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2/09/2021

लागत लेखांकन और प्रबंधकीय लेखांकन मे अंतर

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लागत लेखांकन और प्रबंधकीय लेखांकन मे अंतर 

prabandhkiya lekhankan or lagat lekhankan me antar;वित्तीय लेखांकन की तरह ही लागत लेखा विधि भी प्रबन्धकीय लेखांकन का एक अंग है। लागत लेखांकन वित्तीय लेखांकन के विकास की अगली कड़ी है। इसकी आवश्यकता वित्तीय लेखो की कमी के कारण ही महसूस की गई। आधुनिक लागत विधि जिसमे सीमान्त लागत, समविच्छेद बिन्दु विश्लेषण, प्रमाप लागत, एकरूप लागत आदि का समावेश किया जाता है, प्रबंधकीय लेखाविधि का ही समरूप बन जाता है, इसी कारण से अनेक लोग दोनो मे कोई अंतर नही कर पाते। वास्तविक स्थिति यह है कि प्रबन्धकीय लेखांकन व लागत लेखांकन एक-दूसरे के पूरक है। 

लागत लेखांकन, लेखांकन की एक विशिष्ट शाखा है, जिसका प्रयोग मुख्य रूप से निर्माण तथा सेवा प्रदान करने वाली संस्थाओं मे किया जाता है। इसके अंतर्गत उत्पादन व बिक्री से संबंधित व्ययों का इस प्रकार विश्लेषण व वर्गीकरण किया जाता है, जिससे उत्पादित वस्तु या प्रदान की जाने वाली सेवा की प्रति इकाई लागत सही-सही ज्ञात हो सके। लागत लेखे लागतों पर नियंत्रण रखने मे तथा प्रबंधकों द्वारा विभिन्न निर्णय लेने मे महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते है।

प्रबन्धकीय लेखांकन, नीति निर्धारण तथा व्यावसायिक क्रिया-कलापों को नियंत्रित करने के लिए प्रबंधकों का मार्गदर्शन करने की एक अवधारणा है। इस लेखांकन के स्त्रोत परिव्यय लेखांकन व वित्तीय लेखांकन होते है। परिव्यय लेखा प्रब्धकीय निर्णय लेने के उद्देश्य से प्राप्त सूचना का प्रस्तुतीकरण करता है। अतः लागत लेखांकन प्रबंध लेखांकन का आधार है। हालाकि लागत लेखांकन और प्रबंधकीय लेखांकन मे कुछ हद तक समानताएं होने के बावजूद भी इन दोनों मे अंतर पाया जाता है। लागत लेखांकन और प्रबंधकीय लेखांकन मे अंतर इस प्रकार है--

1. उद्देश्य सम्बंधित अंतर 

लागत लेखाविधि का प्रमुख उद्देश्य वस्तु, उत्पादन या सेवा की प्रति इकाई लागत को ज्ञात व निर्धारण करना होता है। प्रबन्धकीय लेखांकन का उद्देश्य प्रबन्धकीय क्रियाओं के कुशल संचालन व निष्पादन मे प्रबंध की सहायता हेतु लागत समंकों को प्रस्तुत करना है।

2. रूचि रखने वाले पक्ष से संबंधित अंतर 

लागत लेखाविधि द्वारा उपलब्ध समंकों व तथ्यों मे आंतरिक व बाहरी दोनों पक्ष रूचि रखते है। 

प्रबन्धकीय लेखांकन द्वारा प्रस्तुत समंकों मे केवल प्रबंध ही रूचि रखता है।

3. क्षेत्र संबंधित अंतर 

लागत लेखाविधि का क्षेत्र प्रबन्धकीय लेखांकन की तुलना मे सीमित होता है। 

4. प्रकृति संबंधित अंतर 

लागत लेखाविधि के अंतर्गत भूतकालिक एवं वर्तमान की घटनाओं का लेखांकन किया जाता है। 

प्रबन्धकीय लेखांकन के मुख्य रूप से भविष्य की घटनाओं का पूर्वानुमान किया जाता है।

5. उपयोगिता संबंधित अंतर 

लागत लेखाविधि आंतरिक तथा बहारी दोनो पक्षों के लिए समान रूप से उपयोगी है। 

प्रबन्धकीय लेखांकन आंतरिक पक्ष अर्थात् प्रबंधकों के लिए ही उपयोगी है।

6. तथ्य संबंधित अंतर 

लागत लेखाविधि मे सामान्यतः मौद्रिक तथ्यों का प्रयोग होता है। प्रबन्धकीय लेखांकन मे मौद्रिक व अमौद्रिक सभी प्रकार के तथ्यों का प्रयोग किया जा सकता है।

7. सिद्धान्त संबंधी अंतर 

लागत लेखाविधि मे कुछ निश्चित सिद्धांतों तथा प्रारूपों का प्रयोग किया जाता है। 

प्रबन्धकीय लेखांकन मे प्रबंध की आवश्यकता के अनुसार प्रारूपों व सिद्धांतों मे परिवर्तन कर लिया जाता है।

8. उदय एवं विकास संबंधी अंतर 

लागत लेखाविधि का उदय बीसवीं सदी के प्रारंभ मे औद्योगिक क्रांति के सूत्रपात के साथ ही हो गया था, अतः इसका विकास 100 से अधिक वर्षों मे हुआ है। 

प्रबन्धकीय लेखांकन की उत्पत्ति सन् 1950 के बाद हुई है, अतः इस शास्त्र का विकास गत् 7 दशकों मे ही हुआ है।

शायद यह जानकारी आपके लिए काफी उपयोगी सिद्ध होंगी

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