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8/15/2020

गंदी बस्तियां क्या है? परिभाषा, कारण, प्रभाव/दुष्परिणाम

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गंदी बस्तियां क्या है? गंदी बस्तियाँ किसे कहते है (gandi basti ka arth)

Gandi basti arth paribhasha visheshta  karan prabhav;औधोगिकरण एवं नागरीकरण के परिणामस्वरूप गंदी बस्तियों का जन्म हुआ। रोजगार की तलाश मे गाँव से नगरों की ओर प्रवास बढ़ने से औधोगिक एवं नगरीय क्षेत्र मे बढ़ी हुई जनसंख्या के अनुरूप समुचित आवास की व्यवस्था न होने के कारण गंदी बस्ती की समस्या पैदा होती है।
साधारण शब्दों मे यह कहा जा सकता है कि वे सब आवास-क्षेत्र गन्दी बस्तियां कहलाते है, जहाँ स्वस्थ जीवन की आवासीय सुविधायें उपलब्ध नही होती।
गंदी बस्तियों की समस्या केवल भारत की ही नही है बल्कि गंदी बस्तियों की समस्या एक वैश्विक समस्या है। भारत के लगभग सभी औधोगिक केन्द्रो मे श्रमिकों की गंदी बस्तियां पाई जाती है।
आगे जानेंगे गंदी बस्ती की परिभाषा और गंदी बस्तियों के प्रभाव या दुष्प्रभाव

गंदी बस्ती की परिभाषा (gandi basti ki paribhasha)

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार " एक गंदी बस्ती ऐसी गली, सँकरी गली, निम्नस्तर के मकान आदि है जो कि एक नगर या कस्बे के भीड़-भाड़ भरे क्षेत्र के रूप मे स्थित है, निम्न आय वर्ग के लोगों की बस्ती या अत्यंत निर्धन लोग इसमे रहते है, अनेक सँकरी गलियाँ और निम्न स्तर के मकान अत्यधिक जनसंख्या वाले पड़ोस, गंदी और दयनीय दशा मे देखे जा सकते है।
2001 की जनगणना के अनुसार " एक छोटे घने क्षेत्र जिसकी जनसंख्या कम से कम 300 या लगभग 60-70 गरीब परिवार जो कि अस्वस्थकर वातावरण मे सामान्यतः अनुपयुक्त आधारभूत सुविधाएं यथा पीने का पानी एवं सफाई सुविधाओं के अभाव मे निवास करते है, को चिन्हित गंदी बस्ती माना जायेगा। (2011 की जनगणना मे भी इसी आधार को माना गया है)
ई. ई. बर्गेल के अनुसार," मलिन बस्तियां शहर के वे क्षेत्र है जिनमें निम्न स्तर की आवास दशा होती है। एक एक गंदी बस्ती सदैव एक ऐसा क्षेत्र होती है। एक अकेला मकान पतन की निष्क्रिय अवस्था मे होने पर भी गंदी बस्ती नही कहा जा सकता।" 
संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार," मलिन बस्ती एक मकान, मकानों का एक समूह या क्षेत्र है जिसकी विशेषता भीड़भाड़युक्त, अस्वस्थकर दशा तथा सुविधाओं का अभाव है।"
भारत सेवक समाज द्वारा ' भारत सेवक समाज द्वारा एक रिपोर्ट प्रकाशित की गयी थी जिसमे गन्दी बस्ती को इन शब्दों मे परिभाषित किया था, " गन्दी बस्तियां नगर के उन भागों को कहा जाता है जो कि मानव विकास की दृष्टि से अनुपयुक्त हो चाहे वे पुराने ढांचे के परिणामस्वरूप हो या स्वास्थ्य रक्षा की दृष्टि से जहाँ सफाई की सुविधाएं असम्भव हो। "
गन्दी बस्तियों के सम्बन्ध मे डाॅ. राधाकृष्णन मुखर्जी ने लिखा है कि " झोपड़ियों मे प्रकाश का अभाव रहता है और उनमे भीड़ बहुत रहती है तथा उनमे स्वच्छता तथा पानी की पूर्ति की सुविधाएं अपर्याप्त होती है।

गंदी बस्ती की विशेषताएं (gandi basti ki visheshta)

