9/08/2020

राजनीति विज्ञान अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र

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राजनीति विज्ञान का अर्थ (rajniti vigyan ka arth)

rajniti vigyan meaning in hindi;राजनीति विज्ञान एक सामाजिक विज्ञान है। अंग्रेजी भाषा मे इसको political science कहते है। इसके अन्तर्गत सामाजिक जीवन के राजनैतिक सम्बन्ध एवं संगठनों का अध्ययन आता है। आगे जानेंगे राजनीति विज्ञान की परिभाषा, राजनीति विज्ञान का क्षेत्र। 
राजनीति का अंग्रेजी समानार्थक शब्द  " पाॅलिटिक्स" यूनानी भाषा के शब्द से बना है। इसका अर्थ है-- "नगर राज्य" प्राचीन यूनान मे छोटे-छोटे "नगर राज्य" होते थे। अरस्तु के समय मे यूनान मे एथेन्स, स्पार्टा आदि अनेक नगर राज्य थे। ये नगर राज्य अपने आप मे एक स्वतंत्र संगठित इकाई होते थे। " पाॅलिटिक्स" शब्द से इन्ही नगर राज्यों की शासन व्यवस्था का बोध होता था। धीरे-धीरे समय बीतता गया। मानव समाज मे व्यापक राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक परिवर्तन हुए। फलतः अब नगर राज्यों का स्थान राष्ट्रीय राज्यों ने ले लिया। राज्य के आकार को बढ़ाने मे पहले धर्म, फिर विज्ञान का बहुत बड़ा हाथ रहा। राज्य के आकार के बढ़ने के साथ-साथ राजनीति का क्षेत्र भी व्यापक होता गया। आधुनिक काल मे जीवन के सभी अंगों का अध्ययन वैज्ञानिक ढंग से होने लगा है। अतः राज्य से सम्बंधित मानव के कार्य-कलापों का अध्ययन भी व्यवस्थित रूप से वैज्ञानिक ढंग से किया जाने लगा। राज्य-विषयक यह अध्ययन ही राजनीतिक-विज्ञान कहलाता है।

राजनीतिक विज्ञान की परिभाषा (rajniti vigyan ki paribhasha)

राजनितिक विज्ञान की परिभाषा देते हुए विद्वानों ने उसके अलग-अलग पहलुओं को देखा है। राजनीतिक विज्ञान की परिभाषाएं निम्न दो दृष्टिकोण से की है--

(अ) परम्परागत दृष्टिकोण 

इस दृष्टिकोण के विद्वानों ने राजनीतिक विज्ञान के अध्ययन का मुख्य क्षेत्र राज्य व सरकार को माना है। इन विद्वानों की मुख्य परिभाषाएं निम्न प्रकार है--
गिल क्राइस्ट के शब्दों मे " राजनीतिक विज्ञान के अन्तर्गत राज्य एवं सरकार का अध्ययन किया जाता है।" ये विद्वान मानते है कि राज्य और सरकार पृथक नही हैं।
गार्नर के शब्दों मे " राजनीतिक विज्ञान का प्रारंभ और अन्त राज्य से होता है।"
लीकाॅक के शब्दों में " राजनीतिशास्त्र सरकार का अध्ययन करता है।"
उक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि राजनीतिशास्त्र राज्य पर केन्द्रित है तथा राज्य ही राजनीतिशास्त्र के अध्ययन का मुख्य विषय है।

(ब) आधुनिक दृष्टिकोण 

इस दृष्टिकोण के विद्वानों ने राजनीतिक विज्ञान की परिभाषा को राज्य तक सीमित नही रखा है, बल्कि इसमे राज्य के अतिरिक्त सम्पूर्ण राजनीतिक व्यवस्था को भी शामिल किया है। इस दृष्टिकोण की मुख्य परिभाषाएं निम्न प्रकार है--
डाॅ. हजसार और स्टीवेन्सन " राजनीतिक विज्ञान अध्ययन का वह क्षेत्र है, जो प्रमुख रूप से शक्ति सम्बन्धों का अध्ययन करता है। इन शक्ति सम्बन्धों के कुछ प्रमुख रूप है व्यक्तियों मे परस्पर व्यक्ति और राज्य के मध्य शक्ति सम्बन्ध और राज्यों मे परस्पर शक्ति सम्बन्ध।"
डट्टल के अनुसार " शक्ति, शासन और अधिकार राजनीतिशास्त्र है।"
डाॅ. नागपाल के शब्दों मे " राजनीतिक विज्ञान राज्य का शासन का, मनुष्य के राजनीतिक क्रिया-कलापों का विज्ञान है।
उपयुक्त परिभाषा
उपरोक्त सभी परिभाषाओं के अध्ययन के आधार पर राजनीतिक शास्त्र की एक ही उपयुक्त परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है कि राजनीतिशास्त्र समाज विज्ञान का वह अंग है, जिसके अन्तर्गत राज्य तथा शासन के अध्ययन के साथ-साथ मनुष्य के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कार्यकलापों तथा उनकी प्रकियाओं का अध्ययन भी किया जाता है। संक्षेप मे, राजनीतिशास्त्र को सम्पूर्ण राजनीतिक व्यवस्था का अध्ययन कहा जा सकता है।

