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2/05/2021

प्रबंधकीय लेखांकन क्या है? परिभाषा, विशेषताएं

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प्रबंधकीय लेखांकन क्या है? prabandhkiya lekhankan ka arth)

prabandhkiya lekhankan arth paribhasha visheshta;प्रबन्धकीय लेखांकन दो शब्दों प्रबंधन+लेखांकन के योग से बना है। प्रबन्धकीय या प्रबंध से आशय उस प्रकिया से है जिसमे व्यवसाय की नीतियों का नियोजन, उद्देश्यों का निर्धारण, उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए उचित समन्वय एवं नियन्त्रण तथा व्यवसास मे संगठन का कार्य सम्मिलित होता है। लेखांकन से तात्पर्य है व्यवसाय के व्यवहारों का विश्लेषण एवं व्याख्या करने की प्रक्रिया से है। 

यह लागत लेखांकन की एक विशिष्ट शाखा है जो प्रबन्ध को निर्णय लेने मे सहायता करती है।

साधारण बोलचाल चाल की भाषा मे, कोई भी लेखाविधि, जो प्रबंध के कार्यों मे सहायता हेतु आवश्यक सूचनाएँ प्रदान करती है, उसे प्रबंधकीय लेखांकन कहा जाता है। 

प्रबंधकीय लेखांकन लेखांकन प्रबंध का एक महत्वपूर्ण उपकरण माना जाता है जिसका प्रयोग व्यवसाय के कुशल प्रबंध, नीति-निर्धारण तथा निर्गमन के लिए अत्यंत आवश्यक है। 

प्रबंधकीय लेखांकन की परिभाषा (prabandhkiya lekhankan ki paribhasha)

आर.एन. एन्थोनी के अनुसार," प्रबंधकीय लेखांकन लेखा-पद्धति की सूचनाओं से संबंधित है, जो कि प्रबंध के लिये बहुत उपयोगी है।" 

आई.सी.डब्ल्यू.ए. के अनुसार," लेखाविधि का कोई भी रूप, जो कि व्यवसाय को अधिक कुशलतापूर्वक संचालन योग्य बनाये, प्रबंधकीय लेखाविधि कहा जाता है।" 

बास्टाॅक के अनुसार," प्रबंधकीय लेखांकन लेखांकन के प्रबंध को उन आँकड़ों चाहे वह मुद्रा मे हो या अन्य इकाइयों मे, प्रस्तुत करने की उस कला के रूपे परिभाषित किया जा सकता है जिससे कि प्रबंध को उनके कार्यकरण मे सहायता प्राप्त हो सकें।" 

टी. जी. रोज के अनुसार," प्रबंधकीय लेखांकन लेखा सूचनाओं की प्राप्ति एवं विश्लेषण है तथा यह उनकी पहचान एवं व्याख्या प्रबंध को सहायता करने के लिए करता है।" 

वाॅल्टर बी. मैकफरलैण्ड के अनुसार," प्रबंधकीय लेखांकन किसी उपक्रम के नियोजन एवं प्रशासन हेतु सभी स्तरों पर प्रबंध के लिए उपयोगी वित्तीय समंक की पूर्ति करने से सम्बंधित है।" 

आई. सी. एम. ए. लंदन के अनुसार," प्रबंधकीय लेखांकन, लेखांकन सूचनाओं के इस प्रकार तैयार करने मे प्रयुक्त कुशलता तथा पेशेवर ज्ञान है जो कि प्रबंध को नीति निर्धारण तथा संस्था की क्रियाओं के नियोजन व नियंत्रण मे सहायक हो सके।" 

अमेरिकी लेखा संघ के अनुसार," प्रबंधकीय लेखाविधि मे वे रीतियां व संकल्पनायें सम्मिलित है जो प्रभावपूर्ण नियोजन के लिये, वैकल्पिक व्यावसायिक क्रियाओं मे चयन के लिये तथा नियंत्रण के लिये निष्पादन को मूल्यांकन और निर्वाचन करने हेतु आवश्यक है।" 

