर्मा के शब्दों में," इसमें न्यूनतम विशेषीकरण होता है और कर्ता एक साथ राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक भूमिकाएं संपन्न करते हैं। आदिम समाजों के मुखिया इसी प्रकार के होते हैं।" 

2. प्रजाभावी राजनीतिक संस्कृति 

इस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति में व्यक्ति व्यवस्था के संबंध में पूरी जानकारी रखता हैं। उसे कार्यपालिका, नौकरशाही तथा न्यायपालिका के संबंध में पूरा ज्ञान होता हैं। उसे इन संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले कार्यों का ज्ञान होता हैं। वह इन घटकों द्वारा प्राप्त होने वाले लाभों का मूल्यांकन करने की स्थिति में होता हैं। 

प्रजाभावी राजनीतिक संस्कृति में शासन द्वारा किए जाने वाले कार्यों के संबंध में तो जानकारी व्यक्ति को होती है लेकिन वह सरकार को प्रभावित करने वाले तत्वों यथा राजनीतिक दल, दबाव गुट तथा संचार के साधनों से अनभिज्ञ होता हैं। इस राजनीतिक संस्कृति में व्यक्ति निष्क्रिय होता हैं। वह नौकरशाही के आदेशों का पालन आँख मींच कर करता हैं क्योंकि उसके निर्णयों को चुनौती देने की शक्ति उसमें नहीं होती। 

गिलबर्ट तथा जार्ज के शब्दों में," शासन के साथ व्यक्ति के संबंध उदासीनता के होते हैं।"

3. सहभागी राजनीतिक संस्कृति 

इस प्रकार की संस्कृति में व्यक्ति राज्य का सक्रिय सदस्य होता हैं। उसे राजनीतिक तंत्र का पूर्ण ज्ञान होता है। उसे शासन के अंगों के संगठन तथा उसके कार्यों का ज्ञान होता है। इसके साथ ही सरकार की नीतियों को प्रभावित करने वाले तत्वों, यथा राजनीतिक दलो, दबाव समूहों तथा प्रचार साधनों का उसे पूर्ण ज्ञान होता हैं। वह शासन की नीतियों को भी प्रभावित करता हैं। सहभागी राजनीतिक संस्कृति में प्रत्येक व्यक्ति सरकार की आलोचना तथा मूल्यांकन करने का अधिकार होता हैं। 

डाॅ. वर्मा के शब्दों में," वह अकेला और समूहों मे रहकर सभी स्तरों पर व्यवस्था का मूल्याँकन और तदनुसार अनुक्रिया करता हैं।" 

फिर भी वे तीनों प्रकार की संस्कृतियां विशुद्ध नहीं होती। प्रत्येक राजनीतिक संस्कृति में दूसरी राजनीतिक संस्कृति के तत्व पाए जाते हैं। यही कारण है कि आमंड ने कहा कि राजनीतिक संस्कृतियाँ मिश्रित प्रक्रिया की होती हैं। इन मिश्रित संस्कृतियों को उसने पुनः 4 भागों में विभाजित किया हैं-- 

(अ) संकुचित प्रजाभावी राजनीतिक संस्कृति, 

(ब) प्रजाभावी सहभागी राजनीतिक संस्कृति,

(स) संकुचित सहभागी राजनीतिक संस्कृति, 

(द) नागरिक राजनीतिक संस्कृति। 

जब किसी समाज की राजनीतिक संस्कृति में प्रथम तीनों प्रकार की संस्कृति की विशेषताएं पाई जाती हैं, तो उसे 'नागरिक राजनीतिक संस्कृति' कहा जाता हैं। आमंड तथा बर्वा ने अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी तथा इटली की राजनीतिक संस्कृति को नागरिक राजनीतिक संस्कृति की संज्ञा दी हैं।

राजनीतिक संस्कृति का तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन में महत्व 

