8/14/2020

सामाजिक विघटन के कारण

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सामाजिक विघटन के कारण (samajik vighatan ke karan)

1. जनसंख्या का स्थानान्तरण
जनसंख्या का स्थानान्तरण सामाजिक विघटन का एक मुख्य कारण है। जहाँ पर व्यक्ति अपने समुदाय से बाहर नही आते जाते वहां पर सामाजिक विघटन की संभावना नही होती क्योंकि वह अपने समुदाय के रीति-रिवाजों का पालन करते रहते है। किन्तु आवागमन के साधनों की सुविधा के कारण जो व्यक्ति अपना स्थान बदलते रहते है वह एक स्थाई समूह के संपर्क मे नही रह पाते। परिणामस्वरूप उन्हें रीति-रिवाजों के प्रति श्रद्धा नही होती। परिणामस्वरूप वे रीति-रिवाजों का उल्लंघन करते है तथा सामाजिक विघटन की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है।
2. प्राथमिक समूह से द्वितीयक समूह के अनुभव मे परिवर्तन 
जब समाज मे द्वितीयक समूह की प्रधानता बढ़ जाती है और प्राथमिक समूह को व्यक्ति अधिक महत्व नही देते तब सामाजिक विघटन आरंभ हो जाता है क्योंकि प्राथमिक समूह से सुरक्षित होने वाले पारस्परिक हित द्वितीयक समूह के कारण संकट मे पड़ जाते है। द्वितीयक समूह मे व्यक्ति परमार्थ के स्थान पर स्वार्थ की ओर अधिक ध्यान देते है।
3. नगरीकरण
औधोगिक विकास के कारण नगरों का भी तीव्र गति से विकास होता है। आज छोटे-छोटे नगर बड़े नगरों मे विकसित हो गए है तथा गांवों का स्थान छोटे-छोटे नगर लेते जा रहे है। नगरों के विकास की इसी प्रक्रिया को समाजशास्त्र मे नगरीयकरण के नाम से पुकारा जाता है। जहाँ नगर की विशेषता सामाजिक विषमता है वहां ग्रामों की विशेषता सामाजिक समानता है। नगरों मे अनके धर्म, जाति, व संस्कृति के लोग निवास करते है अतः वह परस्पर एकता के सूत्र मे नही बंध पाते और उनमे प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से संघर्ष चलते रहते है। यही आपसी संघर्ष सामाजिक विघटन को जन्म देते है।
4. तीव्र सांस्कृतिक परिवर्तन
सांस्कृतिक परिवर्तन दो प्रकार से हो सकता है। प्रथम एक संस्कृति के व्यक्तियों के दूसरी संस्कृति के संपर्क मे आने से और द्वितीय, संचार के साधनों द्वारा संस्कृति के साथ स्थानान्तरित होने से दोनों ही प्रकार के सांस्कृतिक परिवर्तन मे व्यक्तियों और समूहों के बीच अव्यवस्था उत्पन्न हो जाती है। इस प्रकार के सांस्कृतिक परिवर्तनों मे व्यक्तियों द्वारा संस्कृति के साथ स्थानान्तरित होने से दोनों ही प्रकार के सांस्कृतिक परिवर्तनों मे व्यक्तियों और समूहों के बीच अव्यवस्था उत्पन्न हो जाती है। इस प्रकार के सांस्कृतिक परिवर्तन यंत्रों के आविष्कारों के कारण हो जाते है। जैसा कि भारत मे रेल तथा मोटरों के चलने से बहुत से लोगों को अपनी आदतों और नैतिक मूल्यों मे परिवर्तन करना पड़ता है। खाने-पीने, पूजा-पाठ आदि के नियम तथा छूआ-छूत के प्रतिबंध दृढ़ न रह सके। मशीनों के आविष्कार के कारण लोगो के व्यवसायों पर भारी प्रभाव पड़ा। यातायात के साधनों ने भी प्रचानी रूढ़ियों, रीति-रिवाजों पर विशेष प्रभाव डाला है जिसके परिणामस्वरूप सामाजिक विघटन की प्रक्रिया आरंभ हो गई है।
5. धर्म निरपेक्षता
यद्यपि धर्म निरपेक्षता प्रत्येक प्रजातंत्र राज्य का आवश्यक गुण होना चाहिए। इससे राजनैतिक एकता व व्यक्तिगत स्वतंत्रता की स्थापना होती है किन्तु साथ ही साथ धर्म निरपेक्षता समाज के विभिन्न वर्गो मे संघर्ष को जन्म देती है जिससे सहयोग का अंत व विघटन प्रारंभ होता है।

सामाजिक विघटन के अन्य कारण

1. जातिप्रथा एवं जातिवाद
2. जनसंख्या का अधिक्य
3. भाषावार प्रांतों का विभाजन
4. औधोगिकरण एवं नगरीकरण
5. युद्ध
6. धर्म का घटता हुआ प्रभाव
7. त्रुटिपूर्ण शिक्षा पद्धति
8. सामाजिक कुप्रथाए
9. बेकारी एवं निर्धनता
10. अस्पृश्यता
संदर्भ; बी.एन.बी पब्लिकेशन
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