गंदी बस्तियों की निम्न विशेषताएं है--
1. इन बस्तियों मे मकानों की भीड़भाड़ होना बात है।
2. इन बस्तियों मे स्वास्थ्य एवं सफाई का अभाव पाया जाता है।
3. इन बस्तियों मे रहने वाले मजदूरी व निम्न स्तर का व्यवसाय करने वाले होते है।
4. इनमें निवास करने वाले परिवारों का जीवन स्तर निम्न होता है।
5. इन बस्तियों मे पानी हेतु नल, बिजली, शुद्ध हवा, अच्छे पक्के रास्ते नही होते है।
6. इन बस्तियों मे असामाजिक कार्य एवं अपराध होते रहते है।
7. गंदी बस्तियों मे रहने वाले व्यक्ति स्वयं की सफाई तथा स्वच्छाता का ध्यान नहि रखते।
8. इन बस्तियों मे निवासी अशिक्षित, अज्ञानी व आपराधिक प्रवृत्ति मे लिप्त होते है।
9. इन बस्तियों मे बसावट मे सरकार की स्वीकृति नही होती है।
10. गंदी बस्ती मे रहने वाले शराब, धूम्रपान व अन्य नशे के आदी होते है।

गंदी बस्तियों के विकास के कारण (gandi basti ke karan)

गंदी बस्तियों के निम्न कारण है--
1. जनसंख्या वृद्धि भारत मे गंदी बस्तियों के विकास का प्रमुख कारण आवास का अभाव है। जनाधिक्य होने पर अत्यधिक भीड़-भाड़ के कारण मकानों की समस्या पैदा होती है। परिणामस्वरूप गंदी बस्तियां पनपती है। देश मे जनसंख्या की वृद्धि हो जाने, विशेषकर नगर की जनसंख्या मे वृद्धि हो जाने से मकानों का अभाव होने से गंदी बस्तियां विकसित हो गई है।
2. औद्योगीकरण और नागरीकरण
औधोगिकरण और नगरीकरण गंदी बस्तियों के विकास मे मुख्य कारण है। औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप  गांव से लोग रोजगार के लिए नगरों मे आते है परिणामस्वरूप जनसंख्या की वृद्धि के साथ आवास की समस्या उत्पन्न होती है और गंदी बस्तियां विकसित होती है।
3. निर्धनता
निर्धनता भी गंदी बस्तियों का कारण है। निर्धनता के कारण व्यक्ति को गन्दी बस्तियों मे रहना पड़ता है। श्रमिकों की इतनी कम आया होती है कि वे अपने आवास के लिए अधिक धन खर्च नही कर सकते इसलिए वह गंदी बस्तियों मे रहने के लिए मजबूर होते है।
4. अज्ञानता
गंदी बस्तियों मे रहने वाले लोग संक्रामक बीमारियों स्वच्छता और स्वास्थ्य के संबंध के प्रति जागरूक नही होते। अतः जिन बस्तियों मे निवास करते है उन्हीं अस्वस्थकर स्थितियों मे जीने के आदि हो जाते है।5. ग्रमीणों की प्रवासी प्रवृत्ति
ग्रामीण लोगों का नगरों की ओर प्रवासित होना भी गंदी बस्तियों का कारण है। ग्रामीण रोजगार की तलाश मे ओर शहर की चकाचौंध देखकर नगरों के ओर आ रहे है। जिससे नगरों की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, उचित आवास ना मिलने पर वे गंदी बस्तियों का निर्माण करते है परिणामस्वरूप गंदी बस्तियों का विकास हो रहा है।
6. गतिशीलता
गाँव मे पर्याप्त सुविधाओं का आभाव होने के कारण ग्रामीण प्रवास की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है नगर आकर्षण का केंद्र होते है। जिनमे स्वास्थ्य शिक्षा, रोजगार, मनोरंजन जैसी सुविधाएं होती है। ग्रामीण लोग इन सुविधाओं के आकर्षण मे नगरों की ओर पलायन करते है। ग्रामीण क्षेत्रों मे जाति आधारित काम की मांग घटने एवं शिक्षा के प्रसार के कारण गतिशीलता मे वृद्धि हुई है। यहि कारण है कि नगरीय क्षेत्र मे जनसंख्या का संकेन्द्रण बढ़ता जा रहा है और समुचित आवास के आभाव मे गंदी बस्तियां पनप रही है।