उपरोक्त परिभाषाओं का अध्ययन करने के बाद हम निष्कर्ष रूप मे यह कह सकते है कि प्रबंधकीय लेखांकन  से आशय ऐसी तकनीक एवं पद्धति से है जो वित्तीय लेखांकन के आधार पर प्रबंध को प्रभावकारी नियंत्रण करने मे सहायता पहुँचाने के उद्देश्य मे महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराती है। संक्षिप्त मे इसे प्रबंधकों द्वारा लेखा सूचनाओं के प्रयोग की क्रिया कह सकते है।

प्रबन्धकीय लेखांकन की विशेषताएं या प्रकृति (prabandhkiya lekhankan ki visheshta)

प्रबन्ध लेखांकन की विशेषताएं इस प्रकार है--

1. भविष्य पर अधिक जोर 

प्रबन्धकीय लेखांकन वर्तमान की अपेक्षा भविष्य पर अधिक जोर देता है। प्रबन्धकीय लेखा-विधि का कार्य केवल ऐतिहासिक तथ्यों का संकलन करना ही नही होता बल्कि क्या होना चाहिए था,य इस पर प्रकाश डालना भी होता है। प्रबन्धकीय लेखांकन के अंतर्गत भविष्य की योजनाएं तथा पूर्वानुमान तैयार किये जाते है और जब भविष्य वर्तमान के रूप मे हमारे समक्ष उपस्थित होता है तो पूर्वानुमान से तुलना कर उपलब्धियों का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया जाता है। इससे प्रबंध के लिए समस्त व्यावसायिक क्रियाओं पर उचित नियंत्रण रख पाना आसान हो जाता है।

2. पूर्व सूचनाओं का प्रयोग 

संस्था के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए प्रबन्धकीय लेखांकन मे विभिन्न सूचनाओं का प्रयोग किया जाता है। संस्था के उद्देश्य निर्धारण मे तथा योजना बनाने मे पिछली अवधियों के समंकों का अध्ययन किया जाता है। पूर्व अवधि के समंकों से विभिन्न कार्यों के प्रमाप निर्धारित किये जाते है तथा इन प्रमापों की वास्तविक निष्पादन से तुलना कर विभागीय कार्यकुशलता की जांच की जाती है।

3. केवल आँकड़े प्रदान करना, निर्णय नही 

प्रबन्धकीय लेखांकन की तीसरी विशेषता यह की यह प्रबन्धकीय लेखा-विधि निर्णय के संबंध मे आंकड़े प्रदान करती है, निर्णय नही, इससे व्यावसायिक निर्णय संभव हो पाते है। प्रभावपूर्ण निर्णय के लिए आवश्यक तथा जुटाना तथा उनका विश्लेषण व प्रबंध के समक्ष प्रस्तुतीकरण का कार्य लेखापाल द्वारा किया जाता है, वह स्वयं निर्णय नही लेता। वस्तुतः निर्णयन का काम संस्थाओं के प्रबन्धकों का होता है।

4. लेखांकन नियमों एवं सिद्धांतों का पालन नही 

प्रबन्धकीय लेखांकन मे वित्तीय लेखांकन की भांति निश्चित प्रकृति के नियमों का पालन नही किया जाता है। वास्तव मे प्रबन्धकीय लेखांकन का मुख्य लक्ष्य प्रबंध को आवश्यक सूचनाएँ सरलीकृत रूप मे उपलब्ध कराकर उनकी दक्षता मे वृद्धि करना है। अतः इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु प्रबन्धकीय लेखांकन सामान्य स्वीकृति नियमों से पृथक अपने स्वयं के नियम बना सकता है तथा तथ्यों के प्रस्तुतीकरण मे अपने अनुभव ज्ञान, बुद्धि एवं कल्पना शक्ति का प्रयोग कर ऐसी सूचनाओं को सृजित कर सकता है जो प्रबन्धकों को महत्वपूर्ण निर्णयन मे सहायक हो।

