7/02/2020

भारतीय प्रधानमंत्री की शक्तियां व कार्य एवं भूमिका

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भारतीय प्रधानमंत्री 

प्रधानमंत्री की शक्तियां व कार्य; संविधान के अनुच्छेद 74 का उपबन्ध है कि राष्ट्रपति को उसके कार्यों के निर्वहन मे सहायता और सलाह हेतु एक मंत्रिपरिषद् होगी जिसका प्रधान, प्रधानमंत्री होगा। राष्ट्रपति को उसकी सलाह अनुसार ही कार्य करना है। अअनुच्छेद 75 के अन्तर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्तियां वह प्रधानमंत्री की सलाह से करता है। प्रधानमंत्री की नियुक्ति हेतु एक मात्र शर्त यह है कि उसे लोकसभा सदस्यों के बहुमत का समर्थन हो। किसी पार्टी अथवा संयुक्त रूप से किसी गठबन्ध को लोकसभा मे बहुमत प्राप्त हो तो इसमे कठिनाई नही होती। संसदीय परम्परानुसार राष्ट्रपति को बहुमत वाले दल अथवा गठबन्ध के नेता को ही प्रधानमंत्री पद हेतु आमंत्रित कर सरकार बनाने को कहना है।
भारत के प्रधानमंत्री का पद भारत मे इतना महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री लोक प्रशासन और शासन तन्त्र की उसी प्रकार आधारशिला है जिस तरह कि विद्वानों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के लिए कहा है।

भारत के प्रधानमंत्री का चुनाव 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 (1) मे कहा गया है कि प्रधानमंत्री संघीय मंत्रिपरिषद् का नेता होता है। वह लोकसभा मे बहुमत दल का नेता होता है। प्रधानमंत्री की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। वह ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद पर चुनता है जो लोकसभा के बहुमत दल का नेता होता है। राज्य सभा का सदस्य भी प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त हो सकता है लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि उसे लोकसभा का बहुमत प्राप्त हो। उप-प्रधानमंत्री के रूप मे यदि कोई व्यक्ति शपथ ग्रहण करता है तो वह अवैध नही माना जाएगा। उप-प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री के अधिकार नही मिलेंगे।
भारत के प्रधानमंत्री

भारत के प्रधानमंत्री की शक्तियाँ व कार्य (bharat ke pradhanmantri ki shaktiyan)

Bharat ke pradhanmantri ki shaktiyan;शासन की कार्यकारी शक्तियों का वास्तविक उपयोग करते हुए प्रधानमंत्री की अनेक शक्तियां है। इन शक्तियों का उपयोग करते हुए उसके महत्वपूर्ण कार्य निम्म कहे जा सकते है--
1. मन्त्रिपरिषद् का निर्माण, परिवर्तन और उनमें विभागों का विभाजन एवं उनमे समन्वय।
2. प्रधानमंत्री का महत्वपूर्ण कार्य राष्ट्रपति को प्रत्येक मामले से अवगत कराना, उसे सलाह देना और उससे सलाह लेकर उचित नीतियों का निर्धारण करना है।
3. संघसूची के विषयों पर कानून बनाने की नीति तथा कार्यक्रमों की रूपरेखा को अन्तिम रूप देना।
4.  रक्षा, गृह, विदेश, वित्त उद्योग इत्यादि पर प्रमुख नीतियों को निर्धारित करना एवं उनके क्रियान्वयन की व्यवस्था करना।
5. संसद शासन के पक्ष का सर्मथन करना।
6. देश की समस्याओं एवं विकास सम्बन्धी नीतियों का स्पष्ट करना।
7. राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय मंचो पर भारत की नीतियों को प्रस्तुत करना।
8. राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता को बनाए रखने हेतु उचित कदम उठाना।
9. योजना आयोग के अध्यक्ष के नाते योजनाओं के निर्माण, क्रियान्वयन एवं संसाधन बाबत् राष्ट्र निर्माण व विकास के सार्थक प्रयास करना। योजना आयोग को नीति आयोग मे परिवर्तित कर उसमे राज्यों के कुछ मुख्यमंत्रियों का समावेश भी किया गया है।
10. संविधान व कानून के संरक्षण के दायित्वों का निर्वहन, विशेषतः भारत के संघात्मक स्वरूप के संदर्भ मे केन्द्र व राज्यों के समन्वय का कार्य करना।
11. महत्वपूर्ण प्रशासनिक व राजनयिक पदों पर नियुक्तियों हेतु राष्ट्रपति को सलाह देना।

