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6/28/2021

निर्धनता के परिणाम/प्रभाव, दूर करने के उपाय/सुझाव

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निर्धनता के परिणाम/प्रभाव (nirdhanta ke parinam)

निर्धनता स्वयं किसी देश के लिए अभिशाप है। यह एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो अनेक प्रकार की आर्थिक सामाजिक बुराइयों को उत्पन्न करती है। निर्धनता के निम्न परिणाम है--

1. देश मे तनाव, घुटन, निराशा और बेरोजगारी की गंभीर समस्या निर्मित हो जाती है, इसलिए वैयक्तिक विघटन अधिक होता है।

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2. देश के अंदर प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक बड़ जाती है कि उसे जीने के लिये कठिन संघर्ष करना पड़ता है, प्रतिस्पर्धा मे असफलता हासिल होने पर वह अपराधी भी बनता है। 

3. देश में निर्धन परिवार के सदस्यों मे न तो सद्भावना होती है और न एकता, इसीलिए यह विघटित हो रहे है। 

4. निर्धन व्यक्ति जिसकी आय कम है और परिवार बड़ा है वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये अनैतिक कार्यों में लिप्त होने लगता है।

5. अति निर्धनता व्यक्ति को लाचार बना देती है। उसे भीख मांगकर जीने के लिये विवश कर देती है।

6. निर्धन व्यक्तियों के बच्चे, बेसहारा, बाल अपराधी बनते है जो आगे चलकर बड़े अपराधी बनते है।

7. समाज मे धन और धनी व्यक्ति का अधिक महत्व होता है। अधिकांश व्यक्ति गैर-कानूनी और भ्रष्ट तरीके से अधिक से अधिक धन अर्जित करना चाहते है। इसीलिये देश के अंदर भ्रष्टाचार तेजी से बड़ता हैं।

8. निर्धनता के कारण नगरों मे वेश्यावृत्ति के अनेक स्वरूप पनपते जा रहे है क्योंकि नगर मे धनी बनने का सपना तथा विलासिपूर्ण जीवन की महत्वकांक्षा निर्धन युवा लड़कियों को गलत रास्ते पर ले जा रही है।

निर्धनता को दूर करने के उपाय/सुझाव (nirdhanta dur Karen ke upay)

निर्धनता को दूर करने के उपाय अथवा सुझाव इस प्रकार है--

1. बेरोजगारी को दूर करना

बेरोजगारी निर्धनता का सबसे मुख्य कारण है, जब तक बेरोजगारी रहेगी तब-तक निर्धनता कभी खत्म नहीं होगी। इसलिए निर्धनता को दूर करने के लिए बेरोजगारी को खत्म करना बहुत जरूरी है।

2. उत्पादन में वृद्धि 

उत्पादन में वृद्धि किये बिना निर्धनता को समाप्त नही किया जा सकता।

3. सामाजिक बीमा योजना 

समाज का यह उत्तरदायित्व है कि वह प्रत्येक सदस्य की न्युनतम आवश्यकताओं की पूर्ति का प्रबंध करें।

4. रहने की समुचित व्यवस्था 

निर्धनता को दूर करने के लिये रहने की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। गंदे वातावरण मे रहते हुए मनुष्य कभी भी संपन्न नही हो सकता।

5. अनिवार्य तथा निःशुल्क शिक्षा 

शिक्षा अनिवार्य तथा निःशुल्क होनी चाहिए। शिक्षा के विकास से ही निर्धनता दूर हो सकती है।

6. यान्त्रिक शिक्षा

यान्त्रिक शिक्षा भी अत्यंत आवश्यक है। इसके बिना उत्पादन नही बढ़ सकता।

7. मद्य निषेध 

सरकार को मद्य निषेध अधिनियम पारित करना चाहिये और कड़ाई के साथ इसे लागू करना चाहिए। मद्यपान दरिद्रता का एक बहुत बड़ा कारण है।

8. न्यूनतम मजदूरी का निश्चय 

राज्य को न्यूनतम मजदूरी निश्चित कर देनी चाहिए। भारत में अधिकांश राज्यों से इसे निश्चचत कर दिया गया है। परन्तु मिल मालिक इसे देने में अनेक बाधाएं खड़ी करते है।

निर्धनता को दूर करने के उपरोक्त उपायों अथवा सुझावों के अतिरिक्त निर्धनता को दूर करने के लिये और भी अनेक तात्कालिक उपाय बताये जा सकते है, परन्तु निर्धनता सामाजिक व्यवस्था से अधिक संबंधित है। समाज की व्यवस्था में ही परिवर्तन होना चाहिए।

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