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4/25/2021

जनसंख्या विस्फोट क्या है? कारण, प्रभाव, रोकने के उपाय

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जनसंख्या विस्फोट क्या है? (jansankhya visfot kise kahte hai)

jansankhya visfot arth karan prabhav rokne ke upay;जब जनसंख्या दर इतनी तेज हो जाती है कि देश मे उपलब्ध संसाधन आवश्यकताओं की पूर्ति नही कर पाते तब इस स्थिति को 'जनसंख्या विस्फोट' कहा जाता है। जनसंख्या की तीव्र गति से वृद्धि हमारे आर्थिक विकास के सारे प्रयासो को विफल कर देती है। 

भारत का क्षेत्रफल विश्व मे कुल क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है जबकि हमारे देश की जनसंख्या का लगभग 16.7 प्रतिशत है जनसंख्या की दृष्टि से विश्व मे भारत का दूसरा स्थान है जबकि क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवां स्थान है। हमारे देश मे आज जनसंख्या विस्फोट के कारण वस्त्र, आवास और भोजन की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। 1901 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 23.8 करोड़ थी जो की 2011 की जनगणना के अनुसार यह बढ़कर 1.21 अरब आबादी हो गई है। 

जनसंख्या विस्फोट के कारण (jansankhya visfot ke karan)

जनसंख्या विस्फोट के कारण इस प्रकार है--

1. सामाजिक कारण 

(अ) संयुक्त परिवार प्रथा होने से अधिक बच्चो के पालन पोषण मे सामान्यतः परेशानी न होना।

(ब) कम आयु मे विवाह होने से बच्चे अधिक पैदा होना।

(स) भारतीय समाज का परम्परावादी होना एवं लड़को के जन्म को महत्वपूर्ण माना जाना।

(द) स्त्रियों की सामाजिक स्थिति का कमजोर होना।

5. बच्चो के जन्म को ईश्वर की देन मानना।

2. आर्थिक कारण 

(अ) निर्धनता के कारण अधिक बच्चो को कमाई का साधन माना जाता है।

(ब) कृषि पर निर्भरता- कृषि कार्य मे लगे परिवारों के बच्चे उनके कृषि संबंधी कार्यों मे सहायता करते है। पशु चराने मे खेतो की रखवाली करने मे अधिक बच्चे उपयोगी होते है।

(स) दोषपूर्ण आर्थिक दृष्टिकोण- ग्रामीण जनता की यह धारणा होती है कि आने वाला बच्चा अपने साथ दो हाथ-पैर भी लाता है और उनके काम मे सहायक होता है। इसलिए वे बच्चों को वरदान मानते है।

3. जनसंख्या विस्फोट के अन्य कारण 

(अ) शिक्षा का आभाव- अशिक्षित जनता अधिक जनसंख्या की हानियों को नही समझ पाती है। इस कारण वे इस ओर ध्यान नही देते।

(ब) उष्ण जलवायु- भारत की जलवायु गर्म है। यहां लड़कियों मे परिपक्वता जल्दी आ जाती है, कम उम्र मे शादी होने से अधिक बच्चे हो जाते है।

(स) संतान निरोधक विधियों की कमी है। अज्ञानता और अनुपलब्धता के कारण इन विधियों का प्रयोग कम हो रहा है।

(द) घटती मृत्यु दर- भारत मे मृत्यु दर तेजी से घट रही है इस कारण जनसंख्या कम नही हो पा रही है। 

जनसंख्या विस्फोट के प्रभाव (jansankhya visfot ke prabhav)

जनसंख्या विस्फोट के दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं--

1. प्रति व्यक्ति आय मे गिरावट आती है।

2. बचत और विनियोग बहुत कम हो पाता है।

3. भूमि पर जनसंख्या का अधिक भार पड़ रहा है। कृषि योग्य भूमि आवश्यक मात्रा मे अनाज उत्पन्न नही कर पा रही है।

4. खाद्यन्न की कमी- खाद्यन्न का उत्पादन सीमित और जनसंख्या मे वृद्धि खाद्यन्न की कमी समस्या पैदा करता है।

5. जनसंख्या वृद्धि के कारण आवास और शिक्षा की समस्या उत्पन्न हो रही है। रहने के लिये आवास क्षेत्र बढ़ता है परिणामस्वरूप कृषि व अन्य उपयोग हेतु भूमि कम हो रही है।

6. स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यक मात्रा मे पूर्ति नही हो पा रही है।

7. जनसंख्या वृद्धि से मांग बढ़ रही है वस्तुएं कम मात्रा मे उपलब्ध हो पा रही है इससे कीमतें बढ़ रही है।

8. बेरोजगारी मे वृद्धि- जनसंख्या वृद्धि से श्रम की पूर्ति बढ़ जाती है, इससे बेरोजगारी की संख्या बढ़ जाती है।

9. ऊर्जा का उपयोग बढ़ जाता है। अधिक बिजली की जरूरत होती है इससे अधिक बिजलीघरों के निर्माण की आवश्यकता महसूस होती है।

उपरोक्त परिणाम हमारे विकास प्रक्रिया के मार्ग मे बाधा पहुँचाते है अतः इन्हे दूर करने के प्रयास करने होगे तभी जनसंख्या विस्फोट की समस्या से निपटा जा सकेगा।

जनसंख्या विस्फोट को रोकने के उपाय अथवा सुझाव 

भारत मे जनसंख्या की वृद्धि दर को कम करने का एकमात्र उपाय जन्म दर को घटाना है। हमारे देश मे जनसंख्या को कम और नियंत्रित करने के लिए जनसंख्या नीति अपनाई गई है इस दिशा मे सरकार ने आवश्यक कदम उठाये है, व इसके लिये जनसंख्या की नीति को भी निर्धारित किया गया है। प्रत्येक पंचवर्षीय योजना मे जनसंख्या समस्या हेतु व्यवस्था की जाती है। छठी पंचवर्षीय योजना मे परिवार नियोजन को प्राथमिकता दी गयी, फिर भी कोई संतोषजनक परिणाम नही हुए। लेकिन ऐसा विश्वास है कि जनता मे शिक्षा द्वारा जनसंख्या के नियंत्रण मे एक महत्वपूर्ण योगदान होगा। निम्न उपायो से जनसंख्या का नियंत्रण प्रभावशाली ढंग से किया जा सकता है--

1. परिवार नियोजन

2. जनसंख्या शिक्षा तथा

3. जनसंख्या संबंधी कानून।

जनसंख्या नियंत्रण के अन्य साधन तथा उपाय इस प्रकार हैं--

1. प्राकृतिक साधन तथा उपाय।

2. जनसंख्या संबंधी योजना तथा नीति।

3. जनसंख्या तथा परिवार नियोजन की अलग से मंत्रालय हो।

4. जन-संचार माध्यमों का जनसंख्या नियंत्रण मे उपयोग।

5. मुद्रित व प्रकाशन-सामग्री जैसे पोस्टर, नारे, कहनियाँ आदि।

6. सतत् शिक्षा कार्यक्रम प्रौढ़ शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा कार्यक्रम आदि मे जनसंख्या प्रत्यय को भी सम्मिलित किया जाये।

7. जनसंख्या संबंधी कानून को सरकार द्वारा निष्ठा तथा कड़ाई से लागू करना।

शायद यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

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