2/05/2022

राजनीतिक सिद्धांत का अर्थ, परिभाषा, महत्व/उपयोगिता

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प्रश्न; राजनीतिक सिद्धांत का अर्थ एवं महत्व बताइए। 

अथवा" राजनीतिक सिद्धांत से आप क्या समझते है? राजनीतिक सिद्धांत की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए। 

अथवा" राजनीतिक सिद्धांत क्या है? राजनीतिक सिद्धांत के लाभों का वर्णन कीजिए। 

अथवा" राजनीतिक विज्ञान में राजनीतिक सिद्धांत की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-- 

राजनीतिक सिद्धांत का अर्थ (rajnitik siddhant kya hia)

राजनीतिक सिद्धांत राजनीतिक घटनाओं, तथ्यों और अवलोकन पर आधारित निष्कर्षों के समूह को कहते हैं। ये निष्कर्ष परस्पर सम्बद्ध होते हैं तथा इनके आधार पर वैसे ही तथ्यों या घटनाओं की व्याख्या या पूर्व कथन किया जा सकता हैं। नवीन घटनाओं एवं तथ्यों के सन्दर्भ में उक्त निष्कर्षों एवं उपलब्धियों में सुधार या संशोधन किया जाता हैं। अनुभव पर आधारित तथ्यों की जांच की जा सकती हैं तथा उन्हें दूसरे व्यक्तियों तक संचारित या प्रेषित किया जा सकता हैं। इस तरह राजनीतिक सिद्धांत राजनीति से निष्कर्षों का समूह हैं। 

राजनीतिक सिद्धांत अंग्रेजी भाषा के शब्द Political Theory का हिंदी रूपांतरण हैं। Theory शब्द की उत्पत्ति यूनायी भाषा के Theoria से हुई हैं, जिसका अर्थ होता हैं-- एक ऐसी मानसिक दृष्टि जो एक वस्तु के अस्तित्व और उसके कारणों को प्रकट करती हैं। कार्ल पाॅपर की के मतानुसार सिद्धांत एक प्रकार का जाल है, जिसमें संसार को समझा जा सकता हैं। ये एक ऐसी मानसिक स्थिति है जो एक वस्तु के अस्तित्व और उसके कारणों को सामने रखती हैं।

वर्तमान समय में राजनीति सिद्धान्त शब्दावली का प्रयोग विस्तृत अर्थ में होता है। राजनीति सिद्धान्त, राजनीति के अथवा उसके विषय से जुड़ा एक सिद्धान्त है। यह राजनीति का विज्ञान है, उसका दर्शन है और उसका इतिहास भी है। अपने शाब्दिक रूप में यह दो शब्दों से मिलकर बना है, राजनीति व सिद्धान्त। 

अपने अस्तित्व की रक्षा एवं विषय के विकास की दृष्टि से राजनीति विज्ञान को एक सामान्य सिद्धान्त (General Theory) की सबसे अधिक आवश्यकता है। 

कैटिलन ने लिखा हैं," किसी भी विज्ञान की परिक्वता उसके सामान्य सिद्धान्त की एकरूपता एवं अमूर्तिकरण की स्थिति से जानी जाती हैं।" डेविड ईस्टन ने राजनीति विज्ञान में सिद्धान्त की भूमिका एवं महत्व पर सबसे अधिक जोर दिया है। उसी ने सर्वप्रथम राजनीतिक विज्ञानियों का ध्यान राजनीतिक सिद्धान्त या राज्य सिद्धान्त की आवश्यकता की ओर खींचा हैं। उसके अनुसार किसी भी विज्ञान की अभिवृद्धि आनुभाविक अनुसंधान एवं सिद्धान्त दोनों के विकास एवं उनके मध्य घनिष्ठ संबंध पर निर्भर करती हैं।

राजनीतिक सिद्धांत की परिभाषा (rajnitik siddhant ki paribhasha)

राजनीति विज्ञान शब्दकोष के अनुसार," राजनीति सिद्धान्त राजनीतिक घटनाचक्र का मूल्यांकन है, उसकी व्याख्या तथा उसकी भविष्यवाणी करने वाले चिन्तन का समूह है।" 

डेविड हैल्ड ने अपनी पुस्तक  'Political Theory Today' मे लिखा है कि," राजनीति सिद्धान्त राजनीतिक जीवन विषयक अवधारणाओं व सामान्य सिद्धान्त का ताना-बाना है। जिसमें हम सरकार, राज्य व समाज की मुख्य विशेषताओं उनकी प्रकृति व उद्देश्य से सम्बन्धित विचारों मान्यताओं व वक्तव्यों तथा मनुष्यों के राजनीतिक सामर्थ्य का अध्ययन करते है।" 

