3/10/2022

जाति और वर्ग में अंतर

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जाति और वर्ग में अंतर 

jati or varg vyavastha me antar;जाति प्रथा और वर्ग व्यवस्था में निम्नलिखित अंतर हैं--
1. जाति एक बंद वर्ग हैं जबकि वर्ग में खुलापन पाया जाता हैं 
चूँकि जाति का आधार जन्म हैं, अतः उसकी सदस्यता जीवनपर्यंत होती हैं उसे बदला नही जा सकता, जबकि वर्ग का आधार शिक्षा, व्यवसाय, सम्पत्ति, आदि होने से इसे बदला जा सकता हैं। एक व्यक्ति धन अर्जित कर श्रमिक वर्ग से मालिक वर्ग में एवं शिक्षा ग्रहण कर शिक्षितों के वर्ग में जा सकता है। इसी कारण कहा जा सकता है कि जाति एक बंद वर्ग हैं, जबकि वर्ग में खुलापन पाया जाता हैं। 
2. जाति का आधार जन्म है वर्ग का नहीं
जाति-व्यवस्था के अन्तर्गत एक व्यक्ति उसी जाति का सदस्य होता हैं जिसमें उसने जन्म लिया हैं। वर्ग का आधार शिक्षा, सम्पत्ति, पेशा तथा धर्म, आदि होने के कारण इनमें से व्यक्ति जिसे भी प्राप्त कर लेता हैं, उसी के आधार पर उसकी वर्ग सदस्यता का निर्धारण होता हैं। 
3. जाति की सदस्यता प्रदत्त है वर्ग की अर्जित
एक व्यक्ति जाति की सदस्यता प्रयत्न करने पर बदल नहीं सकता क्योंकि वह समाज द्वारा जन्म के आधार पर एक ही बार प्रदान की जाती हैं अतः यह स्थिर भी हैं, जबकि एक व्यक्ति जागरूक प्रयत्नों द्वारा किसी भी वर्ग की सदस्यता प्राप्त कर सकता हैं इसलिए वर्ग की सदस्यता अर्जित हैं। 
4. जाति में पेशे निश्चित होते हैं, वर्ग में नहीं 
जाति-व्यवस्था में प्रत्येक जाति का व्यवसाय परम्परागत एवं पूर्व-निर्धारित होता हैं उसी को अपनाकर जाति के सदस्य अपना जीवनयापन करते हैं। वर्ग का कोई निश्चित पेशा नहीं होता। एक वर्ग के लोग अपनी क्षमता तथा योग्यता के अनुसार विभिन्न व्यवसायों में लगे होते हैं। सभी श्रमिक एक ही व्यवसाय नहीं करते एवं न सभी पूँजीपति एक ही धन्धे में पूँजी लगाते हैं। 
5. जाति में खान-पान पर प्रतिबंध हैं, वर्ग में नहीं 
प्रत्येक जाति के खान-पान संबंधी नियम होते हैं, सदस्य यह जानते हैं कि वे किन-किन जातियों के यहाँ कच्चा व पक्का भोजन, पानी तथा हुक्का-बीड़ी ग्रहण कर सकते हैं एवं किन के यहाँ नहीं, जबकि वर्ग में इस तरह के कठोर प्रतिबंध नहीं होते हैं। 
6. जाति अन्तर्विवाही हैं, वर्ग नहीं 
एक जाति के सदस्य सामान्यतः अपनी ही जाति में विवाह कर सकते हैं, जबकि एक वर्ग के लोग अपने से ऊँचे एवं नीचे वर्ग में विवाह कर सकते हैं। 
7. जाति वर्ग की अपेक्षा अधिक स्थिर हैं
चूँकि जाति की सदस्यता जन्म पर आधारित होती हैं, तथा यह बदली नहीं जाती हैं, अतः जाति-व्यवस्था एक स्थिर संगठन हैं। दूसरी तरफ वर्ग-व्यवस्था समाज की सामाजिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलती रही हैं। सामन्त, दास, भूस्वामी, जोतदार, पूँजीपति, श्रमिक, आदि के रूप में समय-समय पर अनेक वर्ग अस्तित्व में आते रहे हैं। 
8. वर्ग की अपेक्षा जातियों का संस्तरण अधिक निश्चित तथा स्पष्ट 
जाति-व्यवस्था में एक जाति से दूसरी जाति के बीच सामाजिक दूरी निश्चित होती हैं, कौन-सी जाति किससे ऊँची व किससे नीची हैं, यह स्पष्ट है पर वर्ग व्यवस्था में एक संस्तरण होते हुए भी संस्तरण के नियम कठोर नहीं हैं, एक वर्ग के महत्व को दूसरे की अपेक्षा कम नहीं कहा जा सकता।
शायद यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

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