8/29/2020

उद्यमी की समस्याएं या कठिनाईयां

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उद्यमी की प्रमुख समस्याएं या कठिनाईयाँ (udyami ki samasya)

udyami ki samasya in hindi;प्रत्येक व्यवसाय शुरू होने के पीछे कामाना उसके सफल होने की होती है। एक व्यवसाय जो अपने वैशिष्ट्य हेतु पहचाना जाना चाहता है, उसे जरूरत होती है एक मौके की, पर तेजी से बदलते दौर मे उसे अपनी व्यवस्था मे समयानुसार प्रचलित तथा व्यावहारिक बदलाव करने की जरूरत अवश्य होती है। उसे ऐसी नीतियों का निर्माण कर उन्हें अपनाना होगा जो स्वयं नवाचार तथा नवोधम को प्रोत्साहित करती है।
एक सफल उद्यमी बनने हेतु व्यवसाय चाहे छोटा हो अथवा बड़ा उसे व्यावसायिक व्यावहारिकता से चलाने की जरूरत होती है। चूँकि एक उद्यमी मूलतः एक संशोधक एवं नवीन संयोजनओं द्वारा नवीन उत्पादन तैयार करने वाला होता है। लेकिन नवाचार के प्रस्तुतीकरण के साथ वह रिस्क लेने वाला भी होता है। वैसे तो हर व्यापारिक गतिविधि मे कुछ न कुछ समस्याएं होती है इसलिए उद्यमी इनसे अछूता नही रही रह सकता। उसे कई तरह की समस्याओं से जुझना पड़ता है जैसे व्यक्तिगत, प्रबन्धिकीय, प्रशासकीय, ब्राह्रा इत्यादि। इनका विश्लेषण करे तो हम पाते है कि व्यक्तिगत समस्याएं, प्रबन्धिकीय क्षमताओं की कमी, असमानता, अपर्याप्त तकनीकी ज्ञान, जोखिम उठाने की कम क्षमता, पारिवारिक दिक्कतें तथा अपर्याप्त शिक्षा हो सकती है। पर वर्तमान समय मे एक उद्यमी व्यक्तिगत समस्याओं के अलावा विभिन्न समस्याओं मे भी उलझा रहता है। अतः उद्यमी की समस्याओं को क्षेत्रवार दो भागों मे विभाजित कर इस तरह स्पष्ट किया जा सकता है--

