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4/03/2021

अकबर की राजपूत नीति

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अकबर की राजपूत नीति 

akbar ki rajput niti;अकबर पहला ऐसा शासक था जिसने यह समझा कि मुगल साम्राज्‍य के स्‍थायित्‍व एंव सुदृढ़ीकरण के लिए राजपूताना की अधीनता ही काफी नहीं है, राजपूतो की दोस्‍ती भी आवश्‍यक है। अगर हम पीछे मुड़कर देखें तो पता चलता है कि सल्‍तनत काल में लगभग तीन सौ वर्ष तक तुर्क अफगान शासको के सारे सैनिक प्रयासों के बावजूद राजपूतों की स्‍वतंत्रा की भावना को कुचला नहीं जा सका था। राजपूतों की गुलामी और आजादी का क्रम स्थिति के अनुसार चलता ही रहा। उन्‍होंनें स्‍वतंत्रा प्राप्ति या प्रतिरोध की कोशिशो को कभी छोड़ा नहीं था। 

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बाबर, हुमायूं और शेरशाह के काल में भी स्थिति लगभग वैसी ही थी। बाबर का प्रतिरोध करने की साहसपूर्ण कोशिश मेवाड़ के राणा सांगा तथा चन्‍देरी के मेदिनी राय ने की थी। सफलता बाबर को मिली। हुमायूं तो अपने ही अस्तित्‍व की लड़ाई लड़ता रहा। बहादूरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की मदद कर हुमायूं राजपूतों की हमदर्दी पा सकता था परन्‍तु ऐसा नहीं हो सका। शेरशाह ने भी जैसे तैसे राजपूतों के प्रति आक्रमण और अधिकार की नीति को ही अपनाया। 

जाहिर है कि अकबर के पूर्व सुल्‍तानों और सम्राटों की राजपूत नीति में स्‍थायित्‍व के तत्‍वों का अभाव था। युवा अकबर ने सारी स्थिति का विश्‍लेषण कर राजपूतों के प्रति ऐसी व्‍यावहारिक नीति अपनाई जिसमें उसकी स्‍वाभाविक उदारता और राजनीतिक पटुता का सम्मिश्रण दिखाई देता है। इस नीति के स्‍थायी एंव अनुकुल परिणाम हुए। अकबर की राजपूत नीति एंव उसके स्‍वरूप का विवेचन इस प्रकार किया जा सकता है--

1. राजपूतों को उच्‍च पद प्रदान करना

अकबर ने राजपूतो से मैत्री बढ़ाने के लिए राजपूतों को उच्‍च पद प्रदान किए। अकबर ने राजपूतों को सेना में भी भर्ती करना शुरू कर दिया। इसका अकबर को बहुत लाभ हुआ। इन राजपूतो ने मुगल साम्राज्‍य की रक्षा की तथा उसका विस्‍तार करने में बहुत सहयोग दिया था। अकबर ने इन राजपूतों को मुसलमान शासक के विरूद्ध सहयोग भी दिया। अकबर ने राजपूतों को केन्‍द्रीय सरकार में उच्‍च पद दिए। 

2. राजपूतों से वैवाहिक संबंध 

राजपूतों से मैत्री संबंध बनाने के लिए राजपूतों से अकबर ने वैवाहिक संबंध भी बनाए। अकबर ने सर्वप्रथम राजपूत राजा भारमल की पुत्री मानवाई से 1562 ई. में वैवाहिक संबंध बनाए। यह किसी राजपूत राजकुमारी का अकबर के साथ प्रथम विवाह था तथा ऐसी नीति की शुरूआत थी जिसने भारत में मुगल शासक पर पर्याप्‍त प्रभाव डाला था। प्रथम राजपूत कन्‍या से विवाह के बाद अकबर ने विवाह बीकानेर के राजा की पूत्री, जैसलमेर के राजा की पुत्री से किया। 1584 ई. में भगवानदास की पूत्री से शहजादा सलीम का अकबर ने विवाह करवा दिया। 

