11/03/2020

नातेदारी का महत्व या आवश्यकता

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 नातेदारी का महत्व (natedari ka mahatva)

1. विवाह तथा परिवार के क्षेत्र मे महत्व 

प्रत्येक समाज मे विवाह का स्वरूप उस समाज की सांस्कृतिक विशेषताओं द्वारा निर्धारित होता है। व्यक्ति कितने विवाह कर सकता है? किस पद्धति से करे? कौन से विवाह समाज द्वारा मान्य है और कौन से अमान्य? इन सभी प्रश्नों के उत्तर नातेदारी व्यवस्था मे ही ढूंढ़े सकते है।

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2. यौन सम्बबन्धों को व्यवस्थित करना 

यौन संतुष्टि मानव की प्रमुख आवश्यकताओं मे एक है। नातेदारी व्यवस्था न हो तो इन सम्बन्धों को परिसीमित करना बहुत कठिन हो जायेगा। नातेदारी के निषेध नियमो का महत्वपूर्ण कार्य यौन सम्बन्धों को नियंत्रित करना है।

3. मानसिक संतुष्टि 

नातेदारी का अहसास परिवारिक सदस्यों को मानसिक संतुष्टि प्रदान करता है। नातेदारी की उपस्थिति से व्यक्ति स्वयं को अकेला महसूस नही करता उसे ऐसा लगता है कि कोई उसका अपना है इस दुनिया मे, यही बात उसे प्रसन्नता और संतुष्टि प्रदान करती है।

4. वंश, उत्तराधिकारी एवं पदाधिकारी का निर्णय 

नातेदारी व्यवस्था वंशावली निर्धारित करती है तथा बताती है कि परिवार या कुल की संपत्ति का कौन दावेदार हो सकता है। मातृवंशीय तथा पितृवंशीय परिवारों मे उत्तराधिकार के भिन्न-भिन्न सामाजिक नियम होते है।

5. उत्तरदायित्व एवं सहयोग को प्रोत्साहन 

नातेदारी व्यवस्था समूह के सदस्यों मे सहयोग, उत्तदायित्व एवं श्रम विभाजन की भावना जागृत करती है। नातेदारी व्यवस्था समूह या परिवार के सदस्यों के कर्तव्यों का निर्धारण कर श्रम विभाजन के सिद्धांत को लागू करने करती है।

6. पारिवारिक शांति हेतु

परिवार मे सास, ससुर, पुत्र वधु, भाई बहिन, पति-पत्नी आदि के रिश्ते नजदीकी के और घनिष्टता के होते है। नातेदारी व्यवस्था मे परिवार के उन सदस्यों को जिनमे संघर्ष हो सकता है किसी सीमा तक पृथक पृथक रखने का प्रावधान रहता है। ससुर और पुत्र-वधु तथा सास और दामाद को यथा सम्भव अलग-अलग रखा जाता है ताकि परिवारिक संबंध मधुर बने रहे।

7. समानता और स्नेह सम्बन्धों को प्रगाढ़ बनाने के लिये 

नातेदारी व्यवस्था समानता के भाव का संचार करती है और एक दूसरे के प्रेम सम्बन्धो मे मधुरता लाने मे सहायक होती है।

8. मानव को सामाजिक प्राणी बनाती है

जन्म के समय बालक न तो सामाजिक होता है और न असामाजिक। नातेदारी के अन्य सदस्यों के साथ रहते हुये धीरे-धीरे उसको सामाजिक सम्बन्धों का ज्ञान होने लगता है। नातेदारी की रीतियों, प्रथाओं, मान्यताओं और विश्वासों के अनुरूप वह स्वयं को ढालने लगता है।

9. सामाजिक सुरक्षा 

समाज मे रहते हुये व्यक्ति अनेक संस्थाओं का सदस्य बन जाता है। उसकी अनेक आवश्यकताओं की पूर्ति हो जाती है। किन्तु उसे सुरक्षा की गारंटी जितनी नातेदारी मे मिलती है उतनी और कही नही मिलती।

10. आर्थिक समयोग 

नातेदारी प्रणाली का एक महत्वपूर्ण लाभ आपसी संबंधियों को आर्थिक संकट की स्थिति मे उबारना भी है। जब किसी नातेदार को आर्थिक दृष्टि से सहयोग की आवश्यकता होती है तो वह विस्तृत नातेदारी समूह से सहयोग ले सकता है।

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