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2/09/2021

वित्तीय विवरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं

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वित्तीय विवरण पत्र का अर्थ (vittiya vivaran kya hai)

vittiya vivaran arth paribhasha visheshta;वित्तीय विवरण का अर्थ, उस विवरण पत्र से है जो वित्त से संबंधित सूचनाएं देता है। जब किसी भी व्यवसाय की वित्तीय स्थिति का ज्ञान प्राप्त करना होता है तो एक चिट्ठा तथा लाभ-हानि खाता बनाया जाता है। ये दोनों ही व्यावसायिक वित्तीय विवरण-पत्र कहलाते है। ये विवरण-पत्र किसी न किसी रूप मे वित्तीय स्थिति प्रकट कहते है। (चाहे वह संपत्तियों तथा दायित्वों के बारे मे हो या लाभ तथा हानि के बारे मे हो या कोषों, रोकड़ या कार्यशील पूंजी के बारे मे हो) अतः इन्हें वित्तीय विवरण पत्र कहा जाता है। अंशधारियों के हितों को ध्यान मे रखकर जब इनका प्रकाशन किया जाता है तो इन्हें प्रकाशित लेखों के नाम से भी जाना जाता है। 

वित्तीय विवरण की परिभाषा (vittiya vivaran ki paribhasha)

जाॅन मेयर के अनुसार," वित्तीय विवरण किसी व्यावसायिक उपक्रम के लेखों को सारांश के रूप मे प्रस्तुत करते है। आर्थिक चिट्ठा किसी निश्चित तिथि को संपत्तियों, दायित्वों एवं पूंजी की स्थिति को प्रकट करता है एवं आय विवरण किसी अवधि के संचालन परिणामों को प्रकट करता है। 

एन्थोनी के शब्दों मे," वित्तीय विवरण किसी व्यावसायिक उपक्रम की एक निश्चित अवधि से संबंधित आर्थिक गतिविधियों के अन्तरिम प्रतिवेदन को कहते है। 

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर निष्कर्ष रूप मे हम कह सकते है, कि वित्तीय विवरण का आशय आर्थिक चिट्ठा, लाभ-हानि खाता एवं आधिक्य विवरण से है। आर्थिक चिट्ठा, लाभ-हानि खाता एवं आधिक्य विवरणों से संबंधित अनुसूचियां एवं संचालकों तथा अंकेक्षण का प्रतिवेदन भी संबंधित व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को प्रदर्शित करता है। 

अच्छे वित्तीय विवरण के आवश्यक तत्व या विशेषताएं (vittiya vivaran ki visheshta)

किसी भी संस्था के वित्तीय विवरणों मे अंशधारी, विनियोक्ता, वित्तीय संस्थायें, श्रमिक तथा अन्य वर्ग अपने-अपने उद्देश्य मे रूचि रखते है। अतः प्रबंध का यह उत्तरदायित्व है कि वह इन्हे इस प्रकार तैयार करे कि सभी उद्देश्यों की पूर्ति हो जाये। एक अच्छे वित्तीय विवरण मे यह आवश्यक तत्व या विशेषताएं होनी चाहिए--

1. तैयार करने मे सरल 

जिन तथ्यों को वित्तीय विवरण मे सम्मिलित करना है वह सरलता से संस्था की लेखा पुस्तकों से मिल जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त वित्तीय विवरणों का आकार असाधारण रूप से बड़ा नही होना चाहिए।

2. बोधगम्यता 

वित्तीय विवरणों मे दी जाने वाली सूचनाएं सरल, स्पष्ट, बोधगम्य होनी चाहिए जिन्हें एक साधारण व्यक्ति भी, जिसे लेखांकन के सिद्धांत का ज्ञान नही हो, आसानी से समझ सके। वित्तीय विवरणों का प्रारूप जटिल नही होना चाहिए तथा इनमें प्रयोग किये गये शब्द सरल, प्रचलित तथा गैर-तकनीकी होनी चाहिए।

3. विश्वसनीयता 

वित्तीय विवरणों मे दी जाने वाली सूचनाएं विश्वसनीय होना चाहिए। वित्तीय विवरणों मे ऐसी सूचनायें ही दी जानी चाहिए जिनकी विश्वसनीयता को सत्यापित किया जा सके। सही निष्कर्षों पर पहुंचने के लिए सूचनाओं का शुद्ध होना बहुत आवश्यक होता है।

4. तुलनात्मकता 

वित्तीय विवरण ऐसा होना चाहिए ताकि उसकी तुलना भूतकाल मे हुए क्रियाकलापों तथा वर्तमान क्रियाकलापों से की जा सके। वास्तव मे वित्तीय विश्लेषण का आधार तुलना ही होता है। हम यह भी कह सकते है कि वित्तीय विवरण इस तरह तैयार किये जाये जिससे चालू वर्ष की प्रगति की तुलना गत वर्ष से की जा सके।

5. तत्परता 

वित्तीय विवरण एक निश्चित समयावधि के लिये तैयार किये जाते है। अतः इस अविधि के अंत मे इन्हें तैयार व अंकेक्षित करवाकर संबंधित पक्षों को जानकारी दे देनी चाहिए। यदि उचित समय पर इन्हें उपलब्ध नही कराया गया तो इनका सफलतापूर्वक उपयोग नही हो सकता। निष्कर्षस्वरूप यह कहा जा सकता है कि वित्तीय विवरणों मे तत्परता का भी गुण होना चाहिए।

6. पूर्ण संतुष्टि 

वित्तीय विवरण ऐसा होना चाहिए जिससे व्यवसाय की आवश्यकता की पूर्ण संतुष्टि हो सके क्योंकि जब तक उससे पूर्ण संतुष्टि न हो तब तक उसका कोई भी महत्व नही होता।

7. आकर्षक 

वित्तीय विवरण इस ढंग से बनाये जाने चाहिए, कि जो देखने मे आकर्षक लगें। इसके लिये महत्वपूर्ण तथ्य आकर्षक स्याही से रेखांकित कर दिये जाने चाहिए।

8. शुद्धता 

वित्तीय विवरण सही आँकड़ों से तैयार किये जाने चाहिए, जिससे अध्ययनकर्ता अध्ययन के बाद व्यवसाय के संबंध मे सही जानकारी प्राप्त कर सकें।

9. अविलम्ब प्रकाशन 

लेखा वर्ष की समाप्ति के बाद वित्तीय विवरणों को प्रकाशित कर दिया जाना चाहिए। विलम्ब से प्रकाशित वित्तीय विवरणों की उपादेयता समाप्त हो जाती है एवं इनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सूचनाएं एवं समंक अप्रासंगिक हो जाते है।

यह भी पढ़ें; वित्तीय विवरण के उद्देश्य, सीमाएं

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