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2/21/2021

स्थिर बजट और लोचदार बजट मे अंतर

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स्थिर बजट और लोचदार बजट मे अंतर 

स्थिर और लोचशील बजट मे निम्म अंतर है--

1. स्थिर बजट अपरिवर्तित रहता है। इसमे समय के अनुसार परिवर्तन कराना संभव नही है। जबकि लोचदार बजट मे लोचशीलता होने के कारण समयानुसार परिवर्तन लाया जा सकता है। 

2. स्थिर बजट हमेशा यह मानकर चलता है कि परिस्थितियां यथावत सामान्य बनी रहेगी। जबकि लोचदार बजट के अंतर्गत यह कल्पना की जाती कि दशायें परिवर्तनशील होगी तथा आवश्यकतानुसार बजट मे परिवर्तन कर लिया जायेगा।

3. स्थिर बजट मे लागतों को उनकी परिवर्तनीयता के अनुसार वर्गीकृत नही, जैसे-- स्थायी,परिवर्तनीय तथा अर्द्ध-परिवर्तनीय। लोचशील बजट को उनकी परिवर्तनीयता के आधार पर बाँटा जाता है।

4. स्थिर बजट मे यदि किसी कारण से परिस्थितियों मे परिवर्तन आ जाये तो लागतों का सही निर्धारण संभव नही हो पाता है। जबकि लोचदार बजट मे गतिविधि के विभिन्न स्तरों पर लागतों को आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।

5. स्थिर बजट मे परिणामों का सही तौर पर पूर्वानुमान लगाना कठिन होता है। जबकि लोचदार बजट के अंतर्गत परिणामों का सही-सही अनुमान लगाया जा सकता है क्योंकि क्रियाओं के परिचालन पर व्ययों के प्रभाव को स्पष्ट रूप मे दर्शाया जाता है। 

6. स्थिर बजट मे यदि उत्पादन की मात्रायें पृथक-पृथक हो तो वास्तविक बजटेड निष्पत्त मे सही तुलना नही की जा सकती है। लोचशील बजट मे तुलनायें वास्तविक होती है क्योंकि परिवर्तित योजना राशियाँ ही वास्तविक के सामने रखी जाती है।

7. स्थिर बजट का सीमित उपयोग होता है तथा लागत नियंत्रण के तंत्र के रूप मे यह अप्रभावी रहा है। लोचशील बजट को प्रभावी लागत नियंत्रण के उपकरण के रूप मे अच्छी तरह से काम मे लाया जा सकता है। 

8. स्थिर बजट मे यदि बजटेड तथा वास्तविक गतिविधि स्तर अलग-अलग हो तो लागतों का सही निर्धारण तथा मूल्य निर्धारित कठिन हो जाता है। लोचदार बजट लागतों के सही निर्धारण के कारण मूल्य तय करने तथा टेण्डर भेजने मे सहायक होता है।

शायद यह जानकारी आपके लिए काफी उपयोगी सिद्ध होंगी

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