7. नगर नियोजन की कमी
गन्दी बस्तियों के विकास का उत्तरदायित्व नगरपालिकाओं पर भी है। यदि वे नगर का विकास सुनियोजित तौर पर होने के लिए कानून बनाती और एक औसत के बूरे मकानों को जबरन गिरवा देती तो औद्योगिक नगरों मे ये बस्तियाँ विकसित ही नही हो पाती।
है।
8. मकानों का अभाव 
मकानों की अपर्याप्त संख्या भी गंदी बस्तियों को प्रोत्साहित करती है। नगरों में उद्योगों और व्यवस्थाओं की अधिकता होती है तथा अनेक अन्य आकर्षणों के कारण भी नगरीय जनसंख्या का आकार विशाल हो जाता है। भूमि की मात्रा सीमित और अपर्याप्त होती है, व्यक्तियों के पास जो भी साधन होते हैं अत्यंत ही सीमित होते हैं। अतः नगरों में निवास करने वाले सभी व्यक्ति अपना मकान बनवाने में असमर्थ रहते हैं। इसके अतिरिक्त नगरों में अन्य अनेक परेशानियों के कारण भी अनेक व्यक्ति मकान निर्माण को उपेक्षा की दृष्टि से देखते है। परिणामस्वरूप अधिकांश व्यक्ति किराए के मकानों में रहने को बाध्य होते हैं। इस कारण वहां मकानों का अभाव हो जाता है और अनेक व्यक्तियों को विवश होकर गंदे मकानों में निवास करना पड़ता है।
9. प्राकृतिक विपदाएं 
समय-समय पर पड़ने वाली प्राकृतिक आपदाएं भी भारतीय नगरों में गंदी बस्तियों के लिए उत्तरदाई है। इन प्राकृतिक विपदाओं में अकाल, बाढ़, सूखा आदि प्रमुख है। प्राकृतिक आपदाओं का सीधा प्रभाव कृषि पर पड़ता है और कृषि पैदावार में गिरावट आ जाती है। अनेक अवस्थाओं में कुछ ऐसी प्राकृतिक विपदाएं है, जैसे-- पाला, ओला, बाढ़, सूखा आदि प्रमुख आती है। तो लगी फसलें भी सूख जाती है, नष्ट हो जाती हैं, और किसान का सारा जीवन संकटग्रस्त हो जाता है। भारत में प्रतिवर्ष इन प्राकृतिक विपदाओं के कारण खेती की भारी मात्रा में हानि होती है। खेती ही ग्रामीण लोगों के भरण पोषण का आधार होती है, ऐसी अवस्था में ग्रामीण जन किस प्रकार से अपना जीवन यापन करें? गांवों में अन्य उद्योग-धंधे तो होते नहीं जिसकी शरण में ग्रामीण जा सके। अतः ऐसी अवस्था में ग्रामीण व्यक्तियों को एक ही रास्ता प्रतीत होता है और वह रास्ता है नगर की ओर पलायन करने का। व्यक्ति विवश होकर नगरों की शरण लेते हैं आवास के अभाव में उन्हें गंदी बस्तियों में निवास करना पड़ता है। इससे गंदी बस्तियों को प्रोत्साहन मिलता है।
10. अन्य कारण
भारत में गंदी बस्तियों के लिए उत्तरदाई जिन कारणों की विवेचना की गई है, उनके अतिरिक्त अन्य अनेक कारण भी है जो नगरीकरण को प्रोत्साहित करते हैं इनमें से भी कुछ प्रमुख कारण निम्न है--
(अ) पारिवारिक कलह,
(ब) सामाजिक बहिष्कार, 
(स) रीति-रिवाज और रूढ़ियों की उपेक्षा, तथा
(द) अनाथ अवस्था और ग्रामीणों पर अत्याचार।