एण्ड्यू हैक्कर के अनुसार," राजनीति सिद्धान्त एक ओर बिना किसी पक्षपात के अच्छे राज्य तथा अच्छे समाज और दूसरी ओर राजनीतिक एवं सामाजिक वास्तविकताओं की पक्षपातरहित जानकारी की तलाश है।"

जॉन प्लेमेन्टज के मतानुसार," राजनीतिक सिद्धांत सरकार के कार्यों की व्याख्या के साथ-साथ सरकार के उद्देश्यों का भी व्यवस्थित चिन्तन है।"

नेडल के अनुसार," सिद्धान्त का अर्थ हैं, प्रत्यात्मक योगना की तार्किक रूपरेखा अथवा ढाँचा।" 

जार्ज कैटलीन के अनुसार," राजनीतिक सिद्धान्त राजनीति विज्ञान और राजनैतिक दर्शन दोनों का मिश्रण हैं, जहाँ सम्पूर्ण सामाजिक जीवन के नियंत्रण के विभिन्न स्वरूपों की प्रक्रिया की ओर ध्यान आकर्षित करता हैं।

जार्ज सेबाइन के अनुसार,"व्यापक तौर पर राजनीतिक सिद्धांत से अभिप्राय उन सभी बातों से है जो राजनीति से सम्बन्धित हैं और संकीर्ण अर्थ में यह राजनीतिक समस्याओं की विधिवत छानबीन से सरोकार रखता है।"

गुल्ड और कोल्ब ने राजनीतिक सिद्धांत को परिभाषित करते हुए लिखा है कि," राजनीतिक सिद्धान्त, राजनीति विज्ञान का एक उप-क्षेत्र है, जिसमें निम्नलिखित का समावेश है--

1.राजनीतिक दर्शन-राजनीति का एक नैतिक सिद्धान्त और राजनीतिक विचारों का एक ऐतिहासिक अध्ययन 

2. एक वैज्ञानिक मापदंड, 

3. राजनीतिक विचारों का भाषाई विश्लेषण,

4. राजनीतिक व्यवहार के बारे में सामान्यीकरणों की खोज और उनका व्यवस्थित विकास।

राजनीतिक सिद्धान्त की उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि राजनीतिक सिद्धान्त मुख्यतः दार्शनिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से राज्य का अध्ययन है। सिद्धान्तों का सम्बन्ध केवल राज्य तथा राजनीतिक संस्थाओं की व्याख्या,  वर्णन तथा निर्धारण से ही नहीं हैं बल्कि उसके नैतिक उद्देश्यों का मूल्यांकन करने से भी है। इनका सम्बन्ध केवल इस बात का अध्ययन करना ही नहीं है कि राज्य कैसा है बल्कि यह भी कि राज्य कैसा होना चाहिए। 

एक लेखक के अनुसार," राजनीतिक सिद्धान्तों को एक गतिविधि के रूप में देखा जा सकता है जो व्यक्ति के सार्वजनिक और सामुदायिक जीवन से सम्बन्धित प्रश्न पूछती है उसके सम्भव उत्तर तलाश करती है तथा काल्पनिक विकल्पों का निर्माण करती है। अपने लम्बे इतिहास में ये इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर खोजते रहे हैं जैसे राज्य की प्रकृति और उद्देश्य क्या है? एक राज्य दूसरे राज्य से श्रेष्ठ क्यों हैं? राजनीतिक संगठनों का उद्देश्य क्या है? इस उद्देश्यों के मानदण्ड क्या होते हैं? राज्य तथा व्यक्ति में सम्बन्ध क्या है? आदि। प्लेटो से लेकर आज तक राजनीतिक चिन्तक इन प्रश्नों के उत्तर तलाश कर रहे हैं क्योंकि इन उत्तरों के साथ व्यक्ति का भाग्य अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। आरम्भ से ही सिद्धान्त उन नियमों की खोज में लगे हुए हैं जिनके आधार पर व्यक्ति एक ऐसे राजनीतिक समुदाय का विकास कर सके जिसमें शासक और शासित दोनों सामान्य हित की भावना से प्रेरित हों। यह आवश्यक नहीं कि राजनीतिक सिद्धान्त सभी राजनीतिक प्रश्नों के कोई निश्चित व अन्तिम हल ढूँढ़ने में सफल हो जायें परन्तु ये हमें उन प्रश्नों के हल के लिये सही दिशा संकेत अवश्य दे सकते हैं।"

