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4/07/2021

अकबर एक राष्ट्रीय सम्राट

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अकबर एक राष्‍ट्रीय सम्राट 

akbar ek rashtriya samrat tha kaise;राष्‍ट्र निर्माता उस व्‍यक्ति को कहते है जो किसी जनसमूह में राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक तथा सांस्‍कृतिक एकता उत्‍पन्‍न कर उसे एकता के प्रबल सूत्र में बांध देता है, अकबर में ये सारे गुण विद्यमान थे जिसके कारण  लेनपूल ने अकबर को भारत में सर्वश्रेष्‍ठ बादशाह और मुगल साम्राज्‍य का वास्‍तविक संस्‍थापक और व्‍यवस्‍थापक बताते हुए उसके काल को स्‍वर्ण युग कहा है। इस कथन के प्रकाश में जब अ‍कबर के व्‍यक्तित्‍व, स्‍वभाव और विचारों की समीक्षा करते हैं। अकबर का व्‍यक्तित्‍व सुन्‍दर, उदार स्‍वभाव और दूरदर्शी और समयोजित विचारों का गम्‍भीर व्‍यक्ति दिखाई देता है। वह एक आज्ञाकारी पुत्र, प्रिय पति, उदार पिता और अपने समस्‍त मित्रों के प्रति प्रेमपुर्ण था और सदैव आदर का व्‍यवहार करता था। अबुल फजल और बीरबल की मृत्‍यु ने उसे आंसूओं में डुबा दिया था। प्रजा के प्रति कर्तव्‍यशील था और उदार भी था।

1. कुशल महान सेनापति, शासक और राजनीतिज्ञ 

अकबर महान शासक था उसने राजस्‍व व्‍यवस्‍था को सुन्‍दर और तार्किक बनाया। योग्‍य कर्मचारियों वरियता देकर नियुक्‍त किया। यातायात, उद्योग, सेना सभी को अधिक गतिशील, विश्‍वसनीय और संगठित बनाया। उसकी धार्मिक व्‍यवस्‍था और धर्मनिरपेक्षता की प्रशंसा अनेक इतिहासकारों ने की है। उसकी व्‍यवस्‍था और सुधार के कारण न केवल साम्राज्‍य को स्‍थायित्‍व प्राप्‍त हुआ, बल्कि सभी आयामी विकास के द्वार खुले। संगीत, नृत्‍य, चित्र स्‍थापत्‍य के क्षेत्रों में अद्भुत समन्‍वय और उन्‍नति हुई। अकबर ने अनके युद्धों में साहस, वीरता और सुझ-बूझ का परिचय दिया। गुजरात विद्रोह के लिये किया गया सैनिक अभियान उसका ऐतिहासिक अभियान था।

2. हिन्‍दू-मुस्लिम एकता 

सम्राट अकबर के बिना किसी भेदभाव के हिन्‍दू एंव मुसलमानों को समान स्‍तर पर लाकर खड़ा कर दिया। उसने जनता के प्रति धर्मनिरपेक्षता की नीति का पालन किया। प्रत्‍येक विभाग में सेवाओं का आधार योग्‍यता हो गया। मैलीसन् ने कहा है कि अकबर की दृष्टि में योग्‍यता थी, चाहे वह किसी हिन्‍दू राजकुमार की हो अथवा उजबेग मुसलमान की। उसके सामाजिक सुधारों ने भी हिन्‍दू एंव मुसलमानों को एक स्‍थान पर लाकर खड़ा कर दिया। 

3. कला एंव साहित्‍य में एकता

 बाबर और हुमायूं के आक्रमण के साथ ही भारत में चित्र, स्‍थापत्‍य और संगीत कलाओं में ईरानी या फारसी शैली का आगमन हुआ। अकबर की उदारता और कला में रूचि और कलाओ की ओर देखने का इस्‍लाम से भिन्‍न दृष्टिकोण के कारण इन क्षेत्रों में ईरानी और हिन्‍दू शैलियों का मिश्रण हुआ तथा चित्र और स्‍थापत्‍य में दोनों के मिश्रण से मुगल कला का जन्‍म हुआ इसका पूरा श्रेय अकबर को ही जात है। अकबर के काल में आगरा-फतेहपूर सीकरी में चाहे महल बने हो या फिर हुमायूं का मकबरा या स्‍मृति-प्रतीक बुलन्‍द दरवाजा सभी मुगल कला के सर्वाेच्‍च नमूने  हैं। जामा मस्जिद, बीरबल का महल, शहजादी अम्‍बर का महल, तुर्की सुल्‍तान का महल, दीवाने खास, आगरा और लाहौर के किले, दिल्‍ली का हाथी दरवाजा, अमरसिंह दरवाजा। इनमे हिन्‍दू चित्र और मूर्ति शैली अंकित है। शेर, चीते, हाथियों,मोर आदि को देखकर स्‍पष्‍ट कहा जा सकता है कि इन पर हिन्‍दू प्रभाव था। अबुल फजल ने लिखा है कि सम्राट शानदार इमारतों के नक्‍शें बनाते है और हृदय तथा मस्तिष्‍क की कल्‍पनाओं का पत्‍थर और मिट्टी का जामा पहना देते है। ख्‍वाजा अब्‍दूल समद, बहलाद, मीर सैयद अली, फारूख बेग मुस्लिम चित्रकार थे और दशवन्‍त, बसावन, सांबलदास, ताराचन्‍द, जगन्‍नाथ आदि हिन्‍दू चित्रकार थे अतरू दोनों शैलियों का समन्‍वय हुआ। अकबर ने चंगेजनामा, रामायाण, कलिया दमन, जफरनामा, नल-दमन और रज्‍मनामा आदि को चित्रित करवाया था। 

