10/19/2020

महमूद गजनवी का इतिहास/ भारत पर आक्रमण, कारण, प्रभाव या परिणाम

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तुर्की को इस्लाम स्वीकार किये अधिक समय नही हुआ था। इस्लाम की स्वीकृति के बाद वे अधिक साम्राज्यवादी, संकीर्ण और भौतिकवादी रूप मे प्रगट हुये। इन तुर्कियों मे मेहमूद गजपबी और मोहम्मद गौरी प्रारम्भिक आक्रमणकारी थे। जिन्होंने भारत पर आक्रमण किये।

महमूद गजनवी का परिचय/महमूद गजनवी का इतिहास 

महमूद गजनवी सुबुक्तगीन का पुत्र था। पिता की मृत्यु के बाद अपने भाई को हटाकर  वह गजनी का शासक बना। जब वह सिंहासन पर वैठा  उस समय गजनी मे अफगानिस्तान तथा खुरासान सम्मिलित थे। 

महमूद गजनवी का भारत पर आक्रमण (mahmood ghaznavi ke aakraman)

महमूद गजनवी ने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना का प्रयास प्रारंभ किया। मेहमूद गजनवी धन का बहुत अधिक लोभी था। अतः भारत मे आक्रमण का उसका उद्देश्य प्रथम उद्देश्य धन लूटना था। परन्तु इस्लाम के धर्मान्ध अनुयायियों ने उसे जिहाद की प्रेरणा दी। 

महमूद गजनवी ने एक शक्तिशाली सेना तथा बहुत सा धन एकत्र किया और फिर भारत पर आक्रमण करने की योजना बनाई। कहा जाता है कि 1000 से 1026 ई. के बीच मे उसने भारत पर 17 बार आक्रमण किये। वह प्रत्येक वर्ष भारत पर आक्रमण करता और सीमाओं के शासको को लूटता और "गाजी" तथा "बुतशिकन" की उपाधि धारण करके चला जाता। उसके प्रारंभ के कुछ आक्रमण पंजाब तथा अन्य राज्यों पर हुए। उनमे से महमूद गजनवी के कुछ आक्रमण इस प्रकार है--

1. राजा जयपाल पर आक्रमण 

मेहमूद गजनवी ने सीमान्त क्षेत्रों पर अधिकार करके पंजाब के जयपाल पर आक्रमण किया और एक भयानक संघर्ष के बाद जयपाल को परिवार सहित बन्दी बनाया गया। उसके परिवार को रस्सी से बांध कर मारते हुए सड़क से ले जाया गया। बाद मे जयपाल ने मेहमूद को भारी धनराशि दी मेहमूद ने उसे  मुक्त कर दिया। अपनी पराजय के अपमान से अपने पुत्र आनंदपाल को गद्दी सौंप कर  जयपाल ने अग्नि मे प्रवेश कर  आत्महत्या कर ली। 

2. आनंदपाल संयुक्त 

आनंदपाल जयपाल का पुत्र था। मेहमूद गजनवी ने आनंदपाल के मित्र शिया मुसलमान फतेहदाऊद पर आक्रमण करने के लिये आनंदपाल से मार्ग मांगा। मार्ग न देने पर मेहमूद ने आनंदपाल पर आक्रमण कर दिया तथा भेरा और मुल्तान को भी अधिकार मे ले लिया। इस युद्ध मे जयपाल के नाती सुखपाल ने इस्लाम का त्याग करके संघर्ष किया। मेहमूद गजनवी ने यहाँ से भारी मात्रा मे स्वर्ण, चांदी और मूल्यवान वस्तुयें लूटी। हीरे-मोती, वस्त्र आदि भी वह ऊंटो पर लाद कर ले गया। मेहमूद गजनवी ने नगरकोट को लूटा।

आनंदपाल के बाद त्रिलोचनपाल, भीमपाल ने संघर्ष किये परन्तु महमूद गजनवी काश्मीर को जीतने मे फसल रहा। भीमपाल मारा गया।

3. मथुरा और कन्नौज पर आक्रमण 

महमूद गजनवी ने 1018 मे कन्नौज पर आक्रमण किया। यहाँ के प्रतिहार शासक ने उसकी अधीनता स्वीकार कर ली। इसके बाद महमूद ने मथुरा के मंदिरो को लूटा। यहाँ के कई मन्दिरों को उसने नष्ट कर दिया।

