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7/03/2020

राज्यपाल की शक्तियाँ व कार्य

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राज्यपाल का पद 

राज्य के अध्यक्ष को राज्यपाल कहा जाता हैं। संविधान के अनुच्छेद 153 द्वारा प्रत्येक राज्य मे राज्यपाल होगा। इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा। संविधान के अनुच्छेद 157 एवं 158 राज्यपाल पद पर प्रतिष्ठित होने वाले व्यक्ति की योग्यताओं का उल्लेख किया गया है जिनके अनुसार जो इनको पूरा करेगा वही व्यक्ति राज्यपाल बन सकता है राज्यपाल पद हेतु योग्यताएं निम्न प्रकार हैं---
राज्यपाल के पद हेतु आवश्यक योग्यताएं
(क) वह भारत का नागरिक हो,
(ख) वह 35 वर्ष की आयु पूरी कर चूका हो,
(ग) राज्यपाल शासन के किसी अन्य पद को धारण नही करेगा।
(घ) वह संसद या विधानमंडल का सदस्य न हो। यदि कोई ऐसा व्यक्ति राज्यपाल नियुक्ति कर दिया जाए जो संसद का या विधानमंडल का सदस्य हो तो उसे, नियुक्त होने की तारीख से पूर्व पद की सदस्यता त्यागनी होगी।
राज्यपाल
राज्यपाल का वेतन
राज्यपाल, मासिक वेतन-भत्ते, नि:शुल्क आवास एवं अन्य विशेषाधिकारों का उपभोग करता है, जो समय-समय पर संसदीय अधिनियम द्वारा निर्धारित किए जाते है। वर्तमान मे उपलब्धियां, भत्ते और विशेषाधिकार, संशोधन अधिनियम 1998 के द्वारा निर्धारित किए गए है। राज्यपाल का वेतन 1 फरवरी, 2018 से 3.5 लाख रूपये प्रतिमास कर दिया गया है। राज्यपाल की पदावधि मे उसके वेतन एवं अन्य विशेषाधिकारों को कम नही किया जा सकता।

राज्यपाल की शक्तियाँ व कार्य (rajyapal ki shaktiya)