3. धार्मिक सहिष्‍णुता की नीति 

अकबर ने सभी को अपने धर्म का पालन करने की स्‍वतंत्रता दे दी थी। उसने अपनी हिन्‍दू पत्नियों को अपना-अपना धर्म पालन की स्‍वंतत्रता रखी थी। 1563 ई. में उसने हिन्‍दूओं से यात्रा कर समाप्‍त कर दिया। उसके बाद 1564 ई. में अकबर ने हिन्‍दूओं से जजिया कर समाप्‍त कर दिया। अकबर ने हिन्‍दूओं के धार्मिक त्‍यौहार को भी मनाना शुरू कर दिया। इन सभी कार्यो से राजपूत अकबर के समीप आ गए। 

4. राजपूत राजाओं को अभयदान 

अकबर इस तथ्‍य से भली भांति परिचित था कि यदि किसी राजपूत राज्‍य पर वह अधिकार भी कर लेगा तो वह स्‍थाई रूप से वहां शासन नही कर सकेगा, अतः जिन राजपूत राजाओं ने उनके विरूद्ध युद्ध भी लड़े उन्‍हें भी अकबर ने क्षमा कर दिया। इस प्रकार यदि कोई राजपूत शासक अकबर का आधिपत्‍य स्‍वीकार कर लेता था तो अकबर उससे मित्रता कर लेता था। 

5. राजपूतों की शक्ति का उपयोग 

अकबर अत्‍यंत कूटनीतिज्ञ शासक था। उसने राजपूतों की शक्ति का राजपूतों के विरूद्ध ही प्रयोग किया व अपनी आंकाक्षाओं की पूर्ति की। उदाहरण के लिए राणा प्रताप के विरूद्ध राजा मानसिंह को युद्ध करने के लिए भेजा गया। इसी प्रकार अमेर के राजपूतों ने रणथंभौर व मेवाड़ आदि पर अपना अधिकार करने में मुगलों की सहायता की। 

अकबर की राजपूत नीति के परिणाम 

अकबर की राजपूत नीति का भारतीय राजनीतिक स्थिति पर व्‍यापक प्रभाव हुआ व उसके महत्‍वपूर्ण परिणाम हुए जिनमें से प्रमुख निम्‍‍नलिखित थे--

1. अनेक राजपूतों नरेशों में मुगल साम्राज्‍य के विस्‍तार में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया। राजपूत मुगल साम्राज्‍य की ढाल बन गए। 

2. अकबर की उदार और मैत्रीपूर्ण नीति के कारण हिन्‍दू-मुस्लिमों संस्‍कृतियों में समन्‍वय स्‍थापित हुआ। 

3. अकबर की उदार नीति के कारण अनेक राजपूत राज्‍य नष्‍ट होने बच गए। 

4. साम्राज्‍य में शांति और व्‍यवस्‍था स्‍थापित हो जाने के कारण साहित्‍य, कला आदि सभी क्षेत्रों में उन्‍नति हुई। व्‍यापार वाणिज्‍य में बहुत विकास हुआ और देश की आर्थिक दशा बहुत सुधर गई। 

5. राजपूतो के सहयोग से अकबर अपने विरोधी अमीर सरदारों पर अंकुश रखने और उनकी विद्रोहात्‍मक गतिविधियों का दमन करनें में सफल हुआ। 

6. राजपूत नीति से अकबर को एक लाभ यह हुआ कि बिना किसी परेशानी व खर्च के राजपूतों की विशाल एंव शक्तिशाली सेना उसके अधीन हो गई, जिसका उसने समय-समय पर लाभ लिया। 

7. अकबर की राजपूत नीति के परिणामस्‍वरूप अनेक राजपूत राजाओं की अपनी योग्‍यता का प्रदर्शन करने का उचित अवसर मिला। 

8. राजपूतों द्वारा मुगलों का आधिपत्‍य स्‍वीकार कर लेने से राजपूतों की प्रतिष्‍ठा धूल-धूसरित हो गई। 

9. राजपूत राजाओं ने दक्षिण भारत व बंगाल पर आक्रमण किए व धन प्राप्‍त किया। 

10. राजपूत नीति के कारण उत्तर भारत में राजनीतिक एकता की स्‍थापना हुई, जिसमें उत्तर भारत का सर्वोन्‍मुखी विकास हुआ। 

इस प्रकार स्‍पष्‍ट है कि अकबर की राजपूत नीति के मुगलों व भारतीय दोनों के लिए ही दूरगामी एंव व्‍यापक  प्रभाव हुए।

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