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4/28/2021

जैव विविधता क्या है? महत्व/आवश्यकता, प्रकार

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जैव विविधता किसे कहते हैं? (jaiv vividhata kya hai)

jaiv vividhata arth mahatva prakar;जैविक विविधता का अर्थ है पृथ्वी पर उपस्थित अनेक प्रकार के जीव-जन्तु उनके आकार-प्रकार व्यवहार, जीवनचक्र और प्रकृति मे उनका योगदान ब्लू ह्रेल मछली से लगाकर सूक्ष्मदर्शी, जीवाणु, मनुष्य से लेकर फफून्द और सैकड़ों लाखो मे बिखरा प्रकृति का यह जीवित खजाना मनुष्य के विकास का गवाह है और उसके भविष्य की निधि भी है। सतही संदर्भ मे कहा जा सकता है कि घांस का गेहूं खाने वालो से क्या संबंध है। किन्तु इस घासों के कारण ही गेहूं और चावल की किस्मों का जन्म हुआ है। सब तथा परस्पर जुड़े हुए है।

जैव विविधता शब्द का सर्मथन प्रयोग सन् 1986 मे वाल्टर जी. रोसेन नामक जीव विज्ञानी ने किया। 

रोसेन के अनुसार," पादपों, जन्तुओं तथा सूक्ष्म जीवो की विविधता तथा भिन्नता तथा भिन्नता जैव विविधता कहलाती है।" 

संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार," जीव-जन्तुओं मे मिलने वाली भिन्नता, विषमता तथा पारिस्थितिक जटिलता को जैव विविधता कहा जाता है।

वस्तुतः जैव विविधता मे पौधों तथा जन्तुओं (पादप, जन्तु तथा सूक्ष्म जीवधारी) की विभिन्न प्रजातियां सम्मिलित होती है, जो किसी पारिस्थितिकी तंत्र मे पारस्परिक क्रियाओं के परिणामस्वरूप निवास करती है। जैव विविधता मे पौधों तथा जन्तुओं की विभिन्न प्रजातियां सम्मिलित होती है। संक्षेप मे जैव विविधता जीन्स, प्रजातियों तथा पारिस्थितिक तंत्रो की समग्रता होती है।

जैविक विविधता की आवश्यकता तथा महत्व 

jaiv vividhata ka mahatva;व्यावहारिक जीवन मे जैविक विविधता के महत्व तथा आवश्यकता को प्रायः क्रमबद्ध करना कठिन है, क्योंकि यह प्राणी मात्र के जीवन के हर क्षेत्र को किसी-न-किसी तरह लाभ पहुंचाता है तथा वस्तुतः हमे स्वस्थ, सुखी, प्रसन्नचित्त एवं स्फूर्तिमय रखता है। दैनिक जीवन के आधार पर एक सूची यहाँ इसी क्रम मे प्रस्तुत है--

1. हम जैविक विविधता मे जीते है

पृथ्वी पर की सभी चीजें जो हमे निरापद रूप से मिल पाती है, उसका श्रेय जैविक विविधता को जाता है। पीने योग्य पानी, स्वच्छ वायु, उपजाऊ मिट्टी जिससे हमे अन्न मिलता है, इसी की देन है। पेड़ों से ऑक्सीजन का मिलना, फैक्ट्रीज से निकली कार्बन-डाइऑक्साइड को आत्मसात करना, घर तथा कार्यालय को शुद्ध हवा उपलब्ध कराना, खेतों मे कई जीवों मे अन्न को सुरक्षित रखना, कई कीड़े-मकोड़ो की मदद से मिट्टी को उपजाऊ बनाना आदि विविध कार्य जैविक विविधता की महत्ता को ही बताते है। एक तरह से हम कह सकते है कि यह हमारे सुखमय जीवन के विभिन्न आयामों का स्त्रोत है।