भारत के प्रधानमंत्री की भूमिका अथवा अधिकार 

देश की वास्तविक कार्यपालिका के रूप मे प्रधानमंत्री की बहुआयामी भूमिका है। वह मंत्रिपरिषद् रूपी मेहराब की आधारशिला के साथ ही शासन- सत्ता का केन्द्र बिन्दु है।
1. विदेशों मे राष्ट्र का प्रतिनिधित्व
प्रधानमंत्री विदेशी राजनीतिज्ञों से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने और उन संबंधों को बढ़ाने के प्रयास मे रहता है। वह अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के लिए विदेशों मे जाता है। वहां वह देश के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए वार्ता करता है और देश की नीतियों के निर्धारण करने के लिए सदैव अग्रसर रहता है।
2. लोकतांत्रिक शासन का प्रमुख
भारत के लोकतांत्रिक शासन का प्रमुख होने के नाते जनसाधारण की समस्याओं का निराकरण तथा संवैधानिक निर्देशों का पालन प्रधानमंत्री एवं उसकी मंत्रिपरिषद् की कार्यप्रणाली का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। अतः जन समर्थित राजनीतिक व प्रशासनिक ध्येयों की पूर्ति उसका लक्ष्य होता है। जनता प्रधानमंत्री की भूमिका को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
3. मंत्रि परिषद् का गठन करना
प्रधानमंत्री स्वयं निर्वाचित हो जाने के बाद राष्ट्रपति की सलाह से सुयोग्य मंत्रियों को नियुक्त करता है और उन्हें देश की शासन-व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए विभिन्न विभाग देता है। और इस प्रकार मंत्रिपरिषद् का गठन करता है। मंत्रिपरिषद् के अंतर्गत विभिन्न मंत्री अपने-अपने विभाग देखते है।
4. मंत्रियों की नियुक्ति और पदच्युत करना
भारत के प्रधानमंत्री को यह अधिकार प्राप्त है कि वह मंत्रिपरिषद् के लिए विभिन्न मंत्रियों को नियुक्त करे। प्रधानमंत्री को किसी भी मंत्री को पद से हटाने, मंत्रिमंडल से बाहर करने, मंत्रिमंडल का पुनर्गठन करने का महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त है। प्रधानमंत्री के प्रभाव से ही प्रत्येक मंत्री सुचारू ढंग से कार्य करता है।
5. संसद का नेतृत्व
लोकसभा के बहुमत दल के नेता होने से प्रधानमंत्री को संसद के दोनों सदनों मे एक कुशल राजनीतिज्ञ की भूमिका अदा करनी पड़ती है। विपक्ष तथा अन्य अल्पमत दलों से तालमेल रखकर कार्य करना होता है। संसद मे प्रस्तुत किये जाने वाले विधेयक, प्रस्ताव, बजट अविश्वास मत आदि पर दोनों सदनों मे शासन की नीति का बचाव उसका महत्वपूर्ण कार्य है। सांसदो की क्षेत्रीय समस्याओं का निवारण भी उसका दायित्व होता है। लोकसभा की कार्यसूची एवं व्यवस्था स्थापित करने मे प्रधानमंत्री का प्रमुख योगदान होता है। अतः संसद के सकारात्मक नेतृत्व मे प्रधानमंत्री की भूमिका एक कुशल राजनीतिज्ञ के रूप मे परिलक्षित होती हैं।
6. सरकारी नीति की व्याख्या करना
प्रधानमंत्री को सरकारी नीति निर्धारित करने और सरकारी नीति की व्याख्या करने का अधिकार होता है। राष्ट्रपति के लिए वह सरकारी नीति को स्पष्ट कर सकता है और अपने मंत्रियों के माध्यम से उचित कार्यवाही कर सकता है।
7. विभिन्न विभागों को देखना
प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह अपने द्वारा निर्मित मंत्रिमंडल के विभिन्न विभागों की देखरेख रखे, उन विभागों पर नियंत्रण रखे ताकि वे अपने पद का दुरूपयोग न करे। वह विभिन्न मंत्रालयों के झगड़ों और मतभेदों का निपटारा करता है।
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1 टिप्पणी:
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  1. बेनामी30/12/23, 6:06 am

    कैलाश जी पॉलिटि ke new notes av date kro sir ji thanks 🙏 जय हिन्द

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