तुलनात्मक राजनीति में राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा की सामान्य उपयोगिता को स्पष्ट करते हुए सिडनी वर्बा ने लिखा हैं," आधुनिक शताब्दी में राजनीतिक जगत और राजनीतिक अध्ययन क्षेत्र दोनों में ही तीन परिवर्तन हुए हैं। राष्ट्रों का उदय हुआ हैं, पुरानों में परिवर्तन आये है और अनेक ऐसी समस्याएँ उठ खड़ी हुई हैं जो राजनीतिशास्त्र के विद्वानों तथा वर्तमान संस्थाओं की क्षमताओं को एक चुनौती हैं।" ऐसी चुनौती का सामना करने की क्षमताओं का ज्ञान राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा के आधार पर ही किया जा सकता हैं। 

पीटय मर्कल ने अपनी 'माॅडर्न कम्पेरेटिव पोलिटिक्स' में राजनीतिक सांस्कृतिक उपागम की अन्य अध्ययन उपागमों से अधिक लाभप्रदता मानी हैं। पीटर मर्कल ने राजनीतिक संस्कृति के तीन लाभों को मौलिक माना हैं--

1. राजनीतिक संस्कृति का आनुभाविक सत्यापन या जाँच संभव हैं। इसका अर्थ है कि राजनीतिक संस्कृति के संकेतकों को कभी भी जाँचा या परखा जा सकता हैं। 

2. राजनीतिक संस्कृति पर आधारित शोध से आने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट रूप से इंगित किया जा सकता। 

3. राजनीतिक संस्कृति के प्रति-राष्ट्रीय तुलनाएँ तटस्‍थ और परिमाणात्मक आधार पर की जा सकती हैं। 

4. राजनीतिक संस्कृति विविध व पृथक-पृथक प्रत्ययों को राजनीतिक व्यवस्था की अपनी अवधारणा में एकीकृत करने का अवसर प्रदान करती हैं। 

उपर्युक्त कारणों से पीटर मर्कल राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा पर आधारित अध्ययनों को अधिक ठीक मानते हैं। 

एस.पी. वर्मा ने अपनी पुस्तक 'माॅडर्न पोलिटिकल थ्योरी' में राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा को आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत के विकास में अत्यधिक व महत्वपूर्ण देन माना है। उनके अनुसार राजनीतिक संस्कृति के प्रत्यय के आधार पर किये गये अध्ययनों में अनेक गुण परिलक्षित होते हैं। जो कि संक्षेप में निम्नानुसार हैं--

1. एस. पी. वर्मा का अभिमत है कि राजनीतिक संस्कृति के प्रत्यय से राजनीतिक समुदाय या समाज पर एक गत्यात्मक सामूहिक सत्ता के रूप में अध्ययन करने के लिए ध्यान आकर्षित हुआ हैं। 

2. राजनीतिक सांस्कृतिक दृष्टिकोण व्यष्टि और समष्टि उपागमों को संयुक्त करने पर जोर देने के कारण राजनीतिशास्त्र को और अधिक पूर्ण सामाजिक विज्ञान बनाने में सहायक रहा हैं। 

3. राजनीतिक संस्कृति ने राजनीतिशास्त्र का विषय क्षेत्र विस्तृत करने में सहायता प्रदान की हैं। 

4. राजनीतिक सांस्कृतिक दृष्टिकोण ने व्यक्तियों की क्रियाओं के बुद्धिसंगत कारकों के अध्ययन के साथ ही साथ व्यवहार के अधिक गुप्त अविवेकी नियामकों के अध्ययन को भी प्रोत्साहन दिया हैं। 

5. राजनीतिक संस्कृति ने राजनीतिक विकास की विभिन्न दिशाओं को समझने में सहायता प्रदान की हैं। 

अतः यह स्पष्ट है कि राजनीतिक संस्कृति किसी देश के राजनीतिक विकास को निरूपित करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करती हैं। इसके साथ ही राजनीतिक संस्कृति तुलनात्मक राजनीतिक विश्लेषणों में बहुत उपयोगी हैं। यह राजनीतिक आधुनिकीकरण के उपागम की कमियों की पूर्ति करने वाला दृष्टिकोण भी माना जा सकता हैं।