2. खाने पर हमें जैविक विविधता मिलती है

खाने की मेज पर उपलब्ध भोज्य सामग्री (अन्न, माँस, मछली, अंडे) दूध-दही, आइसक्रीम, फल, सब्जियां, अचार तथा अन्य सामग्री सभी प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से जैविक विविधता का प्रतिफल है। खेतो से आहार, पशुओं से दूध, समुद्र से मांसाहारी पदार्थ, मुर्गियों से अंडे आदि जीव विविधता से लगातार मिलती रहती है। जैविक विविधता गुणवत्ता बनाये रखती है।

3. जैविक विविधता हमे स्वस्थ रखती है 

जैविक विविधता का एक और महत्वपूर्ण योगदान उसके द्वारा प्रतिपादित जंगल तथा वन्य प्रजाति से संबंधित है। वह है कि यह हमे स्वस्थ रखती है। एक समय था जब कि विश्व की शत-प्रतिशत औषधियां सिर्फ पेड़ पौधों या विभिन्न पशुओं तथा जीव-जन्तुओं से ही प्राप्त होती थी एवं आज से कोई 50 वर्ष पहले भी कोई 3 अरब मनुष्य जंगली जड़ी-बूटियों तथा उनसे निर्मित विभिन्न दवाइयों पर ही आधारित थे। आज भी कई शोधो के बावजूद इन विविध प्रजातियों को नकारा नही गया है। चीन मे 5100 प्रजातियों, अमेरिका मे 3000 प्रजातियों का आज भी उपयोग एन्टीबायोटिक एवं अन्य दवाइयों मे प्रयोग होता है। भारत मे तो पूरा आयुर्विज्ञान उपचार प्रणाली इन घरेलू तथा जंगली पेड़-पौधो पर आधारित है। कई एलोपैथिक उपचारो मे सिर्फ नाम अंग्रेजी के है, जबकि दवाई मे अन्तर्वस्तु सभी सामान्य पौधों के सत्व है। निश्चित ही यह प्रभावी उपचार प्रणालियाँ जैविक विविधता की पहचान कराती है।

4. जैविक विविधता हमे भोजन, आवास तथा कपड़ा उपलब्ध कराती है

किसी भी देश के कृषि क्षेत्र सिर्फ अन्न उपजाने एवं अन्य उत्पादन देने के साध्य ही नही है वरन् इसके साथ-साथ यह जैविक विविधता के भण्डार भी है जिनकी सुरक्षा तथा संरक्षण से ही हम रह पा रहे है एवं जी पा रहे है। आवास के लिए लकड़ी के लिए रूई, ऊन तथा अन्य पदार्थ एवं पेट भरने के लिए कई तरह के अन्न, फल, सब्जियां, मांस, मछली, दूध, क्रीम एवं इन सभी की अनेकानेक किस्मे जैविक विविधता की ही देन है।

5. जैविक विविधता वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को स्थायित्व प्रदान करती है

किसी भी आबादी एवं प्रजाति का अस्तित्व और आवास विशेष मे निर्जीव वस्तुओं से इनकी पारस्परिक संक्रिया से ही संभव है जिससे उनके पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता सुनिश्चित होती है। जैविक विविधता इन सभी पारिस्थितिक तंत्रो को नियमित रूप से चलते रहने मे तथा उनको स्थायित्व प्रदान करने की महती भूमिका निभाती है।

6. जैविक विविधता हमारे व्यक्तित्व मे नयापन लाती है

हमारी पारम्परिक गतिविधियों मे मे विविधताओं की समाविष्ट ने मनुष्य के जीवन मे कई परिवर्तन किये है। सिर्फ भोजन, आवास तथा कपड़ा ही नही वरन्  आमोद-प्रमोद की विविधता, रीति-रिवाजों मे से पारम्परिक एकाकीपन का अलगाव, रहने-सहने के नये रंग-ढंग स्वस्थ तथा स्वच्छ जीवन शैली की प्रद्धति, वार्तालाप का उल्लासित एवं उमंग भरा तरीका आदि सभी ने मनुष्य के व्यक्तित्व मे एक ऐसा नयापन ला दिया है जिससे जीवन दर्शन का स्वरूप प्रसन्नतामय, सुखमय तथा शांतिपूर्ण हो गया है। अप्रत्यक्ष रूप से यह सब जैविक विविधता के कारण ही है।

