10/13/2020

वर्ग निर्धारण के प्रमुख आधार

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वर्ग निर्धारण या वर्ग निर्माण के प्रमुख आधार

वर्ग निर्माण के प्रमुख आधार इस प्रकार है--

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1. व्यवसाय 

व्यवसाय के आधार पर भी वर्ग का निर्धारण होता है। सेन्टर्स ने व्यवसाय के आधार पर वर्ग विभाजन बतलाया है। उनके अनुसार उच्च व्यवसाय के लोग उच्च वर्ग के समझे जाते है और निम्न व्यवसाय के लोग निम्न वर्ग के समझे जाते है।

2. आयु 

आयु भी वर्ग निर्धारण का एक आधार है। प्रत्येक समाज मे व्यक्ति को कोई भी पद या स्थिति प्रदान करते समय उसकी आयु का विशेष ध्यान रखा जाता है। आयु का सम्बन्ध मानसिक परिपक्वता तथा व्यावहारिक अनुभव से होता है। इसी कारण अधिक महत्वपूर्ण पदों पर कुछ विशेष आयु से कम के व्यक्तियों की नियुक्ति नही की जाती।

3. लिंग 

लिंग भी वर्ग निर्माण का प्रमुख आधार है। आदिकाल से ही स्त्री-पुरूष को इनके लैंगिक भेद के कारण समाज मे विभिन्न स्तरों पर रखा गया है।

4. सम्पत्ति 

सम्पत्ति वर्ग का निर्माण का एक प्रमुख आधार है। आधुनिक पूंजीवादी समाजों मे व्यक्ति की स्थिति का निर्धारण उसकी सम्पत्ति व धन के आधार पर किया जाता है। अतः वर्गों के निर्माण मे सम्पत्ति का प्रमुख स्थान है। मार्क्स तथा एंजेल्स ने वर्ग विभाजन का आधार आर्थिक माना है। उनके अनुसार धन मनुष्य की सामाजिक स्थिति को निश्चित करता है।

5. शारीरिक श्रम 

वेब्लेन के अनुसार वर्ग निर्माण का आधार शारीरिक श्रम है।

6. शैक्षणिक योग्यता 

प्रत्येक समाज मे अशिक्षित व्यक्तियों की अपेक्षा शिक्षित व्यक्तियों को अधिक श्रेष्ठ समझा जाता है और उन्हे अधिक प्रतिष्ठा दी जाती है। अतः प्रत्येक समाज मे शैक्षणिक योग्यता भी वर्ग निर्माण का प्रमुख आधार है।

7. धार्मिक ज्ञान 

कुछ धर्म प्रधान एवं परम्परागत समाजों मे उन व्यक्तियों को सर्वश्रेष्ठ समझा जाता है जिनको समाज के धर्म का विशेष ज्ञान हो। इन समाजों मे व्यक्ति की आयु, लिंग तथा आर्थिक स्थिति के स्थान पर धार्मिक ज्ञान को ही अधिक महत्व दिया जाता है।

8. निवास की स्थिति 

निवास की स्थिति के आधार पर भी वर्गों का निर्माण किया जा सकता है। निवास की स्थिति मे भी ऊंच नीच का संस्तरण दृष्टिगोचर होता है और उसी संस्तरण के आधार पर समाज मे व्यक्तियों की स्थिति का निर्धारण होता है।

9. निवास की अवधि

निवास की अवधि भी वर्ग निर्माण का प्रमुख आधार है। कोई व्यक्ति केवल सर्वोत्कृष्ट स्थान या क्षेत्र मे अच्छा निवास और संपत्ति प्राप्त करके ही समाज का उच्च वर्गीय प्रस्थिति मे स्वतः ही स्थान नही प्राप्त कर लेता जब तक वह वहां के पुराने परिवार का सदस्य न हो अथवा उसके निवास की अवधि अधिक न हो।

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