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2/09/2021

वित्तीय विवरण के उद्देश्य, सीमाएं

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वित्तीय विवरण के उद्देश्य (vittiya vivaran ke uddeshya)

vittiya vivaran uddeshya simaye;वित्तीय विवरणों का मूल उद्देश्य व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को दर्शाना और निर्णय लेने हेतु उपयोगी सूचनाएं प्रदान करना है। विस्तृत रूप से वित्तीय विवरण के उद्देश्यों को निम्न प्रकार रखा जा सकता है--

1. वित्तीय सूचनाएं प्रदान करना 

वित्तीय विवरणों का प्रारम्भिक उद्देश्य व्यवसाय के संबंध मे विभिन्न और विश्वसनीय वित्तीय सूचनाएं प्रदान करना है।

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2. अर्जन क्षमता की जानकारी 

वित्तीय विवरण ऐसी वित्तीय सूचनाएं प्रदान करते है जिससे व्यावसायिक उपक्रम की अर्जन स्थिति की जानकारी मिल सके और उसके आधार पर अर्जन क्षमता का अनुमान लगया जा सके।

3. वित्तीय स्थिति की जानकारी 

वित्तीय विवरणों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य व्यावसायिक इकाई के आर्थिक संसाधनों (संपत्तियों) तथा दायित्वों के संबंध मे विस्तृत एवं विश्वसनीय सूचनाएं प्रदान करना है।

4. वित्तीय स्थिति मे परिवर्तन की जानकारी 

वित्तीय विवरणों का एक उद्देश्य यह भी होता है कि एक निश्चित अवधि मे वित्तीय संसाधनों एवं दायित्वों मे होने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट करे। इसी दृष्टि से रोकड़ प्रवाह विवरण, कोष प्रवाह विवरण और विभिन्न अनुसूचियों को वित्तीय विवरणों मे शामिल किया जाता है। 

5. वित्तीय पूर्वानुमान मे सहायता 

वित्तीय विवरणों का एक उद्देश्य ऐसी सभी आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध कराना भी है जिनके आधार पर विश्वसनीय वित्तीय पूर्वानुमान लगाए जा सकें।

6. प्रयोगकर्ताओं के लिए विविध सूचनाएं 

वित्तीय विवरणों का उद्देश्य यह भी होता है कि विवरणों के विभिन्न प्रयोगकर्ताओं, जैसे-- विनियोगकर्ताओं, लेनदारों, वित्तीय संस्थाओं, स्कन्ध विपणि, शोधकर्ताओं इत्यादि की दृष्टि से भी यथा संभव पर्याप्त सूचनाएं प्राप्त हो सके। 

वित्तीय विवरणों की सीमाएं (vittiya vivaran ki simaye)

वित्तीय विवरण संस्था मे हित रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए काफी महत्वपूर्ण होते है, किन्तु कुछ ऐसी भी बातें है, जिनके माध्यम से हमें इनकी सीमाओं का पता चलता है। वित्तीय विवरण की मुख्य सीमाएं इस प्रकार है--

1. अत्यधिक सूक्ष्मता का अभाव 

वित्तीय विवरणों के तथ्यों मे बहुत अधिक सूक्ष्मता नही होती है। क्योंकि इनकी विषय सामग्री ऐसे मामलों से संबंधित है जिसे सूक्ष्मता को व्यक्त नही किया जा सकता है। ये तथ्य लेखांकन मान्यताओं व प्रथाओं पर आधारित होते है। 

2. गैरे-मौद्रिक तथ्यों का समावेश न होना 

वित्तीय विवरण व्यवसाय का सही चित्र प्रस्तुत नही करते है। क्योंकि इनमें केवल मौद्रिक तथ्यों को ही सम्मिलित किया जाता है जबकि गैर-मौद्रिक तत्व भी व्यवसाय को प्रभावित करते है। उदाहरण के लिए व्यवसाय की साख, कर्मचारियों का मनोबल, प्रबंध की कुशलता आदि। लेकिन इन तत्वों को वित्तीय विवरण मे नही दर्शाया जाता है।

3. ऐतिहासिक प्रलेख 

वित्तीय विवरण ऐतिहासिक प्रलेख होते है। अतः व्यवसाय की वर्तमान स्थिति का सही चित्रण नही करते है।

4. भूतकालीन घटनाओं पर आधारित 

वित्तीय विवरण भूतकालीन घटनाओं पर आधारित होते है। भविष्य के बारे मे जानकारी नही देते है। 

5. ऊपरी दिखावे 

वित्तीय विवरणों मे ऊपरी दिखावे का सहारा लेकर संस्था की स्थिति को वास्तविकता से अधिक अच्छा दिखाया जा सकता है।

6. अन्तरिम प्रतिवेदन 

वित्तीय विवरण अन्तरिम प्रतिवेदन होते है क्योंकि व्यवसाय के वास्तविक लाभ की जानकारी व्यवसाय के समाप्त होने के बाद ही जानी जा सकती है।

7. मूल्य परिवर्तन को न दर्शाना 

वित्तीय विवरण मूल्य परिवर्तनों को नही दर्शाते। अतः विभिन्न वर्षों के वित्तीय विभागों मे दिखाए गए तुलनीय नही होते है। 

8. व्यक्तिगत पक्षपात एवं ज्ञान से प्रभावित 

वित्तीय विवरणों के समंक मूक होते है, उनसे कुछ भी निष्कर्ष निकाला जा सकता है, अतः इनके आधार पर निकाले गए निष्कर्षों मे प्रयोगकर्ता की व्यक्तिगत भावनाओं एवं ज्ञान का प्रभाव पड़ता है।

शायद यह जानकारी आपके लिए काफी उपयोगी सिद्ध होंगी

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