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9/02/2019

मद्यपान का अर्थ, परिभाषा, कारण और दुष्परिणाम

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नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का kailasheducation.com मे, हमारी भारतीय संस्कृति में मद्यपान को कभी भी उचित नही माना गया है। प्रचानी भारत में भी मद्यपान का प्रचलन था लेकिन अंग्रेजों के आगमन के पश्चात शराब (मद्यपान) का प्रचलन समाज में और अधिक बढ़ता चला गया। अंग्रेजों ने शराब को अपने आर्थिक लाभ का माध्यम बनाया। आज के इस लेख में हम मद्यपान का अर्थ, परिभाषा, मद्यपान (शराब पीने के) कारण और मद्यपान के दुष्परिणाम पर निबंध भी लिखेंगे।

मद्यपान के अन्तर्गत निम्नलिखित बातें शामिल की जा सकती है----

1. शराब का सेवन करना ही मद्यपान है।
2. मद्यपान एक सामाजिक समस्या है।
3. मद्यपान एक बुरी आदत है जिसे व्यक्ति चाहते हुये भी नही छोड़ पाता।
4. मद्यपान से कृत्रिम उत्तेजना अथवा कृत्रिम अचेतन अथवा न्यून चेतना की स्थिति उत्पन्न होती है।
5.मद्यपान एक सामाजिक कलंक है।


मद्यपान का अर्थ


मद्यपान का अर्थ (Meaning of alcohol in Hindi)

मद्यपान के अर्थ को बताते हुए फेयरचाइल्ड ने लिखा है कि" शराब की असामान्य बुरी आदत ही मद्यपान है। महात्मा गांधी ने मद्यपान के विषय पर कहा था "शराब की लत शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आर्थिक रूप से मनुष्य को बर्बाद कर देती है एवं शराब के नशे में मनुष्य दुराचारी बन जाता है।
मद्यपान शराब पर निर्भरता की ऐसी आदत है जिसकी वजह से पीने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इस आदत से जीवन मे नकारात्मक सामाजिक परिणाम देखने को मिलते है।

शराब (मद्यपान) एक ऐसी बुरी आदत है जिसकी वजह से शराब पीने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इस आदत से उस व्यक्ति का पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। अत्यधिक मद्यपान से स्मरण-शक्ति समाप्त हो जाती है और अपनी इच्छाओं का दमन करने की योग्यता समाप्त हो जाती है। शराब पीने वाला व्यक्ति दूसरों के हाथों का खिलौना बन जाता है।

 मद्यपान की परिभाषा (Definition of alcoholism in Hindi)

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार "मद्यपान का तात्पर्य मद्यता मद्य मतलब नशा करने वाले उस व्यक्ति से है जो शराब पर इतना निर्भर हो जाता है कि जिससे व्यक्ति का मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य, सामाजिक संबंध और आर्थिक जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
अमेरिकन चिकित्सा एसोसिएशन के अनुसार " मद्दपान शराब से जुड़ी समस्याओं के लिए विस्तृत शब्द है। आमतौर पर इसका प्रयोग अनियंत्रित और आदतन बाध्यकारी रूप से शराब का सेवन करने के लिए होता है। जिसका अर्थ शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य, व्यक्तिगत संबंध और सामाजिक स्थिति के बिगड़ने से लगाया जाता है। चिकित्सा की दृष्टि से इसे बीमारी के रूप मे लिया जाता है।
मद्यपान (शराब) का अर्थ और परिभाषा के बाद अब हम शराब (मद्यपान) के कारणों के बारें में जानेंगे।
मद्यपान (शराब पीने) के कारण


मद्यपान (शराब पीने) के कारण  (Due to alcoholism in hindi)

1.मानसिक चिन्ता
समाज में कुछ व्यक्ति ऐसे होते है जिन्हें अपने परिवार, पत्नी, बच्चों  आदि की बहुत ही अधिक चिन्ता हो जाती है। इस कारण वे लोग अपनी मानसिक चिन्ताओं को दूर करने के लिए (मद्यपान) शराब का सेवन करने लगते है।

2. फैशन
पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव के कारण समाजिक जीवन में तेजी से बदल हो रहै है। भारतीय समाज में शराब पीना अब फैशन बन गया है। कुछ लोग शराब पीने को अपनी ऊंची सामाजिक स्थिति का प्रतीक मानने लगे है।

3. वातावरण एवं माहौल 
मदिरापान या मद्यपान की लत का एक मुख्य कारण व्यक्ति के चारों के माहौल या वातावरण का रहा है। यदि किसी व्यक्ति के दोस्त, उसके परिवार के सदस्य आस-पड़ोस के लोग मद्यपान की लत के शिकार है तो उस व्यक्ति मे शराब के सेवन करने की लग का पड़ जाना कोई आश्चर्य की बात नही है।


4. संवेदनात्मक आनन्द 
यदि आप किसी शराबी से पुछ़े के तुम शराब क्यों पीते हो? तो उसका जबाव होगा आनन्द के लिए। मद्यपान से संवेदनात्मक आनन्द प्राप्त होता है।


5. शराब का आसानी से उपलब्ध होना
वर्तमान समय में शराब पीने वाले व्यक्ति को बड़ी ही आसानी से शराब मिल जाती है। लगभग हर जगह 5 से 10 किलोमीटर की दूरी पर उसे शराब की दूकान मिल जाती है। यह भी शराब (मद्यपान) पीने का एक कारण है।

6. विघटित व्यक्तित्व वाले लोग 
अक्सर देखा गया है की असंतुलित व्यक्तित्व वाले लोग अपने साथियों और परिवार के साथ समायोजन नहीं कर पाते। ऐसे लोग सदैव भयभीत रहते है। ऐसे लोग मद्यपान (शराब) का सेवन करने लगते है।

