8/23/2020

विपणन प्रबंधन का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं क्षेत्र

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विपणन प्रबंधन का अर्थ (vipanan parbandhan kya hai)

विपणन प्रबंध व्यावसायिक प्रबंध की वह शाखा है जिसके द्वारा निर्माता अथवा उत्पादक से उपभोक्ता तक वस्तुओं एवं सेवाओं का हस्तांतरण किया जाता है। विपणन प्रबंध सम्पूर्ण उपक्रम की विपणन क्रियाओं को क्रियान्वित एवं नियंन्त्रित करता है। विपणन प्रबंध दो शब्दों का संयोजन है। एक तो विपणन और दूसरा प्रबंध अतः संयुक्त रूप से विक्रय प्रबंध का अर्थ जानने के लिए आवश्यक है कि दोनों शब्दों विपणन और प्रबंध का पृथक पृथक अर्थ समझ लिया जाये।
विपणन " विपणन ऐसी आर्थिक क्रिया है जिसके द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं का मुद्रा के बदले विनियम किया जाता है। विपणन वास्तव मे उन प्रयासों को कहते है जो वस्तुओं एवं सेवाओं के स्वामित्व हस्तांतरण मे सहायता करते है और उनके भौतिक स्थानान्तरण की प्रबंध करते है।
प्रबंध " प्रबंध से आशय निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अन्य व्यक्तियों के प्रयत्नों का समन्वय करना है।
आर. सी. डेविस के अनुसार " प्रबंध कर्मचारी नेतृत्व का कार्य है। वह मुख्यतः एक मानवीय क्रिया है। यह कार्य के नियोजन, संगठन तथा सामूहिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिये अन्य व्यक्तियों का नियंत्रण करने से सम्बंधित है।"
सरल शब्दों में, प्रबंध से आश्य किसी व्यक्ति समूह के प्रयासों का इस तरह नियोजन, संगठन, संचालन, नियंत्रण, निर्देशन एवं नेतृत्व से है जिससे सामूहिक उद्देश्यों की प्राप्ति की जा सके।
आगे जानेंगे विपणन प्रबंधन का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं क्षेत्र।

विपणन प्रबंधन की परिभाषा (vipanan prabandhan ki paribhasha)

फेल्प्स एवं वेस्टिंग " प्रबन्धकीय दृष्टि से विपणन तक पहुँचना विपणन प्रबंधन कहलाता है।
कंडिफ एवं स्टिल के शब्दों मे " विपणन प्रबंध सामान्य प्रबंध की वह शाखा है जो विपणन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये सोद्देश्य क्रियाकलापों के संचालन से सम्बन्ध रखती है।"
इस परिभाषा के अनुसार विपणन प्रबंध की ही वह शाखा है जिसका प्रमुख उद्देश्य विपणन सम्बन्धी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये विपणन कार्य का नियोजन, संगठन एवं नियंत्रण करना है।
प्रो. जाॅनसन " विशिष्ट रूप से विपणन प्रबंध के क्षेत्र के उत्पादों, बाजारों, प्रयोग की जाने वाली वितरण विधियों, विक्रय विभाग के संगठन का प्रकार विक्रय प्रबंध के कार्यों, विज्ञापन, आन्दोलन, विक्रय संवर्ध्दन कार्य और विक्रय नियंत्रण की विधियों आदि का विश्लेषण तथा उनसे सम्बन्धित योजनाओं का निर्माण एवं सम्पादन सम्मिलित है।"
विलियम जे. स्टेण्टन के अनुसार " विपणन अवधारणा का व्यावहारिक या क्रियात्मक रूप ही विपणन प्रबंध है।"
विपणन कार्य के अन्तर्गत तीन प्रमुख कार्य है- प्रथम उपभोक्ताओं की आवश्यकता सन्तुष्टि, द्वितीय विक्रय मात्रा मे वृद्धि तथा तृतीय संगठन के लाभों मे वृद्धि। ये तीनों ही लक्ष्य एक दूसरे के पूरक है अतः एक की उपलब्धि शेष अन्य दो की उपलब्धि पर निर्भर है अतः विपणन प्रबंध वह प्रबन्धकीय एवं प्रशासकीय कार्य है जो विपणन कार्य को सम्पादित करता है।

विपणन प्रबंधन की विशेषताएं (vipanan prabandhan ki visheshta)

