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12/08/2020

रोलेट एक्ट क्या था?

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रोलेट एक्ट क्या था? 

rowlatt act in hindi;युद्ध काम मे भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन का दमन करने के लिए भारतीय सुरक्षा अधिनियम पारित किया गया। इस कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस रोलेट थे। अप्रैल 1918 मे इसकी रिपोर्ट प्रकाशित हुई। इस कमेटी ने यह निर्णय किया कि क्रांतिकारियों का दमन करने लिए वर्तमान कानून अधूरे है, अतः आतंकवादी व अपराध अधिनियम फरवरी 1919 मे बनाया गया। इसके अनुसार मजिस्ट्रेटों को यह अधिकार प्राप्त हुआ कि वे संदिग्ध क्रांतिकारियों की मामूली जाँच पड़ताल के बाद नजरबंदी का आदेश जारी कर सकते है। 18 मार्च 1919 को रोलेट एक्ट पास हुआ, जिसके द्वारा मोतीलाल नेहरू के शब्दों मे," अपनी, दलील, वकील की व्यवस्था का अंत कर दिया गया।

जब भारत के सभी वर्गो के विरोध के बावजूद ब्रिटिश सरकार ने रोलेट कमेटी की रिपोर्ट को कानूनी रूप देने का प्रयास किया तो ब्रिटिश न्यायप्रियता से महात्मा गांधी के विश्वास को क्षति पहुँची। उन्होंने वायसराय को पत्र लिखा कि सरकारी नीति के कारण मेरे लिए सत्याग्रह के अतिरिक्त और कोई मार्ग शेष नही है।

इस अधिनियम की भारतीय समाचार पत्रों ने भी कटू आलोचना की। पंजाबी नामक अखबार ने लिखा था,"  यह उस नौकरशाही का जिसका दिमाग लोगो की स्वतंत्रता मे दखल देने के निरंकुश अधिकार से फिर गया है, एक निर्लज्ज प्रयास है। 

चिन्तामणि के अनुसार, " रौलेट एक्ट से देश भर मे विरोध की भावना भड़क उठी थी। इसका विरोध प्रत्येक गैर-सरकारी भारतीय निर्वाचित एवं मनोनीत सदस्यों ने किया था, किन्तु सरकार अपनी बात पर अड़ी रही और जरा भी नही झुकी तथा इस विधेयक को पारित कराने मे सरकार ने अपनी सारी शक्ति लगा दी।" 

इस अधिनियम ने गांधी जी को उदार नीति त्याग कर अंग्रेजों का सीधा विरोध करने के लिए विवश कर दिया। 

सारे देश मे सत्याग्रह की शपथ ली गई। इस चेतावनी के बावजूद भी बिल कानून बन गया, इसके विरोध मे हिन्दू-मुस्लिम एक हो गए। 30 मार्च 1919 मे संपूर्ण देश मे हड़ताल का निश्चय किया गया। बाद मे यह तिथि 6 अप्रैल कर दी गई। सारे देश मे तिथि पर सफलतापूर्वक शांतिपूर्ण हड़ताल हुई। दिल्ली मे हिंसात्मक घटनाएं आरंभ हो गई। महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर लिया गया। महात्मा गांधी के अहमदाबाद पहुँचाने पर ही स्थिति शांत हुई, किन्तु ब्रिटिश सरकार का दमन चक्र चलता रहा।

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