8/21/2020

उत्पादन प्रबंधन का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं या प्रकृति

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उत्पादन प्रबंधन की अवधारणा 

utpadan prabandhan kya hai;प्रत्येक औद्योगिक संस्थान मे दो कार्य मुख्य रूप से किये जाते है जिन्हें कि हम उत्पादन एवं विपणन की संज्ञा दे सकते है अर्थात् किसी वस्तु का उत्पादन करना एवं तत्पश्चात् उसकी विक्रय सम्बन्धी क्रियाएँ उत्पादन प्रबंध के अन्तर्गत आती है। उत्पादन से आशय किसी वस्तु मे आवश्यकतानुसार उपयोगिता सृजन करना होता है साथ ही इसके लिए संसाधन जुटाने एवं उनको कुशलतापूर्वक प्रयोग करने का कार्य भी सम्मिलित होता है। उत्पादन हो जाने के पश्चात उसके विक्रय एवं वितरण की व्यवस्था की जाती है। विपणन से आशय उन व्यावसायिक क्रियाओं से है जो उत्पादकों से उपभोक्ताओं तक माल एवं सेवाओं के प्रवाह को निर्देशित करने हेतु की जाती है। इस प्रकार हम कह सकते है कि प्रबंध की वह विशिष्ट शाखा, जो उत्पादन एवं निर्माण क्रियाओं से सम्बन्धित है," उत्पादन प्रबंध " या " निर्माण प्रबंध " कहलाती है।
आगे जानेंगे उत्पादन प्रबंधन का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं।

उत्पादन प्रबंधन क्या है? उत्पादन प्रबंधन का अर्थ (utpadan prabandhan ka arth)

उत्पादन प्रबंध दो शब्दों से मिलकर बना है- उत्पादन एवं प्रबंध। " उत्पादन  " से आशय कच्चे माल को पक्के माल मे परिवर्तित करने की प्रक्रिया से है, जबकि "प्रबंध" वांछित परिणामों की प्राप्ति के लिए भौतिक एवं मानवीय साधनों के काम मे लेने की प्रक्रिया है। अतः "उत्पादन प्रबंध" उत्पादन से सम्बध्द क्रियाकलापों के नियोजन, संगठन, समन्वय एवं नियंत्रण की प्रक्रिया है।

उत्पादन प्रबंधन की परिभाषा (utpadan prabandhan ki paribhasha)

ई. एफ. बेच के अनुसार " उत्पादन प्रबंध एक उपक्रम के परिचालन के प्रभावी नियोजन तथा नियमन की वह प्रक्रिया है, जो सामग्रियों को निर्मित उत्पादन मे रुपान्तरित करने के लिए उत्तरदायी है।"
आर. आर. मेयर के अनुसार " एक अभिनिर्माणी संगठन मे व्यक्तियों, सामग्रियों और साज-समान के उपयोग से किसी भौतिक उद्देश्य को प्राप्त करना ही उत्पादन है। एस सेवा संगठन मे उत्पादन एक ऐसे कार्य का निष्पादन है जिसकी कुछ उपयोगिता हो, इसमे अनेक कार्य जैसे- मोटर की मरम्मत से लेकर एक ग्राहक को वैज्ञानिक सलाह देने तक सम्मिलित है।"
ए. डब्ल्यू. फील्ड के अनुसार " उत्पादन-प्रबंध किसी उघम की उन क्रियाओं के प्रभावपूर्ण नियोजन एवं नियमन की प्रक्रिया है, जो सामग्रियों को निर्मित उत्पादों मे रुपान्तरित करने के लिए उत्तरदायी है।"
निष्कर्ष रूप मे यह कहा जा सकता है कि " उत्पादन प्रबंध, प्रबंध का वह भाग है जो वैज्ञानिक नियोजन एवं नियमन द्वारा साहस के उस भाग को गति मे लाता है, जिसे कच्चे माल को वास्तव मे पक्के माल मे परिवर्तित करने का कार्य भार सौंपा जाता है।"

उत्पादन प्रबन्धन की प्रकृति/विशेषताएं (utpadan prabandhan ki visheshta)

1. उत्पादन प्रबंधन सामान्य प्रबंधन की आधारभूत तथा प्रमुख शाखा है, जिस पर अन्य क्रियाएँ निर्भर करती है।
2. उत्पादन प्रबंधन व्यवसाय की अन्य क्रियाओं जैसे- क्रय, विक्रय, वित्त एवं विपणन इत्यादि से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है।
3. उत्पादन-प्रबंधन का क्षेत्र काफी विस्तृत है क्योंकि इसमे निर्माणी क्रियाओं के साथ-साथ उत्पादन की सहायक क्रियाओं, शोध एवं विकास की क्रियाओं, क्रियात्मक अनुसंधान, डिजाईनिंग इत्यादि को भी शामिल किया जाता है।
4. उत्पादन प्रबंधन कला एवं विज्ञान दोनों है। कला करना सिखाती है और विज्ञान जानना सिखाता है। विज्ञान क्यों का कारण स्पष्ट करता है और कला अभ्यास पक्ष को प्रस्तुत करती है। उत्पादन प्रबंधन यह दोनों कार्य करता है। अतः विज्ञान व कला दोनों है।
5. उत्पादन-प्रबंध एक गतिशील प्रक्रिया है, जिसमे निरंतर नए-नए परिवर्तन दृष्टिगोचर हो रहे है।
6. उत्पादन प्रबंधन का दृष्टिकोण अन्-र्तविषय है, क्योंकि यह इंजीनियरिंग, गणित, मनोविज्ञान, व्यवहार विज्ञान इत्यादि से प्रभावित होता है।
7. उत्पादन प्रबंध एवं विशिष्टीकृत कार्य है, जिसमे आधुनिक स्वचालित तकनीक प्रमापीकरण, विविधीकरण, कम्प्यूटर इत्यादि का प्रयोग होता है।
इस प्रकार उत्पादन प्रबंधन उद्यमी के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है, जितने कि अन्य विषय। उत्पादन के प्रबन्धन के लिए प्रमुख रूप से उद्यमी उत्पादन नियोगन, नियंत्रण, किस्म नियंत्रण, विधि, विश्लेषण, सयंत्रविन्यास, सामग्रीहस्तन, कार्यमापन, स्कन्ध नियंत्रण तथा भण्डारण जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य करता है।
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