राजनीतिक सिद्धांत का महत्व अथवा उपयोगिता (rajnitik siddhant ka mahatva)

राजनीतिक सिद्धांत की महत्ता का प्रतिपादन करते हुए यूजीन जे महीन ने लिखा हैं, अपने आदर्शरूप मे सिद्धान्त एक निर्माण की प्रक्रिया है तथा एक कला की कृति हैं। अच्छे सिद्धांत सौंदर्य की वस्तुयें तथा सौंदर्य की मूल्य होती हैं-- उर्वर, विचारोत्तेजक, सरल, उत्पादक व संतोषप्रद।' राजनीतिक सिद्धांतों द्वारा एक आदर्श समाज की रूपरेखा बनती हैं इसलिए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में राजनीतिक सिद्धान्तों का बहुत महत्व हैं। राजनीतिक सिद्धांतों के महत्व का अध्ययन निम्नांकित रूप में किया जा सकता हैं-- 

1. सामाजिक परिवर्तन को समझने में सहायक 

मानव समाज एक गतिशील संस्था है जिसमें दिन प्रतिदिन परिवर्तन होते रहे हैं। ये परिवर्तन समाज के राजनीतिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक जीवन पर कुछ न कुछ प्रभाव डालते हैं। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन देशों में स्थापित सामाजिक व्यवस्थाओं के विरूद्ध क्रान्ति हुई अथवा विद्रोह हुआ उसका मुख्य कारण उस समय की स्थापित सामाजिक व्यवस्थाएं (Established Social Order) नई उत्पन्न परिस्थितियों के अनुकूल नहीं थीं फ्रांस की सन् 1789 की क्रांति का उदाहरण हमारे सामने है। कार्ल मार्क्स ने राजनीतिक सिद्धान्त को एक विचारधारा (Ideology) का ही रूप माना है और उसका विचार था कि जब नई सामाजिक व्यवस्था (वर्ग-विहीन तथा राज्य विहीन समाज) की स्थापना हो जाएगी तो फिर सिद्धान्तीकरण की आवश्यकता नहीं रहेगी। मार्क्स ने एक विशेष विचारधारा और कार्यक्रम के आधार पर वर्गविहीन और राज्य विहीन समाज की कल्पना की थी। उसका यह विचार ठीक नहीं है कि समाज स्थापित हो जाने के पश्चात सिद्धान्तीकरण (Theorising) की आवश्यकता नहीं रहेगी। 

2 . राजनीतिक सिद्धान्त की राजनीतिज्ञों, नागरिकों तथा प्रशासकों के लिए उपयोगिता 

राजनीतिक सिद्धान्त के द्वारा वास्तविक राजनीति के अनेक स्वरूपों का शीघ्र ही ज्ञान प्राप्त हो जाता है जिस कारण वे अपने सही निर्णय ले सकते हैं। 

डॉ. श्यामलाल वर्मा ने लिखा है, " उनका यह कहना केवल ढ़ोंग या अहंकार है कि उन्हें राज सिद्धान्त की कोई आवश्यकता नहीं है या उसके बिना ही अपना कार्य कुशलतापूर्वक कर रहे हैं अथवा कर सकते हैं। वास्तविक बात यह है कि ऐसा करते हुए भी वे किसी-न-किसी प्रकार के राज सिद्धान्त को काम में लेते हैं।

3. वास्तविकता का ज्ञान

राजनीतिक सिद्धांत से हमे वास्तविकता के बारें में जानकारी मिलती हैं। राजनीतिक सिद्धांत अपनी वैज्ञानिक विषयवस्तु के द्वारा अनुशासन में एकरूपता तथा सम्बद्धता का विकास करते है। इस प्रक्रिया में अनुशासनात्मक स्तर उच्चतर बनता है जिससे अनेक घटनाओं तथा तथ्यों को समझने में सहायता मिलती हैं। 

4. समस्याओं के समाधान में सहायक 

राजनीतिक सिद्धांतों का महत्व राजनीतिक समस्याओं के समाधान से जुड़ा हुआ हैं। एक राजनीतिक चिंतक परिस्थितियों का गहन अध्ययन करता है और उस परीक्षण के आधार पर अपने कुछ समाधान प्रस्तुत करता हैं, जिनसे मानव-जीवन यानि सम्पूर्ण व्यवस्था को लाभ प्राप्त होता हैं। अतः समस्याओं के समाधान के दृष्टिकोण से राजनीतिक सिद्धांत की बहुत उपयोगिता हैं। 