5. कालिंजर पर आक्रमण 

1020 ई. मे महमूद गजनवी ने चन्देल शासक को दण्ड देने के के उद्देश्य से कालिंजर पर आक्रमण किया था। वह ग्वालियर होते हुए कालिंजर पहुँचा, परन्तु वह कालिंजर को जीतने मे असफल रहा। 1022 ई. मे उसने कालिंजर पर पुनः आक्रमण किया, परन्तु वह इस बार भी असफल रहा।

6. सोमनाथ पर आक्रमण 

महमूद गजनवी का सबसे महत्वपूर्ण आक्रमण सोमनाथ पर हुआ। सोमनाथ का मंदिर सौराष्ट्र मे अपनी अपार सम्पत्ति के लिए प्रसिद्ध था। महमूद गजनवी रेगिस्तान को पार करके सोमनाथ तक पहुँचा। वहां के पुजारियों को यह विश्वास था कि सोमनाथ इन सैनिको को नष्ट कर देंगे। महमूद वहां की अपार धन सम्पदा देखकर आश्चर्यचकित रह गया। इतनी सम्पत्ति उसने कभी-कहीं नही देखी थी। वह सम्पत्ति को लूटकर ऊँटों पर भरकर गजनी ले गया।

महमूद गजनवी के भारत पर आक्रमण के कारण 

भारत पर महमूद गजनवी ने आक्रमण क्यों किये इस प्रश्न पर विद्वानों ने अनेकों मत दिये है। डाॅ. नाजिम का विचार है कि उसका मुख्य उद्देश्य विजय तथा धन प्राप्त करना था। लैनपूल का कथन है कि सोमनाथ की विजय से स्पष्ट होता है कि महमूद का उद्देश्य मूर्ति-पूजा का खंडन करना था। जाफर का मत है कि " उसका उद्देश्य भारत मे इस्लाम धर्म का प्रचार करना न था, बल्कि धन लूटना था।" इस प्रकार से हम देखते है कि महमूद ने भारत पर किसी एक कारण से आक्रमण न किए थे, अपितु इसके आक्रमणों का उसकी लालसा, मूर्ति पूजा को भारत से समाप्त करना, इस्लाम धर्म का प्रचार करना, महत्वाकांक्षी होने के कारण अपने साम्राज्य विस्तार आदि थे।

महमूद गजनवी के आक्रमणों का प्रभाव या परिणाम 

कुछ विद्वानों का यह मानना है कि महमूद गजनवी के आक्रमणों का भारत के ऊपर कोई प्रभाव नही पड़ा था। अपने इस मत का समर्थन करते हुए ये विद्वान कहते है कि महमूद के भारत पर आक्रमण का उद्देश्य धन लूटना, मूर्ति खण्डित करना तथा काफिरों को इस्लाम धर्म स्वीकार कराना था। वह अपने साम्राज्य का विस्तार भी नही करना चाहता था, क्योंकि उसने जीते हुए प्रदेशों को अपने राज्य का अंग नही बनाया था। परन्तु हम यह नही मान सकते है कि महमूद के आक्रमण का भारत पर कोई प्रभाव नही पड़ा।

महमूद गजनवी के आक्रमणों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तथा तात्कालिक प्रभाव या परिणाम इस प्रकार है--

1. महमूद के आक्रमण के कारण सिन्धु प्रदेश मे अनेको तुर्की बस्तियों का निर्माण हो गया धीरे-धीरे ये लोग भारत के भीतरी भाग मे भी बसने लगे, जिससे तुर्को की संख्या काफी अधिक हो गयी। इन्ही तुर्कों ने मुहम्मद गौरी के आक्रमण के समय अधिक मदद की थी।

2. इस आक्रमण का दूसरा महत्वपूर्ण प्रभाव यह हुआ कि पंजाब तथा मुल्तान को महमूद गजनवी ने जीतकर अपने साम्राज्य मे मिला लिया, जिसके कारण इन दोनों राज्यों का भारत से सम्बन्ध विच्छेद हो गया। इसके परिणामस्वरूप मुस्लिम आक्रमणकारियों के लिए भारत का मार्ग खुल गया। 

3. भारत की आपार सम्पत्ति को लूटकर महमूद गजनी ले गया।

4. भारत के सैकड़ों मंदिरो और मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया।

5. महमूद के आक्रमण के कारण भारत की सैनिक दुर्बलता स्पष्ट हो गयी। इसके अतिरिक्त राजपूत सैनिकों की आपसी फूट तथा सैनिक दुर्बलता के कारण गौरी के आक्रमणों का मार्ग प्रशस्त हो गया।

6. सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव महमूद के आक्रमण का यह हुआ की भारत मे भविष्य मे सल्तनत तथा मुगल शासन का मार्ग प्रशस्त हो गया।

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