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2/24/2021

पूंजी लागत क्या है? परिभाषा, महत्व

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पूंजी की लागत क्या है? (Punji lagat ka arth)

Punji lagat ka arth paribhasha mahatva;साधारण रूप से विनियोक्‍ता की दृष्टि से लागत उस त्‍याग का पुरस्‍कार है जिसकी वह वर्तमान उपभोग को स्‍थापित करके भविष्‍य में विनियोग के बदले प्राप्‍त करने की कामना करता है। दूसरी और पूंजी का उपयोग करने वाली फर्म की दृष्टि से पूंजी का उपयोग करने के बदले उसके द्वारा विनियोक्‍ता को दिया गया मूल्‍य ही पूंजी की लागत है।
पूंजी की लागत वह न्‍युनतम दर है जिसको पूंजी पर अर्जित करना प्रबन्‍धकों के लिए आवश्‍यक होता है क्‍योकि इससे कम दर पर अर्जन व्‍यवसाय के लिए हानिप्रद होता है।

पूंजी की लागत की परिभाषा (Punji lagat ki paribhasha)

मिल्‍टन एच. स्‍पेन्‍सर के शब्‍दों में,'' पूंजी लागत प्रतिफल की वह न्‍यूनतम दर है जो एक विनियेाग योजना के लिए आवश्‍यक है।''
हन्‍ट, विलियन एंव डोबाल्‍डसन के शब्‍दो में,'' पूंजी लागत को उस दर के रूप में प्रयोग किया जा सकता है जो देय धन देय होने पर लागत व्‍यय की पूर्ति हेतु उचित अर्जन है।''
ऊपर दी गयी दी परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि पूंजी लागत से तात्‍पर्य संस्‍था द्वारा पूंजी के प्रयोग के बदले में दिया गया प्रतिफल होता है जिसे प्राप्‍त हो उपयोग की गयी पूंजी पर प्रतिशत के रूप मे व्‍यय करते है। 

पूंजी की लागत का महत्‍व (punji lagat ka mahatva)

पूंजी की लागत का महत्‍व इस प्रकार है--
1. पूंजी संरचना के निर्धारण में सहायक 
एक व्‍यवसायिक संस्‍था की पूंजी की लागत पूंजी ढांचा से प्रभावित होती है। पूंजी की लागत का उपयोग विभिन्‍न स्‍त्रोतों के तुलनात्‍मक अध्‍ययन से किया जा सकता है ताकि संस्‍था की पूंजी की औसत लागत को न्‍यूनतम रखकर उसके बाजार मूल्‍य को अधिकतम रखा जा सके। 
2. पूंजी बजटन निर्णयों में सहायक 
पूंजी बजटिंग के क्षेत्र में पूंजी की लागत का प्रयोग निर्णयन में एक मापदण्‍ड के रूप में सहायक सिद्ध हो रहा है। किसी व्‍यवसायिक संस्‍था की पूंजी की औसत लागत प्रत्‍याय की उस न्‍यूनतम दर का परिचायक है जिससे कम पर पूंजी विनियोग के किसी भी प्रस्‍ताव को स्‍वीकार नही किया जाना चाहिये। उदाहरण के लिए बट्टा दर विधि के अन्‍तर्गत परियोजना के भावी नगद प्रवाहों को इसी दर के आधार पर बट्टा किया जाता है। इसी प्रकार आन्‍तरिक प्रत्‍याय दर विधि के अन्‍तगर्त जिस दर से भावी नगद प्रवाहो का मूल्‍य परियोजना की वर्तमान लागत के बराबर होता है यदि वह दर पूंजी की लागत दर के बराबर अथवा अधिक होती है तब ही उस प्रस्‍ताव को स्‍वीकृत किया जाता है अन्‍यथा नही। अत: यह कहा जा सकता है कि पूंजी की लागत वह न्‍यूनतम दर है जो निवेश पर अवश्‍य अर्जित की जानी चाहिए। 
3. वित्तीय साधनों के तुलनात्‍मक मूल्‍यांकन में सहायक 
किसी समय पर एक फर्म अनेक साधनों से धन प्राप्‍त कर सकती है। इन विभिन्‍न साधानों से किस साधन को चुना जाए,  इसका मूल्‍यांकन व निर्धारण पूंजी की लागत के आधार पर किया जाता है। 
4. प्रबन्‍धन की वित्तीय कुशलता के मूल्‍यांकन में सहायक 
प्रबन्‍धन की वित्तीय कुशलता का मूल्‍यांकन पूंजी की लागत के सिद्धांत के आधार पर किया जाता है। यदि पूंजी की लागत की तुलना मे परियोजनाओ की सम्‍भावित लाभदायकता अधिक हो तो यह स्थिति उच्‍च प्रबन्‍धकों की वित्तीय कुशलता का परिचायक मानी जाती है। 
5. अन्‍य वित्तीय निर्णयों मे उपयोगी 
पूंजी की लागत की अवधारण का उपयोग अन्‍य वित्तीय निर्णयों में भी किया जा सकता है। यह धारणा कार्यशील पूंजी के उचित प्रबन्‍धन, लाभांश नीति, चल सम्‍पत्तियों मे निवेश की प्रक्रिया आदि के निर्धारण में भी प्रबन्‍धकों का उचित मार्गदर्शन करती है।
शायद यह जानकारी आपके काफी उपयोगी सिद्ध होंगी 

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