संविधान मे राज्यपाल को व्यापक शक्तियाँ प्रदान की गई है। राज्य शासन मे राज्यपाल की वही स्थिति होती है, जो केन्द्रीय शासन मे राष्ट्रीपति की होती है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक अध्यक्ष होता है। केन्द्रीय शासन मे जो शक्तियां राष्ट्रपति को प्राप्त है लगभग वही शक्तियाँ राज्य शासन मे राज्यपाल को प्राप्त है। डाॅ. बसु के अनुसार " संक्षेप मे राज्यपाल की शक्तियाँ राष्ट्रपति के समान है, केवल कूटनीतिक, सैनिक तथा संकटकालीन अधिकारों को छोड़कर।" अतः राज्यपाल को निम्नलिखित शक्तियाँ प्राप्त है---
1. राज्यपाल की कार्यकारिणी शक्तियाँ
(क) राज्यपाल समवर्ती सूची के विषयों पर राष्ट्रपति की स्वीकृति के अन्तर्गत अपने अधिकार का प्रयोग करता है।
(ख) राज्पाल राज्य सरकार के कार्यकरण के सम्बन्धों मे नियम का निर्माण करता है। वह मंत्रियों के बीच कार्यों का भी विभाजन करता है।
(ग) राज्यपाल को मुख्यमंत्री से किसी भी प्रकार की सूचना मांगने का अधिकार है।
(घ) वह मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है तथा उसके परामर्श से अन्य मन्त्रियों की। वह महाधिवक्ता, लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा उसके सदस्यों की नियुक्ति करता है।
(ङ) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति के सम्बन्ध मे उससे सलाह ली जाती है। लोक सेवा आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तों का निर्धारण और उनके कार्यों के सम्बन्ध मे नियम बनाने का अधिकार भी राज्यपाल को दिया गया है।
2. राज्यपाल की आपातकालीन  शक्तियाँ
राज्य मे संवैधानिक संकट उपस्थित होने अथवा राजनीतिक अस्थिरता या अन्य किसी कारण से संवैधानिक तंत्र की असफलता पर राज्यपाल की स्थिति के विषय मे राष्ट्रपति को अपना प्रतिवेदन प्रेषित करता है। उसके प्रतिवेदन के आधार पर अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राज्य मे राष्ट्रीपति शासन लागू किया जाता है। सामान्यतः राज्य विधानसभा मे किसी एक दल का बहुमत न हो और कोई अन्य विकल्प भी न हो तो संवैधानिक तंत्र की विफलता मानी जाती है। राष्ट्रपति शासन के समय राज्यपाल की भूमिका बहुत शक्तिशाली बन जाती है और वह राज्य के वास्तविक शासक की भूमिका का निर्वाह करता है।
3 . राज्यपाल की विधाय शक्तियाँ
(क) राज्यपाल को विधान मंडल को बुलाने तथा उसे सम्बोधित करने का अधिकार है।
(ख) वह विधान सभा को उसका कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व भंग कर सकता है।
(ग) वह किसी एक अथवा दोनों सदनों को सम्बोधित कर सकता है तथा उसमे सन्देश भेज सकता है।
(घ) यदि किसी विधान-मण्डल के दोनों सदनों के मध्य निर्माण सम्बन्धी गत्यावरोध उत्पन्न हो जाता है, तो राज्यपाल संयुक्त अधिवेशन बुला सकता है।
(ङ) विधान मण्डलों द्वारा पारित विधायक पर राज्यपार की स्वीकृति अदिवार्य है।
(च) राज्यपाल विधान परिषद् के सदस्यों की पूरी संख्या के लगभग 1/6 सदस्यों को मनोनीत करता है। ये कला, साहित्य, विधान तथा सामाजिक सेवा मे ज्ञान रखते है।
(छ) आवश्यकतानुसार वह अंग्ल-भारतीय को भी नामंकित कर सकता है।
(ज) निर्वाचन आयोग की मन्त्रणा पर वह किसी सदन के किसी सदस्य की अयोग्यता से संबंधित प्रश्न के विषय मे निर्णय देता है।
4. राज्यपाल की वित्तीय शक्तियाँ
राज्यपाल की सिफारिश के बिना कोई वित्त विधेयक विधानसभा मे प्रस्तावित नही किया जा सकता। यह राज्यपाल का कर्तव्य है कि प्रति वर्ष बजट विवरण विधानसभा मे रखवाये तथा वह पारित किया जाए। राज्य की आकस्मिक निधि उसी के नियंत्रण मे रहती है। विधानसभा से स्वीकृत की अपेक्षा मे वह इस निधि मे से व्यय की अनुमति सरकार को दे सकता है।
5. राज्यपाल की न्यायिक शक्तियाँ
राज्यपाल राज्य के कार्यपालिका क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले कानूनों के विरूद्ध अपराध करने वाले व्यक्तियों को प्राप्त दण्ड को कम करने, स्थगित करने, बदलने और क्षमा प्रदान करने का अधिकार रखते है। राष्ट्रपति राज्य के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय राज्य के राज्यपाल की सलाह लेते है। राज्यपाल के विरूद्ध उसके पदासीन रहने तक कोई मुकदमा नही चलाया जा सकता।
6. राज्यपाल की अन्य शक्तियाँ
उपरोक्त शक्तियों के अतिरिक्त राज्यपाल को कुछ अन्य शक्तियाँ भी प्राप्त है। वह राज्य के आय-व्यय के सम्बन्ध मे महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन को प्राप्त करता है। संविधान के अनुसार राज्य का शासन न चलने पर राज्यपाल राष्ट्रपति को सूचित करता है तथा राज्य मे राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है। किसी भी प्रदेश का राज्यपाल निकटवर्ती संघीय भू-भाग का शासक बनाया जा सकता है। संकटकालीन स्थिति मे वह राष्ट्रपति के अभिकर्त्ता के रूप मे कार्य करता है।

राज्यपाल की वास्तविक स्थिति 

उपरोक्त शक्तियों के विवेचन से यह ऐसा प्रतीत होता है कि राज्यपाल को प्रदेश शासन मे व्यापक शक्तियाँ प्राप्त है, परन्तु वास्तविकता यह है कि विधानसभा मे बहुमत प्राप्त न होने जैसी विषय परिस्थितियों मे मुख्यमंत्री को चुनने के स्वविवेकी अधिकार के अतिरिक्त उसके पास कोई ऐसी शक्ति नही है जिसका प्रयोग वह अपनी मर्ज़ी से करता हो।
वह मुख्यमंत्री तथा अन्य मन्त्रियों की नियुक्ति मे स्वतंत्र नही होता है। वह अपनी मन्त्रिपरिषद् से परामर्श करके कार्य करने के लिये बाध्य होता है। उसकी स्थिति पर प्रकाश डालते हुये कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने कहा था, " वर्तमान संविधान मे राज्यपाल मन्त्रियों के परामर्श से ही कार्य करेगे। भारत के वर्तमान संविधान मे राज्यपाल के स्वविवेक की शक्तियाँ व व्यक्तिगत निर्णय की शक्तियाँ छीन ली गई है। राज्यपाल को अवश्य ही मन्त्रियों के परामर्श के अनुसार कार्य करना चाहिए।
किन्तु राज्यपाल को पूर्णतया शक्तिहीन नही रखा गया है। संविधान की यह भावना है कि राज्यपाल सरकार के मार्गदर्शक बने, उन्हें आवश्यक सलाह दे तथा जहाँ आवश्यक उन्हें समझें वा चेतावनी दे। अनेक ऐसे अवसर आते है कि मुख्यमंत्री व मन्त्रिगण उससे गुप्त सूचना व सलाह प्राप्त करते है। वह उन्हें सही सलाह देता है और उसकी सलाह व परामर्श को मुख्यमंत्री व मंत्री सभी मानते है। राज्यपाल शासन न करते हुये भी राज्य के शासन संचालन पर पर्याप्त प्रभाव रखता है।
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