5. वैज्ञानिक व्याख्या में सहायक 

सिद्धांत वैज्ञानिक व्याख्याएँ प्रस्तुत करने में सहायक होते है। यह राजनीति विज्ञान को सामान्यीकरणों पर आधारित करके राजनीतिक व्यवहार को एक विज्ञान बनाने का प्रयास करता है। यह नवीन क्षेत्रों की खोज कर नवीन सिद्धांतों को नियमिऔ करता हैं। राजवैज्ञानिक राजनीतिक सिद्धांतों के आधार पर ही भविष्य में घटने वाली घटनाओं और प्राप्त होने वाले परिणामों के संबंध में पूर्व कथन कर सकते हैं। 

6. मावन समाज की प्रगति के लिए आवश्यक 

राजनीतिक सिद्धांत मानव समाज की राजनीतिक, संवैधानिक तथा वैधानिक प्रगति में सहायक होते हैं। इनके द्वारा नवीन तथ्यों का ज्ञान तथा आने वाली समस्याओं के संबंध में पूर्वानुमान करने में सहायता प्राप्त होती है। वर्तमान वैज्ञानिक युग में राजनीतिक सिद्धांत और अधिक उपयोगी हैं। 

7. भविष्य की योजना में सहायक 

राजनीतिक सिद्धांत का उद्देश्य केवल वर्तमान परिस्थितियों की समालोचना करना ही नही हैं, वरन् भविष्य के लिए योजना निर्धारित करना भी है, ताकि एक बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सके। उदाहरणार्थ, प्लेटो के द्वारा अपनी प्रथम व महत्वपूर्ण आदर्शवादी रचना 'The Republic' में न्याय, शिक्षा और साम्यवादी सिद्धान्तों के साथ-साथ अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन आदर्श राज्य की परिकल्पना हेतु किया गया है। इसी प्रकार सकारात्मक उदारवादी चिन्तकों के द्वारा न्यायपूर्ण समाज के लिए लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना में विभिन्न सिद्धांतों का प्रतिपादन किया जाता रहा हैं। 

8. औचित्यपूर्ण सिद्ध करना 

राजनीतिक क्षेत्र में विभिन्न कार्यों का औचित्य प्रतिपादित करने का कार्य राजनीतिक सिद्धांत करते हैं। जनता की दृष्टि में शासन प्रणाली एवं शासकों को औचित्यपूर्णता प्रदान करने में सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण की भूमिका निभाते हैं। विशिष्ट वर्ग प्रायः अपनी श्रेष्ठता को बनाये रखने हेतु इसी उपकरण की मदद लेता हैं। 

9. नवीन धारणाओं का विकास 

सभी समयों में परिस्थितियाँ एक जैसी नही होती। प्रत्येक राजनीतिक विचारक अपने समय की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नई-नई अवधारणाएँ प्रस्तुत करता हैं। मध्यकालीन युग के बाद बौद्धिक जागरण, धार्मिक सुधार आंदोलन व औद्योगिक क्रांति ने उदारवाद को सामने लाया और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अवधारणा का जन्म हुआ, उसी प्रकार परम्परागत उदारवादी सिद्धांत के विरोध में समाजवादी और मार्क्सवादी सिद्धांत का उदय और आर्थिक समानता की अवधारणा का विकास हुआ। अतः यह कहा जा सकता हैं कि बदलती परिस्थितियों में राजनीतिक सिद्धांत नवीन मानवीय मूल्यों की स्थापना में सहायक साबित होते हैं। 

10. अनुशासन बनाये रखना 

राजनीति विज्ञान का एकीकरण, शोध विभाजन आदि राजनीतिक सिद्धांत पर ही निर्भर रहता हैं क्योंकि इससे व्यवहार में अनुशासन बनाये रखने में सहायता मिलती हैं।

11.  संतुलनकारी भूमिका 

राजनीतिक सिद्धांत घटनाओं तथा मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने का कार्य अच्छी तरह से करते हैं। घटनाओं और मानवीय मूल्यों के बीच सन्तुलन स्थापित करने के लिए ही राजनीतिक सिद्धांतों को अपने स्वरूप में परिवर्तन लाना पड़ता हैं।

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