1. उद्यमी की प्रारम्भिक अवस्था की समस्या 

हालांकि उद्यमी को यह माना जाता है कि वह समस्याओं को शुरू से ही साथ लेकर चलता है। क्योंकि वह जिस क्षेत्र मे घुस रहा है वह पूर्णतः उसके लिए नया अनुभव लिए होता है उसे उन सब बातों का समुचित ज्ञान नही होता, जो उसमे शामिल होती है। जिन समस्याओं से एक उद्यमी गुजरता है उनमे निम्म प्रमुख है--
प्रोजेक्ट बनाने की समस्या 
एक उद्यमी जब अपना उद्यम स्थापित करना चाहता है तो उसके लिए यह जरूरी है कि वह उसका प्लान कर ले, एवं फिर उस प्लान को एक निर्धारित प्रोजेक्ट के रूप मे तैयार कर ले क्योंकि उस प्रोजेक्ट के आधार पर ही वह अपने को आगे बढ़ा सकता है, इस प्रोजेक्ट को दिखाकर ऋण की व्यवस्था, बिजली के कनेक्शन एवं रजिस्ट्रेशन आदि हेतु इस प्रोजेक्ट की जरूरत होती है इसलिए उद्यमी जो इस कार्य मे प्रशिक्षित नही होता है, वह अपने उधम सम्बन्धी प्रोजेक्ट को अच्छे से तैयार नही कर पाता है। यह उसके लिए बहुत गंभीर समस्या है, इसके लिए वह जगह-जगह पर जाकर लोगों से सम्पर्क कर अपने प्रोजेक्ट को तैयार करवा तो लेता है पर यह प्रोजेक्ट उस व्यवस्था के अनुरूप तैयार नही हो पाता है जो उसे भविष्य मे करना होगा। इसलिए उद्यमी को यह जरूरी है कि वह अपने भविष्य को ध्यान मे रखते हुए अपनी समझ मे अपना प्रोजेक्ट तैयार कराये।
प्रारंभिक पूँजी एकत्र करने की समस्या 
एक उद्यमी के सामने सबसे बड़ी समस्या होती है, प्रारम्भिक अवस्था मे पूँजी की, जब वह "hand to mouth" होता है उद्यमी को यह भी समझ मे नही आता कि वह कितनी पूंजी एकत्रित करे, तथा कहाँ से लाये, इसके लिए वह अपने परिवार तथा सगे सम्बन्धियों, रिश्तेदारों से मिलने की आशा मे प्रयत्न करता है, पर इस व्यवस्था मे वह सफल नही हो पाता है, तब कही जाकर ऋण लेने के लिए सोचता है। जिसकी जटिल प्रक्रिया के कारण एक उद्यमी अपने आप को व्यवस्थित नही कर पाता है एवं फिर वह सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सुविधाओं के अंतर्गत योजनाओं मे लाभ हेतु ऋण प्राप्त करने का प्रयास करता है। जो कि काफी तकलीफदेय एवं मुश्किल होती है। इस तरह एक उद्यमी पूंजी एकत्रित करने की प्रारम्भिक प्रक्रिया मे ही उलझ जाता है जो कि एक गम्भीर समस्या के रूप मे उद्यमी को घेर लेती है।
औधोगिक क्षेत्र मे स्थान प्राप्त करने की समस्या
एक उद्यमी को अपने उद्यम डालने हेतु स्थान की जरूरत होती है। अगर उधमी उत्पादन सम्बन्धी कार्य कर रहा है तो उसके लिए यह जरूरी है कि वह उस उद्यम को नियमानुसार औद्योगीक क्षेत्र मे डाले, जिसके लिए वह जिला उद्योग केन्द्र के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्र मे जमीन/जगह प्राप्त करे। जिसके लिए आवेदन करना होता है, यह प्रक्रिया भी आसान नही है। कई औपचारिकताओं को पूर्ण कर जगह का आवंटन होता है। जिसका शुल्क जमा करना होता है, यहाँ यह जरूरी नही है कि उद्यमी से इस क्षेत्र मे मनपसंद जगह/स्थान उपलब्ध हो जाये, कभी,-कभी जिला के क्लर्क/अधिकारी भी उद्यमी को गलत जानकारी देकर कार्य को उलझा देते है तथा नवउद्यमी अपने मनपसंद जगह/स्थान पाने से वांचित रह जाता है जो कि उसके लिए गंभीर समस्या का परिणाम होती है।
N.O.C. प्राप्त करने की समस्या 
