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4/16/2021

व्यापार संतुलन क्या है? परिभाषा

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व्यापार संतुलन क्या है? (vyapar santulan ka arth)

vyapar santulan arth paribhasha;दो या दो से अधिक देशों के मध्य निश्चित समय मे होने वाले आयात-निर्यात के अंतर को व्यापार संतुलन या व्यापार शेष कहते है। इस प्रकार व्यापार संतुलन मे आयात-निर्यात मे केवल दृश्य मदों को ही शामिल किया जाता है। दृश्य मदें वे वस्तुएं है जिनका लेखा-जोखा बन्दरगाहो, हवाई अड्डों, सीमा चौकियों आदि पर रखा जाता है।

व्यापार संतुलन की परिभाषा  (vyapar santulan ki paribhasha)

बेन्हम के अनुसार," किसी देश का व्यापार संतुलन वह संबंध है जो एक निश्चित समयावधि मे उसके आयातों तथा निर्यातों के मूल्यों के बीच पाया जाता है।" 

जाॅर्ज लीलैण्ड बेंच के अनुसार," व्यापार संतुलन सिर्फ वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार को सम्मालित करता है।

डब्ल्यू. एम. स्केमेल के शब्दों मे," देश के निवासियों द्वारा विदेशियों को बेची गयी वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य तथा उस देश के निवासियों द्वारा विदेशियों से खरीदी गयी वस्तुओं के मूल्यों का अंतर व्यापार संतुलन होता है।" 

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि एक देश के अवधि विशेष मे निर्यातों एवं आयातों के मूल्य के अंतर को व्यापार शेष कहा जाता है। इन निर्यातों मे वस्तुओं और सेवाओं दोनों के उन आयातों एवं निर्यातों को सम्मालित किया जाता है, जो राष्ट्रीय आय के उत्पादन अथवा उपभोग से संबंधित होते है।

व्यापार संतुलन की तीन स्थितियां हो सकती है, यथा- अनुकूल व्यापार संतुलन, प्रतिकूल व्यापार संतुलन और साम्य व्यापार संतुलन। इनका विवेचना इस प्रकार है--

1. अनुकूल व्यापार संतुलन 

अनुकूल व्यापार संतुलन से आशय उस स्थिति से है, जब आयातों की तुलना मे निर्यात अधिक हो। दूसरे शब्दों मे, वस्तुओं के निर्यात से प्राप्त होने वाली राशि, वस्तुओं के आयात के लिए किए गए भुगतानो से अधिक हो।

2. प्रतिकूल व्यापार संतुलन 

प्रतिकूल व्यापार संतुलन से आशय उस स्थिति से है जब निर्यातों की तुलना मे आयात अधिक हो। दूसरे शब्दों मे, वस्तुओं के आयात के लिए किए गए भुगतान, वस्तुओं के निर्यात से प्राप्त राशि से अधिक हो।

3. साम्य व्यापार संतुलन

साम्य व्यापार संतुलन से अभिप्राय विदेशी व्यापार की उस दशा से है जिसमे किसी बर्ष मे देश के आयातों का मूल्य, निर्यातों से प्राप्त राशि के बराबर हो। प्रायः ऐसी स्थिति देखने मे नही आती जब आयात एवं निर्यात दोनों बराबर हो।

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