इनके अलावा भी जैविक विविधता का योगदान हम निम्न तरह भी पाते है--

7. जैविक विविधता हमारा पारम्परिक शैलियों से संबंध जोड़े रखती है।

8. जैविक विविधता हमारी आर्थिक सम्पन्नता मे वृद्धि करती है।

9. जैविक विविधता हमे आश्चर्य मे डालती है। 

10. जैविक विविधता हमारे ग्रह की सुरक्षा करती है।

11. जैविक विविधता हमारी पृथ्वी को स्वच्छ रखती है।

12. जैविक विविधता हर क्षेत्र मे वृद्धि करती है।

इस तरह जैविक विविधता की आवश्यकता एवं उसके महत्व को हम किस स्तर तक स्वीकारते है, यह हमारा दृष्टिकोण है।

जैव विविधता के प्रकार (jaiv vividhata ke prakar)

जैव विविधता के प्रकार निम्न तरह है--

1. आनुवांशिक या जेनेटिक विविधता 

प्रजातियों मे मिलने वाली जैव विविधताएँ इसमे सम्मिलित है। इस प्रकार की प्रजातियों की विविधता एक क्षेत्र मे भी मिल सकती है तथा एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र मे भी मिल सकती है। उदाहरण के लिए वन क्षेत्र मे मिलने वाले एक ही प्रजाति के हिरनो मे गुणसूत्रों या जीन्स की भिन्नता मिल सकती है।

2. प्रजातीय विविधता 

सर्वाधिक आधारभूत स्तर पर जैव विविधता के अंतर्गत पृथ्वी पर निवास करने वाले जीवधारियों की लाखो प्रजातियां सम्मिलित होती है। इसमे सूक्ष्म जीवधारी (बैक्टीरिया, वाइरस तथा प्रोटोजोआ) से लेकर विशाल जीवधारी (जैसे-- हाथी, जेबरा, शेर, ऊँट आदि) सम्मिलित है। एक अनुमान के अनुसार विश्व मे 30 लाख से 7 करोड़ की संख्या मे जैव प्रजातीयां है, लेकिन अभी तक वैज्ञानिक केवल 14 लाख जैव प्रजातियों की ही खोज कर पाने मे सफल रहे है।

3. समुदाय/पारिस्थितिकी विविधता 

वृहद् स्तर पर किसी प्रदेश मे अनेक पारिस्थितिकी तंत्र मिलते है तथा प्रत्येक पारिस्थितिकी तंत्र मे निश्चित संख्या मे पौधों तथा जन्तुओं की प्रजातियों का अस्तित्व मिलता है। पारिस्थितिकी तंत्र मे जैव विविधता जितनी अधिक होगी, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता उतनी ही अधिक होगी।

इसका मुख्य कारण यह है कि अधिक जैव विविधता रखने वाले पारिस्थितिकी तंत्र मे किसी भी उपभोक्ता के लिए अनेक प्रकार के जीव उपलब्ध होते है। यदि ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र मे एक या दो जीव किसी प्रकार विलुप्त भी हो जाते है, तो उनके स्थान की आपूर्ति अथवा प्रतिस्थापन के लिए अन्य जीव भी पारिस्थितिकी तंत्र मे उपलब्ध हो जाते है। इस प्रकार किसी एक या दो जीव के समाप्त होने पर जटिल पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता पर नगण्य प्रभाव पड़ता है।

ओडम महोदय का मानना है कि चरम समुदाय वाले प्रौढ़ पारिस्थितिकी तंत्र मे जीवधारियों की प्रजातियों की विविधता अधिक मिलती है। ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र मे स्वसाम्यावस्थित व्यवस्था अपेक्षाकृत अधिक मिलने से पारिस्थितिकी तंत्र को प्राकृतिक रूप से स्थिरता प्राप्त होती है। ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र के जीवधारी बाह्रा पर्यावरणीय परिवर्तनों के साथ समायोजन करने मे अधिक सक्षम होते है।

स्पष्ट है कि किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए उस पारिस्थितिकी तंत्र की जैव विविधता के अस्तित्व को कायम रखा जाये।

शायद यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

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