9/05/2019

जनजाति का अर्थ परिभाषा और विशेषताएं

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नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का, जैसा की आप सब जानते है हमारा भारत विविधताओं वाला देश है, यहाँ अनेक जातियाँ- जनजाति, और अनेक धर्मों और भिन्न भाषा बोलने वाले समूह निवास करते है। आज के इस लेख मे हम जनजाति समाज के बारें मे विस्तार से चर्चा करेंगे। जिसमें जनजाति का अर्थ, परिभाषा और विशेषताएं जानेंगें।

जनजाति का अर्थ 

भारत के विभिन्न क्षेत्रो में ऐसे मानव-समूह निवास करते है जो आज भी सभ्यता तथा संस्कृति से आपरिचित है। जो सभ्य समाजों से दूर जंगल, पहाड़ो अथवा पठारी क्षेत्रों मे निवास करते है। इन्ही समूहों को जनजाति, आदिम समाज, वन्य जाति, आदिवासी आदि नामों से जाना जाता है।
जनजाति समाज की संस्कृति अन्य समाजों से भिन्न होती है। उनके रीति-रिवाज, विश्वास, भाषा और स्थान अलग-अलग होते है। यदि व्यक्तियों का सामाजिक स्तर समान न हो तब भी उनमें स्तरीकरण एवं विलगता दिखाई नही पड़ती।
जनजाति का अर्थ के बाद अब हम जनजाति की परिभाषा और जनजाति की विशेषताओं के बारें मे चर्चा करेगें।

जनजाति की परिभाषा 

 राल्फ लिटंन के अनुसार= " सरलतम रूप मे जनजाति ऐसी टोलियों का एक समूह है। जिसका एक सानिध्य वाले भूखण्ड़ो पर अधिकार हो और जिनमें एकता की भावना, संस्कृति में गहन सामान्यतः निरंतर संपर्क तथा कतिपय सामुदायिक हितों में समानता से उत्पन्न हुई हो।
मजूमदार के अनुसार; कोई जनजाति परिवारों का ऐसा समूह है जिसका एक समान नाम है जिसके सदस्य एक निश्चित भूभाग पर निवास करते है तथा विवाह व्यवसाय के संबंध मे कुछ निषेधाज्ञाओं का पालन करते है एवं जिन्होंने एक आदान-प्रदान संबंध तथा पारस्परिक कर्तव्य विषयक एक निश्चित व्यवस्था का विकास कर लिया हो।

इम्पीरियल गजेटियर के अनुसार "  एक जनजाति समान नाम धारण करने वाले परिवारों का संकलन है, जो समान बोली बोलती है, एक क्षेत्र से संबंधित होते है एवं सामान्यतः ये समूह अंतर्विवाही होते है। "

जे.पी. सिंह के अनुसार; सांस्कृतिक रूप से समरूप समुदाय जिसका समान भू-भाग भाषा तथा एक ही पूर्वज वंश होता है। यह एक अंतर्विवाही समूह है। इसके सदस्यों मे सामान्यतः स्तरण नही होता और सारे सदस्यों का सामाजिक स्तर एक-सा होता है।
डाॅ. घुरिये के अनुसार= "भारत मे जनजाति पिछड़े हुए हिन्दू है।"

हाॅबेल के शब्दों मे= "जनजाति या प्रजाति विशिष्ट जननिक रचना के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाले शारीरिक लक्षणों का एक विशिष्ट संयोग रखने वाले 

विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई जनजाति की परिभाषाओं के बाद अब हम जनजाति की विशेषताएं जानेंगे।

जनजाति की विशेषताएं 

1. प्रत्येक जनजाति के एक नाम
सभी जनजाति समूह के अलग-अलग नाम होता है जिसके द्वार उसे पहचाना जाता है।
2. सामान्य भू-भाग 
जनजातियों का संबंध निश्चित भू-भाग से होता है निश्चित भू-भाग में निवास करने से उनमें सामुदायिक भावना का विकास होता है।
3. जनजाति परिवारों का समूह है
एक जनजाति में समान लक्षण वाले परिवारों का समूह होता है। कुछ परिवारों से मिलकर एक नातेदारी समूह का निर्माण होता है और इसी तरह नातेदारी समूहों के अंत: संबंधो के आधार पर जनजाति समूह विकसित हो जाता है।
4. सामान्य भाषा
जनजाति की अपनी एक सामान्य भाषा होती है जिसका उपयोग वे अपने विचारों के आदान-प्रदान के लिए करती है।
5. शिक्षा का अभाव 
जनजाति समूह मे शिक्षा का आभाव बहुत ही अधिक होता है। भारत सरकार ने शिक्षा के आभाव को दूर करने के लिए अनेक दम भी उठाए है।
6. अंतर्विवाह
जनजातियों मे अंतर्विवाह का पिरचनल से एक जनजाति के लोग दुसरी जनजाति मे विवाह नही करते।
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7. आत्म-निर्भरता
जनजाति समूह मे आत्म-निर्भरता पाई जाती है भौतिकता के दौर मे जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने मे जनजाति समूह स्वयं सक्षम होते है।
8. विस्तृत आकार
एक जनजाति कई परिवारों का संकलन है इसमे वंश समूह, गोत्र और गोत्र के संयुक्त रूप भ्रातृदल होते है। इस तरह जनजाति संगठन एक विस्तृत आकार ले लेता है।
9. सामान्य निषेध

जनजाति जीवन मे रहन-सहन के तरीकों विश्वास तरीकों एवं संबंध निर्वाह के तरीकों मे कुछ निश्चित निषेधों का पालन किया जाता है। निषेधाज्ञाओं का पालन जनजातीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषता हैं।

10. जनजाति परिवारों का समूह है
एक जनजाति मे समान लक्षण वाले परिवारों का समूह होता है। दरअसल कुछ परिवारों से मिलकर एक नातेदारी समूह का निर्माण होता है और इसी तरह नातेदारी समूहों के अंत:संबंधों के आधार पर जनजाति समूह विकसित हो जाता है। 

दोस्तो जनजाति से सम्बन्धित या फिर इस लेख से सम्बन्धित आपका किसी प्रकार का कोई विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताए।
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