राजनीति विज्ञान का क्षेत्र 

राजनीति के अध्ययन का क्षेत्र बहुत व्यापक है और इसका निर्धारण भी बहुत कठिन है क्योंकि व्यक्ति औय समाज का ऐसा शायद ही कोई पक्ष हो जो राजनीतिक इकाई से न जुड़ा हो।
राजनीतिक विज्ञान की परिभाषा की भाँति ही राजनीतिक विज्ञान के क्षेत्र के संदर्भ मे भी मूलतः दो प्रकार के दृष्टिकोण पाए जाते है-- परम्परागत दृष्टिकोण ( Traditional approach) तथा आधुनिक या व्यवहारवादी दृष्टिकोण (Modern or behavioural approach)। परम्परागत दृष्टिकोण के अंतर्गत गार्नर, गेटिल, गिलक्राइस्ट, ब्लंश्ली आदि के दृष्टिकोण को सम्मिलित किया जा सकता है। ये सभी विद्वान राजनीतिक विज्ञान के क्षेत्र के अंतर्गत राज्य, सरकार तथा इसी प्रकार की अन्य राजनीतिक संस्थाओं के औपचारिक अध्ययन को रखते है।
गिलक्राइस्ट और फ्रेडरिक पोलक ने राजनीतिक विज्ञान के दो विभाजन किए है-- सैद्धांतिक और व्यावहारिक। गिलक्राइस्ट का विचार है कि सैद्धांतिक राजनीतिक के अंतर्गत राज्य की आधारभूत समस्याओं का अध्ययन किया जाता है। इसके अंतर्गत इस बात का अध्ययन सम्मिलित नही है कि कोई राज्य अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए किन साधनों का प्रयोग करता है। इसके विपरीत व्यावसायिकता राजनीतिक के अंतर्गत सरकार के वास्तविक कार्य संचालन तथा राजनीतिक जीवन की विभिन्न संस्थाओं का अध्ययन किया जाता है। सर फ्रेडरिक पोलक के अनुसार सैद्धान्तिक राजनीतिक के अंतर्गत राज्य, सरकार, विधि-निर्माण तथा राज्य का अध्ययन किया जाता है, जबकि व्यावहारिक राजनीति के अंतर्गत सरकारों के विभिन्न रूप अथवा प्रकार, सरकारों के संचालन तथा प्रशासन, कूटनीति, युद्ध, शांति तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यवहार एवं समस्याओं आदि का अध्ययन किया जाता है।
व्यवहारवादी दृष्टिकोण राजनीतिक विज्ञान के अध्ययन क्षेत्र को राज्य और सरकार के अध्ययन तक सीमित नही मानता वरन् मनुष्य के व्यवहार का समग्रता मे अध्ययन करता है। व्यवहारवादियों का मत है कि राजनीति विज्ञान का अध्ययन क्षेत्र मनुष्य के राजनीतिक व्यवहार तक सीमित नही है वह व्यापक है क्योंकि मनुष्य के राजनीतिक क्रिया-कलाप, उसके जीवन के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, नैतिक आदि सभी क्रिया-कलापों से प्रभावित होते हैं और उन्हें प्रभावित भी करते है।

