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3/01/2021

प्राप्यों का प्रबंध क्या है? क्षेत्र

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प्राप्‍यों का प्रबन्‍ध क्या है?

आज के युग में उधार विक्रय के बिना काम नहीं चल सकता और प्राप्‍य इसी उधार विक्रय का परिणाम होते है। प्राप्‍यों के अर्थ में हम देनदारों एंव प्राप्‍य विपत्रों को सम्मिलित करेंगे। प्राप्‍यों में व्‍यवसाय में कार्य शील कोष का एक महत्‍वपूर्ण भाग निरन्‍तर विनियोजित रहता है। प्राप्‍यों के प्रबन्‍ध का सीधा सम्‍बन्‍ध उधार विक्रय एंव वसूली नीतियों से होता है। 

प्राप्‍यों के प्रबन्‍ध का क्षेत्र 

1. साख नीति का निर्धारण 

प्राप्‍यों के प्रबन्‍ध के अन्‍तर्गत सबसे प्रमुख कार्य यह है कि उधार विक्रय किया जायें अथवा नहीं एंव यदि किया जाना है तो उसकी मात्रा क्‍या होगी, साथ ही उधार की अवधि निश्चित करना भी इसके अन्‍तर्गत सम्मिलित है। 

2. रोकड़ अन्‍तर प्रवाह 

प्राप्‍यों के प्रबन्‍ध के अन्‍तर्गत प्रबन्‍धक को इस बात का प्रयास करना चाहिये कि कम से कम उधार माल बेचा जावे एंव इसका विपरीत प्रभाव कुल विक्रय पर न हो साथ ही साथ इस बात का सतत प्रयास किया जाना चाहिये कि संस्‍था में अधिकाधिक रोकड़ का अन्‍तर्प्रवाह हो सके। 

3. साख नीति का क्रियान्‍वयन 

साख नीति निर्धारण के पश्‍चात् इसका प्रमुख कार्य ऋणो की वसूली करना, प्राप्‍यों में निवेश को अनुकुलतम स्‍तर तक बनाये रखना तथा चल सम्‍पत्तियों में होने वाली हानि को कम से कम करना एंव अधिकतम आय अर्जित करना है। 

4. ऋण वसूली की नीतियां एंव विधियां निश्चित करना 

प्राप्‍यों के प्रबन्‍ध के अन्‍तर्गत इस बात का भी निश्‍चय किया जाना है कि बकाया राशि की वसूली के लिए नीति क्‍या होगी एंव उसमें कौन-कौन सी विधियों का प्रयोग सम्मिलित किया जा सकेगा। 

5. प्राप्‍यों का नियंत्रण एंव विश्‍लेषण 

सबसे अन्‍त में वित्तीय प्रबन्‍धक को विभिन्‍न प्राप्तियों पर उचित नियंत्रण रखना जिससे कि आधिकाधिक राशि वसूल हो सके, की व्‍यवस्‍था करना है। इसके साथ ही अन्‍त में हमें इस बात का भी विश्‍लेषण करना चाहिये कि विभिन्‍न प्राप्तियां हमारी नीति एंव परिणामों के अनुरूप है अथवा नही।

प्राप्‍य निवेश प्रबन्‍ध के उद्देश्‍य 

प्राप्‍यों के निवेश के प्रबन्‍ध का प्रमुख उद्देश्‍य व्‍यापार में संलग्‍न विभिन्‍न सम्‍पत्तियों की भांति इसमें किये निवेश पर अधिकतम प्रतिफल प्राप्‍त करना है तथा निवेशो मे वृद्धि करना एंव डूबत ऋण से होने वाली हानि में कमी करना है। प्राप्‍यों में निवेश उद्योग की कार्यशील पूंजी तरलता एंव लाभदायकता को प्रभावित करना है। अत: उचित लाभदायकता बनाये रखने के लिए उचित प्राप्‍य स्‍तर बनाये रखना आवश्‍यक है। 

निष्‍कर्ष मे कह सकते है कि प्राप्‍य निवेश प्रबन्‍ध का प्रमुख उद्देश्‍य अल्‍पकाल में फर्म के कोषों की तरलता बनाये रखना तथा दीर्घकाल में फर्म की लाभ उत्‍पाकता बनाये रखना ही प्रमुख है। अन्‍त में हम कह सकते है कि प्राप्‍य प्रबन्‍ध का उद्देश्‍य संस्‍था की वित्तीय सुदृढ़ता रखना है।

शायद यह जानकारी आपके काफी उपयोगी सिद्ध होंगी 

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