5/16/2020

सूक्ष्मदर्शी किसे कहते हैं? सूक्ष्मदर्शी के प्रकार

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सूक्ष्मदर्शी किसे कहते है? सूक्ष्मदर्शी क्या हैं? सूक्ष्मदर्शी का अर्थ

वह यंत्र जो सूक्ष्म वस्तु का बड़ा एवं स्पष्ट प्रतिबिम्ब बनाता है, सूक्ष्मदर्शी कहलाता है।
जब हमें अति सूक्ष्म वस्तुओं को स्पष्ट देखना होता है, तब हम दो लेंसो के संयोग का प्रयोग कर आवर्धन को बढ़ा लेते है। इस तरह हम दो प्रकार के सूक्ष्मदर्शी का प्रयोगशाला मे उपयोग करते है।

सूक्ष्मदर्शी के प्रकार 

सूक्ष्मदर्शी दो प्रकार के होते हैं।
1. सरल सूक्ष्मदर्शी और 2. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी

1. सरल सूक्ष्मदर्शी 

सरल सूक्ष्मदर्शी एक कम फोकस दूरी का उत्तल लेंस होता हैं जिसे एक हैण्डिल लगे वृत्ताकार फ्रेम मे लगा दिया जाता है।
सरल सूक्ष्मदर्शी का सिद्धांत
किसी वस्तु को उत्तल लेंस के प्रकाश केन्द्र व फोकस के बीच रखने से उसका आभासी, सीधा व बड़ा प्रतिबिम्ब वस्तु की ओर बन जाता है, यहाँ उत्तल लेंस, आवर्धक की भांति कार्य करता है।

2. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी 

दो लेंसो के संयोग से आवर्धन प्राप्त करने की युक्ति, जिससे अति सूक्ष्म कणों को स्पष्ट देखा जाता है, संयुक्त सूक्ष्मदर्शी कहलाता है।
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की रचना
इसमे खोखली नली एक सिरे पर उत्तल लेंस L,1 लगा रहता है, जिसे वस्तु की ओर रखा जाता है। इसे अभिदृश्यक लेंस कहते है। नली के दूसरे सिरे पर इसमे सरकने वाली एक खोखली नली लगी होती है। इस नली के दूसरे सिरे पर एक लेंस L,2 लगा रहता है जो प्रेक्षण के दौरान नेत्र के पास होता है अतः इसे नेत्र लेंस कहते है। नेत्र लेंस के सामने निश्चित दूरी पर क्रास तार लगा रहता है। इस नली को नेत्रिका नली कहते है दण्ड चक्रीय प्रबंध द्वारा नेत्रिका नली को आगे पीछे सरकाकर अभिदृश्यक लेंस और नेत्र लेंस के बीच की दूरी को बदला जा सकता है।

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