5. चुनाव पर आधारित या चयनात्मक प्रकृति 

प्रबन्धकीय लेखांकन की यह एक महत्वपूर्ण विशेषता है कि यह लेखांकन चुनाव पर आधारित है। किसी भी प्रबन्धकीय समस्या को निपटाने हेतु विभिन्न साधनों का तुलनात्मक अध्ययन करके श्रेष्ठ साधन का चुनाव किया जाता है, जिससे एक सही एवं मितव्ययी योजना का निर्माण करने मे सुविधा होती है।

6. लागत के विभिन्न तत्वों का अध्ययन 

प्रबन्धकीय लेखांकन लागत के विभिन्न तत्वों पर ध्यान आकर्षित करती है। इसके अंतर्गत लागत को विभिन्न भागों मे बांटकर उनका उत्पादन के विभिन्न स्तरों पर अध्ययन किया जा सकता है।

7. कारण व प्रभाव का अध्ययन 

प्रबन्धकीय लेखांकन विधि सदैव "कारण व प्रभाव " के सम्बन्ध का अध्ययन करती है। प्रत्येक प्रबन्धकीय समस्या का निराकरण व संबंधित निर्णय लेते समय " कारण व प्रभाव " की खोज की जाती है, और यह विधि इस प्रयत्न मे अधिक योग देती है। इस क्रिया मे प्रबन्धकीय लेखा-विधि केवल मौद्रिक लेन-देनों को ही ध्यान मे नही रखती है, बल्कि कभी-कभी गैर नकद व्यवहारों एवं तथ्यों को भी इस विधि के अंतर्गत संकलित व विश्लेषण किया जाता है।

8. मिश्रित पद्धति 

प्रबन्धकीय लेखांकन की एक विशेषता यह है कि यह एक मिश्रित पद्धति है, इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की विधियों, प्रणालियों, प्रविधियों तथा विषयों से संबंधित सामग्री का प्रयोग किया जाता है। इसके अंतर्गत विभिन्न विषयों जैसे-- वित्तीय लेखांकन, लागत लेखांकन, सांख्यिकी, कंपनी विधि, व्यावसायिक  सन्नियम आदि विषयों का व्यावहारिक प्रयोग शामिल होता है।

9. विशेष तकनीक एवं अवधारणा का प्रयोग 

लेखांकन आँकड़ों को अधिक उपयुक्त बनाने के लिए प्रबन्धकीय लेखा-विधि मे केवल विशेष तकनीक एवं अवधारणाओं का ही प्रयोग किया जाता है। उदाहरणतः इसके अंतर्गत वित्तीय नियोजन एवं विश्लेषण, प्रमाप लागत, बजटरी कण्ट्रोल, लागत एवं नियंत्रण लेखांकन आदि का ही प्रयोग किया जाता है।

10. नियम की निश्चितता का अभाव 

इसके अंतर्गत नियम निश्चित प्रकृति के नही होते है। प्रबंध लेखापाल द्वारा प्रबंधकों की आवश्यकतानुसार अंको को विभिन्न तालिकाओं, चार्टों आदि के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। आंकड़ों को तर्कशक्ति एवं बुद्धि कौशल के आधार पर तुलनात्मक रूप मे तथा प्रतिशत के रूप मे भी प्रस्तुत किया जाता है।

11. लेखांकन सेवा प्रबन्धकीय लेखाविधि प्रबंध के प्रति एक लेखांकन सेवा है

इस सेवा के अंतर्गत संस्था की नीतियों के निर्धारण का विवेकपूर्ण निर्णय लेने के लिए इच्छित आवश्यक सूचनाएँ प्रबंध को तत्काल उपलब्ध करायी जाती है। ये सूचनाएं वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों प्रकार की हो सकती है।

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