7. मित्र मंडली
यदि कोई व्यक्ति बुरी संगति के लोगों के प्रभाव में आ जाए या ऐसे साथियों के सम्पर्क में आ जाए जो शराब (मद्यपान) का सेवन करते है तो व्यक्ति मे शराब का सेवन करने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
8. आनुवांशिकता
यदि माता-पिता मे से कोई शराबी है तो बच्चे मे शराब की लत होने की संभावना बढ़ जाती है।


मद्यपान (शराब पीने) के नुकसान

मद्यपान के दुष्परिणाम (शराब पीने के नुकसान)

मद्यपान (शराब) के सेवन से हाने वाली हानियों (दुष्प्रभाव) को निम्न आधारों पर स्पष्ट किया जा सकता है---

1. मानसिक हानि 
शराब या मद्यपान का सेवन करने पर व्यक्ति की विचार, चिन्तन और स्मरण शक्ति अवरुध्द हो जाती है। वह शराब पीकर अनाप-शनाप बकता है। मद्यपान के नशे में व्यक्ति इतने चूर हो जाता है कि वह अपना होश भी खो बैठता है। शराब के सेवन से व्यक्ति का दिमाग काम करना बंद कर देता है और वह अपने विवेक का इस्तेमाल नही कर पाता है। उसकी सोचने-समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है।

2. शारीरिक स्वास्थ्य की समस्याएं   
शराब (मद्यपान) का सेवन करने वाले व्यक्ति को अनेक रोग घेर लेते हो। शराब का अधिक सेवन करने से व्यक्ति को निम्न रोग हो सकते है-- जैसे  पेट का कैंसर, तंत्रिका तंत्र का कमजोर होना, मानसिक अस्थिरता, यकृत खराब होना, लिवर खराब होना, ह्रदय रोग, हड्डियों का कमजोर होना, बेचैनी, सिरदर्द, हाथ पैरों की कंपन, साँस की गति तेज होना आदि भयानक नुकसान शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति के शरीर में हो सकते है।

3. पारिवारिक विघटन 
शराब का सेवन करने वाला व्यक्ति कभी भी अपनी पत्नी और बच्चों को सुख से नही रख पाता। शराब के सेवन से पति-पत्नी में झगड़े बढ़ जाते है। शराबी व्यक्ति अपने परिवार का एक अच्छा सदस्य भी नही बन पाता। शराबी व्यक्ति के अपने पड़ोसियों के साथ भी अच्छे सम्बन्ध नही होते। शराब पीने के कारण घरेलू हिंसा की घटनाओं में निरंतर वृध्दि हो रही है।

4. व्यक्तिगत विकास में अवरोध
मद्यपान (शराब) का सेवन करने वाला व्यक्ति कभी भी अपना विकास नही कर पाता। शराबी व्यक्ति दूसरों के हाथ का खिलौना बन जाता है। उसकी सोचने समझने की शक्ति समाप्त हो जाती है। ऐसे व्यक्ति चोरी करने, डकैती डालने, बलात्कार करने जैसे अपराध को करने से भी नही चूकते है।

5. आर्थिक क्षति 
शराब पीने वाले व्यक्ति की कार्यक्षमता में कमी आ जाती है। समाज में ऐसे व्यक्ति की प्रतिष्ठा भी बहुत ही कम होती है। ऐसे व्यक्ति अपने काम धंधे से विमुख हो जाते है। ऐसे व्यक्ति जो थोड़ा बहुत धन कमाते है वह उसे शराब पीने में ही नष्ट कर देते है और अपनी पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण ठीक प्रकार से नही कर पाते।


मद्यपान के दुष्प्रभाव (दुष्परिणाम)
इस प्रकार स्पष्ट होते है कि शराब (मद्यपान) का सेवन करना एक सामाजिक बुराई है जिससे समाज की रक्षा करना बहुत ही आवश्यक है। शराब ने ना जाने कितने ही परिवारों को बर्बाद किया है? न जाने शराब ने कितने सीधे-साधे लोगों को खराब इंसान बना दिया है? 
हमारे भारत के संविधान के अनुच्छेद 47 में इस बात का उल्लेख किया गया है की राज्य चिकित्सा संबंधी उपयोग को छोड़कर उन मादक पेयों और औषधियों के प्रचलन पर रोक लगाने का प्रयास करेंगे जो स्वास्थय के लिए हानिकारक है। श्री भारतन कुमारप्पा ने शराब के बुरे प्रभावों की व्याख्या करते हुए लिखा है कि "सम्पत्ति और खाद्य के साथ-साथ शराब के दुष्परिणामों में नैतिकता, हत्या, चोरी, पारिवारिक कलह, उजड़े घरों, भूखें बच्चों, बर्बाद गृह-स्वामियों और संक्षेप में इससे प्रस्तूत नैतिक एवं बौध्दिक ह्रास तथा निर्णय लेने की क्षमता में आने वाली की गणना हमें करनी चाहिए।
इस लेख में हमनें मद्यपान (शराब) का अर्थ, मद्यपान की परिभाषा, मद्यपान के कारण और मद्यपान के दुष्प्रभावों के पर में विस्तार से जाना है। अगर आपका मद्यपान के सम्बन्धित कोई सवाल या प्रश्न है तो नीचे comment कर जरूर बताए।
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2 टिप्‍पणियां:
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  1. भारत में शराब निषेध हेतु सुझाव दीजिए

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  2. भारत में शराब निषेध हेतु सुझाव दीजिए

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