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2/08/2021

प्रबंधकीय लेखांकन का महत्व या लाभ

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प्रबंधकीय लेखांकन का महत्व या लाभ (prabandhkiya lekhankan ka mahatva)

prabandhkiya lekhankan ka mahatva;आधुनिक युग मे व्यवसाय के स्वरूप अत्यन्त विस्तृत एवं जटिल हो गया है। इसमे प्रबंध का महत्व सर्वोपरि है। प्रबन्धकीय लेखांकन प्रबंध के दृष्टिकोण से एक ऐसा यंत्र है जिसके माध्यम से प्रबन्ध पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने मे सफल होता है। प्रबन्धकीय लेखांकन प्रबंध की बहुमूल्य सेवा करता है। यह व्यवसाय मे लक्ष्य निर्धारित करने से लेकर उनकी प्राप्ति तक प्रबंध को अमूल्य सूचनाएं प्रदान करता है जिनकी सहायता से प्रबंध व्यवसाय मे संगठन, नियंत्रण, समन्वय आदि करने मे समर्थ होता है। किसी व्यावसायिक संस्था मे प्रबन्धकीय लेखांकन प्रबंध के आँख, नाक तथा कान की भूमिका निभाता है। यह पग-पग पर प्रबन्धकों का पथ प्रदर्शित करता है। प्रबन्धकीय लेखांकन का महत्व इस प्रकार है--

1. नियोजन कार्य मे सहायता 

वर्तमान युग योजनाओं का युग है। योजनाबद्ध तरीके से उत्पादन किये बिना कोई भी उत्पादन आज के इस प्रतिस्पर्धात्मक युग मे सफलता प्राप्त नही करता किन्तु योजनाओं के निर्माण के लिये भावी संभावनायें, बाजार स्थिति, वैकल्पिक साधनों की उपलब्धता तथा संभावित कठिनाइयों के बारे मे सूचनायें आवश्यक है। ये सभी सूचनायें प्रबंध लेखांकन द्वारा उपलब्ध कराई जाती है।

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2. समन्वय एवं अभिप्रेरण मे सहायता 

कोई भी योजना तभी सफल हो सकती है जब व्यवसाय की क्रियाओं मे उचित समन्वय रहे। प्रबंध लेखांकन से हमे इस बात की सूचना मिलती है कि कहाँ समन्वय की स्थिति नही है या गतिरोध की स्थिति है। प्रबन्धकीय लेखांकन अभिप्रेरणा संबंधी सूचनाओं की भी पूर्ति करता है।

3. लक्ष्य निर्धारण मे सहायक 

प्रबन्धकीय लेखांकन द्वारा सूचना प्रतिवेदनों के आधार पर ही संस्था के लक्ष्यों का निर्धारण किया जाता है। प्रबन्धकीय लेखांकन लक्ष्यों के निर्धारण मे सहयोग करने के साथ-साथ उन्हें पाने का रास्ता भी दिखाता है।

4. निर्णयन मे सहायक 

प्रबंध को व्यवसाय का कार्य सुचारू रूप से संपन्न करने मे समय-समय पर अनेक निर्णय लेने होते है। निर्णय करते समय उपलब्ध अनेक विकल्पों मे से किसी एक सर्वोत्तम विकल्प का चयन करना अत्यन्त कठिन कार्य होता है। प्रबन्धकीय लेखांकन विभिन्न विकल्पों के गुण-दोषों का विवरण तुलनात्मक ढंग से प्रबन्ध के समक्ष प्रस्तुत करता है, इससे निर्णयन का कार्य सरल हो जाता है। 

5. प्रभावपूर्ण नियंत्रण मे सहायक 

किसी भी संस्था का कार्य योजना अनुसार हो रहा है या नही यह देखने का कार्य नियंत्रण प्रणाली का होता है। नियंत्रण व्यवस्था के अंतर्गत पूर्व निर्धारित प्रमापों की तुलना वास्तविक निष्पादन से की जाती है तथा वास्तविक निष्पादन यदि प्रमाप से भिन्न होते है, तो इसके कारणों का पता लगाया जाता है तथा इसमे सुधार हेतु आवश्यक कदम उठाये जाते है। इन समस्त कार्यों के लिए प्रबन्धकीय लेखांकन की विभिन्न तकनीकों का सहारा लिया जाता है।

6. व्यवसाय से संबंधित सभी पक्षों की संतुष्टि 

वर्तमान मे प्रत्येक संस्था के मजदूर अधिक मजदूरी एवं बोनस चाहते है, अंशधारी कम लाभांश की आलोचना करते है एवं सरकार तथा उपभोक्ता कम मूल्य पर अच्छी किस्म की वस्तुओं की मांग करते है। ऐसे मे प्रबंध लेखापाल ही प्रबन्धकों का मार्गदर्शन करके सरकार, उपभोक्ता, मजदूर एवं अंशधारी इस सभी वर्गों को संतुष्ट कर सकता है।  

7. उत्तरदायित्व की भावना का विकास 

प्रबन्धकीय लेखांकन मे उत्तरदायित्व लेखांकन द्वारा विभिन्न कर्मचारियों के दायित्व निश्चित किये जाते है। उत्तरदायित्व लेखांकन मे लागत सूचनाओं को इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है, जिससे सम्बंधित कर्मचारी को उसके कार्य हेतु उत्तरदायी ठहराया जा सके। इससे सभी कर्मचारी निरन्तर जागरूक बने रहते है और व्यवसाय की कार्यक्षमता तथा उत्पादकता मे वृद्धि होती है।

8. कम मूल्य पर श्रेष्ठ उत्पादन 

प्रबन्धकीय लेखांकन द्वारा साधनों के अनुकूलतम प्रयोग पर बल दिया जाता है। प्रबन्धक लेखा सूचनाओं का अधिकतम उपयोग कर उत्पादकता मे वृद्धि करते है, जिसके फलस्वरूप लागतों मे कमी आती है, साथ ही उत्पादन की गुणवत्ता मे भी वृद्धि होती है फलतः संस्था कम मूल्य पर उच्च गुणवत्ता का श्रेष्ठ उत्पादन बाजार मे प्रस्तुत कर सकती है।

9. उत्तरदायित्व मे वृद्धि 

उत्पादन मे वृद्धि तभी संभव है, जब उत्पति के समस्त साधनों का अनुकूलतम प्रयोग किया जाये। इस कार्य मे वैज्ञानिक पूर्वानुमान, बजट निर्माण तथा बजट नियंत्रण का विशेष महत्व है। वैज्ञानिक उत्पादन-प्रणाली के अंतर्गत प्रबंधकों को समय-समय पर लागत संबंधी सूचनाएँ उपलब्ध होनी चाहिए तथा विभिन्न विभागों के लक्ष्य, वास्तविक निष्पादन तथा अंतर की सीमा के बारे मे भी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।

10. कार्यक्षमता मे वृद्धि 

प्रबन्धकीय लेखांकन संस्था की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। क्योंकि, पूर्वानुमान के आधार पर प्रत्येक विभाग का टारगेट तैयार कर लिया जाता है और बाद मे प्राप्त परिणामों से तुलना की व्यवस्था की जाती है। ऐसी स्थिति मे कार्यक्षमता मे वृद्धि होती है। वर्तमान का युग योजना का युग है। वही उत्पादक अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सकता है, जो योजनाबद्ध ढंग से उत्पादन करता है। प्रबन्धकीय लेखांकन व्यवसाय के समस्त भूतकालित आँकड़ों को प्रस्तुत करता है, जिनके आधार पर प्रबंध वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ मे भावीन योजनाओं का निर्माण करता है।

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