एक उद्यमी को अपना उद्यम डालते समय विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है जो वर्तमान मे आसानी से नही मिलता है। भ्रस्टाचार के इस दौर मे हर विभाग "अनापित्त प्रमाण पत्र" जारी करते समय उद्यमी से जायज/नाजायज कुछ धनराशि की माँग करते
है जो कि उद्यमी के लिए समस्या बनती है। इसका मुख्य कारण यह भी रहता है कि जिस विभाग से अनापित्त प्रमाण पत्र लिया जा रहा है उस विभाग की जानकारी/आपत्तियाँ इतनी ज्यादा रहती है जिनको पूरा करना एक नवउद्यमी के लिए मुश्किल होता है, इसलिए उद्यमी इन परेशानियों से बचते हुए " Shortcut" धन देकर प्राप्त कर लेता है जो कि एक नवउद्यमी हेतु परेशानी का सबब बनती है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि की समस्या 
एक उद्यमी के सामने सबसे बड़ी समस्या उसके परिवार से जुड़ी "इमेज" की होती है, साथ ही अगर उद्यमी का परिवार व्यावसायिक है, तब तो इतनी परेशानी नही आती है क्योंकि उसने पारिवारिक लोगो से जुड़कर सारी समस्याओं को देखा तथा समझा होता है। पर अगर उद्यमी का परिवार व्यावसायिक पृष्ठभूमि का नही है तो उसे बहुत हम समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए उद्यमी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
कच्चे माल की समस्या
एक उद्यमी के सामने सबसे बड़ी समस्या कच्चे माल की भी रहती है उसे इस बात का कम ज्ञान होता है कि कच्चा माल कहाँ से आना चाहिए कितना आना चाहिए? और कैसे आये? इन सब बातों को ध्यान मे रखते हुए एक उद्यमी को विचार करना चाहिए क्योंकि किसी उत्पादित वस्तु की कीमत कच्चे माल पर निर्भर करती है इसलिए यह एक समस्या भी गंभीर है क्योंकि उद्यमी की अगली रणनीति " विपणन" होती है जो कि वस्तु की कीमत पर निर्भर करती है। इसलिए उद्यमी को इस बात को गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए।
शक्तिकरण की समस्या
उद्यमी को अपना उद्यम प्रारंभ करते 'बिजली के उपयोग' पर पूरा ध्यान देकर उधम मे व्यवस्था करानी चाहिए इसके लिए उसे विधुत विभाग से कनेक्शन लेकर सभी कार्यवाही पूरी करनी चाहिए। इसके लिए उद्यमी को "Commercial Power Connection" व्यावसायिक कनेक्शन लेना होता है। जिसके लिए विभिन्न तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी होती है। इन औपचारिकताओं को पूरा करना एक उद्यमी हेतु काफी मुश्किल होता है, उद्यमी को यह मुश्किल वर्तमान समय मे चल रही " ऑफिसों की कार्य प्रणाली" के कारण अधिक होती है, इसलिए एक उद्यमी को इस समस्या का सामना कर अपने उद्यम हेतु पर्याप्त विधुत की व्यवस्था करानी चाहिए।
पंजीकरण की समस्या 
हर उद्यमी जो अपना नया उद्यम डाल रहे है उन्हें जरूरत है कि वह अपने उधम से सम्बंधित रिजिस्ट्रेशन अवश्य करा ले क्योंकि भविष्य मे विभिन्न उच्च अधिकारी समय-समय पर आकार उधम का मुआयना करते है, तथा उधम से सम्बंधित जरूरी प्रपत्रों की माँग करते है अतः एक उद्यमी को चाहिए कि वह अपने उद्यम से सम्बंधित जरूरी मद सभी पंजीकरण का कार्य पूरा कर लेना चाहिए, इसके लिए उसे विभिन्न औपचारिकताओं को पूरा करना पड़ता है जिनकी पूर्ति करने हेतु विभिन्न दफ्तरों के चक्कर लगाना पड़ते है तथा कार्यालयीन लेट लतीफी के कारण उसे बहुत सारी समस्याओं का सामाना करना पड़ता है।

