8/24/2020

जिला उद्योग केंद्र अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, कार्य

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जिला उद्योग केंद्र का अर्थ (jila udyog kendra kya hai)

jila udyog kendra meaning in hindi;जिला उद्योग केन्द्र एक जिला-स्तरीय संस्था है जो अपने जिले की सभी लघु इकाइयों तथा सहसियों को  उद्योगों की स्थापना और विकास हेतू जरूरी सुविधाओं, साधनों एवं सहायताओं को उपलब्ध करतारी है। इन सुविधाओं मे वित्त तथा साख, कच्चा माल, लाइसेंस स्वीकृति, संयंत्र व मशीनें, तकनीकी परामर्श, पक्के माल का विपणन, विभिन्न सरकारी रियायतें आदि की सुविधाएँ शामिल है। ये सुविधाएं विनियोजन से पूर्व, विनियोजन के समय एवं विनियोजन के बाद प्रदान की जाती है। ये सभी सुविधाएं साहसी को एक ही छत के नीचे उपलब्ध हो जाने के कारण इसे एक खिड़की की विचारधारा के नाम से जाना जाता है।
आगे जानेंगे जिला उद्योग केन्द्र की विशेषताएं और जिला उद्योग केन्द्र के मुख्य कार्य।

जिला उद्योग केंद्र की परिभाषा (jila udyog kendra ki paribhasha)

श्री वसन्त देसाई के अनुसार " जिला उद्योग केन्द्र एक जिला स्तरीय संस्था है जो उधमियों को सभी सेवाएं एवं सुविधाएं, एक ही स्थान से उपलब्ध कराती है ताकि वे अपने लघु एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना कर सकें।
डाॅ.एन.उपाध्याय के अनुसार " जिला उद्योग केन्द्र का आश्य एक ऐसी संस्था से है जो उधमियों को सभी प्रकार की सहायता एवं सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराती है।
इस तरह स्पष्ट है कि- " जिला उद्योग केन्द्र एक जिला स्तरीय संस्था है जो अपने जिले के सभी लघु तथा ग्रामीण उधोगों की उनकी स्थापना और विकास हेतु आवश्यक सभी सुविधाएं साधन एवं सहायतायें एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराती है। जिला उद्योग केन्द्र एक ऐसी संस्था है जो उधोगों के लिए विभिन्न सुविधाएं प्रदान करने वाली एजेन्सीयाँ; जैसे-वित्त निगम, औधोगिक विकास तथा विनियोग निगम, उधोग निदेशालय, खनिज विकास निगम, लघु उद्योग निगम, खादी एवं ग्रामोद्योग मण्डल, विधुत मण्डल आदि के कार्यालयों को जोड़ती है ताकि लघु उद्यमियों को इन एजेन्सियों के माध्यमों से मिलने वाली सभी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।

जिला उद्योग केंद्र की विशेषताएं (jila udyog kendra ki visheshta)

1. जिला स्तरीय संस्था
जिला उद्योग केन्द्र की स्थापना जिला स्तर पर की जाती है तथा इसका प्रशासनिक भवन मुख्यालय के किसी प्रमुख स्थान पर स्थापित किया जाता है। यह अपने जिले की सभी लघु इकाइयों को स्थापना एवं विकास की सुविधाएँ प्रदान करती है।
2. केन्द्रीय संस्था 
जिला उद्योग केन्द्र के प्रशासनिक भवन मे विभिन्न विभागों, संस्थाओं व निगमों के कार्यालय स्थापित होते है, जो साहसी को विभिन्न सुविधाएं एक ही छत के नीचे प्रदान करते है।
3. समन्वयकारी संस्था
जिला उद्योग केन्द्र एक समन्वयकारी संस्था है जो जिला स्तर पर सभी सम्बन्धित विभागों मे एक प्रभावी समन्वय एक सम्पर्क-सूत्र का कार्य करती है।
4. सरकारी संस्था
जिला उद्योग केन्द्रों को केन्द्रीय सरकार की योजना एवं सहायता के अन्तर्गत राज्य सरकारों द्वारा स्थापित किया जाता है।
5. सहायता कार्य
जिला उद्योग केन्द्र का मूल्य उद्देश्य अपने जिले मे स्थापित होने वाली सभी लघु इकाइयों की स्थापना एवं विकास के लिए सभी आवश्यक सेवाएं एवं सहायताएं उपलब्ध कराना है।
6. सरकारी कार्यक्रमों का क्रियान्वयन
जिला उद्योग केन्द्र केन्द्रीय सरकार के कार्यक्रमों जैसे- ग्रामीण कार्यक्रम, स्वरोजगार योजना आदि के क्रियान्वयन की इकाई के रूप मे कार्य करते है। इस प्रकार सरकारी कार्यक्रमों की सफलता भी काफी सीमा तक इस पर निर्भर करती है।
7. वर्गीकरण
जिला उद्योग केन्द्रों की चार श्रेणियाँ 'अ' 'ब' वर्ग, 'स' वर्ग तथा 'द' वर्ग मे विभक्त किया गया है।
8. परिवर्तन लाने वाली संस्था
जिला उद्योग केन्द्रों के माध्यम से कृषि क्षेत्रों को औधोगिक क्षेत्रों मे परिवर्तित किया जा सकता है। ये केन्द्र समाज मे नये मूल्यों की स्थापना करते है, साहसियों मे आशा का संचार करते है तथा औधोगिक क्षेत्र मे अनेक परिवर्तनों को जन्म देते है।