संस्कृति तथा राजनीतिक संस्कृति 

अब प्रश्न यह उठता है कि संस्कृति और राजनीतिक संस्कृति में क्या अंतर हैं? राजनीतिक संस्कृति, संस्कृति का एक अंग है। यह एक व्यक्ति के राजनीतिक विचारों का समूह है। एक संस्कृति के आधारभूत विश्वासों और मूल आदर्श सामान्यतया राजनीतिक संस्कृति में मुख्य भूमिका अदा करते हैं। सामान्य संस्कृति के मूल्यों और विश्वासों से राजनीतिक संस्कृति अप्रभावित नहीं रह सकती। उदाहरण के लिए, यदि आधारभूति प्रवृत्ति प्रकृति पर आधिपत्य जमाने और सदैव सक्रिय रहने की ओर है तो राजनीतिक विश्वासों, मूल्यों और आदर्शों पर इसका प्रभाव अवश्य पड़ेगा। यदि समाज अपनी संस्कृति को भौतिक आधारों पर विकसित करना चाहता है तो उसे सरकार का सहारा अवश्य लेना पड़ेगा। लोग अपने विभिन्न विश्वासों के अनुकूल राजनीति के सामान्यकरण के आकांक्षी हो सकते है। मानव प्रकृति के संबंध में व्यक्ति के दृष्टिकोण राजनीतिक नेता के प्रति उसके दृष्टिकोण से निकट संबंध होता है। उदाहरण के लिए, वह व्यक्ति जो यह विश्वास करता है कि प्रकृति से ही मनुष्य विश्वासनीय और सहयोगी है, अवश्य ही अपने राजनीतिक नेताओं और यहाँ तक कि राजनीतिक विरोधियों के प्रति भी विश्वास रखेगा और उनके साथ सहयोग करने का इच्छुक होगा। दूसरी ओर यदि लोग अविश्वास की भावना से प्रभावित हैं तो इसका प्रभाव राजनीति में भी परिलक्षित होगा। 

किसी राजनीतिक संस्कृति का वर्णन करने में कौन-से राजनीतिक व्यवहार या दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हैं-- इसका निर्धारण करने की दृष्टि से आधारभूत विश्वास संरचना और राजनीतिक विश्वासों के बीच संबंध पर ध्यान देना बड़ा लाभदायक है। बहुधा राजनीति के छात्र उन राजनीतिक व्यवहारों अथवा दृष्टिकोणों के बारे में प्रश्न कर बैठते है जो राजनीतिक वैज्ञानिकों के अनुसार महत्वपूर्ण है। जैसे राजनीतिक मामलों, दलबन्दी आदि के प्रति दृष्टिकोण। जब व्यक्ति शोधकर्ता के दृष्टिकोण से सहमत नही होता कि युक्तिसंगत राजनीतिक विचारधारा कौन-सी है-- (उदाहरण के लिए, वह युक्तिसंगत रूप से उदारवादी या रूढ़िवादी पक्ष नही लेता) तो यह समझ लिया जाता है कि उसकी कोई राजनीतिक विचारधारा नही हैं। लेकिन आधारभूत मूल्य अनुस्थापनों) पर ध्यान देने से (बहुधा मानव प्रकृति और भौतिक वास्तविकता की प्रकृति के बारे में अन्तर्निहित धारणाओं पर) हम कुछ ऐसे राजनीतिक दृष्टिकोण का पता लगा सकते हैं जिनकी एक निश्चित और महत्वपूर्ण संरचना होती हैं-- चाहे वह उस रूप में संरचित न हों, जिस रूप में कि कोई राजनीतिक दार्शनिक उनकी संरचना कर पाता। चूँकि समाज में व्यक्ति का भाग केवल एक सीमित दायरे मे ही राजनीतिक होता हैं-- चूँकि इस बात की ही सम्भावना अधिक होती है कि वह व्यक्तिगत संबंधों अथवा आर्थिक संबंधों में ही अधिक रूचि लेगा। अतः यह सर्वथा संभव हैं कि वह अपने राजनीतिक दृष्टिकोणों का निर्माण उन्हीं रूपों में करेगा जो उसके कार्यकलापों के अधिक रूचिपूर्ण क्षेत्रों के प्रति दृष्टिकोणों के निर्माण से निर्मित होते है अपेक्षाकृत उन रूपों या तरिकों के जिनमें कि राजनीतिक वैज्ञानिक अथवा सिद्धांतवादी राजनीतिक विश्वास का निर्माण करते हैं। 