2. उद्यम मे गति मिलने के बाद समस्याएं

उपरोक्त सभी समस्याएं एक उधमी को प्रारंभिक दौर मे जूझने हेतु जहाँ मजबूर करती है वही उधम के अपने पूर्ण स्वरूप मे आने के बाद भी निम्न विभिन्न समस्याओं से जुझने को मजबूर कर देती है यह है--
पूंजी निर्माण की समस्या
उद्यमी को अपने बढ़ते हुए व्यवसाय के लिए और ज्यादा पूंजी की जरूरत पड़ती है जिसके लिए वह विभिन्न व्यक्तिगत प्रयास कर पाने कि कोशिश करता है पर अधिक मात्रा मे पूँजी की व्यवस्था न हो सकने के कारण वह सरकार की विभिन्न बड़ी योजनाओं के अन्तर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त करना चाहता है। जिसके लिए उसे कुछ औपचारिकताओं की पूर्ति करनी होती है साथ ही उसे अपने व्यवसाय की बढ़ोत्तरी सम्बन्धी प्रोजेक्ट कितनी वित्तीय व्यवस्था की उपलब्धता हो सकेगी। इस तरह यह सभी औपचारिकताओं को उद्यमी द्वारा समय से पूरा करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से उसे "वित्तीय सहायता" उपलब्ध करा दी जाती है इस प्रक्रिया मे उद्यमी को काफी समस्या आती है इसलिए उसे बहुत सोच समझ कर उद्यम मे पूँजी बढ़ाना चाहिए।
श्रमिकों की समस्याएं
एक उद्यमी को अपने उधम को सफलतापूर्वक संचालित करने हेतु कुशल तथा प्रशिक्षित कर्मचारियों/श्रमिकों की आवश्यकता रहती है। वर्तमान समय मे उधमी को इन श्रमिकों को अपने यहाँ रखने मे बहुत सारी समस्याएं आती है। पहले तो ऐसे श्रमिक/कर्मचारी ईमानदार नही मिलते और अगर मिल भी जाते है, तो वेतन ज्यादा माँगते है और जब वह काम पर आ भी जाते है तो समय रहते यह कर्मचारी/श्रमिक कार्य तो करते है लेकिन अन्य कही और ज्यादा वेतन मिलने पर यह कार्य छोड़कर चले जाते है, जिससे उद्यमी को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है।
आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता की समस्या
उद्यमी द्वारा अपना उधम जिस जगह स्थापित किया जा रहा है उसे यह देखना चाहिए कि वहां उद्योगों के विकास हेतु आधारभूत सुविधाएं पर्याप्त मात्रा मे उप्लब्ध है या नही। क्योंकि उद्योगों की सफलता एक बड़ी सीमा तक औद्योगिक बस्तियों के निर्माण एवं उनमे उपलब्ध बिजली, पानी, यातायात, संचार, वित्त, गोदाम, अनुसंधान आदि की सुविधाओं पर निर्भर करती है। इसलिए यह देखते हुए कहा जा सकता है कि उद्यमी को उक्त जिन सुविधाओं की उपलब्ध पर्याप्त मात्रा मे उप्लब्ध नही हो पाती वहां समस्या बनी ही रहती है।
विपणन सुविधा का अभाव
एक उद्यमी के सामने सबसे बड़ी समस्या होती है अपने द्वारा बेचे जाने वाले माल का "विपणन" करना। यदि उद्यमी के उधमीय क्षेत्र मे विपणन की सुविधाएं उपलब्ध नही है अथवा अभाव है तो उद्यमी को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उसे अपने माल का विपणन करने के लिए अन्यत्र व्यवस्था करनी होती है। जिसके लिए उसे "यातायात सम्बन्धी" मुश्किलों को भी देखना होता है जिसके कारण उसे काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए उद्यमी को इसके लिए विशेष ध्यान रखना चाहिए।
उत्पादन की पूरानी तकनीक सम्बन्धी समस्या 
उद्यमी के सामने सबसे ज्यादा समस्या इस बात की रहती है कि उसके यहाँ जो उत्पादन सम्बन्धी तकनीक जारी है वह समयानुकूल नही है जिससे माल की क्वालिटी एवं समय की बचत नही हो पाती है इसलिए आज के जटिल तकनीकी वातावरण मे उद्यमी को व्यवसाय के कई पहलुओं से परिचित होना जरूरी होता है। उसे व्यवसाय के प्रबन्धकीय, संगठनात्मक, संचालकीय, वित्तीय, तकनीकी तथा अन्य दूसरे पहलुओं का ज्ञान प्राप्त करना जरूरी होता है। इसके अलावा वर्तमान परिवर्तनशील वातावरण मे नवीनतम जानकारी का उचित प्रशिक्षण लिए बिना कोई भी उधमी अपनी संस्था को सफलता नही दिलवा सकता है।
भुगतान प्राप्त करने मे विलम्ब की समस्या 
