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4/10/2021

करारोपण के सिद्धांत

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करारोपण के सिद्धांत (kararopan ke siddhant)

करारोपण के मूख्य सिद्धांत इस प्रकार है--

1. लोच का सिद्धांत 

इस सिद्धांत के अनुसार, कर प्रणाली लोचपूर्ण होनी चाहिए ताकि जरूरत के समय उन्हे बढ़ाया या घटाया जा सके। जैसे-- सरकार को संकटकाल मे युद्ध या आर्थिक विकास की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु अधिक आय की जरूरत होती है जो लोचपूर्ण करों से बढ़ाई जा सकती है। आयकर काफी लोचपूर्ण होने के कारण वर्तमान मे बहुत लोकप्रिय है। 

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2. सरलता का सिद्धांत 

इस सिद्धांत के अनुसार, कर प्रणाली समझने मे सरल हो ताकि साधारण करदाता को भी इसे समझने मे मुश्किल न हो। करदाता की सुविधा के लिए यह सिद्धांत बहुत जरूरी है। आजकल करो मे काफी विस्तार हो रहा है और अधिक उलझनपूर्ण होते जा रहे है जिससे सरलता के सिद्धांत का हनन हो रहा है। इसे दृष्टि मे रखकर भारत मे आयकर प्रणाली को सरल बनाया गया है।

3. विविधता का सिद्धांत 

इस सिद्धांत का अर्थ यह है कि कर कई प्रकार के होने चाहिए मतलब यह सिद्धांत बहुकर प्रणाली पर आधारित है। इसके पीछे मूल भावना यह है कि समस्त वर्गों पर करों का भार पड़ना चाहिए। यही वजह है कि आजकल एकल कर प्रणाली के स्थान पर बहुकर प्रणाली को स्थान दिया जाता है, पर यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि विविधता के सिद्धांत का मितव्ययता एवं उत्पादकता के सिद्धांत के साथ संघर्ष न हो। कई प्रकार के करों वसूल करने की लागत बढ़ जाती है, इसलिए अत्यधिक विविधता अवांछनीय है।

4. समन्वय का सिद्धांत 

इस सिद्धांत का संबंध विभिन्न सरकारों द्वारा लगाये जाने वाले करों मे समन्वय से है। एक सरकार द्वारा लगाये विभिन्न करों तथा विभिन्न सरकारों के करों मे इस तरह का समन्वय हो कि किसी वस्तु या संपत्ति पर दुबारा कर न लग सके।

5. समानता का सिद्धांत 

इस सिद्धांत के अनुसार, हर राष्ट्र की प्रजा को अपनी योग्यता के अनुपात मे राज्य-शासन के लिए कर देना चाहिए अर्थात् उन्हे उस अनुपात मे जो कि सरकार की सुरक्षा से प्राप्त करते है, धन देना चाहिए। इस सिद्धांत का पालन करने से करारोपण की समानता मिलती है तथा इसकी उपेक्षा करने से करारोपण की असमानता। यह सिद्धांत यह बताता है कि सरकार को अपने राज्य-शासन मे व्यय हेतु राष्ट्र के हर व्यक्ति से उसकी योग्यता के अनुपात मे कर वसूल करना चाहिए।

6. निश्चतता का सिद्धांत 

इस सिद्धांत के अनुसार, प्रत्येक कर की राशि, भुगतान का समय, भुगतान की विधि, सभी कुछ निश्चित हो तथा करदाता को इसका पता हो।

7. सुविधा का सिद्धांत 

एडम स्मिथ के शब्दों मे, " प्रत्येक कर ऐसे समय तथा ऐसी रीति से वसूल करना चाहिए कि वह भुगतान करने वाले के लिए बहुत सुविधाजनक हो।" अर्थात कर ऐसी रीति से और ऐसे समय लगाया जाए जबकि करदाता उसका अत्यन्त सुविधा के साथ भुगतान कर सकता हो।

8. मितव्ययिता का सिद्धांत 

एडम स्मिथ के शब्दों मे राज्यों को करों का संग्रह करने मे कम से कम खर्च करना चाहिए। उनके अनुसार," प्रत्येक कर की रचना इस प्रकार करनी चाहिए कि उसके द्वारा सरकारी कोष मे जितनी मुद्रा आये, उसके अतिरिक्त व्यक्तियों की जेबों से कम से कम निकले।" इस सिद्धांत का उद्देश्य है कि कर संग्रह की प्रशासनिक लागत कम से कम हो। 

9. उत्पादकता का सिद्धांत 

इस सिद्धांत के अनुसार करों से सरकार को इतनी आय मिले कि वह अपने व्यय की पूर्ति कर सके तथा अपने अस्तित्व को बनाए रख सके। इस उद्देश्य से एक अच्छे कर का यह लक्षण होना चाहिए कि वह उत्पादक हो मतलब उससे पर्याप्त राजस्व प्राप्त हो। यह सिद्धांत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य की वित्तीय आवश्यकताएं लगातार बढ़ती जा रही है। यह जरूरी है कि कर प्रणाली द्वारा उत्पादन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अप्रत्यक्ष रूप से बचत तथा विनियोग पर भी करों का प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ना चाहिए।

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