यद्यपि राजनीतिक संस्कृति सांस्कृतिक व्यवस्था के अन्य पहलुओं से घनिष्ठ रूप में संबंधित हैं, तथापि राजनीतिक उद्देश्यों को लिए हुए मूल्यों, संज्ञानों और अभिव्यक्तात्मक दशाओं की सामान्य संस्कृति (General Culture of Values, Cognitions and expensive states) से विश्लेषणात्मक पृथकता लाभदायक हैं। इससे लाभ यह होगा कि हम केवल उन तत्वों का ही विश्लेषण करेंगे जो राजनीति से ही संबंधित हैं। हमें यह भी ध्यान रखना हैं कि राजनीतिक संस्कृति और सामान्य संस्कृति का परस्पर घनिष्ठ संबंध होता हैं, फिर भी इनमें पूर्णतया समानता नहीं होती। इनमें कुछ अंतर भी होते हैं। 

राजनीतिक संस्कृति के विद्यार्थी केवल राजनीतिक विषयों के अध्ययन तक अपना अध्ययन सीमित नही रखता बल्कि उसे अनेक गैर-राजनीतिक विषयों का भी अध्ययन करना पड़ता है जिनका प्रत्यक्ष या परोक्ष से राजनीति से संबंध रहता हैं। एक व्यक्ति अपने स्वतंत्र राजनीतिक विचार रख सकता हैं जो दूसरे के राजनीतिक विचारों का विरीधी हो परन्तु इस विरोध का यह अर्थ नहीं कि उन दोनों व्यक्तियों में कोई सामान्य विचार नही है। हम जानते है कि एक ही देश में विभिन्न विचारधाराओं के लोग बसते है परन्तु राजनीतिक दृष्टि से वे एक-दूसरे का विरोध कर सकते हैं, सामाजिक या सांस्कृतिक दृष्टि से नहीं। जापान, इटली, टर्की, जर्मनी, भारत आदि देशों में आधुनिकता के प्रति बड़ी रूचि है और अधिकांश लोग इसी दृष्टि के पक्ष पोषक है परन्तु कुछ परम्परावादी विचारधारा के मानने वाले भी हैं। उन्हें एक सूत्र में बाँधने वाली जीवन की अनेक प्रवृत्तियाँ या पहलू हैं। 

समस्या जब टेढ़ी पड़ती है जब राजनीति संस्कृति को लोग सामान्य संस्कृति में जोड़ देना चाहते हैं और अपने विचारों को जबरन दूसरों के विचारों पर थोप देना चाहते हैं। यह बात सही है कि राजनीतिक विश्वासों का और आम सामाजिक विश्वासों का अंतर स्पष्ट रूप से दिखायी देता है फिर ये एक-दूसरे से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते। उदाहरण के लिए, एक देश में लोकतंत्र की स्थापना होती है। यह राजनीतिक विचारधारा है परन्तु इस विचारधारा का प्रभाव जीवन के अन्य क्षेत्रों पर भक पड़ता हैं। राजनीतिक निर्णयों का प्रभाव गैर-राजनीतिक निर्णयों पर भी पड़ता हैं।

राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा की आलोचना 

1. अस्पष्ट अवधारणा 

राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा स्पष्ट नहीं है। विभिन्न राजनीतिक विचारक इसकी परिभाषा के संबंध में एकमत नही हैं। जिन विद्वानों ने राजनीतिक संस्कृति को परिभाषित करने का प्रयास किया है, वे भी अपने विचारों में स्पष्ट नही हैं। विभिन्न विद्वान किसी ऐसी तकनीकी का निर्धारण करने में भी असफल रहे, जिसके द्वारा राजनीतिक संस्कृति का निर्धारण ठीक ढंग से किया जा सके। राजनीतिक संस्कृति का विचार पूर्णतः काल्पनिक ही प्रतीत होता हैं। 