उद्यमी अपने माल को उधार भी बेचता है क्योंकि वर्तमान मे बगैर उधारी के माल की ब्रिक्री बहुत कम हो पाती है। अतः कुछ समय की उधारी के आधार पर उद्यमी अपने माल को अपने व्यापारियों को बैच देता है। व्यापारी भी उधारी को निर्धारित अवधि मे भुगतान नही करते तथा समय को प्रायः आगे बढ़ा देते है एवं उसे भुगतान प्राप्त करने मे विलम्ब हो जाता है जिससे उद्यमी को काफी तकलीफ होती है।
दलालों द्वारा शोषण की स्थिति 
ज्यादातर नये उद्यमी को दलालों द्वारा समय-समय पर परेशान किया जाता है। उसे माल के क्रय-विक्रय सम्बन्धी लेने-देनों को नियमानुसार एवं समय से पूरा न कराकर समस्या पैदा कर देते है। वह उद्यमी से ज्यादा मात्रा मे दलाली की माँग कर ब्लैक मेल भी करते रहते है इसी चक्कर मे उद्यमी को उनका समुचित सहयोग न मिल पाने के कारण शोषण की स्थिति मे हो जाते है।
शासकीय नीतियों की समस्या 
उधमी के सामने सबसे बड़ी समस्या उसके व्यवसाय से जुड़ी शासकीय नीतियों से है, क्योंकि सरकार की विकास योजनाओं, कार्यक्रमों, लक्ष्यों तथा आदर्शों मे उद्यमिता का विकास निर्धारित होता है। सरकार की आर्थिक तथा औद्योगिक नीतियों के द्वारा ही उधमिता को विशेष क्षेत्रों मे मोड़ा जा सकता है इसलिए सरकार का समय-समय पर बदलना उद्यमी की समस्या का कारण बनती है क्योंकि प्रत्येक सरकार अपने हिसाब से नीति निर्धारित करती है इसलिए उद्यमी को यह एक बड़ी समस्या के रूप मे दिखाई देती है।
सामाजिक वातावरण के प्रति संचेतना की समस्या
किसी भी उद्यम का सामाजिक वातावरण समाज की मानवीय इच्छाओं, आकांक्षाओं, बोद्धिक स्तर, मूल्यों तथा रीति-रिवाजों से निर्मित होता है। उद्यमी इन तत्वों की उपेक्षा नही कर सकता। वास्तव मे, समाज के मूल्यों की अपेक्षा करके कोई भी उधम सफलतापूर्वक कार्य नही कर सकता। इसी तरह उद्यमी को समाज के प्रति अपने सामाजिक दायित्वों का पूर्ण निष्ठा के साथ निर्वाह करना होता है। उसे सामाजिक स्वतंत्रता तथा सहभागिता को स्वीकार करना होता है। " सामाजिक संचेतना का निर्माण " उद्यमिता की एक महत्वपूर्ण समस्या है।
पूंजी के सदुपयोग की समस्या 
उद्यमी के सामने एक महत्वपूर्ण समस्या आदर्श पूंजी ढांचे के निर्माण की होती है। विवेकपूर्ण तथा सुविचारित पूंजी संरचना से पूंजी की लागत को न्यूनतम रखकर पूंजी का अधिकाधिक उपयोग किया जा सकता है। पर उद्यमी को पूंजी के विभिन्न स्त्रोतों का विश्लेषण करके उचित मात्रा मे सही स्त्रोत से पूंजी प्राप्त करने का प्रबंध करना होता है। साथ ही पूंजी के अधिकतम उपयोग की योजना भी तैयार करनी होती है।
आर्थिक सत्ता के सामाजिक उपयोग की समस्या
उद्यमी अत्यधिक लाभ कमाकर समाज मे अपनी आर्थिक सत्ता स्थापित कर सकता है। कई एकाधिकार की स्थिति मे रहने वाले उद्यम उपभोक्ता का शोषण कर सकते है। पर समाज की दृष्टि से व्यवसाय की आर्थिक सत्ता का समाज के हितों मे ही उपभोग किया जाना चाहिए। वृहत् उद्यमों पर सामाजिक नियंत्रण बनाये रखना आवश्यक होता है। स्वयं  उधमी को समाज के हितों की पूर्ति करते हुए लाभ अर्जित करना होता है। यह लाभ तथा सेवा मे उचित सामंजस्य की समस्या है।
सामाजिक लागतों को न्यूनतम रखने की समस्या
आज नये-नये उधमों की स्थापना के कारण समाज मे बढ़ रहे प्रदूषण, मानवीय मूल्यों के ह्रास, प्राकृतिक असंतुलन, व्यावसायिक अनैतिकता, दूषित प्रवृत्तियों आदि की समस्या बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। सम्पूर्ण समाज व्यवसाय की इन असामाजिक प्रवृत्तियों, अनैतिक कार्यकलापों तथा प्रदूषित वातावरण से पीड़ित है। अतः उद्यमिता का विकास सामाजिक लागतों को न्यूनतम रखकर किया जाना आवश्यक है।
समय प्रबंध की समस्या 
उद्यमी को अपनी संपूर्ण क्रियाओं को नियोजित ढंग से चलाना जरूरी होता है। समय पर माल को बाजार मे लाना समय पर उत्पादन करना, ग्राहकों को सही समय पर सुपुर्दगी देना तथा समस्त प्रबन्ध क्रियाओं को उचित समय पर निष्पादित करना जरूरी होता है। अतः विभिन्न क्रियाकलापों हेतु समय का उचित विभाजन बहुत जरूरी होता है।