1. समग्र कार्य समन्वय
व्यापार की समस्त शाखाओं, विभागों या कार्यों का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक लक्ष्य "लाभ प्राप्ति" होता है जिसमे विपणन प्रबंधन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अतः विपणन समस्त व्यापार के विभागों, शाखाओं एवं कार्यों की तरफ से प्रयास करता है एवं उनमे समन्वय स्थापित करवाता है, अतः विपणन प्रबंधन समस्त कार्यों का समन्वय भी होता है।
2. सामाजिक कार्य 
विपणन प्रबंधन मे समाज के प्रत्येक वर्ग से पारस्परिक सम्पर्क बनाना होता है, जिससे वस्तु के उपयोग उपभोक्ता की प्रकृति को प्रभावित कर उन्हें अपने अनुसार कार्य करने के लिए प्रेरित किया जा सके, इसलिए इसे सामाजिक कार्य भी कहा जाता है।
3. प्रबंधकीय दृष्टिकोण
जिस प्रकार प्रबंध का मूल उसके सिद्धांत होते है, उसी प्रकार विपणन प्रबंध भी विक्रय कला को व्यवस्थित रूप से प्रबंध करने का दृष्टिकोण होता है। जिसमे उत्पाद के निर्मित होने के बाद से बिक्री तक के कार्य शामिल होते है।
4. प्रबंध की एक शाखा
विपणन प्रबंधन "प्रबंधन" का ही एक हिस्सा या शाखा है, जिसका मुख्य कार्य व्यवस्था करना होता है। समस्त प्रबंध एक वृक्ष के समान होता है, जिसकी अनेक प्रबंध शाखाओं मे से एक शाखा विपणन प्रबंधन होता है।
5. लाभ प्राप्ति की योजना
विपणन प्रबंधन मे माल के अधिकतम विक्रय करके लाभ कमाने का कार्य किया जाता है, इस हेतु विपणन एवं विक्रय कला को व्यवस्थित करने की योजना बनाई जाती है, जिससे लाभ प्राप्ति संभव हो, इसीलिए इसे लाभ प्राप्ति की योजना कहा जाता है।
6. अवसरों की प्राप्ति का साधन
विपणन प्रबंधन एक साधन है, जिसके द्वारा व्यवसाय मे अत्यधिक लाभ प्राप्ति के अवसरों को प्राप्त करने हेतु विक्रय कला एवं योजनाएँ बनाई जाती है और बाजार मे उत्पादों की मांग के अवसरों की तलाश की जाती है।

विपणन प्रबंधन का क्षेत्र 

विपणन प्रबंध के क्षेत्र मे निम्म क्रियाओं को शामिल किया जा सकता है--
1. उत्पादन सम्बन्धी निर्णय
इसमे वस्तु की किस्म, मात्रा, आकार, रंग, डिजाइन, ब्रांड, पैकिंग आदि विषय सम्मिलित किये जा सकते है।
2. मूल्य सम्बन्धी निर्णय
इसके अन्तर्गत विज्ञापन, लागत, बाजार दशायें, उत्पादन लागत आदि के सम्बन्ध मे निर्णय शामिल है।
3. वितरण सम्बन्धी निर्णय
इसमे माल के विक्रय के सम्बन्ध मे वितरण मार्ग, वितरण व्यय आदि से सम्बंधित निर्णय सम्मिलित है।
4. विक्रय वृद्धि सम्बन्धी कार्य
इसमे विज्ञापन का ढंग, उसकी लागत, प्रत्येक ढंग का मूल्यांकन, वैयक्तिक विक्रय आदि सम्मिलित है।
5. विक्रय पश्चात सेवा 
स्थिर उपभोक्ता वस्तुओं जैसे- रेफ्रीजरेटर, पंखे, टी.टी. आदि के सम्बन्ध मे विक्रयोपरान्त सेवा के लिए यह निर्णय करना कि किस प्रकार की सेवा दी जायेगी तथा वह कितने दिनों तक व किस माध्यम से दी जाये।
6. ग्राहक सम्बन्धी निर्णय
वस्तु के सम्बन्ध मे ग्राहक की पसंद, उसकी क्रय क्षमता, वर्तमान ग्राहकों की संख्या एवं उनका भौगोलिक वितरण, संभावित ग्राहकों की संख्या एवं उनका भौगोलिक वितरण, क्रय प्रेरणायें व आदतें। इसलिए शोध द्वारा आंकड़े एकत्रित किये जाते है।
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