राजनीति विज्ञान के क्षेत्रे में निम्नलिखित अध्ययन सम्मिलित हैं--

1. मनुष्य का अध्ययन
राजनीति विज्ञान मूलतः मनुष्य के अध्ययन से सम्बंधित है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और वह राज्य से किंचित मात्र भी अपने को पृथक नही रख सकता। इसी कारण अरस्तु की यह मान्यता है कि राज्य या समाज मे ही रहकर मनुष्य आत्मनिर्भर हो सकता है। मनुष्य राज्य की गतिशीलता का आधार है। राज्य की समस्त गतिविधियां मनुष्य के इर्द-गिर्द केन्द्रीत होती है। मानव के विकास की प्रत्येक आवश्यकता राज्य पूरी करता है, उसे अधिकार देता है तथा उसे स्वतंत्रता का सुख प्रदान करता है। परम्परागत दृष्टिकोण मनुष्य के राजनीतिक जीवन को राजनीति विज्ञान के विषय-क्षेत्र मे रखता है, जबकि व्यावहारवादी दृष्टिकोण मनुष्य के समग्र जीवन को इसमें सम्मिलित करता है।
2. राज्य के अतीत, वर्तमान तथा भविष्य का अध्ययन
राज्य राजनीतिक विज्ञान का केन्द्रीय विषय है, सरकार इसको मूर्तरूप देती है। राज्य की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि इसके माध्यम से ही जीवन की आवश्यकताएं पूरी की जा सकती है। परन्तु राजनीतिक जीवन का उद्देश्य मात्र दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति नही है। जैसा कि अरस्तु ने लिखा है " राज्य का जन्म दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए होता है, परन्तु इसका अस्तित्व एक अच्छे जीवन के लिए कायम रहता है।" इस रूप मे राज्य मानव के लिए अपरिहार्य संस्था है।
राजनीतिक विज्ञान मे सर्वप्रथम राज्य के अतीत का अध्ययन किया जाता है। इससे हमें राज्य एवं उसकी विभिन्न संस्थाओं के वर्तमान स्वरूप को समझने तथा भविष्य मे उनके सुधार एवं विकास का आधार निर्मित कर सकने मे सहायता मिलती है।
राजनीतिक विज्ञान राज्य के वर्तमान स्वरूप का भी अध्ययन करता है। राजनीतिक विज्ञान के क्षेत्र का यह अंग सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति राज्य से अनिवार्यतः जुड़ा हुआ है। वर्तमान के संदर्भ मे राज्य के अध्ययन के अंतर्गत हम राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन करते है, उसी रूप मे जिस रूप मे वे क्रियाशील है। हम व्यावहारिक निष्कर्षों के आधार पर राज्य के कार्यों एवं उसकी प्रकृति का अध्ययन करते है। इसके अतिरिक्त हम राजनीतिक दलों एवं हित-समूहों, स्वतंत्रता एवं समानता की अवधारणाओं एवं इनके मध्य सम्बन्धों सत्ता तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता, अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय के एक सदस्य के रूप मे राज्य के विकास आदि का भी अध्ययन करते है। इतना ही नही राजनीतिक विज्ञान के क्षेत्र मे हम यह भी अध्ययन करते है कि राज्य आने वाले समय मे कैसा हो सकता है अथवा अपने आदर्श रूप मे उसे कैसा होना चाहिए।
3. सरकार का अध्ययन
राज्य एक अर्मूत संस्था है जिसकी अच्छा को मूर्त रूप सरकार के माध्यम से प्राप्त होता है। राज्य सरकार के माध्यम से कार्य करता है। इसीलिए सरकार को राज्य का अनिवार्य तत्व माना गया है। सरकार के माध्यम से ही सामान्य नीतियों का निर्धारण होता है, सामान्य गतिविधियों का संचालन होता है और सामान्य हितों का सम्बर्द्ध होता है। वर्तमान समय मे सरकार के तीन अंग-कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका-माने जाते है।छ इनके संगठन, कार्यप्रणाली, शक्तियों तथा परस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन भी राजनीतिक विज्ञान के अंतर्गत किया जाता है। राज्य के संविधान का भी अध्ययन किया जाता है।
4. राजनीति सिद्धांतों का अध्ययन
इसके अन्तर्गत राज्य की उत्पत्ति, विकास, संगठन, स्वभाव, उद्देश्य एवं कार्य आदि का अध्ययन सम्मिलित है। इस प्रकार राजनीतिक विज्ञान का सम्बन्ध मुख्यतः राजनीतिक दल के लक्ष्य संस्थाओं तथा प्रक्रियाओं से होता है। इसके आधार पर सामान्य नियम निर्धारित करने का प्रयत्न किया जाता है।
5. अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध
वर्तमान युग मे अन्तर्राष्ट्रीय विकास की बढ़ती हुई गति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समस्त संसार एक होता जा रहा है फलस्वरूप अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों का महत्व बढ़ता जा रहा है। विज्ञान ने दूरी और समय पर विजय प्राप्त करके संसार के राष्ट्रों मे सम्बन्धों को स्थापित करने की प्रेरणा दी है। अतः अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति, अन्तर्राष्ट्रीय विधि एवं अन्तर्राष्ट्रीय संगठन आदि का अध्ययन अब राजनीतिक विज्ञान के विषय क्षेत्र बन गये है।
उपरोक्त विवेचन से सिद्ध होता है कि राजनीति-विज्ञान का अध्ययन क्षेत्र अत्यंत व्यापक है। इसमे राज्य के साथ मनुष्य के उन सम्पूर्ण क्रियाकलापों का अध्ययन किया जाता है, जिसका सम्बन्ध राज्य अथवा सरकार से होता है। इस प्रकार राजनीति-विज्ञान मनुष्य और मनुष्य के तथा मनुष्य और राज्य के पारस्परिक सम्बन्धों पर विचार करता है। सरकार के विभिन्न अंगों, उनके संगठन, उनमे शासन सत्ता का विभाजन तथा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं का भी अध्ययन करता है।

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