2. शरीर वही हैं, केवल चोला नया हैं 

विद्वानों का कहना है कि राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा कोई नवीन विचार नही है। इसमें केवल पुरानी मान्यताओं को नवीन लेबल लगाकर प्रस्तुत किया गया है। प्राचीन राजनीति विज्ञान जिस राष्ट्रीय चरित्र के बारे में बार-बार विचार करता रहा हैं, कमोवेश मे राजनीतिक संस्कृति उसी को कहा जा रहा हैं। 

वास्तविकता तो यह है कि शरीर वही है, केवल चोला अर्थात् नाम बदल गया हैं। यह कोई मौलिक विचार अथवा अवधारणा नहीं हैं। 

ऐब करियन एवं मेसातेन के अनुसार," यह अवधारणा पुराने विचार पर नया लेबल मात्र हैं।" 

3. सामान्य संस्कृति तथा राजनीतिक संस्कृति में कोई स्पष्ट विभाजन रेखा नहीं

आमण्ड तथा बर्वा ने यह तो स्वीकार किया है कि सामान्य संस्कृति तथा राजनीतिक संस्कृति में घनिष्ट संबंध हैं, परन्तु यह संबंध किस सीमा तक है, इसका निश्चित उत्तर देने में वे असमर्थ रहे है। क्या सामान्य संस्कृति तथा राजनीतिक संस्कृति के निर्धारक तत्व समान हैं? यदि वे अलग-अलग है तो कौन-से तत्व सामान्य संस्कृति को निर्धारित करते हैं तथा कौन-से तत्व राजनीतिक संस्कृति को निर्धारित करते हैं। क्या सामान्य संस्कृति के बदलने पर राजनीतिक संस्कृति में भी स्वाभाविक रूप से परिवर्तन हो जाता हैं? आदि कुछ ऐसे प्रश्न है कि जिनका उत्तर ये विद्वान देने में असमर्थ रहे हैं। 

4. राजनीतिक संस्कृति तथा राजनीतिक संरचना का संबंध अस्पष्ट 

राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा के समर्थकों का मत हैं कि किसी देश की राजनीतिक संस्कृति किसी समाज के राजनीतिक व्यवहार को निर्धारित करती है। परन्तु इन दोनों में पारस्परिक निर्भरता कितनी हैं, इस विचार को स्पष्ट करने में विद्वान असफल रहे हैं। राजनीतिक संरचनाएँ राजनीतिक संस्कृति का निर्धारण करती हैं अथवा राजनीतिक संस्कृति के कारण राजनीतिक संरचनाएँ निर्धारित होती हैं? इन प्रश्नों का कोई स्पष्ट उत्तर राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा के प्रतिपादकों ने नहीं दिया हैं। 

5. राजनीतिक संस्कृति का तुलनात्मक अध्ययन असंभव 

राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा की प्रमुख विशेषता यह बताई जाती रही है कि इसके द्वारा विभिन्न राजनीतिक संस्कृतियों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है। परन्तु इस प्रकार का तुलनात्मक अध्ययन संभव नहीं हैं, क्योंकि अमेरिका की राजनीतिक संस्कृति का अध्ययन करने के बावजूद आमण्ड के लिए रूस की राजनीतिक संस्कृति का अध्ययन संभव नहीं था। 

राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा के प्रतिपादकों का यह भी विचार है की राजनीतिक संस्कृति का निर्धारण वैज्ञानिक पद्धित द्वारा संभव हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि अधिनायकवादी समाजों में इस प्रकार के सर्वेक्षण संभव नहीं हैं, क्योंकि इन व्यवस्थाओं में साक्षात्कार नहीं लिये जा सकते।

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