गंदी बस्तियों के प्रभाव या दुष्परिणाम (gandi basti ke prabhav)

गंदी बस्तियां समाज के लिए सबसे बड़े कलंक की निशानी है। यह उन मानव समाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है जो अपने को सभ्य और प्रगतिशील कहते हैं। आज मानव चांद पर पहुंच गया है और भविष्य में वह अन्य ग्रहों पर भी विचरण करेगा। विज्ञान और औद्योगिक ने अत्यधिक मात्रा में प्रगति की है। किंतु धरती पर रहने वाले इन मानवों की समस्या आज भी ज्यों की त्यों है और मर्ज और भी गंभीर होता जा रहा है तथा मरीज की हालत और भी खराब होती जा रही है। इसलिए इस समस्या की ओर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। इसका सामाजिक जीवन पर अत्यधिक ही बुरा प्रभाव पड़ता है। गंदी बस्तियों के दुष्परिणामों को मुख्य रूप से निम्न भागों में विभाजित किया जा सकता है--
1. नैतिक पतन और अपराध
अपराध शास्त्रियों का मत है कि ऐसी बस्तियों मे जहाँ पर घर अच्छे नही है और सफाई की व्यवस्था नही है, अपराध अधिक पनपते है। ऐसी बस्ती मे जो लोग रहते है, उनका रहन-सहन और चिन्तन दोनों ही गिरे हुए होते है। ऐसे स्थानों मे अपराधियों को छिपने और अपराध करने की अधिक सुविधाएं प्राप्त होती है। इस प्रकार से इन गंदी बस्तियों के पर्यावरण भौतिक और नैतिक दोनों दृष्टियों से अहितकर है। गंदी बस्तियों मे रहने वाले अधिकाशं व्यक्ति अपनी सीमित आय होने की वजह से अपनी आवश्यकताओं को जब पूरा नही कर पाते तो वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अवैधानिक तरीके जैसे-- जुआ, सट्टा, चोरी करना जैसी आपराधिक गतिविधियों मे संलग्न हो जाते है और मद्दपान एवं नशीले पदार्थों का सेवन भी करने लगते है।
2. खराब स्वास्थ्य
मकान स्वास्थ्य का भी आपस मे घनिष्ठ संबंध होता है। इन बस्तियों के मकानों मे सूर्य का प्रकाश तक ठीक से नही पहुंचता, सदैव सीलन बनी रहती है। धुआँ आदि बाहर निकलने के कारण मनुष्य को आवश्यक ऑक्सीजन नही मिल पाती जो कि मानव जीवन के लिए आवश्यक है। गंदी बस्तियों मे रहने वाले लोग दूषित पानी पीने के लिए विवश होते है, गंदी बस्तियों मे स्लच्छता का आभाव होता है। ऐसी स्थिति मे अनेक बीमारियों जैसे-- उल्टी, दस्त, डायरिया, पेंचिस, मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू, त्वचा के रोग, तपेदिक के शिकार हो जाते है।
3. पारिवारिक विघटन
आवास और रोजगार की अनिश्चितता के कारण अधिकांश श्रमिक जो अपने परिवार के साथ शहर मे नही आते है वे परिवार के नियंत्रण के अभाव और पारिवारिक सुख से वंचित होने के कारण अपनी इच्छाओं की पूर्ति के गलत रास्ते चुन लेते है। परिणामत: पारिवारिक विघटन की स्थितियां निर्मित होती है एवं परिवार टूटटे की घटनाएँ बढ़ जाती है।
4. मानसिक अवस्था
इन गंदी बस्तियों का सबसे बड़ा मनौवैज्ञानिक दुष्परिणाम यह है कि यह वहाँ के निवासियों मे गंदी बस्तियों मे रहने की मानसिक अवस्था पैदा करती है। इससे उनमे मानसिक अस्वस्थता, उच्छृंखता, स्नायुविक निवृत्ति, सामुदायिक चेतना एवं सौन्दर्यात्मक बोध मे कुण्ठा, पड़ोसियों के प्रति दुर्व्यवहार और कुछ कार्यो मे अत्यधिक अकर्मण्यता व कुछ मे भयहीनता व बुजदिली उत्पन्न होती है।
5. सरकार की कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच आसान नही होती
जो गंदी बस्तियां अनधिकृत बसाहट से पनपती है उनमे रहने वाले व्यक्ति बैंक मे खाता खोलने, अपना पहचान-पत्र बनवाने जैसे कार्यों मे निवास का पता नही दे पाते अतः शासन की सुविधाओं, बैंकों से ॠण लेना आदि इन बस्तियों मे निवासरत व्यक्तियों के लिए मुश्किल होता है।
6. कार्यक्षमता मे कमी
मकान और स्वास्थ्य मे घनिष्ठ सम्बन्ध है तथा वे श्रमिकों की कार्यक्षमता की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करते है। अनुपयुक्त एवं सुविधाहीन घरों के कारण इन बस्तियों मे रहने वाले लोगों का पारिवारिक जीवन नीरस तथा आनन्द रहित हो जाता है। जब कोई व्यक्ति आराम के समय अपने घर मे शांति एवं प्रसन्नता प्राप्त नही करेगा तो वह निश्चित ही कार्य के समय पूर्ण क्षमता के साथ कार्य नही कर पाएगा। 
7. गोपनीयता का अभाव 
यह वह स्थान है जहाँ कमरों मे भीड़ रहती है और व्यक्ति एकान्त के लिए व्याकुल रहता है। एक-एक कमरे मे 10 से 15 तक व्यक्ति रहते है। इनमे कुछ भी गोपनीय नही रहता। शीघ्र ही बच्चे बुरी आदतों को ग्रहण कर लेते है।
8. अपराध के केन्द्र 
यह चरस, गाँजा, कच्ची-शराब बेचने के केन्द्र है। ये जुआ खेलने के अड्डे और अनैतिक यौन-संबंधों के केन्द्र स्थल भी है। यहाँ चोर से डकैत तक शरण पाते है।
9. बाल-अपराधों के केन्द्र स्थल 
बच्चे सामाजिक बुराइयों के मध्य जन्म लेते है। इनके चारों तरफ असामाजिक वातावरण होता है। ये सहज ही बुराइयों को अपना लेते है और बचपन से ही वह सब करने लगते है जो अपराध है। इनके माध्यम से ही चरस, गाँजा और कच्ची शराब बेची जाती है। यह अनैतिक यौन संबंधों की दलाली करते है। जुओं के अड्डों की देख-रेख करते है। इन्हें इसी रूप में प्रशिक्षित किया जाता है। आगे चलकर यह गंभीर अपराधी बनते है।
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