जिला उद्योग केंद्र के कार्य (jila udyog kendra ke karya)

jila udyog kendra ke karya;जिला उद्योग केन्द्रों द्वारा विभिन्न तरह के कार्य किये जाते है, जिन्हें निम्न 3 श्रेणियों मे विभाजित किया जा सकता है--
(अ) विकासात्मक कार्य 
जिला उद्योग केन्द्र जिले मे उधोगों की स्थापना, विकास तथा उनके संरक्षण के लिए कई तरह के कार्य करते है। वे जिले मे रोजगार, आय तथा पूँजी निर्माण को प्रोत्साहित करते है। उनके विकासात्मक कार्य निम्म है--
1. जिले के औधोगिक ढांचे तथा आर्थिक स्थिति का सर्वेक्षण करना एवं विभिन्न तथ्यों का संग्रह करके जिले की कार्य योजना तैयार करना।
2. जिले के स्थानीय साधनों- भूमि, जल, खनिज, शक्ति के साधनों, श्रम, यातायात, संचार आदि का विश्लेषण करना।
3. जिले मे नवीन साहसियों की खोज करना तथा उनका विकास कलना।
4. जिले के सहायक उधोगों का अध्ययन करना।
5. औधोगिक बस्तियों का निर्माण करना एवं उनमे आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था करना।
6. उधोगों की सम्भावना रिपोर्ट तैयार करना।
7. साहसियों के लिए जरूरी तकनीक जानकारी तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था करना।
8. वित्तीय संस्थाओं तथा बैंकों से ॠण उपलब्ध करवाना।
9. कच्चे माल के केन्द्रों तथा सार्वजनिक सुविधा केन्द्रों की स्थापना करना।
10. निर्मित माल की बिक्री के लिए कार्यक्रम तैयार करना।
(ब) प्रशासकीय कार्य
जिला उद्योग केन्द्र अपने जिले के उधोगों के संबंध मे कई प्रबंध व्यवस्था संम्बधी कार्य करते है। इसमे से मुख्य निम्म प्रकार से है--
1. जिले की लघु इकाइयों का अस्थायी तथा स्थायी पंजीकरण करना एवं उनका नवीनीकरण करना।
2. उधोगों के लिए जरूरी साधनों-भूमि, कच्चा माल आदि का वितरण करना।
3. अनुदान तथा ॠणों का वितरण करना।
4. उधोगों की विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कार्यवाही करन।

5. साहसियों कि समस्याओं का पता लगाना एवं उनके निवारण के लिए उपाय करना।
6. औधोगिक शिविरों तथा गोष्ठियों का आयोजन करना।
7. स्व-रोजगार योजना के अन्तर्गत उधमियों का चयन करने के लिए ॠण बैंकों को सिफारिश करना।
8. उधोगों से सम्बंधित विभिन्न विभागों, संस्थाओं तथा एजेन्सियों मे सम्पर्क एवं समन्वय बनाये रखना।
9. रूग्ण इकाइयों का पता करना एवं उनको पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक सहायता तथा सुविधाएं उपलब्ध करवाना।
10. उधोगों की स्थापना के संबंध मे विभिन्न सूचनाओं का प्रदर्शनियों, सम्मेलनों तथा अन्य प्रसार माध्यमों के द्वारा प्रसारण करना।
(द) अन्य कार्य
जिला उद्योग केन्द्रों के अन्य कार्य निम्म प्रकार है--
1. उधोगों की परियोजना रिपोर्ट तैयार करने मे सहयोग प्रदान करना।
2. प्रबन्धकीय तथा तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करना।
3. सरकारी साधनों की प्राप्ति मे मदद देना।
4. सरकारी नियमों तथा योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना।
5. उधमियों की विपणन समस्याओं का निवारण करना।
6. औद्योगिक नीति के क्रियान्वयन मे सहयोग देना।
7. कमजोर वर्गों को प्रशिक्षण, ॠण तथा अनुदान उपलब्ध करवाना।
8. साहसियों की विभिन्न समस्याओं तथा बाधाओं को दूर करना।
9. हस्तशिल्पियों को विभिन्न तरह की सहायता देकर हस्तकला कौशल सुरक्षित करना।
10. विभिन्न औपचारिकताओं की पूर्ति मे उधमियों को सहयोग देना।
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