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1/09/2021

विज्ञापन का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं या लक्षण

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विज्ञापन का अर्थ (vigyapan kya hai)

vigyapan arth paribhasha visheshtaye mahatva;अंग्रेजी भाषा के Advertising के शब्‍द की उत्‍‍पत्ति लेटिन के Advertere शब्‍द से हुई है जिसका आशय मोडने से होता है व्‍यावसायिक तौर पर Advertising शब्‍द का अर्थ ग्राहकों को विशिष्‍ट वस्‍तुओं एवं सेवाओं की ओर जानकारी  देकर मोडनें से लिया गया है वस्‍तुत: विज्ञापन से आशय उन समस्‍त साधनों से है जिनके द्वारा उपभोक्‍ताओं को वस्‍तुओं व उनके गुणों के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है। यह एक प्रकार की अपील है जिसके द्वारा ग्राहकों के दिमाग में वस्‍तुओं को खरीद कर अपनी आवश्‍यकताओं की संतुष्टि करने की प्रेरणा जागृत की जाती है विज्ञापन का मुख्‍य उद्देश्य ग्राहको को वस्‍तुओं  के गुणों एवं मूल्‍यों की सुचना उपभोक्‍ताओं को देना तथा वस्‍तुओं की बिक्री में वृद्धि करना है।

सरल एवं स्पष्ट शब्दों मे हम कह सकते है," अपने ग्राहकों को अपनी वस्तुओं व सेवाओं के बारें मे विशिष्ट जानकारी या विशिष्ट गुणों के बारे मे जानकारी देकर अपनी वस्तुओं या सेवाओं को लेने के लिए प्ररित करना ही विज्ञापन है। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि सरकार द्वारा या किसी अन्य संस्था द्वारा लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से भी विज्ञापन किये जाते है

 विज्ञापन की परिभाषा (vigyapan ki paribhasha)

बुड के अनुसार,'' विज्ञापन जानने, स्‍मरण रखने तथा कार्य करने की विधी है।''

सी. एल. बॉलिंग के अनुसार,'' विज्ञापन को वस्‍तु या सेवा की मांग उत्‍पन्‍न करने की कला कहा जाता है।''

स्‍टार्च के शब्‍दों में,'' विज्ञापन प्राय: मुद्रण के रूप में किसी प्रस्‍ताव को लोगों के समक्ष प्रस्‍तुत करने का एक ढंग है ताकी वे उसके अनुसार कार्य करने  को प्रेरित हों।''

लस्‍कर के शब्‍दों में,'' विज्ञापन मुद्रण के रूप में विक्रय कला है।''

मैसन एवं रथ के मत में,'' विज्ञापन बिना वैयक्तिक विक्रयकर्ता के विक्रय कला  है।''

रिचार्ड  बसकिर्क के शब्‍दों में,'' विज्ञापन एकपरिचय प्राप्‍त प्रयोजक द्वारा विचारों, वस्‍तुओं या सेवाओं के अवैयक्तिक प्रस्‍तुतीकरण या प्रवर्तन का एक ढंग है जिसका भुगतान किया जाता है।''

विज्ञापन के विशेषताएं या लक्षण (vigyapan ki visheshta)

विज्ञापन की विशेषताएं इस प्रकार है--

1. अवैयक्तिक

विज्ञापन अवैयक्तिक होता है यह किसी व्‍यक्ति विशेष के लिए या उसकें समक्ष नही किया जाता है विज्ञापन में दिये जाने वाले संदेश जनता को एक बड़े वर्ग या उस समूह  को ध्‍यान में रखकर दिये जाते है।

2. ग्राहक बनाना

विज्ञापन का उद्धेश्‍य नये ग्राहक को बनाना एवं पहले से विद्यमान ग्राहको कों स्‍थायी बनाये रखना  है।

3. भुगतान

विज्ञापन को संचार या व्‍यापक साधन मना जाता  है इसमें विज्ञापनदाता के माध्‍यम से  कराये जाने वाले विज्ञापनों का मूल्‍य भुगतान किया जाता है।

4. व्‍यावसायिक  क्रिया

विज्ञापन एक व्‍यावसायिक क्रिया है जिसे सभी को अपने व्‍यवसायों में किसी न किसी रूप में उपयोग  करना पड़ता है।

5. सार्वजनिक जानकारी 

विज्ञापन, विज्ञापति वस्‍तुओं के बारें में ज्‍यादा से ज्‍यादा  लोगों को देश-विदेश में रहने वाले व्‍यक्तियों को वस्‍तुओ की जानकारी देता है।

6. क्रय हेतु प्रेरणा

विज्ञापन के माध्‍यम से लोग विज्ञापन वस्‍तुओं को खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता है। 

7. व्‍यापकता  

विज्ञापन एक व्‍यापक प्रक्रिया है इसके लिए विज्ञापन में बहुत से माध्‍यमों का उपयोग किया जा सकता है।

8. संदेश की पुनरावृत्ति

विज्ञापन में संदेश को बार-बार दोहराने की जरूरत भी पड़ती है।

9. स्‍थापित विज्ञापनकर्ता

हर विज्ञापन का एक  प्रायोजित या स्‍थापित विज्ञापनकर्ता होता है सामान्‍य रूप से विज्ञापन  खुले रूप में किये जाते है। जिनको पढ़कर, सुनकर, देखकर विज्ञापनकर्ता  का पता लगाया जा सकता है। विज्ञापन की यह विशेषता उसें प्रकाशन से अलग करती है।  

10. विशिष्‍ट स्‍पष्‍टीकरण 

विज्ञापन एक ही संदेश का अलग-अलग स्‍पष्‍टीकरण विभिन्‍न प्रकार के शब्‍दों वाक्‍यों, रंगो तथा चित्रों आदि के माध्‍यम से करता है।

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