4. सामाजिक रीति-रिवाजों में समन्‍वय

अकबर ने भारत में हिन्‍दू या मुस्लिम ढंग से समाज सुधार करने का प्रयत्‍न नहीं किया। उसे जो भी बुराईयां दिखाई दीं, फिर वह भले ही धर्म सम्‍मत ही क्‍यों न हो, उन्‍हें दूर करने का प्रयत्‍न किया। इसमें उसने मुसलमानों या हिन्‍दूओं की नाराजी की भी चिन्‍ता नहीं की। अकबर ने गौ-वध बन्‍द करवाया, सती प्रथा, खतना मद्यपान, वेश्‍यावृत्ति, जजिया, तीर्थयात्रा कर पर निषेधाज्ञा जारी की। विवाह की आयु को बढ़ाया और अन्‍तर्जातीय विवाहो को प्रोत्‍साहन दिया। हिन्‍दू राजकुमारियो से विवाह करके स्‍वंय हिन्‍दू रीति-रिवाजों जैसे सूर्यपुजा, माला, तिलक, तुलसी पूजा आदि अपनाये। साथ में वंश और त्‍यौहार भी अपनायें। यहां अकबर का दृष्टिकोण मानवीयता का समन्‍वय करना था। 

6. भाषा और साहित्‍य 

अकबर भाषा-साहित्‍य का संरक्षक था। निरन्‍तर होते हुये भी वह धर्म, दर्शन, नीतिशास्‍त्रों का ज्ञाता था। उसने एक विदेशी भाषा फारसी को अपने सम्‍पूर्ण राज्‍य की भाषा बनाया और साम्राज्‍य के कर्मचारियो को इसे जानना अनिवार्य कर दिया। इससे सम्‍पूर्ण देश में भाषाई एकता प्रस्‍थापित हुई। उसने वेद, संस्‍कृति और हिन्‍दू विज्ञान के ग्रन्‍थों का फारसी में अनुवाद करवाया। अरबी, तुर्की और ग्रीक भाषाओं से फारसी में अनुवाद करवाये। राजा मानसिंह और टोडरमल फारसी का बडे उत्‍साह से प्रचार करते थे। ईश्‍वरदास, भीमसेन, राय सुरजन आदि ने फारसी इतिहास ग्रन्‍थ लिखें। बीरबल को अपनी कविता के कारण कविराय की उपाधि मिली। 

निष्‍कर्ष

अकबर को राष्‍ट्रीय सम्राट कहा जाता है। श्रेष्ठ सम्राट शब्‍द उस शासक के लिए प्रयोग किया जाता है। जिसने किसी क्षेत्र के जन-समूह में राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक एंव सांस्‍कृतिक एकता उत्‍पन्‍न कर उन्‍हें एक सूत्र में पिरो दिया हो। अ‍कबर जिस समय सम्राट बना था। उसके राज्‍य में विभिन्‍न नीतियो, धर्माे व संप्रदाय दूसरे से घृणा करता था। राजनीतिक रूप से भी राज्‍य में दृढ़ता का सर्वथा अभाव था। 

लेकिन बाबर को भारत में मुगल शासन स्‍थापित करने के कारण मुगल वंश का संस्‍थापक माना जाता है। वास्‍तव में यह श्रेय अकबर को दिया जाना चाहिए। बाबर ने तो भारत में मात्र कुछ प्रदेशों को जीतकर उन पर अधिकार किया था। किन्‍तु अ‍कबर ने न केवल उन प्रदेशो के अतिरिक्‍त भारत के विशाल भू-भाग पर अधिकार करके भारत में राजनीतिक एकता स्‍थापित की वरन् अपनी कुशल नीतियों से उसने भारत में सांस्‍कृतिक, धार्मिक, सामाजिक व आर्थिक एकता स्‍थापित करने का भी प्रयास किया। इसी कारण अकबर को श्रेष्ठ सम्राट की संज्ञा दी जाती है। उसके विषय में लारेंस विनयन ने लिखा है-एक शासक के रूप में अकबर की सबसे बड़ी सफलता यही थी कि उसने भिन्‍न-भिन्‍न राज्‍यों, विभिन्‍न जातियो व विभिन्‍न धर्मो के समूह को एक सूत्र में पिरो दिया।

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