प्रबन्धकीय तथा प्रशासनिक समस्याएं 

एक उद्यमी को अपने उधम को विकसित करने हेतु सभी प्रयत्न करने पड़ते है एवं जब व्यवसाय बढ़ जाता है तो उसमे कई श्रमिक/कर्मचारी कार्य करने हेतु रखने पड़ते है जिसमे एकाउन्टैन्ट, सुपरवाइजर, स्टोरकीपर जैसे आदि लोगों को व्यवसाय की देखरेख तथा सुचारूरूप से संचालित करने हेतु रखे जाते है। जिन पर एक  उद्यमी हर समय अपनी निगाह नही रख सकता है सिर्फ उनके विश्वास पर ही हिसाब किताब एवं अन्य व्यवस्थाओं पर विश्वास कर लेता है। इसलिए एक उद्यमी को प्रशासन सम्बन्धी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।

स्वामित्व की समस्याएं 

एक उद्यमी अपने उद्यम के समय के साथ आगे बढ़ाता चलता है तथा पूँजी  मे वृद्धि कर व्यवसाय को चौतरफा फैलाता है, उस फैलाव के साथ-साथ अधिक आमदनी के कारण टैक्स की भी समस्या उसके सामने आती है, उद्यमी इस टैक्स को बचाने हेतु व्यवसाय मे अपने परिवार के अन्य लोगों को शामिल कर लेता है जिसके कारण समय-समय पर उसे स्वामित्व सम्बन्धी समस्याओं से भी जूझना पड़ता है।

अन्य समस्याएं

यह कहना उचित होगा कि उद्यमी समस्याओं के साथ तैयार होता है एवं समस्याओं को साथ लेकर आगे बढ़ता है। उपरोक्त सभी समस्याओं के पारिवारिक, सामाजिक, राजनैतिक समस्याएँ भी उसे परेशान करती है, जिन्हें उसे समय-समय पर हल करना पड़ता है।
संंर्दभ; बी. एन. बी. पब्लिकेशन 
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